19.43 लाख का मरघट पूरा, अब उसी जैसी तस्वीर के साथ ₹24.50 लाख का नया काम? छिरिया सलेमपुर में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की तस्वीर आमने-सामने, पुराने कार्य पर ₹19.43 लाख व्यय दर्ज, नए कार्य में अभी ₹0 खर्च जालौन। जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज दो अलग-अलग कार्यों के रिकॉर्ड तथा दूसरे कार्य के साथ लगी जियो-टैग तस्वीर इस मामले को जांच के दायरे में लाती है। एक ओर अंत्येष्टि स्थल से जुड़े कार्य में ₹19,43,879 का व्यय दर्ज है और उसे पूर्ण दिखाया गया है। दूसरी ओर ₹24,50,000 की अनुमानित लागत वाला एक नया कार्य 28 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ है। खास बात यह है कि इस दूसरे कार्य की फोटो में पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देता है, जबकि रिकॉर्ड में कार्य New/Fresh और Onset of work दर्ज है। पहले ₹19.43 लाख का कार्य मेरी पंचायत के रिकॉर्ड में Work ID 125166992 के तहत कार्य दर्ज है। कार्य का विवरण है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets रिकॉर्ड के मुताबिक— अनुमानित लागत: ₹20,00,000 दर्ज व्यय: ₹19,43,879 योजना: Antyeshti Sthalon Ka Vikas गतिविधि: New/Fresh स्थिति: Completion of work पंजीकरण: 25 मई 2025 परिसंपत्ति विवरण में Buildings, उपश्रेणी Old Aged Home और कुल इकाई 1 दर्ज है। अर्थात उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह कार्य पूर्ण है और इसमें करीब 19.43 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है। फिर सामने आया ₹24.50 लाख का दूसरा रिकॉर्ड इसी पंचायत में Work ID 130244502 के तहत दूसरा कार्य दर्ज है। इसका कार्य विवरण भी पहले रिकॉर्ड से काफी मिलता-जुलता है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets इस रिकॉर्ड में— अनुमानित लागत: ₹24,50,000 व्यय: ₹0 पंजीकरण: 28 जुलाई 2026 स्थिति: Onset of work गतिविधि: New/Fresh योजना: Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission... परिसंपत्ति: Buildings उपश्रेणी: Sheds कुल इकाई: 1 दर्ज है। यानी एक कार्य में ₹19.43 लाख खर्च दर्ज है, जबकि दूसरे में ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत दिखाई जा रही है और फिलहाल व्यय शून्य है। नए काम की फोटो ने बढ़ाया सवाल मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दूसरे Work ID की फोटो है। फोटो रिकॉर्ड में 28 जुलाई 2026 की जियो-टैग तस्वीर दिखाई देती है। तस्वीर में एक पहले से बना हुआ पक्का ढांचा/शेड नजर आ रहा है। फोटो पर तारीख और लोकेशन की जानकारी भी दिखाई देती है। यहां सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पोर्टल पर इसी कार्य को New/Fresh और Onset of work बताया गया है। क्या पहले से मौजूद ढांचा ही नए कार्य की तस्वीर है? यह बात अभी जांच का विषय है और उपलब्ध रिकॉर्ड से इसका अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अगर ₹24.50 लाख वाला कार्य किसी अलग शेड या अलग परिसंपत्ति के लिए है, तो उसकी वास्तविक लोकेशन और प्रस्तावित निर्माण स्पष्ट होना चाहिए। वहीं यदि जांच में यह पाया जाता है कि फोटो में दिखाई दे रहा ढांचा उसी पुराने निर्माण से संबंधित है, जिस पर पहले ही करीब ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो फिर नए कार्य को New/Fresh दर्ज किए जाने के आधार की जांच जरूरी होगी। ₹24.50 लाख खर्च होने की बात नहीं यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरे कार्य में पोर्टल पर फिलहाल ₹0 व्यय दर्ज है। इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि ₹24.50 लाख खर्च या भुगतान हो चुके हैं। मामला फिलहाल ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत वाले दर्ज कार्य, उसकी स्थिति और उससे जुड़ी तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों का है। पुराने निर्माण की स्थिति पर भी सवाल मौके की पड़ताल में निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। यदि यह वही निर्माण है, जिस पर ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो इसकी तकनीकी स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। क्या कार्य की एमबी तैयार हुई? क्या तकनीकी जांच हुई? क्या पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हुआ? क्या भुगतान से पहले गुणवत्ता का सत्यापन किया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेख और विभागीय जांच ही दे सकती है। अब दोनों रिकॉर्ड का मिलान जरूरी मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए Work ID 125166992 और Work ID 130244502 की— लोकेशन जियो-टैग फोटो एस्टीमेट तकनीकी स्वीकृति एमबी पूर्णता प्रमाणपत्र भुगतान अभिलेख का मिलान कराया जाना चाहिए। यदि दोनों अलग-अलग कार्य और परिसंपत्तियां हैं तो रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि जांच में दोनों एक ही स्थल या निर्माण से जुड़े पाए जाते हैं, तो फिर यह जानना जरूरी होगा कि अलग कार्य के रूप में रिकॉर्ड तैयार करने का आधार क्या था। सवाल गंभीर हैं, निष्कर्ष जांच के बाद इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के बीच उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक तरफ ₹19,43,879 व्यय वाला कार्य पूर्ण दर्ज है। दूसरी तरफ ₹24,50,000 अनुमानित लागत वाला कार्य New/Fresh और Onset of work के रूप में दर्ज है। और इसी दूसरे कार्य के साथ पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देने वाली तस्वीर मौजूद है। अब असली सवाल— जब पुराने कार्य का रिकॉर्ड पूर्ण है, तो ₹24.50 लाख का नया कार्य किस परिसंपत्ति के लिए दर्ज किया गया? और यदि दोनों कार्य अलग हैं तो उनकी अलग-अलग लोकेशन और स्वीकृत कार्य का विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट क्यों न किया जाए? फिलहाल नए कार्य में ₹0 व्यय दर्ज है। ऐसे में किसी भुगतान पर निष्कर्ष निकालने के बजाय भुगतान से पहले रिकॉर्ड, स्थल और तकनीकी दस्तावेजों का सत्यापन सबसे जरूरी कदम होगा। जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला रिकॉर्ड की सामान्य प्रक्रिया/त्रुटि है, अलग-अलग कार्यों का है या फिर किसी अनियमितता की स्थिति सामने आती है। फिलहाल दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं और जवाब जांच से सामने आना बाकी है।
19.43 लाख का मरघट पूरा, अब उसी जैसी तस्वीर के साथ ₹24.50 लाख का नया काम? छिरिया सलेमपुर में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की तस्वीर आमने-सामने, पुराने कार्य पर ₹19.43 लाख व्यय दर्ज, नए कार्य में अभी ₹0 खर्च जालौन। जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज दो अलग-अलग कार्यों के रिकॉर्ड तथा दूसरे कार्य के साथ लगी जियो-टैग तस्वीर इस मामले को जांच के दायरे में लाती है। एक ओर अंत्येष्टि स्थल से जुड़े कार्य में ₹19,43,879 का व्यय दर्ज है और उसे पूर्ण दिखाया गया है। दूसरी ओर ₹24,50,000 की अनुमानित लागत वाला एक नया कार्य 28 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ है। खास बात यह है कि इस दूसरे कार्य की फोटो में पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देता है, जबकि रिकॉर्ड में कार्य New/Fresh और Onset of work दर्ज है। पहले ₹19.43 लाख का कार्य मेरी पंचायत के रिकॉर्ड में Work ID 125166992 के तहत कार्य दर्ज है। कार्य का विवरण है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets रिकॉर्ड के मुताबिक— अनुमानित लागत: ₹20,00,000 दर्ज व्यय: ₹19,43,879 योजना: Antyeshti Sthalon Ka Vikas गतिविधि: New/Fresh स्थिति: Completion of work पंजीकरण: 25 मई 2025 परिसंपत्ति विवरण में Buildings, उपश्रेणी Old Aged Home और कुल इकाई 1 दर्ज है। अर्थात उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह कार्य पूर्ण है और इसमें करीब 19.43 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है। फिर सामने आया ₹24.50 लाख का दूसरा रिकॉर्ड इसी पंचायत में Work ID 130244502 के तहत दूसरा कार्य दर्ज है। इसका कार्य विवरण भी पहले रिकॉर्ड से काफी मिलता-जुलता है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets इस रिकॉर्ड में— अनुमानित लागत: ₹24,50,000 व्यय: ₹0 पंजीकरण: 28 जुलाई 2026 स्थिति: Onset of work गतिविधि: New/Fresh योजना: Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission... परिसंपत्ति: Buildings उपश्रेणी: Sheds कुल इकाई: 1 दर्ज है। यानी एक कार्य में ₹19.43 लाख खर्च दर्ज है, जबकि दूसरे में ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत दिखाई जा रही है और फिलहाल व्यय शून्य है। नए काम की फोटो ने बढ़ाया सवाल मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दूसरे Work ID की फोटो है। फोटो रिकॉर्ड में 28 जुलाई 2026 की जियो-टैग तस्वीर दिखाई देती है। तस्वीर में एक पहले से बना हुआ पक्का ढांचा/शेड नजर आ रहा है। फोटो पर तारीख और लोकेशन की जानकारी भी दिखाई देती है। यहां सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पोर्टल पर इसी कार्य को New/Fresh और Onset of work बताया गया है। क्या पहले से मौजूद ढांचा ही नए कार्य की तस्वीर है? यह बात अभी जांच का विषय है और उपलब्ध रिकॉर्ड से इसका अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अगर ₹24.50 लाख वाला कार्य किसी अलग शेड या अलग परिसंपत्ति के लिए है, तो उसकी वास्तविक लोकेशन और प्रस्तावित निर्माण स्पष्ट होना चाहिए। वहीं यदि जांच में यह पाया जाता है कि फोटो में दिखाई दे रहा ढांचा उसी पुराने निर्माण से संबंधित है, जिस पर पहले ही करीब ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो फिर नए कार्य को New/Fresh दर्ज किए जाने के आधार की जांच जरूरी होगी। ₹24.50 लाख खर्च होने की बात नहीं यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरे कार्य में पोर्टल पर फिलहाल ₹0 व्यय दर्ज है। इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि ₹24.50 लाख खर्च या भुगतान हो चुके हैं। मामला फिलहाल ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत वाले दर्ज कार्य, उसकी स्थिति और उससे जुड़ी तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों का है। पुराने निर्माण की स्थिति पर भी सवाल मौके की पड़ताल में निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। यदि यह वही निर्माण है, जिस पर ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो इसकी तकनीकी स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। क्या कार्य की एमबी तैयार हुई? क्या तकनीकी जांच हुई? क्या पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हुआ? क्या भुगतान से पहले गुणवत्ता का सत्यापन किया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेख और विभागीय जांच ही दे सकती है। अब दोनों रिकॉर्ड का मिलान जरूरी मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए Work ID 125166992 और Work ID 130244502 की— लोकेशन जियो-टैग फोटो एस्टीमेट तकनीकी स्वीकृति एमबी पूर्णता प्रमाणपत्र भुगतान अभिलेख का मिलान कराया जाना चाहिए। यदि दोनों अलग-अलग कार्य और परिसंपत्तियां हैं तो रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि जांच में दोनों एक ही स्थल या निर्माण से जुड़े पाए जाते हैं, तो फिर यह जानना जरूरी होगा कि अलग कार्य के रूप में रिकॉर्ड तैयार करने का आधार क्या था। सवाल गंभीर हैं, निष्कर्ष जांच के बाद इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के बीच उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक तरफ ₹19,43,879 व्यय वाला कार्य पूर्ण दर्ज है। दूसरी तरफ ₹24,50,000 अनुमानित लागत वाला कार्य New/Fresh और Onset of work के रूप में दर्ज है। और इसी दूसरे कार्य के साथ पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देने वाली तस्वीर मौजूद है। अब असली सवाल— जब पुराने कार्य का रिकॉर्ड पूर्ण है, तो ₹24.50 लाख का नया कार्य किस परिसंपत्ति के लिए दर्ज किया गया? और यदि दोनों कार्य अलग हैं तो उनकी अलग-अलग लोकेशन और स्वीकृत कार्य का विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट क्यों न किया जाए? फिलहाल नए कार्य में ₹0 व्यय दर्ज है। ऐसे में किसी भुगतान पर निष्कर्ष निकालने के बजाय भुगतान से पहले रिकॉर्ड, स्थल और तकनीकी दस्तावेजों का सत्यापन सबसे जरूरी कदम होगा। जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला रिकॉर्ड की सामान्य प्रक्रिया/त्रुटि है, अलग-अलग कार्यों का है या फिर किसी अनियमितता की स्थिति सामने आती है। फिलहाल दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं और जवाब जांच से सामने आना बाकी है।
- दबंग मकान मालिक का कारनामा, एग्रीमेंट के वावजूद कार्यालय में जड़ा ताला, ब्रेकिंग जालौन किराएदार को निकालकर किया बेदखल, पुलिस चौकी में हुए सुलह समझौते के बाद भी दिखाई दबंगई, कार्यालय की चाबी मांगने पर की अभद्रता, पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार, उरई के सुशील नगर शिवा पैलेस के पास का मामला।1
- जालौन हर घर तिरंगा अभियान के तहत भव्य तिरंगा यात्रा निकली। जालौन हर घर तिरंगा अभियान के तहत भव्य तिरंगा यात्रा निकली। पुलिस लाइन उरई से निकली 3 किमी लंबी यात्रा। अधिकारी, जनप्रतिनिधि, छात्र और लोग हुए शामिल। अंबेडकर चौराहे पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया1
- रूरा अकबरपुर मार्ग पर ओवर ब्रिज के समीप एक ट्रेलर नाली की पटिया तोड़कर नाले में जा घुसा, यातायात हुआ बाधित कस्बा रुरा में रूरा अकबरपुर मार्ग पर ओवर ब्रिज के समीप बैक करने के दौरान ट्रेलर का अगला हिस्सा नाली की पटिया तोड़कर नाले में जा घुसा और सड़क के बीचो-बीच खड़ा हो गया जिससे काफी देर तक यातायात बाधित रहा।वहीं क्रेन की मदद से उसको बाहर निकाला गया।जिससे यातायात सुचारू रूप से बहाल हो गया।1
- कृमि मुक्त रहने से बेहतर होता है बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास: बीईओ मनोज कुमार सिंह कानपुर देहात। पीएमश्री विद्यालय बढ़ापुर अकबरपुर में सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का अत्यंत उत्साहपूर्वक और सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने बच्चों और शिक्षकों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य, साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि पेट के कीड़ों से मुक्त रहने से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होता है। साथ ही इससे बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास तेज होता है और उनकी पढ़ाई-लिखाई (पठन-पाठन) की क्षमता भी बेहतर होती है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कंचन यादव के कुशल दिशा-निर्देशन में बच्चों ने विद्यालय मंच पर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति से संबंधित विभिन्न विषयों पर बेहद सुंदर और संदेशप्रद प्रस्तुतियां दीं। बच्चों के इस प्रयास को सभी ने खूब सराहा। विद्यालय के सभी बच्चों ने अपने-अपने कक्षा अध्यापक की देखरेख में एल्बेंडाजोल की गोलियां खाई। बच्चों के साथ-साथ विद्यालय के सभी उपस्थित शिक्षकों और शिक्षणेत्तर स्टाफ ने भी गोलियां खाकर इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाया। इस अवसर पर प्रधानाध्यापिका कंचन यादव, सुमन यादव, सुलेखा, दिव्या सक्सेना, दिनेश पाठक एवं शिक्षामित्र उमा सहित समस्त विद्यालय परिवार सक्रिय रूप से मौजूद रहा।1
- savan ke doosre somwar ko devkli mandir auraiya me umdi bheed1
- नालियां न होने से हारामऊ गांव में जलभराव, कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल बदहाल रास्तों और जलभराव से ग्रामीण परेशान, विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी नालियां न होने से हारामऊ गांव में जलभराव, कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल बदहाल रास्तों और जलभराव से ग्रामीण परेशान, विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी विकासखंड डेरापुर की ग्राम पंचायत हारामऊ में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गांव में नालियां नहीं होने के कारण घरों और रास्तों का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। बारिश के बाद कई रास्तों पर जलभराव के साथ कीचड़ की स्थिति बन जाती है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे ग्रामीणों ने गांव की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की कई सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। जगह-जगह वर्षों पुराने ईंटों के खड़ंजे पड़े हैं, जो बारिश के बाद कीचड़ और फिसलन के कारण राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को रोजाना कीचड़ और जलभराव से होकर स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि खराब रास्तों के कारण बच्चों के कपड़े गंदे होने के साथ-साथ उनके फिसलकर चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों पर कुछ स्थानों पर जानवर बांध दिए जाने से भी आवागमन प्रभावित होता है। इससे पहले से खराब रास्तों पर लोगों को निकलने में और अधिक परेशानी होती है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गांव में अपेक्षित विकास कार्य नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल निकासी और जर्जर रास्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। कीमती देवी, वीरू, लवकुश, वेदपाल सिंह, सतपाल, राजू, सुरेश सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर पक्की सड़कों का निर्माण, जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण तथा जर्जर रास्तों की मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से ही जलभराव और कीचड़ की समस्या से स्थायी राहत मिल सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है।1
- छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण पर बड़ा सवाल—पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर लाखों की धनराशि का प्रस्ताव; रकम फिलहाल पेंडिंग 19 लाख का मरघट, साल भर भी नहीं टिका और उसी की फोटो लगाकर फिर 24.50 लाख का खेल? जनपद जालौन के जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी धन से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की हालत और सरकारी रिकॉर्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मरघट के निर्माण पर करीब 19.43 लाख रुपये खर्च होना दर्ज है, उसमें निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई दे रही हैं। सवाल यह है कि जब निर्माण अभी नया है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मरघट की तस्वीर लगाकर दोबारा लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की धनराशि के लिए रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी जगह फिर लाखों का प्रस्ताव! मेरी पंचायत पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार छिरिया सलेमपुर ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल से जुड़े निर्माण कार्य में 19,43,879 रुपये का व्यय दर्ज है, जबकि अनुमानित लागत 20 लाख रुपये दिखाई गई है। कार्य को पूर्ण भी दर्शाया गया है। लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति देखकर गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लैंटर के नीचे की पट्टियों और निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं। यानी निर्माण पुराना होने की बात नहीं, बल्कि सवाल यह है कि साल भर भी पूरा नहीं हुआ और निर्माण में दरारें कैसे आ गईं? सबसे बड़ा सवाल—उसी मरघट की फोटो फिर क्यों? मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मरघट का निर्माण पहले ही हो चुका है, उसी स्थान की फोटो लगाकर ग्राम पंचायत के ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिर एक नए कार्य के लिए लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की अनुमानित धनराशि दिखाई गई है। उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दूसरे कार्य की अनुमानित लागत 24,50,000 रुपये, पंजीकरण की तारीख 28 जुलाई 2026 और व्यय ₹0 दर्ज है। कार्य वर्तमान में चल रहा/प्रस्तावित स्थिति में दिखाई दे रहा है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल इस नए कार्य की धनराशि खर्च होना रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा और रकम पेंडिंग स्थिति में है। यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है— जब उसी जगह पहले से करीब 19 लाख रुपये खर्च करके मरघट बनाया जा चुका है, तो फिर उसी मरघट की फोटो लगाकर दोबारा 20-24 लाख रुपये के नए कार्य का रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? अगर समय रहते सवाल नहीं उठता तो...? आज अगर इस मामले पर सवाल नहीं उठाया जाता और रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की जाती, तो आशंका थी कि आने वाले दिनों में उसी स्थान पर दोबारा लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत या खर्च की दिशा में आगे बढ़ सकती थी। फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नए कार्य पर ₹0 व्यय दिखाई दे रहा है। इसलिए अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी धनराशि जारी होने से पहले ही पूरे मामले की जांच करें। क्या पहले से बने अंत्येष्टि स्थल की तकनीकी जांच हुई है? क्या पुराने कार्य की एमबी और भुगतान की जांच हुई? क्या नए प्रस्ताव में उसी पुराने निर्माण की फोटो इस्तेमाल की गई? क्या दोनों कार्यों का एस्टीमेट अलग-अलग है? और सबसे महत्वपूर्ण—जब पुराना निर्माण मौजूद है तो उसी स्थान पर फिर 24.50 लाख रुपये का नया काम आखिर किस आधार पर प्रस्तावित किया गया? जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर इस मामले में सीधे तौर पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जरूरी है कि प्रशासन रिकॉर्ड और मौके की संयुक्त जांच कराए। पुराने कार्य की एमबी, एस्टीमेट, भुगतान वाउचर, पूर्णता प्रमाणपत्र और नए कार्य के प्रस्ताव की तकनीकी फाइल की जांच की जाए। अगर जांच में सामने आता है कि एक ही निर्माण को अलग-अलग नाम या फोटो के जरिए दोबारा धनराशि लेने का प्रयास किया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा भी जरूरी होगी। जनता से सीधा सवाल 19 लाख रुपये में बना मरघट, साल भर भी नहीं हुआ और दरारें सामने आ गईं। अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर करीब 20 से 24.50 लाख रुपये का काम रिकॉर्ड में दिखाई दे रहा है, जबकि फिलहाल खर्च ₹0 दर्ज है। आखिर एक ही मरघट पर बार-बार सरकारी धन क्यों? अगर समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो क्या आने वाले दिनों में फिर लाखों रुपये उसी जगह खर्च हो जाते? आपकी क्या राय है? क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। कागजों में कुछ और, जमीन पर कुछ और—अब जांच बताएगी असली सच। #Jalaun #JalaunNews #ChhiriyaSalempur #GramPanchayat #JalaunBlock #GovernmentFund #PanchayatVibhag #PanchayatiRaj #BDOJalaun #DPROJalaun #CDOJalaun #DMJalaun #JalaunAdministration #GramPanchayatSecretary #GramPradhan #DevelopmentWork #GovernmentConstruction #Corruption #Accountability #JalaunCorruption #BreakingNews #LocalNews1
- जालौन दोनों पक्षों में चले जमकर लाठी डंडे लाठी डंडों के बाद हुई फायरिंग फायरिंग करने का वीडियो वायरल आटा थाना क्षेत्र के अटरिया गांव का मामला.1