बार एसोसिएशन वल्लभनगर के तत्वावधान में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना, वल्लभनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे) और एनआई एक्ट न्यायालय की स्थापना की मांग को लेकर किया गया। बार अध्यक्ष बाबूलाल डांगी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए न्यायपालिका और राज्य सरकार से इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। बार एसोसिएशन अध्यक्ष बाबूलाल डांगी, दुर्गेश मेनारिया और अजीत प्रसाद नीमडिया ने बताया कि वल्लभनगर में एडीजे न्यायालय एवं एनआई एक्ट के अंतर्गत मामलों की सुनवाई के लिए एक पृथक न्यायालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन न्यायालयों के अभाव में क्षेत्र के पक्षकारों को न्याय प्राप्त करने के लिए दूरस्थ न्यायालयों में जाना पड़ता है, जिससे उनका समय, धन एवं श्रम अनावश्यक रूप से बर्बाद होता है। इसी समस्या के निवारण हेतु अधिवक्ताओं ने यह न्यायिक बहिष्कार किया है।
बार एसोसिएशन वल्लभनगर के तत्वावधान में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना, वल्लभनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे) और एनआई एक्ट न्यायालय की स्थापना की मांग को लेकर किया गया। बार अध्यक्ष बाबूलाल डांगी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए न्यायपालिका और राज्य सरकार से इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। बार एसोसिएशन अध्यक्ष बाबूलाल डांगी, दुर्गेश मेनारिया और अजीत प्रसाद नीमडिया ने बताया कि वल्लभनगर में एडीजे न्यायालय एवं एनआई एक्ट के अंतर्गत मामलों की सुनवाई के लिए एक पृथक न्यायालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन न्यायालयों के अभाव में क्षेत्र के पक्षकारों को न्याय प्राप्त करने के लिए दूरस्थ न्यायालयों में जाना पड़ता है, जिससे उनका समय, धन एवं श्रम अनावश्यक रूप से बर्बाद होता है। इसी समस्या के निवारण हेतु अधिवक्ताओं ने यह न्यायिक बहिष्कार किया है।
- जयपुर में अजमेर रोड पर कल सुबह हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में राजसमंद के एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। पीओपी से भरा एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बस का इंतजार कर रहे परिवार पर चढ़ गया था। इस भीषण दुर्घटना में चंद्रप्रकाश और उनके तीन बच्चों ने तुरंत दम तोड़ दिया, वहीं उनकी पत्नी कैलाशी देवी के दोनों पैर कुचल गए। गंभीर रूप से घायल कैलाशी देवी अपने पति और बच्चों को तड़पता देख मदद के लिए चीखती रहीं, लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश हो गईं। उनका उपचार अस्पताल में जारी है। आज जब चारों शव राजसमंद के जेतपुरा गांव पहुंचे, तो पूरे मोहल्ले में मातम पसर गया। गांव के सभी आयु वर्ग के लोगों की आंखें नम थीं। इस गरीब परिवार पर अचानक हुए इस वज्रपात के कारण अंतिम संस्कार होने तक गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदारों की मौजूदगी में चारों शवों की अंतिम यात्रा निकाली गई और उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी दुख व्यक्त किया है। वहीं, लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने मृतक परिवार के बुजुर्गों से फोन पर बात कर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं और सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद ग्रामीणों की संवेदनाएं और बढ़ गईं। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।4
- श्रीगंगानगर में हुए नाबालिग बालिका दुष्कर्म प्रकरण से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और बालिका की मृत्यु संबंधी खबरें पूरी तरह से भ्रामक, असत्य और अफवाह हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और उन्हें साझा न करें। पुलिस नियंत्रण कक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में पुलिस कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं।1
- यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर कितने पति अपनी पत्नियों द्वारा मारे जाएंगे। इसी संदर्भ में यह जानकारी भी सामने आई है कि हर साल 82000 हजार लोग आत्महत्या कर रहे हैं।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद, पुलिस विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय खामोश बैठा है। यह प्रकरण ग्राम बानसेन थाना भदेसर निवासी नारायण लाल लढ्ढा द्वारा राजसम्पर्क पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 072606727584938 से संबंधित है। परिवादी ने आरोप लगाया था कि 24 जनवरी 2025 को न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। दिनांक 4 जुलाई 2026 को सीएमओ राजस्थान ने इस परिवाद पर टिप्पणी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि परिवादी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट है, और पुलिस आरोपी को बचाने के चक्कर में इसे 132 का प्रकरण बता रही है, जबकि यह मामला 24 जनवरी 2025 का है और 132 का प्रकरण 6 सितंबर 2024 का है। इसके बाद, 6 जुलाई 2026 को चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक ने स्वयं प्रकरण दर्ज करने और अनुसंधान जारी रखने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस थाना भदेसर द्वारा आदेश के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर संख्या 112/2025 दर्ज नहीं की गई। राज.सम्पर्क 072606727487736 में डीवाईएसपी भदेसर ने भी 24.01.25 को माननीय न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्वीकार किया है। इस पर, परिवादी नारायण लाल ने 7 जुलाई 2026 को एसपी, आईजी उदयपुर, डीएम चित्तौड़गढ़ और सीजेएम चित्तौड़गढ़ को मेल भेजकर 2 घंटे में एफआईआर नंबर उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो वे उच्च न्यायालय जोधपुर में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में जब एसपी कार्यालय चित्तौड़गढ़ और थाना भदेसर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका और उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से संबंधित एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया गया है। इस अपडेट के अनुसार, मनरेगा के कार्य समय में बदलाव किया गया है। यह अपडेट 125 दिन के रोजगार, ₹300 की मजदूरी दर, योजना के नए नामों और रविवार के अवकाश से जुड़ी पूरी सच्चाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।1
- झूठे आरोप किसी भी निर्दोष व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी तबाह कर सकते हैं, और इस पीड़ा को वही समझ सकता है जिस पर यह बीती हो। ऐसे आरोपों के कारण व्यक्ति को वर्षों तक सामाजिक प्रताड़ना, अपमान और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह तो अच्छा हुआ कि किसी पुजारी के संदर्भ में भगवान की दया से सच सामने आ गया, वरना उन्हें भी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता। एक झूठा आरोप केवल व्यक्ति की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सम्मान और मानसिक शांति को भी गहरा आघात पहुँचा सकता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए यह मांग की गई है कि यदि जांच या न्यायालय में यह सिद्ध हो जाए कि किसी ने जानबूझकर झूठा आरोप लगाया था, तो ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। यह कदम निर्दोष लोगों की रक्षा करेगा, झूठे मामलों पर अंकुश लगाएगा और वास्तविक पीड़ितों को भी न्याय मिलने में सहायता करेगा। दरअसल, न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा, जब दोषी को दंड मिले और निर्दोष की गरिमा की भी समान रूप से रक्षा हो।1
- राजस्थान के राजसमंद जिले के नांदोली से न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर नंदलाल पुरबिया द्वारा चारभुजा नाथ के दर्शन जनहित में प्रसारित किए गए हैं।1