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आशंकी सोनी क्लास मे 1st रैंक लाकर माता पिता का किया नाम रोशन
Beerendra mishra
आशंकी सोनी क्लास मे 1st रैंक लाकर माता पिता का किया नाम रोशन
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- *✍️✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️✍️ लोकेशन- जिला रीवा, मध्यप्रदेश* स्लग- बोर्ड परीक्षा परिणाम में नोबल एकेडमी स्कूल रीवा के छात्रों ने लहराया परचम,स्कूल के 2 छात्र बने प्रदेश में टापर। एंकर- माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में नोबल एकेडमी स्कूल, इटौरा बाईपास के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश स्तर पर अपना परचम लहराया है। कक्षा 10वीं में विद्यालय के दो होनहार छात्रों ने प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान लाकर बड़ी सफलता पाई है। नोबल एकेडमी स्कूल की छात्रा श्रद्धा मिश्रा ने 99.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया है। जबकि स्कूल के छात्र श्रीराम मिश्रा ने 98.2 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रदेश में नौवां स्थान प्राप्त किया है। विद्यालय के लिए यह उपलब्धि बेहद गर्व की बात है। वीओ- इसके अलावा कक्षा 10वीं में करीब 20 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। वहीं कक्षा 12वीं के परिणाम भी काफी सराहनीय रहे हैं। स्कूल के छात्र ने 95 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय में सर्वोच्च स्थान हासिल किया, जबकि लगभग 15 विद्यार्थियों ने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। नोबल एकेडमी के छात्रों ने मेरिट में स्थान बनाकर विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को साबित किया है। इस मौके पर विद्यालय परिसर में छात्रों को सम्मानित किया गया। नोबल एकेडमी स्कूल के संचालक बीडी मिश्रा ने सभी सफल विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विजुअल:- 1 बाइट:- 1- श्रद्धा मिश्रा,छात्रा कक्षा 10 बाइट:- 2- बीडी मिश्रा, स्कूल संचालक1
- Post by Ishu kesharwani1
- 💥 *बड़ी खबर*💥 रेल लाइन के किनारे खड़े बच्चे को गाय द्वारा बचाने का AI-generated वीडियो वायरल सोशल मीडिया में वायरल इस वीडियो में कई ऐसी खामियां हैं जो इसके असली न होने की पुष्टि करती हैं, वीडियो में बारीकी से देखने पर कुछ गड़बड़ियाँ नजर आती हैं, जैसे बच्चे के पैरों का धुंधला दिखना, गाय के पैरों के पास उड़ने वाली धूल का अचानक गायब हो जाना या ट्रेन के डिब्बों की संख्या में विसंगति। सोशल मीडिया पर इसे 'चमत्कार' या 'कुदरत का करिश्मा' बताकर शेयर किया जा रहा है, लेकिन यह कोई वास्तविक घटना नहीं है।1
- Post by चन्दन भइया1
- Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa1
- आंबेडकर जयंती के अवसर पर सीधी अमिलिया में हुए हादसे ने हिंसक रूप ले लिया1
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- लाखों की लूट ,गोली भी चली पुलिस नाकाम1
- रीवा के संजय गांधी मेमोरियल* *हॉस्पिटल से सामने आई यह खबर *बेहद गंभीर और संवेदनशील है* । बताया जा रहा है कि एक महिला अस्पताल के बाथरूम में पड़ी मिली, लेकिन उसे तत्काल बेड पर भर्ती कराने के बजाय गार्ड द्वारा परिजनों पर दबाव बनाया गया और महिला को “लावारिस” घोषित कर भेजने की बात कही गई। ऐसे मामले कई बड़े सवाल खड़े करते हैं: क्या अस्पताल प्रशासन ने समय पर चिकित्सा सहायता दी? गार्ड को इतना अधिकार किसने दिया कि वह मरीज की स्थिति पर फैसला करे? क्या यह मानवीय संवेदनाओं और मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन नहीं है? अगर यह मामला सही है, तो यह सीधे-सीधे लापरवाही और अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में आता है। सरकारी अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ सिस्टम पर सवाल उठाती हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करती हैं।। आरोप है कि गार्ड ने महिला को बेड पर भर्ती कराने की जगह उसे “लावारिस” घोषित कर भेजने की बात कही… सोचिए, जहां मरीजों को जीवनदान मिलना चाहिए, वहीं अगर इस तरह का व्यवहार हो, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? सबसे बड़ा सवाल ये है कि— क्या अस्पताल में इंसानियत खत्म हो चुकी है? क्या एक गार्ड अब तय करेगा कि मरीज का इलाज होगा या नहीं? इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है… और क्या पीड़ित महिला को न्याय मिल पाएगा या नहीं…❗ सवाल ये है: क्या अब अस्पतालों में इलाज से ज्यादा “कागजी प्रक्रिया” मायने रखती है? क्या एक गार्ड तय करेगा कि मरीज का क्या होगा? 👉 अगर यह सच है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि इंसानियत के खिलाफ अपराध है। *प्रशासन को तुरंत जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए*1