एमपी को 6 बार 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' दिलाने वाले 27 हजार किसान मित्र व दीदियां बहाली की आस में; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन केंद्र की नई गाइडलाइन व एक्शन प्लान 2025-26 का हवाला देकर उठाई पुनः बहाली की मांग; 18 वर्षों के जमीनी अनुभव को भुनाने की अपील शहडोल /मध्य प्रदेश को लगातार 6 बार प्रतिष्ठित 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' दिलाने में धरातल पर पसीना बहाने वाले करीब 27 हजार 'किसान मित्र' और 'किसान दीदी' आज भी अपनी बहाली की राह देख रहे हैं। सोमवार को भारतीय किसान मित्र/दीदी मजदूर संघ (संबद्ध: भारतीय मजदूर संघ) के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सेवा बहाली की पुरजोर मांग की। 2007 से 2019 तक निभाई रीढ़ की हड्डी जैसी भूमिका संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2007-08 में 'आत्मा' (कृषि तकनीकी प्रबंधन अधिकरण) योजना के तहत प्रदेश भर में किसान मित्रों का चयन किया गया था। 2007 से लेकर 2013 तक जब तक आत्मा योजना में नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई थी, तब तक कृषि विभाग और आत्मा परियोजना की प्रत्येक योजना व तकनीकी विस्तार का जिम्मा इन्हीं किसान मित्रों के कंधों पर था। बाद में कर्मचारियों की भर्ती के उपरांत भी इन्होंने दोगुनी ऊर्जा के साथ काम किया, जिसके दम पर मध्य प्रदेश कृषि क्षेत्र में सिरमौर बना। अचानक सेवा समाप्ति से गहराया संकट प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 31 दिसंबर 2019 को अचानक संचालक महोदय के आदेश से प्रदेश के लगभग 27 हजार किसान मित्रों और दीदियों को सेवा से पृथक कर दिया गया था। बावजूद इसके, कृषि और किसानों से भावनात्मक लगाव के चलते वे आज भी विकासखंड व जिला स्तर पर अधिकारियों के निर्देश पर विभागीय गतिविधियों में निस्वार्थ सहयोग दे रहे हैं। नई गाइडलाइन में प्रावधान, फिर भी फैसले का इंतजार ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी आत्मा परियोजना की नई गाइडलाइन तथा किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी 'एनुअल एक्शन प्लान 2025-26' में प्रति दो गांवों के बीच एक किसान मित्र/दीदी के लिए प्रोत्साहन राशि का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। संघ ने शासन से विनम्र आग्रह किया है कि पिछले 18 वर्षों से कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले इन किसान मित्रों/दीदियों को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि उनके लंबे जमीनी अनुभव का लाभ प्रदेश के किसानों और कृषि विकास को निरंतर मिलता रहे। अजय पाल
एमपी को 6 बार 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' दिलाने वाले 27 हजार किसान मित्र व दीदियां बहाली की आस में; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन केंद्र की नई गाइडलाइन व एक्शन प्लान 2025-26 का हवाला देकर उठाई पुनः बहाली की मांग; 18 वर्षों के जमीनी अनुभव को भुनाने की अपील शहडोल /मध्य प्रदेश को लगातार 6 बार प्रतिष्ठित 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' दिलाने में धरातल पर पसीना बहाने वाले करीब 27 हजार 'किसान मित्र' और 'किसान दीदी' आज भी अपनी बहाली की राह देख रहे हैं। सोमवार को भारतीय किसान मित्र/दीदी मजदूर संघ (संबद्ध: भारतीय मजदूर संघ) के बैनर तले
कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सेवा बहाली की पुरजोर मांग की। 2007 से 2019 तक निभाई रीढ़ की हड्डी जैसी भूमिका संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2007-08 में 'आत्मा' (कृषि तकनीकी प्रबंधन अधिकरण) योजना के तहत प्रदेश भर में किसान मित्रों का चयन किया गया था। 2007 से लेकर 2013 तक जब तक आत्मा योजना में नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई थी, तब तक कृषि विभाग और आत्मा परियोजना की प्रत्येक योजना व तकनीकी विस्तार का जिम्मा इन्हीं किसान मित्रों के कंधों पर था। बाद
में कर्मचारियों की भर्ती के उपरांत भी इन्होंने दोगुनी ऊर्जा के साथ काम किया, जिसके दम पर मध्य प्रदेश कृषि क्षेत्र में सिरमौर बना। अचानक सेवा समाप्ति से गहराया संकट प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 31 दिसंबर 2019 को अचानक संचालक महोदय के आदेश से प्रदेश के लगभग 27 हजार किसान मित्रों और दीदियों को सेवा से पृथक कर दिया गया था। बावजूद इसके, कृषि और किसानों से भावनात्मक लगाव के चलते वे आज भी विकासखंड व जिला स्तर पर अधिकारियों के निर्देश पर विभागीय गतिविधियों में निस्वार्थ सहयोग दे रहे हैं। नई गाइडलाइन में प्रावधान, फिर भी फैसले
का इंतजार ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी आत्मा परियोजना की नई गाइडलाइन तथा किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी 'एनुअल एक्शन प्लान 2025-26' में प्रति दो गांवों के बीच एक किसान मित्र/दीदी के लिए प्रोत्साहन राशि का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। संघ ने शासन से विनम्र आग्रह किया है कि पिछले 18 वर्षों से कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले इन किसान मित्रों/दीदियों को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि उनके लंबे जमीनी अनुभव का लाभ प्रदेश के किसानों और कृषि विकास को निरंतर मिलता रहे। अजय पाल
- एमपी को 6 बार 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' दिलाने वाले 27 हजार किसान मित्र व दीदियां बहाली की आस में; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन केंद्र की नई गाइडलाइन व एक्शन प्लान 2025-26 का हवाला देकर उठाई पुनः बहाली की मांग; 18 वर्षों के जमीनी अनुभव को भुनाने की अपील शहडोल /मध्य प्रदेश को लगातार 6 बार प्रतिष्ठित 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' दिलाने में धरातल पर पसीना बहाने वाले करीब 27 हजार 'किसान मित्र' और 'किसान दीदी' आज भी अपनी बहाली की राह देख रहे हैं। सोमवार को भारतीय किसान मित्र/दीदी मजदूर संघ (संबद्ध: भारतीय मजदूर संघ) के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सेवा बहाली की पुरजोर मांग की। 2007 से 2019 तक निभाई रीढ़ की हड्डी जैसी भूमिका संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2007-08 में 'आत्मा' (कृषि तकनीकी प्रबंधन अधिकरण) योजना के तहत प्रदेश भर में किसान मित्रों का चयन किया गया था। 2007 से लेकर 2013 तक जब तक आत्मा योजना में नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई थी, तब तक कृषि विभाग और आत्मा परियोजना की प्रत्येक योजना व तकनीकी विस्तार का जिम्मा इन्हीं किसान मित्रों के कंधों पर था। बाद में कर्मचारियों की भर्ती के उपरांत भी इन्होंने दोगुनी ऊर्जा के साथ काम किया, जिसके दम पर मध्य प्रदेश कृषि क्षेत्र में सिरमौर बना। अचानक सेवा समाप्ति से गहराया संकट प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 31 दिसंबर 2019 को अचानक संचालक महोदय के आदेश से प्रदेश के लगभग 27 हजार किसान मित्रों और दीदियों को सेवा से पृथक कर दिया गया था। बावजूद इसके, कृषि और किसानों से भावनात्मक लगाव के चलते वे आज भी विकासखंड व जिला स्तर पर अधिकारियों के निर्देश पर विभागीय गतिविधियों में निस्वार्थ सहयोग दे रहे हैं। नई गाइडलाइन में प्रावधान, फिर भी फैसले का इंतजार ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी आत्मा परियोजना की नई गाइडलाइन तथा किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी 'एनुअल एक्शन प्लान 2025-26' में प्रति दो गांवों के बीच एक किसान मित्र/दीदी के लिए प्रोत्साहन राशि का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। संघ ने शासन से विनम्र आग्रह किया है कि पिछले 18 वर्षों से कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले इन किसान मित्रों/दीदियों को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि उनके लंबे जमीनी अनुभव का लाभ प्रदेश के किसानों और कृषि विकास को निरंतर मिलता रहे। अजय पाल4
- पूर्व कोतमा विधायक सुनील सराफ ने कांवड़ यात्रा में की सहभागिता कोतमा। ग्राम निगमगवां स्थित अंगारझार माता मंदिर से जल लेकर सीतामढ़ी तक आयोजित कांवड़ यात्रा के शुभारंभ अवसर पर पूर्व कोतमा विधायक सुनील सराफ ने सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सभी शिवभक्त कांवड़ियों को शुभकामनाएं दीं। कांवड़ यात्रा में उत्साही युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और “बोल बम” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। पूर्व विधायक सुनील सराफ ने सभी कांवड़ियों की यात्रा मंगलमय होने की कामना करते हुए कहा कि भगवान शिव की कृपा सभी पर बनी रहे।1
- वृक्षों को स्वस्थ रखने से पर्यावरण रहेगा सुरक्षित - फग्गन सिंह कुलस्ते साल बोरर कीट से प्रभावित वन क्षेत्र का प्रबंधन एवं संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला अमरकंटक में आयोजित अनूपपुर - इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में वन विभाग द्वारा साल बोरर कीट से प्रभावित वन क्षेत्र का प्रबंधन एवं संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया इस दौरान मुख्य अतिथि से संबोधित करते हुए फग्गन सिंह कुलस्ते सांसद मंडला एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई वर्षों बाद एक बार फिर से मध्यप्रदेश के डिंडौरी एवं अनूपपुर जिले के इलाकों में बृहद पैमाने पर प्राकृतिक तौर पर साल वृक्ष जो बहुतायत मात्रा में है जिममे साल बोरर नामक कीट एक बार फिर से उत्पन्न होने से साल के वृक्षो के प्रभावित होने की संभावना बड़ी संख्या में है साल वन हमारे पर्यावरण के तंत्रिका तंत्र के लिए नितांत आवश्यक है जिसे बचाए रखने हेतु हम सभी को मिलकर सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है उन्होंने वन विभाग के साथ वन समितियो,ग्रामीण जनों को इस बड़ी बीमारी की जानकारी एकत्रित कर समय रहते ही निदान किए जाने की बात कही। इस दौरान पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने कहा कि हमारा यह नर्मदाचल क्षेत्र साल वन क्षेंत्र है साल के वर्षों में वर्षा काल में गिरने वाले पानी को कई माह तक संग्रहित कर रखने की क्षमता है जिस कारण हमारा यह क्षेत्र वर्ष भर हरा भरा रहने के साथ वर्ष भर पानी की अधिकता रहती है यह क्षेत्र जनजातीय समुदाय का बहुल क्षेत्र होने के कारण हम सभी को वनों के रहने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं लेकिन कई वर्षों बाद फिर से साल के वृक्षो में साल बोरर नामक कीट के उत्पन्न हो जाने से वृक्षो में बुरा प्रभाव पड़ रहा है जिस साल के वृक्ष संकट की स्थिति में है समय रहते इस समस्या का समाधान स्थाई रूप से किया जाना हम सभी का दायित्व है। कार्यशाला दौरान वन विभाग के अधिकारियों द्वारा साल वृक्षो में साल बोरर कीट के संबंध में जानकारी प्रस्तुत कर कार्य योजना के संबंध में अवगत कराया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश स्तर के वन अधिकारी विभिन्न वैज्ञानिक सम्मिलित रहे। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक वन वृत शहडोल एमपी सिंह ने साल बोरर कीट की समस्या के निदान के संबंध में जानकारी देते हुए कार्यशाला किए जाने के महत्व एवं उद्देश्यों के संबंध में जानकारी साझा की।1
- सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवम् शीर्ष मॉनिटरिंग अथॉरिटी की तृतीय बैठक मे सहभागिता की l1
- नागपंचमी पर मानपुर में सजा कुश्ती का अखाड़ा, पहलवानों के दांव-पेंच देखने उमड़ा जनसैलाब नागपंचमी पर मानपुर में सजा कुश्ती का अखाड़ा, पहलवानों के दांव-पेंच देखने उमड़ा जनसैलाब मानपुर। नागपंचमी के शुभ एवं पावन पर्व के अवसर पर मानपुर में भव्य कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। पारंपरिक अखाड़े में क्षेत्रभर से पहुंचे पहलवानों ने अपने दमखम और शानदार दांव-पेंच से दर्शकों का रोमांच बढ़ा दिया। कुश्ती मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं क्षेत्रवासी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। जैसे-जैसे मुकाबले आगे बढ़े, दर्शकों में उत्साह और रोमांच भी बढ़ता गया। पहलवानों के जोरदार दांव-पेंच और शानदार प्रदर्शन पर दर्शकों ने तालियों एवं जयकारों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मंच पर मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने पहलवानों का उत्साह बढ़ाते हुए नागपंचमी पर्व की शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। आयोजकों ने बताया कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल हमारी ग्रामीण संस्कृति और खेल विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी खेल क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है और युवा पीढ़ी भी भारतीय पारंपरिक खेलों से जुड़ती है। मानपुर में आयोजित इस कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। देर तक अखाड़े में पहलवानों के बीच रोमांचक मुकाबले जारी रहे और दर्शकों की भीड़ कार्यक्रम का आनंद लेती रही।1
- उमरिया /नागपंचमी के शुभ पावन पर्व के उपलक्ष्य पर मानपुर में चल रहा शानदार कुश्ती कार्यक्रम भारी संख्या में दर्शकों के साथ मंचासीन विराजे जनप्रतिनिधि1
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- श्रावण शुक्ल पंचमी पर अमरकंटक में उमड़ी भक्तों की भीड़ तड़के 3 बजे से शुरू हुआ स्नान-दर्शन और पूजन का क्रम ज्वालेश्वर महादेव के जलाभिषेक को लगीं लंबी कतारें अनूपपूर - पवित्र श्रावण मास के तृतीय सोमवार एवं श्रावण शुक्ल पंचमी, नाग पंचमी के पावन संयोग पर आदितीर्थ अमरकंटक में सोमवार को आस्था, भक्ति और शिव आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। पवित्र नगरी में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिवभक्त और श्रद्धालु मां नर्मदा के पावन तट पर पहुंचे। अनुमान के अनुसार लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने अमरकंटक पहुंचकर नर्मदा स्नान, ध्यान, दर्शन-पूजन तथा भगवान ज्वालेश्वर महादेव के जलाभिषेक का पुण्य लाभ प्राप्त किया। तड़के लगभग 3 बजे से ही स्नान, दर्शन, पूजन-अर्चन एवं अभिषेक का क्रम प्रारंभ हो गया था। जैसे-जैसे सुबह हुई, नर्मदा उद्गम क्षेत्र, रामघाट, कोटि तीर्थ घाट और ज्वालेश्वर धाम की ओर श्रद्धालुओं का सैलाब बढ़ता गया। चारों ओर भगवा वस्त्रों में कांवड़िए, हाथों में नर्मदा जल और कंठ में शिवनाम का जाप करते श्रद्धालु दिखाई दिए। नर्मदा स्नान के बाद ज्वालेश्वर महादेव की ओर बढ़े कदम ज्वालेश्वर धाम पहुंचने से पूर्व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रामघाट एवं कोटि तीर्थ घाट में आस्था की पुण्य डुबकी लगाई। पवित्र नर्मदा में स्नान के पश्चात श्रद्धालु मां नर्मदा उद्गम मंदिर पहुंचे और मां नर्मदा के दर्शन-पूजन कर पवित्र जल प्राप्त किया। इसके बाद यही नर्मदा जल लेकर कांवड़िए एवं शिवभक्त भगवान ज्वालेश्वर महादेव के जलाभिषेक के लिए ज्वालेश्वर धाम की ओर रवाना होते रहे। मान्यता और श्रद्धा के इस भावपूर्ण वातावरण में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो नर्मदा की अविरल धारा स्वयं शिव के चरणों में समर्पित होने के लिए आगे बढ़ रही हो। ज्वालेश्वर धाम में हजारों श्रद्धालु कतारबद्ध ज्वालेश्वर धाम में सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्त अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हुए भगवान भोलेनाथ के दर्शन और नर्मदा जल से जलाभिषेक के लिए उत्सुक नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष गूंजते रहे। श्रावण मास के इस पावन अवसर पर ज्वालेश्वर महादेव की आराधना करने पहुंचे श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और कांवड़ यात्रियों सहित हर वर्ग के श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन नजर आए। मां नर्मदा मंदिर में भी उमड़ा भक्तों का सैलाब मां नर्मदा उद्गम मंदिर में भी सुबह से ही भारी भीड़ बनी रही। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मां नर्मदा के दर्शन और पूजन करते रहे। मंदिर परिसर से लेकर नर्मदा तट तक श्रद्धा का वातावरण बना रहा। घाटों पर धार्मिक मंत्रोच्चार और शिवनाम संकीर्तन से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। श्रावण शुक्ल पंचमी और नाग पंचमी के पावन पर्व के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक रही। नर्मदा स्नान एवं पूजन के साथ नाग पंचमी के धार्मिक महत्व को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। छत्तीसगढ़ सहित अनेक क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में बिलासपुर, मुंगेली, लोरमी, पंडरिया, पाडातरई, कोरबा, रतनपुर, बरगद (ओडिशा), रायपुर, शहडोल, बुढार, धनपुरी, अनूपपुर, कोतमा, जैतहरी, पुष्पराजगढ़, डिंडोरी सहित आसपास के अनेक क्षेत्रों के शिवभक्त शामिल रहे। कई श्रद्धालु समूहों में कांवड़ लेकर पहुंचे तो अनेक भक्त निजी वाहनों एवं अन्य साधनों से अमरकंटक पहुंचे। सुबह से देर तक श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी रहा। पुलिस ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए अमरकंटक के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात रहा। ज्वालेश्वर धाम में छत्तीसगढ़ पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में लगी रही, वहीं पवित्र नगरी के रामघाट, कोटि तीर्थ घाट, मां नर्मदा मंदिर एवं ज्वालेश्वर तिराहा सहित प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था बनाए रखने में सेवाएं दी गईं। भीड़ को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित करने, श्रद्धालुओं को कतारबद्ध रखने तथा आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस एवं सुरक्षा कर्मी लगातार सक्रिय रहे। शिवमय हुआ अमरकंटक श्रावण मास के तृतीय सोमवार और नाग पंचमी के पावन अवसर पर अमरकंटक का आध्यात्मिक स्वरूप अपने चरम पर दिखाई दिया। नर्मदा तट पर आस्था की डुबकी, उद्गम मंदिर में मां नर्मदा के दर्शन और ज्वालेश्वर धाम में शिवलिंग पर नर्मदा जल अर्पित करते श्रद्धालुओं की भक्ति ने पूरी नगरी को शिवमय कर दिया। ऐसा लगा मानो नर्मदा की प्रत्येक लहर शिवनाम का जाप कर रही हो और अमरकंटक की प्रत्येक दिशा “हर-हर महादेव” के दिव्य घोष से आलोकित हो उठी हो। “नर्मदे हर… हर-हर महादेव… बोल बम” के जयघोष के बीच पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रद्धा, साधना और सनातन आस्था की अविरल धारा पूरे दिन प्रवाहित होती रही।1
- उमरिया जिले में तेज बारिश का कहर, नदी-नालों में उफान से पुल-पुलिया टूटीं, कच्चे मकानों को भी नुकसान उमरिया जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है, जहां तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण जिले के कई नदी-नालों में उफान आ गया है। पानी का बहाव तेज होने से कई जगहों पर नदी के पुल और पुलिया क्षतिग्रस्त होकर टूट गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हो गया है। वहीं, तेज बारिश के चलते कई कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचने की खबर सामने आ रही है। कुछ स्थानों पर मकानों के गिरने से लोगों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है। कई रास्तों पर पानी भर जाने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि तेज बारिश और उफनते नदी-नालों के बीच जोखिम लेकर आवागमन न करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।1