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प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुछ ही देर में धार पहुंचने वाले हैं, जिसके लिए जिले में तैयारियां जोरों पर हैं। उनके आगमन को लेकर मंडी प्रांगण में एक विशालकाय मंच तैयार किया गया है, जहां से मुख्यमंत्री धार की जनता को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री भोपाल से हवाई यात्रा कर धार की डी.आर.पी. लाइन स्थित हेलीपैड पर उतरेंगे और वहां से सीधे भोजशाला जाएंगे। भोजशाला में वे मां वाग्देवी के गर्भगृह में दर्शन करेंगे। दर्शन के उपरांत, वे मंच से जनता को संबोधित करेंगे और 'गंगा दशहरा अभियान' के अंतर्गत देवी सागर में श्रमदान भी करेंगे।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुछ ही देर में धार पहुंचने वाले हैं, जिसके लिए जिले में तैयारियां जोरों पर हैं। उनके आगमन को लेकर मंडी प्रांगण में एक विशालकाय मंच तैयार किया गया है, जहां से मुख्यमंत्री धार की जनता को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री भोपाल से हवाई यात्रा कर धार की डी.आर.पी. लाइन स्थित हेलीपैड पर उतरेंगे और वहां से सीधे भोजशाला जाएंगे। भोजशाला में वे मां वाग्देवी के गर्भगृह में दर्शन करेंगे। दर्शन के उपरांत, वे मंच से जनता को संबोधित करेंगे और 'गंगा दशहरा अभियान' के अंतर्गत देवी सागर में श्रमदान भी करेंगे।
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- प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुछ ही देर में धार पहुंचने वाले हैं, जिसके लिए जिले में तैयारियां जोरों पर हैं। उनके आगमन को लेकर मंडी प्रांगण में एक विशालकाय मंच तैयार किया गया है, जहां से मुख्यमंत्री धार की जनता को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री भोपाल से हवाई यात्रा कर धार की डी.आर.पी. लाइन स्थित हेलीपैड पर उतरेंगे और वहां से सीधे भोजशाला जाएंगे। भोजशाला में वे मां वाग्देवी के गर्भगृह में दर्शन करेंगे। दर्शन के उपरांत, वे मंच से जनता को संबोधित करेंगे और 'गंगा दशहरा अभियान' के अंतर्गत देवी सागर में श्रमदान भी करेंगे।4
- बड़वानी जिले के चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले पिछोड़ी हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। अपने 58 वर्षीय पिता जगन बड़ोले की बीच सड़क पर गोली मारकर हत्या करने वाला कलयुगी बेटा चंदन बड़ोले आखिरकार 35 दिनों की लंबी फरारी के बाद पुलिस के चक्रव्यूह में फंस गया। आरोपी अमलाली के घने जंगलों और पहाड़ियों में छिपकर पुलिस से बच रहा था, जिसे मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस टीम ने चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया। जानकारी के अनुसार, आरोपी चंदन बड़ोले ने बीते 19 अप्रैल को पैसों के आपसी विवाद को लेकर गांव के रास्ते पर अपने पिता के सिर में गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद से ही वह फरार चल रहा था। बड़वानी पुलिस उसकी तलाश में आसपास के जिलों सहित सीमावर्ती राज्यों, महाराष्ट्र और गुजरात, में लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन आरोपी शातिर तरीके से अपने गुप्त ठिकाने बदल रहा था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि चंदन ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जंगल में अपना गुप्त ठिकाना बना रखा था, जहाँ वह बेहद तंगी में सिर्फ नमक-बाटी खाकर दिन गुजार रहा था। सोमवार शाम को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना पर थाना प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन के नेतृत्व में 20 सदस्यीय पुलिस बल ने अमलाली के जंगल को घेर लिया। खुद को खाकी के चक्रव्यूह में घिरा देख आरोपी पहाड़ी से कूदकर भागने की कोशिश करने लगा, जिससे वह चोटिल और घायल हो गया। पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लेकर बड़वानी जिला अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ कड़ी सुरक्षा के बीच उसका इलाज जारी है।1
- खरगोन में जनप्रतिनिधियों और पालिका अफसरों ने जलकुंभी हटाई है, लेकिन इस कार्य को महज एक औपचारिकता बताया गया है। इस औपचारिकता के कारण नदी सफाई का पूरा अभियान अधूरा ही रह गया है।1
- लाबरिया गौशाला के रमणीय स्थान पर स्थित हमारे लाबरिया गौशाला मंदिर का एक बेहद शानदार और मनमोहक नजारा देखने को मिला है। यह दृश्य बेहद आकर्षक बताया जा रहा है।1
- सीधी जिले के रामपुर नैकिन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और अमानवीय घटना सामने आई है, जहाँ बघवार निवासी 30 वर्षीय युवक, राजपूतकोल कोल (पिता बाबू लाल कोल) की इलाज के अभाव में दर्दनाक मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज जब जिंदगी और मौत से जूझ रहा था, तब अस्पताल के डॉक्टर अपनी सरकारी ड्यूटी छोड़कर निजी कमरों में 'मोटी रकम' लेकर मरीजों का इलाज करने में व्यस्त थे। इमरजेंसी ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मुस्तैद नहीं मिला, और सही समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण युवक ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव फैल गया है और परिजनों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों में भी स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि रामपुर नैकिन का यह सरकारी अस्पताल अब केवल एक रेफर केंद्र और डॉक्टरों की अवैध कमाई का अड्डा बनकर रह गया है, जहाँ गरीब मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की कथित तानाशाही को बेनकाब किया है। पीड़ित परिवार और स्थानीय नागरिकों ने सीधी कलेक्टर से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर मुख्यमंत्री व जिले के आला अधिकारियों को टैग करते हुए यह मांग की जा रही है कि ड्यूटी से नदारद रहकर निजी क्लीनिक चलाने वाले दोषी डॉक्टर पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए, ऐसे संवेदनहीन डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए और पीड़ित परिवार को उचित न्याय के साथ मुआवजा दिया जाए। हालाँकि, यह भी कहा गया है कि उक्त वीडियो की पुष्टि नहीं की गई है और जाँच के बाद ही दोषियों पर कार्रवाई का पता चलेगा।1
- खरगोन में भीषण गर्मी के बीच पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अमृत कंठ अभियान द्वारा एक पहल की गई है। इस अभियान के तहत प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को सकोरे (मिट्टी के पानी के पात्र) भेंट किए गए। अभियान के सदस्यों ने पत्रकारों से अपने घरों, कार्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों के लिए पानी रखने और आमजन को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया है। अमृत कंठ अभियान के राकेश वर्मा ने बताया कि वर्तमान में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा है, जिसके कारण पानी की कमी से कई बेजुबान पक्षियों के दम तोड़ने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने इस स्थिति को पक्षियों के लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न बताया। वर्मा ने जानकारी दी कि अब तक अभियान के तहत लगभग 500 सकोरे वितरित किए जा चुके हैं और इसे विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं अन्य संस्थाओं का निरंतर सहयोग मिल रहा है। अभियान का लक्ष्य लोगों को पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें अपने घर, छत, दुकान, कार्यालय, मंदिर, पार्क व आसपास पानी रखने के लिए प्रेरित करना है। राकेश वर्मा ने पत्रकारों से कहा कि वे समाज की जागरूक शक्ति हैं और उनकी एक खबर, एक फोटो या एक अपील हजारों लोगों को प्रेरित कर सकती है। उन्होंने जोर दिया कि यदि मीडिया इस अभियान से जुड़ेगा, तो यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मानवता का जनआंदोलन बन जाएगा। पत्रकारों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे मानवता और संवेदनशीलता से जुड़ा एक प्रेरणादायी प्रयास बताया और आमजन से भी पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने की अपील की। अभियान के अंतर्गत कल ब्रह्म कुमारी ध्यान केंद्र में भी सकोरे वितरित किए जाएंगे। इस अवसर पर अमृत कंठ टीम के श्री प्रतीक भावसार, धर्मेंद्र पगारे, रोहित यादव, दिलीप सोनी, हेमन्त आलिवाल, जितेंद्र गुप्ता एवं सुखदेव मनाग्रे सहित कई पत्रकार साथी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि “जहाँ तक हमारी पहुँच है, वहाँ तक पानी अवश्य पहुँचे।”1
- बड़वानी जिले के अंजड़ में छोटा बरदा से गोलटा मार्ग तक कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस क्षेत्र में दिन-रात डम्परों, पोकलैंड मशीनों और भारी वाहनों के माध्यम से रेत निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग पर कथित रूप से जांच चौकियां और सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं, जिसके बावजूद खनन गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लग रही है और खनिज विभाग इस पूरे मामले पर मौन है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि इस क्षेत्र में वैध ठेका या अनुमति दी गई है, तो प्रशासन और खनिज विभाग इसकी सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दे रहा है। वहीं, यदि यह खनन अवैध है, तो कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रेत से भरे डम्परों की लगातार आवाजाही से सड़कें खराब हो रही हैं, जिससे आसपास के रहवासियों को धूल, प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कोई स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिशें भी कथित रूप से विफल रही हैं, क्योंकि अधिकारियों द्वारा मोबाइल रिसीव न करने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि खनन किस अनुमति के तहत किया जा रहा है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से आग्रह किया है कि छोटा बरदा से गोलटा तक चल रही खनन गतिविधियों की गहन जांच की जाए, वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए और नियम विरुद्ध कार्य पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।1
- बड़वानी जिले के एक पहाड़ी इलाके में स्थित गाँव में सड़क की खराब हालत को लेकर सरकार से गुहार लगाई गई है। ग्रामीणों ने बताया है कि देवगढ़ में रास्ता बेहद खराब है, जिसके चलते उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सरकार से अनुरोध किया है कि उनके गाँव में सड़क का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि उनकी इस समस्या का समाधान हो सके।2