सबौर प्रखंड में प्रधानमंत्री राजपुर–मुरहन सड़क की हालत बद से बदतर, ग्रामीणों में आक्रोश राजपुर–मुरहन सड़क की स्थिति इन दिनों अत्यंत दयनीय हो चुकी है। यह सड़क, जो कभी क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हुआ करती थी, आज गड्ढों और जलजमाव के कारण बदहाल हो गई है। सड़क की खराब हालत ने न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई स्थानों पर तो यह पहचानना भी मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रात के समय यह सड़क और भी खतरनाक बन जाती है, जब गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण और मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद इस महत्वपूर्ण सड़क की अनदेखी चिंता का विषय बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय वादे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही समस्याएं भुला दी जाती हैं। इस सड़क से राजपुर, मुरहन और आसपास के कई गांव जुड़े हुए हैं, जहां हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। किसान अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी देरी हो रही है। कई बार एंबुलेंस भी इस खराब सड़क के कारण समय पर नहीं पहुंच पाती, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए और इसे मजबूत एवं टिकाऊ बनाया जाए, ताकि आने वाले समय में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारोंमंलोगों की जीवनरेखा है। ऐसे में इसकी उपेक्षा न केवल विकास में बाधा उत्पन्न करती है, बल्कि आम जनजीवन को भी संकट में डालती है। प्रशासन को चाहिए कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देते हुए आवश्यक कदम उठाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
सबौर प्रखंड में प्रधानमंत्री राजपुर–मुरहन सड़क की हालत बद से बदतर, ग्रामीणों में आक्रोश राजपुर–मुरहन सड़क की स्थिति इन दिनों अत्यंत दयनीय हो चुकी है। यह सड़क, जो कभी क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हुआ करती थी, आज गड्ढों और जलजमाव के कारण बदहाल हो गई है। सड़क की खराब हालत ने न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई स्थानों पर तो यह पहचानना भी मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रात के समय यह सड़क और भी खतरनाक बन जाती है, जब गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण और मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद इस महत्वपूर्ण सड़क की अनदेखी चिंता का विषय बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय वादे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही समस्याएं भुला दी जाती हैं। इस सड़क से राजपुर, मुरहन और आसपास के कई गांव जुड़े हुए हैं, जहां हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। किसान अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी देरी हो रही है। कई बार एंबुलेंस भी इस खराब सड़क के कारण समय पर नहीं पहुंच पाती, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए और इसे मजबूत एवं टिकाऊ बनाया जाए, ताकि आने वाले समय में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारोंमंलोगों की जीवनरेखा है। ऐसे में इसकी उपेक्षा न केवल विकास में बाधा उत्पन्न करती है, बल्कि आम जनजीवन को भी संकट में डालती है। प्रशासन को चाहिए कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देते हुए आवश्यक कदम उठाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
- राजपुर–मुरहन सड़क की स्थिति इन दिनों अत्यंत दयनीय हो चुकी है। यह सड़क, जो कभी क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हुआ करती थी, आज गड्ढों और जलजमाव के कारण बदहाल हो गई है। सड़क की खराब हालत ने न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई स्थानों पर तो यह पहचानना भी मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रात के समय यह सड़क और भी खतरनाक बन जाती है, जब गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण और मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद इस महत्वपूर्ण सड़क की अनदेखी चिंता का विषय बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय वादे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही समस्याएं भुला दी जाती हैं। इस सड़क से राजपुर, मुरहन और आसपास के कई गांव जुड़े हुए हैं, जहां हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। किसान अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी देरी हो रही है। कई बार एंबुलेंस भी इस खराब सड़क के कारण समय पर नहीं पहुंच पाती, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए और इसे मजबूत एवं टिकाऊ बनाया जाए, ताकि आने वाले समय में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारोंमंलोगों की जीवनरेखा है। ऐसे में इसकी उपेक्षा न केवल विकास में बाधा उत्पन्न करती है, बल्कि आम जनजीवन को भी संकट में डालती है। प्रशासन को चाहिए कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देते हुए आवश्यक कदम उठाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।1
- मैट्रिक में गोड्डा जिला के सायमन आज ने जिला में टॉप किया है वही भागलपुर जिला के सनोखर थाना क्षेत्र के बड़ीनाकी पंचायत के बड़ीनाकी स्कूल से मैट्रिक में पंचायत टॉप किया है स्कूल टॉप किया है।1
- Post by Abhishek ranjan C E O1
- जानकारी के अनुसार अजीत कुमार (कुर्सेला) और नीतू कुमारी (बरियारपुर, मुंगेर) की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी। बातचीत का सिलसिला बढ़ा और दोनों के बीच प्यार हो गया। परिवार की मर्जी के बिना 29 अप्रैल को दोनों घर से फरार हो गए। रात कुर्सेला में एक दोस्त के यहां बिताई और अगले दिन शादी करने नवगछिया पहुंचे।1
- भागलपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां चर्चित प्रमिला देवी हत्याकांड में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि प्रमिला देवी, जो कि चिंतामन साह की पत्नी थीं, की कुछ दिन पहले निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस मामले में नामजद आरोपी रंजन साह, पिता प्रेमानंद साह, घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। लगातार कई महीनों तक फरार रहने के बाद अब भागलपुर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। सनोखर थाना क्षेत्र के नाकी गांव स्थित आरोपी के घर पर कोर्ट के आदेश के अनुसार कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की गई। सनोखर थाना अध्यक्ष पंकज किशोर ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था, जिसके चलते न्यायालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और लोगों में न्याय की उम्मीद जगी है।1
- छगराहा में 23 वर्षीय महिला का फांसी के फंदे से लटकता हुआ मिला शव बलबड्डा थाना क्षेत्र के छगराहा में सोमवार को 23 वर्षीय महिला का फांसी के फंदे से लटकता हुआ शव मिला। वहीं इस घटना की सूचना मिलने पर मेहरमा थाना प्रभारी सौरभ कुमार ठाकुर व बलबड्डा थाना के पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंचे एवं परिजनों तथा मृतिका के मायके पक्ष से घटना की जानकारी ली।वहीं मायके पक्ष में मृतिका की मां मृतिका की मां यशोदा देवी ने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है।मृतिका की मां ने कहा कि तीन लाख रुपए दिया गया था।जहां मृतिका के पति रंजीत दास के द्वारा पचास हजार रुपए और गहने भी मांगा गया था।पचास हजार रुपए तथा गहने जेवर नहीं देने के कारण मेरी बेटी गुड़िया कुमारी का ससुराल पक्ष के द्वारा हया कर दिया गया तथा ससुराल पक्ष के द्वारा हमेशा मेरी बेटी को घरों के विवाद में प्रताड़ित किया जाता था।वहीं मृतिका के पति रंजीत दास ने कहा कि सुबह पत्नी गुड़िया कुमारी के साथ मामूली विवाद हुआ था और हम काम करने के लिए बलबड्डा गए थे,वहां से वापस आने पर पत्नी का शव फांसी के फंदे से लटकता हुआ पाया।पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गोड्डा भेज दिया।हालांकि इस घटना की जांच में स्थानीय पुलिस जुट गई है।इधर मायके पक्ष का रो-रोकर बुरा हाल है।मृतिका का नाम गुड़िया कुमारी,उम्र 23 वर्ष,पति-रंजीत दास,ग्राम-छगराहा,थाना -बलबड्डा,जिला-गोड्डा है।1
- Post by Atish Deepankar1
- सबौर प्रखंड के बैजलपुर पंचायत के वार्ड संख्या 3 में जलजमाव की समस्या अब गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है। यहां एक बड़े गड्ढे में लंबे समय से पानी जमा है, जिसकी निकासी नहीं होने के कारण आसपास के लोगों को कई तरह की बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह गड्ढा पिछले कई महीनों से गंदे पानी से भरा हुआ है और धीरे-धीरे यह क्षेत्र मच्छरों व विषैले कीटों का अड्डा बनता जा रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि इस स्थायी जलजमाव के कारण मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बनी हुई है। इसके अलावा, दूषित पानी और उससे उठने वाली दुर्गंध के कारण श्वसन संबंधी समस्याएं और त्वचा रोग भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने तो यहां तक आशंका जताई है कि लंबे समय तक ऐसे प्रदूषित वातावरण में रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। वार्ड संख्या 3 के निवासी बताते हैं कि उन्होंने कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को आवेदन देकर इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आता। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलजमाव वाले स्थानों में गंदा पानी लंबे समय तक जमा रहने से बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं। यही कारण है कि ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस गड्ढे के पानी की निकासी की व्यवस्था करे और वहां की सफाई सुनिश्चित करे। साथ ही, स्थायी समाधान के तहत नाली निर्माण या गड्ढे को भरने की दिशा में भी काम किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि पूरे गांव के जीवन स्तर के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और शीघ्र कार्रवाई कर ग्रामीणों को इस संकट से राहत दिलाएं।1