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कोटा मेडिकल कॉलेज से एक अत्यंत गंभीर खबर सामने आई है, जहाँ गर्भवती महिलाओं को कथित तौर पर पानी के इंजेक्शन दिए गए थे। इस चौंकाने वाली घटना के परिणामस्वरूप, पाँच महिलाओं की दुखद मौत हो गई।
PGS INDIA NEWS
कोटा मेडिकल कॉलेज से एक अत्यंत गंभीर खबर सामने आई है, जहाँ गर्भवती महिलाओं को कथित तौर पर पानी के इंजेक्शन दिए गए थे। इस चौंकाने वाली घटना के परिणामस्वरूप, पाँच महिलाओं की दुखद मौत हो गई।
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- कोटा मेडिकल कॉलेज से एक अत्यंत गंभीर खबर सामने आई है, जहाँ गर्भवती महिलाओं को कथित तौर पर पानी के इंजेक्शन दिए गए थे। इस चौंकाने वाली घटना के परिणामस्वरूप, पाँच महिलाओं की दुखद मौत हो गई।1
- झुंझुनूं में आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन और ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के प्रतिनिधि धर्मेंद्र राठौड़ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण की मौजूदा पात्रता शर्तों में संशोधन की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। राठौड़ ने केंद्र सरकार के 2019 में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने के फैसले को ऐतिहासिक बताया, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान जटिल पात्रता मानदंड और प्रक्रियाओं के कारण बड़ी संख्या में पात्र एवं जरूरतमंद परिवार इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। धर्मेंद्र राठौड़ ने केंद्र सरकार से ईडब्ल्यूएस आरक्षण की प्रक्रिया को सरल और व्यवहारिक बनाने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र सरकार की नौकरियों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लिए पात्रता शर्तों का सरलीकरण किया जाए, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद युवाओं को लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकाय चुनावों में भी 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण के अनुरूप सीटें आरक्षित करने की मांग रखी, ताकि इस वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके। राठौड़ ने पात्र व्यक्तियों के ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र तत्काल प्रभाव से जारी करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि उन्हें भर्ती प्रक्रियाओं और अन्य सरकारी योजनाओं में कोई बाधा न आए। उन्होंने कृषि भूमि संबंधी शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बढ़ती कृषि लागत और सीमित आय के बावजूद कई किसान परिवार सिर्फ भूमि स्वामित्व के कारण ईडब्ल्यूएस श्रेणी से बाहर हो जाते हैं, जो वास्तविकता के विपरीत है। राठौड़ ने जानकारी दी कि मंच के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से पहले ही मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने एक बार फिर मांग की कि भूमि एवं आवास संबंधी शर्तों को समाप्त किया जाए और पात्रता मानदंडों को अधिक सरल, यथार्थपरक तथा समावेशी बनाया जाए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता यशवर्धन सिंह शेखावत, रणजीत सिंह चंदेलिया, कुलदीप सिंह भाटी, रामपाल सिंह राठौड़, प्रवीण सिंह राठौड़, कैलाश व्यास, प्रमेन्द्र सिंह शेखावत, जय पहाड़ी, सरवन सैनी सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।1
- सूत्रों के अनुसार, सनातन धर्म में आज भी विश्वास और आस्था बरकरार है, लेकिन कुछ गलत लोगों की वजह से सनातन के संस्कार और संस्कृति बदनाम हो रही है। इसके बावजूद, ईश्वर में तपस्या, आस्था और विश्वास आज भी मौजूद है।1
- चूरू में 'ऑपरेशन उमंग-7' की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ 'उमंग' की जगह कथित तौर पर 'दर्द' देखने को मिला है। बताया गया है कि एक 11 साल के बालक के लिए उसकी माँ रातभर भटकती रही, जिसके बाद अब उसके परिजन सम्प्रेषण गृह के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर हरलाल सहारण, राहुल कस्वां, राजेंद्र राठौड़, CMO राजस्थान, Sp चूरू, चाइल्डहेल्पलाइन चूरू, Ministry of Women & Child Development, Government of India, भजनलाल शर्मा और अशोक गहलोत का ध्यान आकर्षित किया गया है।1
- देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसा भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने वैवाहिक विवादों के बीच इंसानियत और बड़प्पन की मिसाल पेश की है। यह पूरा मामला शिखा, उनके पति सौरभ और शिखा के पिता के स्वाभिमान से जुड़ा है। शिखा और सौरभ का विवाह साल 2020 में हुआ था, जिसके बाद आपसी अनबन बढ़ने पर शिखा ने अपने पति सौरभ के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया था। इस कानूनी लड़ाई के चलते शिखा के पिता की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उनके पास अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए भी पैसे नहीं बचे। इसी भारी मानसिक तनाव के कारण शिखा के पिता को अचानक हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब शिखा के पति सौरभ को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने पुरानी सारी कड़वाहट और मुकदमों को दरकिनार करते हुए तुरंत सरकारी अस्पताल पहुँचकर अपने ससुर को वहाँ से निकाला और गुरुग्राम के सबसे बड़े अस्पताल 'मेदांता द मेडिसिटी' में भर्ती कराया। सौरभ ने बिना किसी हिचकिचाहट के इलाज की पूरी जिम्मेदारी उठाई, जिसके परिणामस्वरूप आज शिखा के पिता पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जब दिल्ली की एक अदालत में दोनों के केस की तारीख थी, तो कोर्ट रूम में पति सौरभ के सामने आते ही शिखा का दिल ग्लानि और आभार से भर उठा। जिस पति को उसने कटघरे में खड़ा किया था, उसी ने उसके पिता को नया जीवनदान दिया था। शिखा ने तुरंत ही जज और वकीलों के सामने तलाक के सारे कागजात फाड़कर फेंक दिए और रोते हुए पति के गले लग गईं। कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स इस भावुक पल को देखकर दंग रह गया। अब यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग दामाद के इस बड़प्पन की जमकर तारीफ कर रहे हैं।1
- खाई से आ रही रहस्यमयी आवाज ने लोगों को चौंका दिया। जब आवाज का स्रोत जानने के लिए नीचे जाकर देखा गया, तो जो सामने आया उसे देखकर लोग पूरी तरह हैरान रह गए।1
- राम मंदिर निर्माण से जुड़े एक मामले में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप सामने आया है। इस संबंध में यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो पाएगी।1
- नीम का थाना में बिजली विभाग की कथित नाकामी, कामचोरी और रिश्वतखोरी के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक दुकानदार ने शिकायत की है कि उनकी दुकान के बाहर लगा बिजली का पैनल खुला पड़ा है, जिससे कभी भी जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। यह पैनल लगातार खराब होता रहता है। शिकायतकर्ता ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए निजी पावर हाउस में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस खुले पैनल से किसी भी प्रकार का जान-माल का नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।1