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रायगढ़-ओडिशा हाईवे पर शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस अभियान के तहत, नशे की हालत में वाहन चला रहे पाँच ड्राइवरों को पकड़ा गया है। इन सभी पकड़े गए ड्राइवरों पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया है।
Raigarh Chhattisgarh
रायगढ़-ओडिशा हाईवे पर शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस अभियान के तहत, नशे की हालत में वाहन चला रहे पाँच ड्राइवरों को पकड़ा गया है। इन सभी पकड़े गए ड्राइवरों पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया है।
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- रायगढ़ जिले में गति शक्ति समिति की द्वितीय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को पोर्टल के उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान करना था।1
- कोरबा जिले के जनपद पंचायत करतला के अंतर्गत आने वाली दमखाचा पंचायत में स्ट्रीट लाइट से संबंधित भारी फर्जीवाड़े और गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।1
- कोरबा जिले के कटघोरा में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह सरकार छत्तीसगढ़ राज्य को अपराध का गढ़ बना रही है।1
- रायगढ़ पुलिस ने कल शाम शहर के प्रमुख बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों में कोतवाली पुलिस द्वारा एक व्यापक फुट पेट्रोलिंग अभियान चलाया। इस दौरान, सीएसपी श्री मयंक मिश्रा ने स्वयं पुलिस बल के साथ पेट्रोलिंग करते हुए जवानों को संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सघन जांच करने तथा असामाजिक गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एसआई ऐनु देवांगन और एएसआई गौतम ठाकुर के नेतृत्व में यह फुट पेट्रोलिंग हटरी बाजार, मॉल के सामने मुख्य मार्ग, न्यू मार्केट, गौरीशंकर मंदिर मार्ग, सराफा बाजार, सब्जी मार्केट और बड़पारा क्षेत्र में की गई। बड़पारा शराब भट्ठी के पास मौजूद संदिग्ध युवकों से पूछताछ कर उनके वाहनों की जांच भी की गई। इसके अतिरिक्त, पुलिस टीम ने संजय कॉम्प्लेक्स, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ चौक, रेलवे स्टेशन, सत्तीगुड़ी चौक, बैकुंठपुर और राजीव नगर वार्डों के अंदर पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पेट्रोलिंग के दौरान, सुनसान स्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर अड्डेबाजी कर रहे युवकों, शराबखोरी तथा झगड़ा-विवाद की प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों को सख्त चेतावनी दी गई। पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें। रायगढ़ पुलिस प्रतिदिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों में पैदल पेट्रोलिंग कर 'विजुअल पुलिसिंग' को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य बदमाशों और संदिग्ध व्यक्तियों की सघन जांच करना है, ताकि आमजन में सुरक्षा का विश्वास बना रहे और अपराधियों में पुलिस का भय व्याप्त हो। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने संदेश दिया है कि 'विजुअल पुलिसिंग' के माध्यम से शहर के प्रत्येक क्षेत्र में पुलिस की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है, और असामाजिक तत्वों, अड्डेबाजी, शराबखोरी तथा शांति भंग करने वाले व्यक्तियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।3
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मानसून ने धमाकेदार दस्तक दी है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ जमकर बारिश हुई, जिससे इलाके में मानसूनी गतिविधियों का जोरदार आगाज हुआ।1
- यह पूरी घटना कोरबा जिले के लेमरू थाना क्षेत्र की है, जहाँ एक पति ने अपनी पत्नी को हाथ-मुक्कों और डंडों से पीट-पीटकर मार डाला।1
- जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बालाझार में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जहाँ एक परिवार ने कथित तौर पर सिर्फ एक एकड़ जमीन बेचने का वादा किया था, लेकिन रजिस्ट्री कागजात में 1.77 एकड़ जमीन दर्ज कर दी गई। इससे पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उन्हें लगता है कि 0.77 एकड़ जमीन मुफ्त में हथिया ली गई है। इस 'महाघोटाले' को देखकर 'जादूगर' पटवारियों और रजिस्ट्री बाबुओं के 'काला जादू' की बात कही जा रही है, और इसका प्रमाण '10114233650.jpg' में छपी खबर को बताया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि अनपढ़ होने का फायदा उठाकर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया है। इस घटना को 'प्रशासनिक गणित' की विफलता और 'डिजिटल इंडिया' के पारदर्शिता के दावों पर 'तमाचा' बताया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या रजिस्ट्री विभाग में कोई जांच-पड़ताल नहीं होती और क्या पटवारी, तहसीलदार तथा रजिस्ट्री बाबू ऐसे 'जादुई' सौदों के दौरान सिर्फ 'मूकदर्शक' बने रहते हैं, या उनकी भी इसमें कोई 'हिस्सेदारी' है। यह मामला सिर्फ जमीन के हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार ने कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों में एक नाबालिग बेटी को धमकी देना, अदालत में विचाराधीन मामले के बावजूद घर तोड़ने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल करना, और 2 लाख रुपये का चेक बाउंस होना शामिल है, जिसे 'धोखाधड़ी' का खुला मामला बताया गया है। इस पूरे प्रकरण को कुछ लोग 'विवादित' कह सकते हैं, लेकिन जब पूरी प्रशासनिक मशीनरी की सांठगांठ नजर आती है, तो यह एक 'सुनियोजित' साजिश अधिक लगती है। पुलिस ने इस मामले की जांच की है और डायल 112 ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन केवल 'थाने बुलाने' या 'सक्षम न्यायालय' जाने की सलाह एक बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। जनता अब मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने और उन 'जादूगर' बाबुओं और पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही है, जिन्होंने इस 'एनालॉग' घोटाले को अंजाम दिया है। यह सवाल उठाया गया है कि क्या यह मामला भी एक और 'व्यंग्यात्मक' कहानी बनकर रह जाएगा, या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 'अशिक्षा' को 'लूटने का लाइसेंस' न समझा जाए।2