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सतना जिले के मैहर में आम आदमी पार्टी (आप) ने पानी की किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा।

2 hrs ago
user_Sharda Shrivastava
Sharda Shrivastava
पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

सतना जिले के मैहर में आम आदमी पार्टी (आप) ने पानी की किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा।

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  • मैहर सिविल अस्पताल में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह पूछा गया है कि क्या मरीजों को समय पर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएँ मिल पा रही हैं। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से यह भी जानने की मांग की गई है कि क्या वे इन आरोपों की जांच करेंगे और व्यवस्थाओं में सुधार लाएंगे। इन सवालों के माध्यम से नेताओं से जवाबदेही और जन सुनवाई की पुरजोर मांग की गई है।
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    मैहर सिविल अस्पताल में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह पूछा गया है कि क्या मरीजों को समय पर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएँ मिल पा रही हैं। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से यह भी जानने की मांग की गई है कि क्या वे इन आरोपों की जांच करेंगे और व्यवस्थाओं में सुधार लाएंगे। इन सवालों के माध्यम से नेताओं से जवाबदेही और जन सुनवाई की पुरजोर मांग की गई है।
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    2 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के रीवा के प्रसिद्ध बघेली यूट्यूबर और कलाकार मनीष पटेल को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन पर सोशल मीडिया पर एक वर्ग विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र वीडियो पोस्ट करने का आरोप है। पुलिस ने यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद की। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मनीष पटेल ने वेलेंटाइन वीक के दौरान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम शामिल हैं, पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस विवादास्पद वीडियो और उसके शीर्षक में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां की गई थीं। वीडियो के वायरल होने के बाद ब्राह्मण समाज के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया, जिससे मामला गरमा गया। सिविल लाइंस थाने में मनीष पटेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(ए), जो विभिन्न समूहों के बीच धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर शत्रुता बढ़ावा देने से संबंधित है, और धारा 353(2), जो विभिन्न समुदायों के बीच नफरत या दुर्भावना पैदा करने वाले बयान फैलाने से संबंधित है, के तहत एफआईआर दर्ज की। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए मनीष पटेल ने जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। हालांकि, जस्टिस रामकुमार चौबे की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उन टिप्पणियों को समाज में नफरत फैलाने वाला और बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अग्रिम जमानत याचिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी कलाकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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    मध्य प्रदेश के रीवा के प्रसिद्ध बघेली यूट्यूबर और कलाकार मनीष पटेल को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन पर सोशल मीडिया पर एक वर्ग विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र वीडियो पोस्ट करने का आरोप है। पुलिस ने यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद की।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मनीष पटेल ने वेलेंटाइन वीक के दौरान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम शामिल हैं, पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस विवादास्पद वीडियो और उसके शीर्षक में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां की गई थीं। वीडियो के वायरल होने के बाद ब्राह्मण समाज के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया, जिससे मामला गरमा गया। सिविल लाइंस थाने में मनीष पटेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(ए), जो विभिन्न समूहों के बीच धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर शत्रुता बढ़ावा देने से संबंधित है, और धारा 353(2), जो विभिन्न समुदायों के बीच नफरत या दुर्भावना पैदा करने वाले बयान फैलाने से संबंधित है, के तहत एफआईआर दर्ज की।

अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए मनीष पटेल ने जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। हालांकि, जस्टिस रामकुमार चौबे की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उन टिप्पणियों को समाज में नफरत फैलाने वाला और बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अग्रिम जमानत याचिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी कलाकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • सतना जिले के मैहर में आम आदमी पार्टी (आप) ने पानी की किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा।
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    सतना जिले के मैहर में आम आदमी पार्टी (आप) ने पानी की किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा।
    user_Sharda Shrivastava
    Sharda Shrivastava
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मैहर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम जरियारी के ग्रामीण भीषण गर्मी के दौरान सप्लाई के गंदे पानी को पीने के लिए विवश हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि दूषित पानी के सेवन के कारण लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं। इस गंभीर दुर्दशा पर सीईओ श्री अशोक तिवारी जी के उदासीन रवैये पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। पोस्ट में कहा गया है कि नौतपा की भयंकर गर्मी में, जब शुद्ध पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे में एक जिम्मेदार अधिकारी का यह रवैया समझ से परे है। लापरवाही की हद यह है कि एक तरफ पूरा गांव भयंकर पानी के संकट से जूझ रहा है और प्यासा तड़प रहा है, वहीं दूसरी तरफ जनता को पानी बांटने के बजाय, पानी के टैंकर को नाली निर्माण के काम में लगा दिया गया है। प्रशासन पर आरोप लगाया गया है कि उसे जनता के प्यासी मरने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा। पोस्ट ग्राम जरियारी के ग्रामीणों को गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होने और जनपद सीईओ अशोक तिवारी जी की इस मामले में चुप्पी पर गहरा आक्रोश व्यक्त करती है।
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    मैहर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम जरियारी के ग्रामीण भीषण गर्मी के दौरान सप्लाई के गंदे पानी को पीने के लिए विवश हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि दूषित पानी के सेवन के कारण लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं।

इस गंभीर दुर्दशा पर सीईओ श्री अशोक तिवारी जी के उदासीन रवैये पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। पोस्ट में कहा गया है कि नौतपा की भयंकर गर्मी में, जब शुद्ध पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे में एक जिम्मेदार अधिकारी का यह रवैया समझ से परे है। लापरवाही की हद यह है कि एक तरफ पूरा गांव भयंकर पानी के संकट से जूझ रहा है और प्यासा तड़प रहा है, वहीं दूसरी तरफ जनता को पानी बांटने के बजाय, पानी के टैंकर को नाली निर्माण के काम में लगा दिया गया है।

प्रशासन पर आरोप लगाया गया है कि उसे जनता के प्यासी मरने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा। पोस्ट ग्राम जरियारी के ग्रामीणों को गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होने और जनपद सीईओ अशोक तिवारी जी की इस मामले में चुप्पी पर गहरा आक्रोश व्यक्त करती है।
    user_विक्रम रजक
    विक्रम रजक
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाली लापरवाही सामने आई है। दिसंबर 2025 में यहाँ 5 थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्चों को एचआईवी (HIV) संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया था। इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य आयुक्त द्वारा गठित ज्वाइंट टास्क टीम की जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच प्रक्रिया के दौरान पीड़ित बच्चों को खून देने वाले संदिग्ध डोनर्स की खोजबीन बुरी तरह उलझ गई है। कुल 147 संदिग्ध डोनर्स में से 15 ने दोबारा ब्लड टेस्ट कराने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है, जबकि 41 डोनर्स के मोबाइल नंबर लगातार बंद आ रहे हैं, जिससे उनसे संपर्क साधना नामुमकिन हो गया है। दस्तावेजों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों को खून देने वाले कुल 196 लोगों की सूची तैयार की थी। जांच के इस अहम मोड़ पर डोनर्स का असहयोग और मोबाइल नंबरों का बंद होना किसी बड़ी साजिश या ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में भारी हेरफेर की ओर इशारा कर रहा है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। जनता के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर ब्लड बैंक ने बिना उचित स्क्रीनिंग और पुख्ता रिकॉर्ड के संक्रमित रक्त को बच्चों को चढ़ाने की अनुमति कैसे दे दी। वहीं, अब संदिग्ध डोनर्स का इस तरह गायब होना या जांच से भागना इस मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।
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    मध्य प्रदेश के सतना जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाली लापरवाही सामने आई है। दिसंबर 2025 में यहाँ 5 थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्चों को एचआईवी (HIV) संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया था। इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य आयुक्त द्वारा गठित ज्वाइंट टास्क टीम की जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच प्रक्रिया के दौरान पीड़ित बच्चों को खून देने वाले संदिग्ध डोनर्स की खोजबीन बुरी तरह उलझ गई है। कुल 147 संदिग्ध डोनर्स में से 15 ने दोबारा ब्लड टेस्ट कराने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है, जबकि 41 डोनर्स के मोबाइल नंबर लगातार बंद आ रहे हैं, जिससे उनसे संपर्क साधना नामुमकिन हो गया है। दस्तावेजों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों को खून देने वाले कुल 196 लोगों की सूची तैयार की थी। जांच के इस अहम मोड़ पर डोनर्स का असहयोग और मोबाइल नंबरों का बंद होना किसी बड़ी साजिश या ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में भारी हेरफेर की ओर इशारा कर रहा है।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। जनता के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर ब्लड बैंक ने बिना उचित स्क्रीनिंग और पुख्ता रिकॉर्ड के संक्रमित रक्त को बच्चों को चढ़ाने की अनुमति कैसे दे दी। वहीं, अब संदिग्ध डोनर्स का इस तरह गायब होना या जांच से भागना इस मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।
    user_MADHYA BHARAT NEWS
    MADHYA BHARAT NEWS
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Sandeep Saket
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    Post by Sandeep Saket
    user_Sandeep Saket
    Sandeep Saket
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मादा गांव में आज तक पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे ग्रामीण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। गांव के निवासियों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से निवेदन किया है कि इन बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जाए। यह अपील ग्राम पंचायत सेमरा के मादा गांव, बैहर क्षेत्र से संबंधित है, जहाँ ग्रामीण लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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    मादा गांव में आज तक पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे ग्रामीण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। गांव के निवासियों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से निवेदन किया है कि इन बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जाए। यह अपील ग्राम पंचायत सेमरा के मादा गांव, बैहर क्षेत्र से संबंधित है, जहाँ ग्रामीण लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।
    user_भारत कोल मादा से
    भारत कोल मादा से
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने और बेहतर सेवाएं देने का दावा करता है, लेकिन मैहर जिले का घुनवारा रेलवे स्टेशन इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रहा है। यहाँ यात्रियों को टिकट तो आसानी से मिल रहे हैं, मगर सुविधाओं के नाम पर स्थिति बेहद चिंताजनक है, जिससे यात्रियों को भारी बदहाली का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में स्टेशन पर पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 1 और 2 की हालत भी खराब है, जहाँ जगह-जगह 2 से 3 फीट तक ऊँची घास उग आई है, जो साफ-सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि स्टेशन परिसर लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। रेलवे नियमों के अनुसार स्वच्छ पेयजल, साफ और सुरक्षित प्लेटफॉर्म, बैठने की समुचित व्यवस्था, साफ-सुथरे शौचालय, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, समय पर अनाउंसमेंट और दिव्यांग व बुजुर्ग यात्रियों के लिए सहायता जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना अनिवार्य है। लेकिन घुनवारा स्टेशन पर इन सभी आवश्यक सुविधाओं का घोर अभाव यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे प्रशासन केवल टिकट बिक्री तक ही सीमित दिखाई दे रहा है और यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा पर गंभीर ध्यान नहीं दे रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन पर तत्काल साफ-सफाई अभियान चलाने, पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे या स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर यात्रियों से किराया वसूलने वाला रेलवे विभाग सुविधाओं के मामले में कब अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।
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    भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने और बेहतर सेवाएं देने का दावा करता है, लेकिन मैहर जिले का घुनवारा रेलवे स्टेशन इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रहा है। यहाँ यात्रियों को टिकट तो आसानी से मिल रहे हैं, मगर सुविधाओं के नाम पर स्थिति बेहद चिंताजनक है, जिससे यात्रियों को भारी बदहाली का सामना करना पड़ रहा है।

भीषण गर्मी में स्टेशन पर पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 1 और 2 की हालत भी खराब है, जहाँ जगह-जगह 2 से 3 फीट तक ऊँची घास उग आई है, जो साफ-सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि स्टेशन परिसर लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है।

रेलवे नियमों के अनुसार स्वच्छ पेयजल, साफ और सुरक्षित प्लेटफॉर्म, बैठने की समुचित व्यवस्था, साफ-सुथरे शौचालय, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, समय पर अनाउंसमेंट और दिव्यांग व बुजुर्ग यात्रियों के लिए सहायता जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना अनिवार्य है। लेकिन घुनवारा स्टेशन पर इन सभी आवश्यक सुविधाओं का घोर अभाव यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे प्रशासन केवल टिकट बिक्री तक ही सीमित दिखाई दे रहा है और यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा पर गंभीर ध्यान नहीं दे रहा है।

क्षेत्रीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन पर तत्काल साफ-सफाई अभियान चलाने, पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे या स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर यात्रियों से किराया वसूलने वाला रेलवे विभाग सुविधाओं के मामले में कब अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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