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पीलीभीत हजारा के नेहरू नगर में सड़क दुर्घटना में तेंदुए की दर्दनाक मौत वन विभाग मौके पर पहुंचकर जांच में जुटा, लेकिन लगातार हो रहे ऐसे हादसे चिंता का विषय हैं कृपया इस मामले की गंभीरता से जांच कर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
फास्ट न्यूज इंडिया पीलीभीत
पीलीभीत हजारा के नेहरू नगर में सड़क दुर्घटना में तेंदुए की दर्दनाक मौत वन विभाग मौके पर पहुंचकर जांच में जुटा, लेकिन लगातार हो रहे ऐसे हादसे चिंता का विषय हैं कृपया इस मामले की गंभीरता से जांच कर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
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- Post by समाचार Crime News1
- Post by Pankaj gupta1
- शाहजहांपुर जिले से आस्था और हृदय परिवर्तन की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ तिलहर क्षेत्र के निवासी फैज ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपना लिया है। शुद्धिकरण संस्कार के पश्चात अब उन्हें सोनू चौहान के नाम से जाना जाएगा। कालीबाड़ी मंदिर में हुआ 'घर वापसी' कार्यक्रम शहर के प्रसिद्ध कालीबाड़ी मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ सोनू चौहान (पूर्व नाम फैज) का 'घर वापसी' कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान: पंडितों द्वारा विशेष हवन-पूजन कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल पिलाकर उनका शुद्धिकरण किया गया। भगवा वस्त्र और तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया। अयोध्या यात्रा और महादेव की भक्ति ने बदला जीवन सोनू चौहान ने बताया कि सनातन धर्म के प्रति उनका लगाव नया नहीं है, बल्कि वह वर्ष 2000 से ही इसकी ओर आकर्षित थे। उनके इस परिवर्तन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित रहे: "मुझे शुरू से ही सनातन धर्म में अटूट आस्था थी। मैं अक्सर अयोध्या, हरिद्वार और वाराणसी जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा करता था। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर मिले धार्मिक प्रमाणों ने मेरे विश्वास को और पुख्ता कर दिया। मुझ पर किसी का दबाव नहीं है, यह मेरी अंतरात्मा का निर्णय है।" — सोनू चौहान उन्होंने विशेष रूप से भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और कहा कि वह काफी समय से इस निर्णय पर विचार कर रहे थे। आयोजकों का पक्ष: 'यह धर्म परिवर्तन नहीं, घर वापसी है' इस कार्यक्रम को संपन्न कराने में मुख्य भूमिका निभाने वाले राजेश अवस्थी ने इसे धर्म परिवर्तन मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा: यह पूरी तरह से एक 'घर वापसी' है। सोनू चौहान काफी समय से इसके लिए प्रयासरत थे, लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हुई। दावा किया जा रहा है कि भविष्य में सोनू का परिवार भी इसी मार्ग पर चलेगा।1
- Post by FH.NEWS1
- पलिया कलां खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए गेंडा परिवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । जिनकी वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इसी वजह से पर्यटक बंगाल टाइगर के साथ-साथ खुले में विचरण करते एक सींग वाले गैंडे के दीदार भी कर रहे हैं । बताया जा रहा है बीते 15 अप्रैल को मुंबई से सफारी के लिए आए फोटोग्राफरों के एक दल के सामने उस वक्त रोमांचक पल आया,जब मादा गेंडा 'विजय श्री' अपने शावक के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी। इस दौरान दल के साथ मौजूद गाइड राजू और पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है मादा गेंडा और उसका बच्चा बेहद शांत भाव से जंगल की सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। बता दें दुधवा के जंगलों में गेंडा संरक्षण क्षेत्र में गेंडों की साइटिंग काफी बढ़ गई है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक उत्साहित हैं। पार्क प्रशासन का कहना है कि दुधवा में गेंडा पुनर्वास परियोजना के सफल होने से अब इनके कुनबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुकूल वातावरण और सुरक्षा के चलते गेंडा परिवार अक्सर खुले मैदानों और रास्तों के करीब देखे जा रहे हैं, जो पर्यटन के लिहाज से बेहद सुखद संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गेंडा और शावक की इस तरह की बेखौफ आवाजाही जंगल के बेहतर स्वास्थ्य और वन्यजीवों की सुरक्षा को दर्शाती है। मुंबई से आए फोटोग्राफरों ने इस अनुभव को यादगार बताते हुए कहा कि दुधवा जैसा प्राकृतिक परिवेश गेंडों के लिए स्वर्ग जैसा है।1
- पलिया कलां खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए गेंडा परिवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । जिनकी वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इसी वजह से पर्यटक बंगाल टाइगर के साथ-साथ खुले में विचरण करते एक सींग वाले गैंडे के दीदार भी कर रहे हैं । बताया जा रहा है बीते 15 अप्रैल को मुंबई से सफारी के लिए आए फोटोग्राफरों के एक दल के सामने उस वक्त रोमांचक पल आया,जब मादा गेंडा 'विजय श्री' अपने शावक के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी। इस दौरान दल के साथ मौजूद गाइड राजू और पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है मादा गेंडा और उसका बच्चा बेहद शांत भाव से जंगल की सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। बता दें दुधवा के जंगलों में गेंडा संरक्षण क्षेत्र में गेंडों की साइटिंग काफी बढ़ गई है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक उत्साहित हैं। पार्क प्रशासन का कहना है कि दुधवा में गेंडा पुनर्वास परियोजना के सफल होने से अब इनके कुनबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुकूल वातावरण और सुरक्षा के चलते गेंडा परिवार अक्सर खुले मैदानों और रास्तों के करीब देखे जा रहे हैं, जो पर्यटन के लिहाज से बेहद सुखद संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गेंडा और शावक की इस तरह की बेखौफ आवाजाही जंगल के बेहतर स्वास्थ्य और वन्यजीवों की सुरक्षा को दर्शाती है। मुंबई से आए फोटोग्राफरों ने इस अनुभव को यादगार बताते हुए कहा कि दुधवा जैसा प्राकृतिक परिवेश गेंडों के लिए स्वर्ग जैसा है।1
- Post by समाचार Crime News1
- Post by Firdosh journalist1
- पलिया कलां खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए गेंडा परिवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । जिनकी वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इसी वजह से पर्यटक बंगाल टाइगर के साथ-साथ खुले में विचरण करते एक सींग वाले गैंडे के दीदार भी कर रहे हैं । बताया जा रहा है बीते 15 अप्रैल को मुंबई से सफारी के लिए आए फोटोग्राफरों के एक दल के सामने उस वक्त रोमांचक पल आया,जब मादा गेंडा 'विजय श्री' अपने शावक के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी। इस दौरान दल के साथ मौजूद गाइड राजू और पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है मादा गेंडा और उसका बच्चा बेहद शांत भाव से जंगल की सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। बता दें दुधवा के जंगलों में गेंडा संरक्षण क्षेत्र में गेंडों की साइटिंग काफी बढ़ गई है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक उत्साहित हैं। पार्क प्रशासन का कहना है कि दुधवा में गेंडा पुनर्वास परियोजना के सफल होने से अब इनके कुनबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुकूल वातावरण और सुरक्षा के चलते गेंडा परिवार अक्सर खुले मैदानों और रास्तों के करीब देखे जा रहे हैं, जो पर्यटन के लिहाज से बेहद सुखद संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गेंडा और शावक की इस तरह की बेखौफ आवाजाही जंगल के बेहतर स्वास्थ्य और वन्यजीवों की सुरक्षा को दर्शाती है। मुंबई से आए फोटोग्राफरों ने इस अनुभव को यादगार बताते हुए कहा कि दुधवा जैसा प्राकृतिक परिवेश गेंडों के लिए स्वर्ग जैसा है।1