भगतपुरा में टीबी जांच का बड़ा अभियान: 165 ग्रामीणों की जांच, 12 संदिग्ध मरीजों के नमूने कुशलगढ़ (बांसवाड़ा), 25 अगस्त। टीबी मुक्त जनजाति अभियान के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग बांसवाड़ा तथा पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कुशलगढ़ ब्लॉक के भगतपुरा गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 165 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। शिविर में 116 लोगों के एक्स-रे किए गए। इनमें 12 संभावित टीबी मरीजों के थूक के नमूने लेकर अत्याधुनिक ट्रू-नाट (Truenat) मशीन से जांच की गई। साथ ही ग्रामीणों की शुगर, ब्लड प्रेशर, लंबाई और वजन की जांच कर आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श दिया गया। पिरामल फाउंडेशन के डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य जनजाति बहुल एवं दुर्गम क्षेत्रों के प्रत्येक व्यक्ति तक टीबी जांच और उपचार की सुविधा पहुंचाना है। बांसवाड़ा को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत ऐसे शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। सेक्टर चिकित्सा अधिकारी डॉ. लतीफ अहमद ने ग्रामीणों को लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना और भूख में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। शिविर में बीपीएम पिरामल दिल खुश, पिरामल फाउंडेशन के आरटी, एलटी एवं कम्युनिटी मोबिलाइजर, एसटीएलएस वीरेंद्र राठौर, सीएचओ भरत डामोर, एएनएम, आशा सहयोगिनियों सहित स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन का आभार जताया।
भगतपुरा में टीबी जांच का बड़ा अभियान: 165 ग्रामीणों की जांच, 12 संदिग्ध मरीजों के नमूने कुशलगढ़ (बांसवाड़ा), 25 अगस्त। टीबी मुक्त जनजाति अभियान के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग बांसवाड़ा तथा पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कुशलगढ़ ब्लॉक के भगतपुरा गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 165 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। शिविर में 116 लोगों के एक्स-रे किए गए। इनमें 12 संभावित टीबी मरीजों के थूक के नमूने लेकर अत्याधुनिक ट्रू-नाट (Truenat) मशीन से जांच की गई। साथ ही ग्रामीणों की शुगर, ब्लड प्रेशर, लंबाई और वजन की जांच कर आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श दिया गया। पिरामल फाउंडेशन के डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य जनजाति बहुल एवं दुर्गम क्षेत्रों के प्रत्येक व्यक्ति तक टीबी
जांच और उपचार की सुविधा पहुंचाना है। बांसवाड़ा को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत ऐसे शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। सेक्टर चिकित्सा अधिकारी डॉ. लतीफ अहमद ने ग्रामीणों को लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना और भूख में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। शिविर में बीपीएम पिरामल दिल खुश, पिरामल फाउंडेशन के आरटी, एलटी एवं कम्युनिटी मोबिलाइजर, एसटीएलएस वीरेंद्र राठौर, सीएचओ भरत डामोर, एएनएम, आशा सहयोगिनियों सहित स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन का आभार जताया।
- भगतपुरा में टीबी जांच का बड़ा अभियान: 165 ग्रामीणों की जांच, 12 संदिग्ध मरीजों के नमूने कुशलगढ़ (बांसवाड़ा), 25 अगस्त। टीबी मुक्त जनजाति अभियान के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग बांसवाड़ा तथा पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कुशलगढ़ ब्लॉक के भगतपुरा गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 165 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। शिविर में 116 लोगों के एक्स-रे किए गए। इनमें 12 संभावित टीबी मरीजों के थूक के नमूने लेकर अत्याधुनिक ट्रू-नाट (Truenat) मशीन से जांच की गई। साथ ही ग्रामीणों की शुगर, ब्लड प्रेशर, लंबाई और वजन की जांच कर आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श दिया गया। पिरामल फाउंडेशन के डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य जनजाति बहुल एवं दुर्गम क्षेत्रों के प्रत्येक व्यक्ति तक टीबी जांच और उपचार की सुविधा पहुंचाना है। बांसवाड़ा को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत ऐसे शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। सेक्टर चिकित्सा अधिकारी डॉ. लतीफ अहमद ने ग्रामीणों को लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना और भूख में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। शिविर में बीपीएम पिरामल दिल खुश, पिरामल फाउंडेशन के आरटी, एलटी एवं कम्युनिटी मोबिलाइजर, एसटीएलएस वीरेंद्र राठौर, सीएचओ भरत डामोर, एएनएम, आशा सहयोगिनियों सहित स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन का आभार जताया।2
- बांसवाड़ा राजस्थान में बोहरा समाज द्वारा दिनांक 25/8/2026को ईद मिलादुन्नबी महा जुलूस निकाला गया जिसमें बूढ़े और नौजवान, बच्चों एवं महिला भी शामिल होकर जुलूस का शोभा बढ़ाया।1
- उज्जैन वाले बाबा के दरबार में अखाड़ा और चमत्कार दिखने मिलता हे1
- कुशलगढ, मुस्लिम समाज ने निकाला बारावफात पर जुलुस ढोल की थाप पर थिरके युवाओं के कदम (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ﷺ) - रहमत का दिन* प्राइम न्यूज राजस्थान ब्यूरो रिपोर्ट धर्मेन्द्र कुमार सोनी इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबी-उल-अव्वल इस्लाम में बहुत बरकत वाला माना जाता है। इसी महीने की 12 तारीख को पूरी दुनिया में *बारावफात* का त्योहार बड़े ही अदब और एहतराम के साथ मनाया जाता है। इसे *ईद-ए-मिलाद-उन-नबी* भी कहा जाता है। "बारा" का मतलब बारह होता है और "वफात" का मतलब दुनिया से पर्दा फरमाना होता है। इस्लामी तारीख के मुताबिक 12 रबी-उल-अव्वल को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद ﷺ की पैदाइश हुई और इसी तारीख को आपने दुनिया से पर्दा भी किया, इसलिए इस दिन को बारावफात कहा जाता है। आपका जन्म सन 570 ईस्वी में अरब के मक्का शहर में हुआ था। आपके वालिद का नाम हजरत अब्दुल्ला और वालिदा का नाम हजरत आमना था। *बारावफात क्यों मनाई जाती है?* पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ को इस्लाम में अल्लाह के आखिरी पैगंबर माना जाता है। आपने 63 साल की जिंदगी में पूरी इंसानियत को एक नया रास्ता दिखाया। जब दुनिया में अंधेरा था, बेटियों को जिंदा दफन किया जाता था, गरीबों पर जुल्म होता था, तब आपने अमन, इंसाफ और बराबरी का पैगाम दिया। आपने फरमाया कि सभी इंसान एक ही माँ-बाप की औलाद हैं, कोई छोटा-बड़ा नहीं। औरतों को इज्जत दो, यतीमों के सर पर हाथ रखो, पड़ोसियों का ख्याल रखो चाहे वो किसी भी मजहब का हो। बारावफात उसी रहमत और इंसानियत के पैगाम को याद करने का दिन है। *कैसे मनाते हैं बारावफात?* *1. जुलूस-ए-मोहम्मदी:* बारावफात की सबसे बड़ी पहचान है जुलूस। सुबह फजर की नमाज के बाद से ही बच्चे, जवान और बुजुर्ग हरे झंडे, सफेद टोपी और नए कपड़े पहनकर घरों से निकलते हैं। "आका की आमद मरहबा, सरकार की आमद मरहबा" और "लब्बैक या रसूल अल्लाह" के नारों से पूरा माहौल गूंज उठता है। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सागवाड़ा, उदयपुर, जयपुर, अजमेर में बहुत बड़े जुलूस निकलते हैं। *2. सजावट और चिरागां:* इस मुबारक मौके पर मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों और घरों को फूलों, झंडियों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। रात के वक्त चिरागां होता है, जो देखने में बहुत खूबसूरत लगता है। *3. मिलाद शरीफ और सीरत बयान:* मस्जिदों और घरों में मिलाद की महफिलें सजती हैं। उलेमा-ए-कराम पैगंबर साहब की जिंदगी जिसे सीरत-ए-पाक कहा जाता है, पर बयान करते हैं। नात-ख्वां हजरत की शान में नातें पढ़ते हैं और लोग बड़ी खामोशी से सुनते हैं। *4. लंगर, शरबत और खैरात:* इस दिन को रहमत का दिन समझा जाता है। जगह-जगह लंगर लगते हैं। शरबत, मिठाई, बिरयानी और फल बांटे जाते हैं। लोग गरीबों को कपड़े देते हैं, खाना खिलाते हैं और अल्लाह की राह में खर्च करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया नेक काम कई गुना सवाब देता है। *बारावफात का असली पैगाम क्या है?* बारावफात सिर्फ झंडे लगाने और जुलूस निकालने का नाम नहीं है। इसका असली मकसद है पैगंबर साहब की बताई हुई बातों पर अमल करना। आज दुनिया में नफरत, झूठ और धोखा बढ़ रहा है। ऐसे में आप ﷺ का पैगाम और भी जरूरी हो जाता है। आपने कहा - "तुम में से बेहतरीन वो है जिसका अखलाक सबसे अच्छा है।" अगर हम सच में आपसे मोहब्बत करते हैं तो हमें सच बोलना होगा, वादा निभाना होगा, किसी का दिल नहीं दुखाना होगा। *वागड़ में गंगा-जमुनी तहजीब* डूंगरपुर और बांसवाड़ा के वागड़ क्षेत्र में बारावफात पर एक खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। जुलूस जब निकलता है तो कई जगह हिंदू भाई भी पानी और शरबत की सबील लगाते हैं। यह हमारे देश की गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे की सबसे बड़ी मिसाल है। अंत में यही कहना है कि बारावफात हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाती है। आओ इस दिन हम यह अहद करें कि हम नफरत को मिटाकर मोहब्बत फैलाएंगे। बारावफात के जुलूस में कुशलगढ़ थानाधिकारी प्रवीण सिंह मय जाप्ता तैनात रहा वहीं पुरे कुशलगढ़ कस्बे में शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस निकाला गया4
- BRAKING: प्रतापगढ़ पीपलखूंट में एसीबी ने पटवारी को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा,1
- प्रेम संबंध निभाने के लिए पति को देती रही नींद की गोली एक अनोखा किस्सा जिसने शादी के रिश्तें को तार तार कर दिया प्रेमिका हो तो ऐसी हो घरवालों की ख़ुशी के लिए शादी दूसरे से लेकिन संबंध ससुराल में भी प्रेमी से बनाती थी 45 दिन की शादी में प्रेमी का वादा न तोड़ी दूसरे की पत्नी बनने के बाद भी! शादी के बाद भी प्रेमी से किया वादा निभाया, 45 दिन में 23 अगस्त को खुल गया पूरा राज झांसी–भांडेर: झांसी के एक युवक और मध्य प्रदेश के भांडेर की युवती की शादी 24 जून 2026 को परिवार की मर्जी से हुई थी। बताया जा रहा है कि युवती इस शादी से पूरी तरह सहमत नहीं थी और शादी से पहले उसने अपने प्रेमी से कथित तौर पर वादा किया था कि परिवार की खुशी के लिए शादी तो कर लेगी, लेकिन पति को करीब नहीं आने देगी। आरोप है कि शादी के बाद युवती अपने प्रेमी को ससुराल बुलाने लगी। पति को कथित तौर पर नींद की गोली देने के बाद वह प्रेमी के साथ रात बिताती थी। बताया जा रहा है कि प्रेमी को रात करीब 10 बजे ससुराल बुलाया जाता था और सुबह करीब 4 बजे वह वहां से चला जाता था। परिजनों और पति की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, करीब 45 दिनों की शादी के दौरान कई बार प्रेमी को ससुराल बुलाया गया और लगभग 20 दिनों तक दोनों के बीच संबंध रहे। इसी दौरान 23 अगस्त को पति ने कथित तौर पर प्रेमी को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, पत्नी और प्रेमी की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष तथा पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही माना जाना चाहिए घटना के सामने आने के बाद लोग शादी, आपसी सहमति और रिश्तों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शादी के महज 45 दिनों के भीतर ही पति को पत्नी और उसके कथित प्रेमी के संबंधों की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।2
- आसपुर में सड़कों पर गंदगी की हालत होली चोक से मुख्य मार्ग बस स्टैंड पर गंदगी पसरी1
- पकुशलगढ़ में 12 वफात पर मुस्लिम समाज ने निकाला भव्य जुलूस, अमन-चैन और भाईचारे की दुआ के साथ गूंजा नगर कुशलगढ़, 26 अगस्त। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के अवसर पर बुधवार को कुशलगढ़ नगर में मुस्लिम समाज की ओर से 12 वफात के मौके पर विशाल एवं भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में कुशलगढ़ सहित रामगढ़, नाथपुरा, पार्टी तांबेसरा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन उत्साह के साथ शामिल हुए। पूरे जुलूस के दौरान धार्मिक उल्लास के साथ नगर में भाईचारे और सद्भाव का संदेश देखने को मिला। जमा मस्जिद से निकला जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ आगे बढ़ा। जुलूस के आगे आतिशबाजी की गई, वहीं बड़ी संख्या में युवक ढोल की थाप पर उत्साह के साथ नाचते-गाते हुए चल रहे थे। जुलूस में शामिल समाजजनों में खासा उत्साह नजर आया। नगर के विभिन्न स्थानों पर समाजबंधुओं एवं नागरिकों की ओर से शरबत की व्यवस्था की गई तथा कई जगह तबर्रुक का वितरण कर जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया गया। जुलूस के दौरान धार्मिक नारों और उत्साह के बीच पूरा वातावरण श्रद्धा एवं उल्लास से सराबोर नजर आया। जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ पुनः जमा मस्जिद पहुंचा, जहां मुस्लिम समाज की ओर से विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए। इस अवसर पर कई घरों में मीठे भोज का आयोजन भी किया गया। मुस्लिम समाज के सदर एडवोकेट नजीर खान ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के अवसर पर निकाला गया यह जुलूस समाज की एकता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पैगंबर साहब ने पूरी मानवता को प्रेम, शांति, सद्भाव और इंसानियत का संदेश दिया। उन्होंने देश में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारा कायम रहने की दुआ की। एडवोकेट नजीर खान ने समाजजनों से भी आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ मिल-जुलकर रहने का आह्वान किया। जुलूस में पूर्व सदर कयूम भाई, देहात सदर पीर मोहम्मद, पार्टी तांबेसरा सदर सलीम भाई, नाथपुरा सदर आसिफ भाई तथा रामगढ़ सदर सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं वरिष्ठजन मौजूद रहे। वहीं समाज के वरिष्ठ अंसार अहमद, पठान गनी मोहम्मद, फैजल खान, अजीत भाई, रफीक भाई, मुस्ताक भाई सहित बड़ी संख्या में समाजजन जुलूस में शामिल हुए। मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में निकले इस भव्य जुलूस ने कुशलगढ़ में धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। जुलूस के दौरान नगरवासियों ने भी जगह-जगह स्वागत कर समाजजनों का उत्साह बढ़ाया।2