NEWS:-मजदूरी मांगने वाले श्रमिक से मारपीट प्रकरण में पुलिस की त्वरित कार्रवाई,तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय में पेश करने के बाद उपजेल जावद भेजे गए मनासा। 25 जुलाई 2026 को समाचार पत्र में प्रकाशित मजदूरी मांगने पर एक श्रमिक के साथ मारपीट किए जाने संबंधी प्रकरण में थाना जावद पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पुलिस द्वारा प्रकरण में आरोपी हरिश पिता गणपत जाट (30 वर्ष) निवासी खड़ावदा, थाना जावद, अशोक पिता भेरूलाल जाट (40 वर्ष) निवासी नवेलिया तथा पप्पू पिता विकास उर्फ नंदकिशोर बेरागी (33 वर्ष) निवासी रूपपुरा को गिरफ्तार किया गया। इसके उपरांत तीनों आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के अंतर्गत न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी, उपखंड जावद के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय में आरोपियों की ओर से सक्षम जमानतदार प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को 5 अगस्त 2026 तक उपजेल जावद भेजने के आदेश दिए गए। प्रकरण में थाना जावद पुलिस द्वारा नियमानुसार अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
NEWS:-मजदूरी मांगने वाले श्रमिक से मारपीट प्रकरण में पुलिस की त्वरित कार्रवाई,तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय में पेश करने के बाद उपजेल जावद भेजे गए मनासा। 25 जुलाई 2026 को समाचार पत्र में प्रकाशित मजदूरी मांगने पर एक श्रमिक के साथ मारपीट किए जाने संबंधी प्रकरण में थाना जावद पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को
गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पुलिस द्वारा प्रकरण में आरोपी हरिश पिता गणपत जाट (30 वर्ष) निवासी खड़ावदा, थाना जावद, अशोक पिता भेरूलाल जाट (40 वर्ष) निवासी नवेलिया तथा पप्पू पिता विकास उर्फ नंदकिशोर बेरागी (33 वर्ष) निवासी रूपपुरा को गिरफ्तार किया गया। इसके उपरांत तीनों आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा
170 के अंतर्गत न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी, उपखंड जावद के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय में आरोपियों की ओर से सक्षम जमानतदार प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को 5 अगस्त 2026 तक उपजेल जावद भेजने के आदेश दिए गए। प्रकरण में थाना जावद पुलिस द्वारा नियमानुसार अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
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- मद्रास हाईकोर्ट ने मृतकों के परिजनों को नौकरी देने का आदेश रद्द किया करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की विजय सरकार को झटका चेन्नई / करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की विजय सरकार को बड़ा झटका लगा है। मद्रास हाई कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का सरकारी आदेश रद्द कर दिया है। अदालत से कहा कि इस मामले की जांच अभी सीबीआई कर रही है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी इसकी निगरानी कर रहा है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले इस मुद्दे पर कोई राय देना उचित नहीं होगा। मद्रास हाई कोर्ट ने उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के बाद अदालत ने तमिलनाडु सरकार का आदेश रद्द कर दिया। सीबीआई जांच का दिया हवाला कोर्ट ने कहा कि करूर भगदड़ की जांच फिलहाल सीबीआई के पास है। इतना ही नहीं, इस पूरी जांच पर सुप्रीम कोर्ट भी नजर बनाए हुए है। इसलिए घटना के तथ्यों या जिम्मेदारी को लेकर इस स्तर पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। अदालत ने साफ किया कि मामले की जांच जारी है। ऐसे में अंतिम नतीजे आने से पहले किसी भी तरह का प्रशासनिक फैसला उचित नहीं माना जा सकता। इसी वजह से सरकारी नौकरी देने का आदेश रद्द किया गया। क्या है पूरा मामला बता दें कि 27 सितंबर 2025 को करूर जिले के वेलुस्वामीपुरम में टीवीके की एक राजनीतिक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। विजय का भाषण सुनने के लिए बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। भीड़ बेकाबू होने से 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। एजेंसी टीवीके के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ कर उनके बयान भी दर्ज कर चुकी है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। मुख्यमंत्री बनने के बाद 10 जुलाई 2026 को विजय पहली बार करूर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सितंबर 2025 की करूर भगदड़ से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत की। साथ ही, जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिवारों में से 32 पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। राज्य सरकार ने भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। जिसे अब मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार का यह आदेश रद्द कर दिया है।1
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