राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा (सेट-2026) के आयोजन की जिम्मेदारी इस वर्ष कोटा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत के मार्गदर्शन में, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीटेट परीक्षा को ध्यान में रखते हुए सेट-2026 की पूर्व निर्धारित 6 सितंबर की तारीख को बदलकर अब 13 सितंबर 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष सेट-2026 में पहली बार जनसंचार एवं पत्रकारिता तथा संस्कृत (पारंपरिक) विषयों को शामिल किया गया है, जिसके साथ अब कोटा विश्वविद्यालय कुल 37 विषयों में यह परीक्षा आयोजित करेगा। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने बताया कि यह निर्णय यूजीसी-नेट के विषयों के अनुरूप लिया गया है, और विश्वविद्यालय को इन दोनों विषयों को शामिल करने के लिए कई आवेदन एवं मांग-पत्र प्राप्त हुए थे। विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन विषयों को जोड़ा गया है, जिससे प्रदेशभर के अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिक अवसर प्राप्त होंगे। परीक्षा के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे, जिसके लिए अभ्यर्थी कोटा विश्वविद्यालय की वेबसाइट और एसएसओ पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे। आवेदन शुल्क सामान्य एवं ओबीसी क्रीमीलेयर वर्ग के लिए 1500 रुपये, ओबीसी नॉन-क्रीमीलेयर एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 1200 रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांग वर्ग के लिए 750 रुपये निर्धारित किया गया है। सेट-2026 का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप ऑफलाइन (ओएमआर आधारित) पद्धति से होगा। परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होंगे, जिनमें कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रथम प्रश्नपत्र में शिक्षण एवं शोध अभिक्षमता, तार्किक क्षमता तथा सामान्य बौद्धिक दक्षता से संबंधित 50 प्रश्न होंगे, जबकि द्वितीय प्रश्नपत्र में अभ्यर्थी द्वारा चयनित विषय से संबंधित 100 प्रश्न शामिल होंगे। दोनों प्रश्नपत्रों के लिए कुल 300 अंक निर्धारित किए गए हैं और परीक्षा की अवधि तीन घंटे होगी। परीक्षा में किसी भी प्रकार का नकारात्मक अंकन नहीं किया जाएगा और प्रत्येक सही उत्तर के लिए दो अंक प्रदान किए जाएंगे।
राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा (सेट-2026) के आयोजन की जिम्मेदारी इस वर्ष कोटा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत के मार्गदर्शन में, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीटेट परीक्षा को ध्यान में रखते हुए सेट-2026 की पूर्व निर्धारित 6 सितंबर की तारीख को बदलकर अब 13 सितंबर 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष सेट-2026 में पहली बार जनसंचार एवं पत्रकारिता तथा संस्कृत (पारंपरिक) विषयों को शामिल किया गया है, जिसके साथ अब कोटा विश्वविद्यालय कुल 37 विषयों में यह परीक्षा आयोजित करेगा। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने बताया कि यह निर्णय यूजीसी-नेट के विषयों के अनुरूप लिया गया है, और विश्वविद्यालय को इन दोनों विषयों को शामिल करने के लिए कई आवेदन एवं मांग-पत्र प्राप्त हुए थे। विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन विषयों को जोड़ा गया है, जिससे प्रदेशभर के अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिक अवसर प्राप्त होंगे। परीक्षा के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे, जिसके लिए अभ्यर्थी कोटा विश्वविद्यालय की वेबसाइट और एसएसओ पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे। आवेदन शुल्क सामान्य एवं ओबीसी क्रीमीलेयर वर्ग के लिए 1500 रुपये, ओबीसी नॉन-क्रीमीलेयर एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 1200 रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांग वर्ग के लिए 750 रुपये निर्धारित किया गया है। सेट-2026 का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप ऑफलाइन (ओएमआर आधारित) पद्धति से होगा। परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होंगे, जिनमें कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रथम प्रश्नपत्र में शिक्षण एवं शोध अभिक्षमता, तार्किक क्षमता तथा सामान्य बौद्धिक दक्षता से संबंधित 50 प्रश्न होंगे, जबकि द्वितीय प्रश्नपत्र में अभ्यर्थी द्वारा चयनित विषय से संबंधित 100 प्रश्न शामिल होंगे। दोनों प्रश्नपत्रों के लिए कुल 300 अंक निर्धारित किए गए हैं और परीक्षा की अवधि तीन घंटे होगी। परीक्षा में किसी भी प्रकार का नकारात्मक अंकन नहीं किया जाएगा और प्रत्येक सही उत्तर के लिए दो अंक प्रदान किए जाएंगे।
- 25 जून को पशुपालकों और किसानों के 'हल्ला बोल' प्रदर्शन के बाद, कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने प्रशासन को 15 दिन की चेतावनी दी। इसके बाद, उन्होंने भाजपा खेमे से हुए वार के जवाब में तीखा पलटवार करते हुए कहा कि, "सरकार आप की है और मेरा कब्जा है तो हटायें।" यह बयान गुंजल द्वारा भाजपा पर एक सीधा और चुनौती भरा निशाना है।1
- कोटा में अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध दिवस के अवसर पर, मन आरोग्य न्यास और प्रेरणा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सूरजपोल गेट स्थित प्रेरणा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र पर एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेरणा संस्थान के अध्यक्ष महेश हरितवाल ने की। जन स्वास्थ्य अभियान के प्रदेश सह-संयोजक और मन आरोग्य न्यास के समन्वयक विजय राघव ने अपने संबोधन में कहा कि बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा मादक पदार्थों के जाल में फंस रहे हैं, जो परिवारों और समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने इस बढ़ती प्रवृत्ति का कारण करियर की निराशा, मानसिक हताशा और नशे के आदी मित्रों की संगति को बताया। राघव ने चेतावनी दी कि शुरुआत में ली गई एक-दो खुराक धीरे-धीरे गंभीर लत में बदल जाती है, जिससे व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से कमजोर पड़ता है, और पूरा परिवार व समाज इसकी चपेट में आ जाता है। प्रेरणा संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ता कपिल नैयर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नशा छोड़ने की राह चुनौतीपूर्ण होते हुए भी असंभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए दृढ़ संकल्प लेने, नशे को एक गंभीर समस्या स्वीकार करने और चिकित्सक व मनोचिकित्सक की सहायता लेने जैसे तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रेरणा संस्थान के अध्यक्ष महेश हरितवाल ने जोर दिया कि नशे के प्रचलन से समाज में अपराधों में वृद्धि होती है, अतः इसकी रोकथाम हर नागरिक का सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर फैशन या शौक के रूप में होती है, जो भयानक लत बन जाती है, और इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, संयम व सकारात्मक माहौल में सक्रिय रहना अत्यंत आवश्यक है। हरितवाल ने नशे के आदी व्यक्तियों को संकल्पबद्ध करने, उनका उत्साह बढ़ाने और उन्हें पुनर्वास की ओर अग्रसर करने पर बल दिया। कार्यक्रम के समापन पर, उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों ने 'नशा मुक्त भारत अभियान' से जुड़ने और अपनी क्षमतानुसार देश को नशा मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रतिज्ञा ली। अभिनव हरितवाल, रामहेत सुमन, विजेंद्र नेगी, पिंटू मीणा, भोला सिंह, कुलदीप चौधरी और सुनील ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।4
- राजस्थान और अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया के बीच स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। इस ऐतिहासिक शुरुआत के तहत, राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC), कैलिफोर्निया ऊर्जा आयोग (CEC) और कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (CPUC) के बीच एक सहमति पत्र (MoI) पर वर्चुअल हस्ताक्षर किए गए। राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इस वर्चुअल समारोह में बोलते हुए इसे दोनों राज्यों के सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद, राजस्थान और कैलिफोर्निया का साझा संकल्प और दूरदर्शी लक्ष्य समान है, जो स्वच्छ ऊर्जा का अधिकतम विस्तार और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर व सुरक्षित भविष्य का निर्माण है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस समझौते से दोनों अग्रणी राज्य एक-दूसरे के जमीनी अनुभवों, तकनीकी नवाचारों और विनियामक प्रणालियों से सीख सकेंगे। मंत्री नागर ने यह भी रेखांकित किया कि राजस्थान भारत में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी राज्य बन चुका है, जहाँ प्रचुर सौर ऊर्जा और अनुकूल पवन गतियों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार न केवल ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है, बल्कि आमजन तक किफायती, सुरक्षित और निर्बाध बिजली पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए आधुनिक पावर ग्रिड, उन्नत बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और स्मार्ट मीटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को पूरे प्रदेश में तेजी से लागू किया जा रहा है। मंत्री ने MoI के मुख्य घटकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीकी आदान-प्रदान का एक सुदृढ़ ढांचा तैयार करेगा। इसके तहत सौर और पवन ऊर्जा के आधुनिक प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रोत्साहन तथा एक अत्यधिक विश्वसनीय व स्मार्ट ग्रिड प्रणाली के विकास पर दोनों पक्ष आपसी विचार, शोध और सफल अनुभव साझा करेंगे। कैलिफोर्निया ने ग्रिड मॉडर्नाइजेशन और रिन्यूएबल इंटीग्रेशन में अनुकरणीय कार्य किया है, जिससे राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को नीतिगत और व्यावहारिक स्तर पर बहुत लाभ मिलेगा। ऊर्जा मंत्री ने विश्वास जताया कि इस तकनीकी साझेदारी से मिलने वाले निष्कर्षों का सीधा फायदा राजस्थान और कैलिफोर्निया के उपभोक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल को साकार करने के लिए राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग और कैलिफोर्निया के दोनों ऊर्जा आयोगों की पूरी टीम को बधाई दी। मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी भविष्य में एक गहरी और लंबी व्यावहारिक मित्रता का रूप लेगी।4
- कोटा ग्रामीण पुलिस को मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने विशेष अभियान में एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सुकेत थाना अधिकारी महावीर प्रसाद भार्गव ने मुस्तैदी दिखाते हुए, पिछले चार साल से फरार चल रहे ₹10,000 के इनामी ड्रग तस्कर शेख शाहरूख को झालावाड़ के इण्डस्ट्रीज इलाके से घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई को कोटा ग्रामीण पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।1
- Post by Sadbhavna sandesh news1
- आकाश इंस्टीट्यूट से जुड़ी रेनीत 2026 की टॉपर बन गई हैं। उनका नाम NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के साथ चमक रहा है। इस संदर्भ में उपलक्ष्य गोयल का भी जिक्र किया गया है।3
- अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस की पूर्व संध्या पर कोटा में एक नशा मुक्ति जागरूकता संगोष्ठी और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड स्थानीय संघ कोटा दक्षिण और शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा 696 आर कोटा-बारां के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आवासन मंडल, केशवपुरा में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित एवं सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम प्रभारी एड. दिनेश नायक के अनुसार, डी ओ सी रेलवे प्रवीण कुमार शर्मा मुख्य अतिथि रहे, जबकि शिक्षा सहकारी सभा के अध्यक्ष एवं स्काउट-गाइड जिला प्रधान प्रकाश जायसवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। आर्केडिया एकैडमी की यूनिट लीडर मीनाक्षी महावर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, इस दौरान अंतिमा मेहरा, नीलम पारेता एवं छाया भारती भी मंच पर उपस्थित थीं। मुख्य अतिथि प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए घातक है, और युवाओं को नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा तथा राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने जागरूकता को नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार बताया। मुख्य वक्ता प्रकाश जायसवाल ने नशे को युवाओं के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि मादक पदार्थ न केवल स्वास्थ्य बल्कि आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। अध्यक्षा मीनाक्षी महावर ने समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। संगोष्ठी के बाद नशा मुक्ति विषय पर एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों की नशे से संबंधित जानकारी और समझ का मूल्यांकन किया गया। सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया और सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों ने नशे से दूर रहने तथा समाज में नशा मुक्ति का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। इस पहल ने विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा प्रदान की।2
- इंटरनेट पर इन दिनों एक अत्यंत विचलित करने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक कलयुगी बेटा अपने ही बुजुर्ग और लाचार पिता को जानवरों की तरह बेरहमी से पीटता हुआ नजर आ रहा है। इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर है और लोग आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं। रूह कंपा देने वाली इस हैवानियत भरे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक नौजवान लड़का अपने बुजुर्ग पिता पर रहम खाने के बजाय उन पर टूट पड़ता है। वह कभी बुजुर्ग का गला दबाने की कोशिश करता है, तो कभी उनके बाल पकड़कर उन्हें जमीन पर पटक देता है। बुजुर्ग पिता बेबसी में खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जालिम बेटे को उन पर जरा भी तरस नहीं आता। यह घटना एक बार फिर समाज के पारिवारिक मूल्यों पर बड़ा सवाल खड़ा कर देती है, जहाँ एक बाप बच्चों के बचपन की हर बदतमीजी इसलिए झेल लेता है ताकि उनका भविष्य संवर सके, लेकिन वही बाप जब जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर लाचार होता है, तो कलयुगी बच्चे उसका बोझ नहीं संभाल पाते। वीडियो पर टिप्पणी करते हुए एक यूजर ने भावुक होकर लिखा कि अच्छा है कि आज के समय में वृद्धाश्रम इन बेसहारा बुजुर्गों का सहारा बने हुए हैं, वरना ऐसे जालिम बच्चों के बीच इन बुजुर्गों की जिंदगी क्या होती। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि ऐसे बेटों को समाज में रहने का कोई हक नहीं है और उन्हें सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजना चाहिए। हालांकि यह वीडियो किस शहर या इलाके का है, इसकी पूरी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन लोग इसे सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर कर रहे हैं ताकि यह मामला स्थानीय पुलिस और प्रशासन की नजरों में आ सके और इस जल्लाद बेटे को उसके किए की सख्त सजा मिल सके। लोगों से अपील की जा रही है कि वे इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि आरोपी की पहचान हो सके और पीड़ित बुजुर्ग को न्याय मिल सके। साथ ही, यह भी अपील की गई है कि अगर आपके आस-पास भी किसी बुजुर्ग के साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या सीनियर सिटीन हेल्पलाइन को सूचित करें।1