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राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ जिले में मध्यम से भीषण आंधी-तूफान की प्रबल संभावना शुरू हो गई है, जिसके साथ तेज हवाएँ चलने का अनुमान है। कई स्थानों पर हवाओं की गति 60 से 80 की स्पीड तक पहुँच सकती है। इन तेज हवाओं के साथ-साथ बहुत तेज आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।
Kotputli-Behror Breaking Live
राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ जिले में मध्यम से भीषण आंधी-तूफान की प्रबल संभावना शुरू हो गई है, जिसके साथ तेज हवाएँ चलने का अनुमान है। कई स्थानों पर हवाओं की गति 60 से 80 की स्पीड तक पहुँच सकती है। इन तेज हवाओं के साथ-साथ बहुत तेज आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।
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- अब घरों के भीतर दुकानें खोली नहीं जा सकेंगी। इसके साथ ही, ई-मित्र सहित कुल 17 सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।1
- राजस्थान में पेट्रोल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण राज्यभर में हड़कंप मचा हुआ है। बढ़ती कीमतों के इस माहौल में, पेट्रोल पंपों द्वारा हड़ताल किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है, जिसका सीधा असर सभी पर पड़ने की आशंका है।1
- खैरतल तिजारा जिले के मुंडावर नगर पालिका क्षेत्र में आज सुबह करीब 5 बजे भयंकर ओलावृष्टि हुई। यह ओलावृष्टि लगभग 20 मिनट तक जारी रही।2
- हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में ₹100 करोड़ से अधिक की लागत वाली नौ महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव द्वारा शुरू की गई ये परियोजनाएं स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति को चिह्नित करती हैं।1
- अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में ऐतिहासिक शपथ ली है। उन्होंने अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्रि कषगम' (TVK) के बैनर तले शानदार चुनावी शुरुआत करते हुए सरकार बनाई है। विजय ने कांग्रेस और अन्य दलों के साथ गठबंधन करके सत्ता संभाली। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद, सीएम विजय ने दिन में ही व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। उनके इस आदेश के अनुसार, तमिलनाडु सचिवालय में 1 जून से बॉयोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू की जाएगी।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले में 292 दिनों से चला आ रहा एक धरना प्रशासन द्वारा हटा दिया गया है। इस कार्रवाई पर संघर्ष समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे प्रशासन की दमनकारी कार्रवाई बताया है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस कदम से आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि इसके विरोध में अब मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।1
- अलवर में स्थित 'सिलीसेढ़ लेक पैलेस' अरावली की पहाड़ियों के मध्य एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थल है। यह अलवर शहर से लगभग 13-14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सरिस्का टाइगर रिजर्व के मार्ग में पड़ता है।1
- Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS1
- जयपुर के अजीतपुरा कला-कुजोता में नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के खिलाफ चल रहा 292 दिन पुराना धरना हटा दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर चार थानों की पुलिस और भारी जाब्ता सहित प्रशासनिक अमला तैनात रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से रिहायशी मकानों तक पत्थर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत सुनने के बजाय प्रशासन ने उन पर ही कार्रवाई की। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार को हुई भारी ब्लास्टिंग के कारण उड़कर आए पत्थरों से आसपास के घरों को भारी खतरा पैदा हो गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर बुलाया था। आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय तहसीलदार रामधन गुर्जर, डिप्टी राजेंद्र सिंह और चार थानों के प्रभारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धरना हटवा दिया और स्थल पर लगा टेंट भी सटवा दिया। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उनका यह भी आरोप है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी कर रही है, और आबादी, स्कूल, श्मशान भूमि तथा ग्रामीण सड़कों के बेहद नजदीक खतरनाक ब्लास्टिंग की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर बाहरी लोगों को बुलाकर महिलाओं से अभद्रता की गई और ओवरलोड डंपरों से ग्रामीणों को कुचलने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। जिला प्रशासन को कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, तहसीलदार का कहना है कि कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के कारण यह कार्रवाई की गई। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई से आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा। यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि नेतराम ताखर, पूर्व सरपंच रामकरण मीणा, महेंद्र मीणा, सुवालाल मीणा, महेंद्र दादरवाल, बिरजू धानका, राम सिंह जाट, रामस्वरूप पंच, भागीरथ मीणा, रोशन आर्य, रमेश चौधरी, धनसीराम जागिड़, लखमी कटारिया, बनवारी ताखर, शिवलाल जाट, रियाज खान, गोकल कुमावत, अफीज खान, शीशराम होलदार और लालचंद बावरिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष ग्रामीण मौजूद थे।1