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रंका चुतरू पंचायत के बीडीसी आसीफ आलम गरीब बेटीयों के शादी में बन रहे है रहनुमा

3 hrs ago
user_Sunil singh
Sunil singh
Ranka, Garhwa•
3 hrs ago

रंका चुतरू पंचायत के बीडीसी आसीफ आलम गरीब बेटीयों के शादी में बन रहे है रहनुमा

More news from झारखंड and nearby areas
  • सोसल मीडिया पर बदाती क्रेज से यूवा उत्साहित है l कुछ कर दिखाने की जुनून लेकर l सरकार से नहीं मिल रहा है सपोर्ट l
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    सोसल मीडिया पर बदाती क्रेज से यूवा उत्साहित है l कुछ कर दिखाने की जुनून लेकर l सरकार से नहीं मिल रहा है सपोर्ट l
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    15 hrs ago
  • गढ़वा में सिलेंडर का हाहाकार मचा हुआ है एंजेसीयों में सिलेंडर मिल नहीं रहा है लेकिन निजी दुकानों में कालाबाजारी के लिए प्रयाप्त मात्रा में मिल जाएगा ऐसे एजेंसियों पर प्रशासन करे कारवाही
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    गढ़वा में सिलेंडर का हाहाकार मचा हुआ है एंजेसीयों में सिलेंडर मिल नहीं रहा है लेकिन निजी दुकानों में कालाबाजारी के लिए प्रयाप्त मात्रा में मिल जाएगा ऐसे एजेंसियों पर प्रशासन करे कारवाही
    user_Green Line News, Md Mostaque
    Green Line News, Md Mostaque
    पत्रकार गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    15 hrs ago
  • मिरचैया यज्ञ ऐसा परिक्रमा लोगों ने किए कि चर्चा के #menofjharkhand #यज्ञ #9_दिवसीय_शतचंडी_महायज्ञ_मिरचैया #श्री_शतचंडी_महायज्ञ_मिरचैया
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    मिरचैया यज्ञ ऐसा परिक्रमा लोगों ने किए कि चर्चा के #menofjharkhand #यज्ञ 
#9_दिवसीय_शतचंडी_महायज्ञ_मिरचैया #श्री_शतचंडी_महायज्ञ_मिरचैया
    user_Men of jharkhand
    Men of jharkhand
    Court reporter धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    10 hrs ago
  • विधायक आलोक चौरसिया ने विधानसभा में उठाए सवाल, पलामू के 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की सेवा बहाली का मुद्दा विधयाक आलोक ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इन सभी 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को मानवीय आधार पर न्याय देते हुए पुनः उनकी सेवाओं में बहाल की जाए
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    विधायक आलोक चौरसिया ने विधानसभा में उठाए सवाल, पलामू के 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की सेवा बहाली का मुद्दा
विधयाक आलोक ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इन सभी 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को मानवीय आधार पर न्याय देते हुए पुनः उनकी सेवाओं में बहाल की जाए
    user_Shuru app reporter
    Shuru app reporter
    Press reporter उनतरी रोड, पलामू, झारखंड•
    11 hrs ago
  • रेहला थाना क्षेत्र के उरसुला गांव में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान स्व• ब्रह्मदेव राम का 21 वर्षीय पुत्र प्रत्यूष कोमल कुमार उर्फ नन्हकू के रूप में हुयी है। घटना गुरुवार सुबह की बतायी जा रही है। पुलिस मृतक के घर पहुंच कर जांच पड़ताल कर रही है। वही शव को कब्जे में कर पोस्मार्टम हेतु मेदिनीनगर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इधर क्षत्रपति फाउंडेशन के सचिव गोपाल राम मृतक के परिजनों को हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया।
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    रेहला थाना क्षेत्र के उरसुला गांव में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान स्व• ब्रह्मदेव राम का 21 वर्षीय पुत्र प्रत्यूष कोमल कुमार उर्फ नन्हकू के रूप में हुयी है। घटना गुरुवार सुबह की बतायी जा रही है। पुलिस मृतक के घर पहुंच कर जांच पड़ताल कर रही है। वही शव को कब्जे में कर पोस्मार्टम हेतु मेदिनीनगर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इधर क्षत्रपति फाउंडेशन के सचिव गोपाल राम मृतक के परिजनों को हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया।
    user_पब्लिक न्यूज
    पब्लिक न्यूज
    विश्रामपुर, पलामू, झारखंड•
    15 hrs ago
  • बलरामपुर में फिर उजागर हुई अफीम की खेती: दूरस्थ पंचायतों में बाहरी लोगों का नेटवर्क, जांच की मांग तेज बलरामपुर। जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला एक बार फिर सामने आया है। इस बार मामला करौंदा थाना क्षेत्र के तुरा पानी पंचायत का है, जहां पहाड़ियों की तराई में बसे एक सुदूर गांव में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती किए जाने की जानकारी मिली है। यह गांव झारखंड सीमा से महज करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है और यहां तक पहुंचना भी काफी मुश्किल माना जाता है। बताया जा रहा है कि यह गांव पूरी तरह ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में आता है, जहां आज तक विकास की खास पहुंच नहीं है। यहां के लोगों को आज भी सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। इसी दूरस्थता और प्रशासनिक पहुंच की कमी का फायदा उठाकर बाहरी क्षेत्र से आए कुछ लोगों ने ग्रामीणों को झांसे में लेकर जमीन लीज पर ली और वहां अफीम की खेती शुरू कर दी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि उनके इलाके में अफीम की खेती की जा रही है। आसपास के खेतों में काम करने वाले किसानों ने बताया कि जिन लोगों ने खेती की थी, उन्होंने इसे मसाले की फसल बताकर लगाया था। खेत के बगल में गेहूं की खेती करने वाले एक किसान ने बताया कि “हमें तो आज तक पता ही नहीं था कि यह अफीम है। उसने हमें बताया था कि यह कोई मसाले की खेती है।” ग्रामीणों का आरोप है कि भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीन लीज पर ली गई और उसके बाद बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की गई। यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे मामले में बाहरी लोगों का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जो दूर-दराज के इलाकों को निशाना बनाकर अवैध खेती करा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में बलरामपुर जिले के समरी थाना क्षेत्र में भी अवैध अफीम की खेती को लेकर कार्रवाई की गई थी। उस कार्रवाई में भी बड़ी मात्रा में अफीम के पौधे नष्ट किए गए थे। अब करौंदा थाना क्षेत्र के तुरा पानी पंचायत में इसी तरह का मामला सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यदि इन मामलों की बारीकी से जांच की जाए तो संभव है कि अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आए इन मामलों के पीछे एक ही गिरोह या नेटवर्क का हाथ हो। सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर ऐसे लोग लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हों, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इन सभी मामलों को जोड़कर व्यापक स्तर पर जांच करे, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर अवैध अफीम की खेती का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में लगातार निगरानी बढ़ाई जाए और ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में भोले-भाले ग्रामीणों को इस तरह के अवैध कामों में इस्तेमाल न किया जा सके।
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    बलरामपुर में फिर उजागर हुई अफीम की खेती: दूरस्थ पंचायतों में बाहरी लोगों का नेटवर्क, जांच की मांग तेज
बलरामपुर। जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला एक बार फिर सामने आया है। इस बार मामला करौंदा थाना क्षेत्र के तुरा पानी पंचायत का है, जहां पहाड़ियों की तराई में बसे एक सुदूर गांव में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती किए जाने की जानकारी मिली है। यह गांव झारखंड सीमा से महज करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है और यहां तक पहुंचना भी काफी मुश्किल माना जाता है।
बताया जा रहा है कि यह गांव पूरी तरह ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में आता है, जहां आज तक विकास की खास पहुंच नहीं है। यहां के लोगों को आज भी सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। इसी दूरस्थता और प्रशासनिक पहुंच की कमी का फायदा उठाकर बाहरी क्षेत्र से आए कुछ लोगों ने ग्रामीणों को झांसे में लेकर जमीन लीज पर ली और वहां अफीम की खेती शुरू कर दी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि उनके इलाके में अफीम की खेती की जा रही है। आसपास के खेतों में काम करने वाले किसानों ने बताया कि जिन लोगों ने खेती की थी, उन्होंने इसे मसाले की फसल बताकर लगाया था। खेत के बगल में गेहूं की खेती करने वाले एक किसान ने बताया कि “हमें तो आज तक पता ही नहीं था कि यह अफीम है। उसने हमें बताया था कि यह कोई मसाले की खेती है।”
ग्रामीणों का आरोप है कि भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीन लीज पर ली गई और उसके बाद बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की गई। यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे मामले में बाहरी लोगों का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जो दूर-दराज के इलाकों को निशाना बनाकर अवैध खेती करा रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में बलरामपुर जिले के समरी थाना क्षेत्र में भी अवैध अफीम की खेती को लेकर कार्रवाई की गई थी। उस कार्रवाई में भी बड़ी मात्रा में अफीम के पौधे नष्ट किए गए थे। अब करौंदा थाना क्षेत्र के तुरा पानी पंचायत में इसी तरह का मामला सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यदि इन मामलों की बारीकी से जांच की जाए तो संभव है कि अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आए इन मामलों के पीछे एक ही गिरोह या नेटवर्क का हाथ हो। सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर ऐसे लोग लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हों, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इन सभी मामलों को जोड़कर व्यापक स्तर पर जांच करे, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर अवैध अफीम की खेती का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में लगातार निगरानी बढ़ाई जाए और ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में भोले-भाले ग्रामीणों को इस तरह के अवैध कामों में इस्तेमाल न किया जा सके।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • गढ़वा DC ने करप्शन के खिलाफ करवाई करते हुए चीनिया प्रखंड के मुखिया गोपाल यादव को सस्पेंड कर दिया है। इसके बाद उप मुखिया रानी कुमारी को मुखिया का प्रभार दिया गया?
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    गढ़वा DC ने करप्शन के खिलाफ करवाई करते हुए चीनिया प्रखंड के मुखिया गोपाल यादव को सस्पेंड कर दिया है। इसके बाद उप मुखिया रानी कुमारी को मुखिया का प्रभार दिया गया?
    user_Green Line News, Md Mostaque
    Green Line News, Md Mostaque
    पत्रकार गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    17 hrs ago
  • ऐसा क्या पत्रकार पूछे मंत्री इरफ़ान अंसारी पत्रकारों के सवाल सुनते ही आग बबूला हो गए
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    ऐसा क्या पत्रकार पूछे मंत्री इरफ़ान अंसारी  पत्रकारों के सवाल सुनते ही आग बबूला हो गए
    user_Men of jharkhand
    Men of jharkhand
    Court reporter धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    19 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने बुधवार देर रात में प्रदेश में अफीम की खेती होने का खुलासा किया है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कल देर रात ये जानकारी देते हुए लिखा कि बलरामपुर जिले में एक और खेत में अफीम मिली है। उन्होंने बताया कि करौंधा के पास खजुरी पंचायत में डेढ़ एकड़ भूमि पर अफीम की खेती की गई है। टी.एस. सिंहदेव ने अधिक विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि खजुरी के तुर्रीपनी में लगभग दो एकड़ जमीन पर अफीम के पौधे लहलहा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे संबंधित तस्वीर बुधवार शाम चार बजे की है, जिसमें अफीम के पौधे स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आना बेहद चिंताजनक है।
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    छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने बुधवार देर रात में प्रदेश में अफीम की खेती होने का खुलासा किया है।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कल देर रात ये जानकारी देते हुए लिखा कि बलरामपुर जिले में एक और खेत में अफीम मिली है। उन्होंने बताया कि करौंधा के पास खजुरी पंचायत में डेढ़ एकड़ भूमि पर अफीम की खेती की गई है।
टी.एस. सिंहदेव ने अधिक विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि खजुरी के तुर्रीपनी में लगभग दो एकड़ जमीन पर अफीम के पौधे लहलहा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे संबंधित तस्वीर बुधवार शाम चार बजे की है, जिसमें अफीम के पौधे स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
कांग्रेस नेताओं ने  कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आना बेहद चिंताजनक है।
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
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