जनपद पीलीभीत के बिलसंडा ब्लॉक क्षेत्र के गांव लिलहर में प्राचीन काल से लगने वाले अमावस्या मेला की कुछ दुर्लभ तस्वीर हम आपको दिखाते हैं बता दे लिलहर गांव में प्राचीन काल से अमावस्या के दिन एक मेला लगता है जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं मान्यता है कि वहां सरोवर में स्नान करने से चर्म रोग शरीर में किसी भी तरह की फोड़ा फुंसी जैसी बीमारियां तक ठीक हो जाती है बताया जाता है सर्वप्रथम राजा मोरध्वज के भाई नील ध्वज ने इस सरोवर में स्नान किया था जिससे उनका चर्म रोग पूरी तरह से ठीक हो गया था उसके बाद से लोगों की यहां पर आस्था जुड़ गई और सरोवर में स्नान करने के बाद शिव जी के मंदिर में प्रसाद चढ़कर मन्नत मांगते हैं वही जब कशिश न्यूज़ की टीम ने वहां पहुंचकर आए श्रद्धालुओं से बात की तो उन्होंने बताया इतने पवित्र स्थान पर भी प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है तालाब के किनारे भारी गंदगी देखने को मिली तो वहीं महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम की भी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है वहीं कई ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर भी आरोप लगाए हैं सुनिए क्या कहना है श्रद्धालुओं का
जनपद पीलीभीत के बिलसंडा ब्लॉक क्षेत्र के गांव लिलहर में प्राचीन काल से लगने वाले अमावस्या मेला की कुछ दुर्लभ तस्वीर हम आपको दिखाते हैं बता दे लिलहर गांव में प्राचीन काल से अमावस्या के दिन एक मेला लगता है जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं मान्यता है कि वहां सरोवर में स्नान करने से चर्म रोग शरीर में किसी भी तरह की फोड़ा फुंसी जैसी बीमारियां तक ठीक हो जाती है बताया जाता है सर्वप्रथम राजा मोरध्वज के भाई नील ध्वज ने इस सरोवर में स्नान किया था जिससे उनका चर्म रोग पूरी तरह से ठीक हो गया था उसके बाद से लोगों की यहां पर आस्था जुड़ गई और सरोवर में स्नान करने के बाद शिव जी के मंदिर में प्रसाद चढ़कर मन्नत मांगते हैं वही जब कशिश न्यूज़ की टीम ने वहां पहुंचकर आए श्रद्धालुओं से बात की तो उन्होंने बताया इतने पवित्र स्थान पर भी प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है तालाब के किनारे भारी गंदगी देखने को मिली तो वहीं महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम की भी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है वहीं कई ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर भी आरोप लगाए हैं सुनिए क्या कहना है श्रद्धालुओं का
- खेत की नराई में आग लगाने का विरोध करने पर किशान को जान से मारने की धमकी मामला पीलीभीत के पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र का #पीलीभीत #पूरनपुर #brekingnews #LatestNews #UttarPradesh #uppolice #Dmpilibhit1
- Post by Pankaj gupta1
- Post by समाचार Crime News1
- पीलीभीत। जनपद में गेहूं खरीद को लेकर डीएम अलर्ट।बड़े किसानों और छोटे किसानों के वीच सिस्टम वनाकर कराई जा रही गेहूं खरीद। अनियमितताओं पर कार्रवाई करने का दिया आश्वासन।1
- शाहजहांपुर जिले से आस्था और हृदय परिवर्तन की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ तिलहर क्षेत्र के निवासी फैज ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपना लिया है। शुद्धिकरण संस्कार के पश्चात अब उन्हें सोनू चौहान के नाम से जाना जाएगा। कालीबाड़ी मंदिर में हुआ 'घर वापसी' कार्यक्रम शहर के प्रसिद्ध कालीबाड़ी मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ सोनू चौहान (पूर्व नाम फैज) का 'घर वापसी' कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान: पंडितों द्वारा विशेष हवन-पूजन कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल पिलाकर उनका शुद्धिकरण किया गया। भगवा वस्त्र और तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया। अयोध्या यात्रा और महादेव की भक्ति ने बदला जीवन सोनू चौहान ने बताया कि सनातन धर्म के प्रति उनका लगाव नया नहीं है, बल्कि वह वर्ष 2000 से ही इसकी ओर आकर्षित थे। उनके इस परिवर्तन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित रहे: "मुझे शुरू से ही सनातन धर्म में अटूट आस्था थी। मैं अक्सर अयोध्या, हरिद्वार और वाराणसी जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा करता था। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर मिले धार्मिक प्रमाणों ने मेरे विश्वास को और पुख्ता कर दिया। मुझ पर किसी का दबाव नहीं है, यह मेरी अंतरात्मा का निर्णय है।" — सोनू चौहान उन्होंने विशेष रूप से भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और कहा कि वह काफी समय से इस निर्णय पर विचार कर रहे थे। आयोजकों का पक्ष: 'यह धर्म परिवर्तन नहीं, घर वापसी है' इस कार्यक्रम को संपन्न कराने में मुख्य भूमिका निभाने वाले राजेश अवस्थी ने इसे धर्म परिवर्तन मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा: यह पूरी तरह से एक 'घर वापसी' है। सोनू चौहान काफी समय से इसके लिए प्रयासरत थे, लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हुई। दावा किया जा रहा है कि भविष्य में सोनू का परिवार भी इसी मार्ग पर चलेगा।1
- पूरनपुर-माधोटांडा रेलवे फाटक तकनीकी खराबी के चलते घंटों बंद, लगा भीषण जाम; जोखिम में जान2
- Post by Raunak Ali Ansari1
- पीलीभीत जिले में बिजली निगम के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। आए दिन आ रही तकनीकी खामियों और मनमाने बिलिंग से परेशान होकर अब लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। ताजा मामला शहर की राजीव कॉलोनी का है, जहाँ एक युवक ने स्मार्ट मीटर के बढ़े हुए बिल और बिना सूचना बिजली काटे जाने से नाराज होकर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। क्या है पूरा मामला? राजीव कॉलोनी निवासी सर्वेश कुमार श्रीवास्तव ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सर्वेश के अनुसार: बिना जानकारी मीटर बदलाव: लगभग तीन महीने पहले उनकी अनुपस्थिति में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उनके घर का पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगा दिया था। बिलिंग में विसंगति: स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ही बिल अप्रत्याशित रूप से बढ़कर आने लगा। भुगतान के बाद भी अंधेरा: सर्वेश ने बताया कि 7,000 रुपये का बकाया होने पर उन्होंने 1 अप्रैल को 7,500 रुपये जमा किए थे। इसके बावजूद आंबेडकर जयंती के दिन उन्हें फिर से बकाया बिल का अलर्ट मिला और बुधवार को उनकी बिजली काट दी गई। अफसरों की कार्यशैली पर उठाए सवाल पीड़ित युवक का कहना है कि जब वह समस्या के समाधान के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों के पास पहुँचा, तो उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हार मानकर उसे डीएम कार्यालय की शरण लेनी पड़ी। सर्वेश ने कहा: "मैं एक प्राइवेट नौकरी करने वाला व्यक्ति हूँ। इतना भारी-भरकम बिल भरना मेरे बस के बाहर है। ऊपर से बिल ठीक करवाने के लिए मुझे अपनी नौकरी से छुट्टी लेनी पड़ रही है। विभाग की लापरवाही ने मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर दिया है।" सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हंगामे के दौरान सर्वेश कुमार का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाते और अपनी पीड़ा व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। काफी देर तक कार्यालय परिसर के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। अंततः युवक ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर बिल संशोधन कराने और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गुहार लगाई है। स्मार्ट मीटर पर बढ़ता जनाक्रोश पीलीभीत में यह कोई पहला मामला नहीं है। स्मार्ट मीटर की तेज रफ्तार और सर्वर की समस्याओं को लेकर जिले के कई इलाकों से लगातार शिकायतें आ रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग राजस्व वसूली के नाम पर आम जनता का उत्पीड़न कर रहा है, जबकि तकनीकी खामियों को दूर करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।1