जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बालाझार में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जहाँ एक परिवार ने कथित तौर पर सिर्फ एक एकड़ जमीन बेचने का वादा किया था, लेकिन रजिस्ट्री कागजात में 1.77 एकड़ जमीन दर्ज कर दी गई। इससे पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उन्हें लगता है कि 0.77 एकड़ जमीन मुफ्त में हथिया ली गई है। इस 'महाघोटाले' को देखकर 'जादूगर' पटवारियों और रजिस्ट्री बाबुओं के 'काला जादू' की बात कही जा रही है, और इसका प्रमाण '10114233650.jpg' में छपी खबर को बताया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि अनपढ़ होने का फायदा उठाकर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया है। इस घटना को 'प्रशासनिक गणित' की विफलता और 'डिजिटल इंडिया' के पारदर्शिता के दावों पर 'तमाचा' बताया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या रजिस्ट्री विभाग में कोई जांच-पड़ताल नहीं होती और क्या पटवारी, तहसीलदार तथा रजिस्ट्री बाबू ऐसे 'जादुई' सौदों के दौरान सिर्फ 'मूकदर्शक' बने रहते हैं, या उनकी भी इसमें कोई 'हिस्सेदारी' है। यह मामला सिर्फ जमीन के हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार ने कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों में एक नाबालिग बेटी को धमकी देना, अदालत में विचाराधीन मामले के बावजूद घर तोड़ने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल करना, और 2 लाख रुपये का चेक बाउंस होना शामिल है, जिसे 'धोखाधड़ी' का खुला मामला बताया गया है। इस पूरे प्रकरण को कुछ लोग 'विवादित' कह सकते हैं, लेकिन जब पूरी प्रशासनिक मशीनरी की सांठगांठ नजर आती है, तो यह एक 'सुनियोजित' साजिश अधिक लगती है। पुलिस ने इस मामले की जांच की है और डायल 112 ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन केवल 'थाने बुलाने' या 'सक्षम न्यायालय' जाने की सलाह एक बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। जनता अब मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने और उन 'जादूगर' बाबुओं और पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही है, जिन्होंने इस 'एनालॉग' घोटाले को अंजाम दिया है। यह सवाल उठाया गया है कि क्या यह मामला भी एक और 'व्यंग्यात्मक' कहानी बनकर रह जाएगा, या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 'अशिक्षा' को 'लूटने का लाइसेंस' न समझा जाए।
जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बालाझार में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जहाँ एक परिवार ने कथित तौर पर सिर्फ एक एकड़ जमीन बेचने का वादा किया था, लेकिन रजिस्ट्री कागजात में 1.77 एकड़ जमीन दर्ज कर दी गई। इससे पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उन्हें लगता है कि 0.77 एकड़ जमीन मुफ्त में हथिया ली गई है। इस 'महाघोटाले' को देखकर 'जादूगर' पटवारियों और रजिस्ट्री बाबुओं के 'काला जादू' की बात कही जा रही है, और इसका प्रमाण '10114233650.jpg' में छपी खबर को बताया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि अनपढ़ होने का फायदा उठाकर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया है। इस घटना को 'प्रशासनिक गणित' की विफलता और 'डिजिटल इंडिया' के पारदर्शिता के दावों पर 'तमाचा' बताया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या रजिस्ट्री विभाग में कोई जांच-पड़ताल नहीं होती और क्या पटवारी, तहसीलदार तथा रजिस्ट्री बाबू ऐसे 'जादुई' सौदों के दौरान सिर्फ 'मूकदर्शक' बने रहते हैं, या उनकी भी इसमें कोई 'हिस्सेदारी' है। यह मामला सिर्फ जमीन के हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार ने
कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों में एक नाबालिग बेटी को धमकी देना, अदालत में विचाराधीन मामले के बावजूद घर तोड़ने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल करना, और 2 लाख रुपये का चेक बाउंस होना शामिल है, जिसे 'धोखाधड़ी' का खुला मामला बताया गया है। इस पूरे प्रकरण को कुछ लोग 'विवादित' कह सकते हैं, लेकिन जब पूरी प्रशासनिक मशीनरी की सांठगांठ नजर आती है, तो यह एक 'सुनियोजित' साजिश अधिक लगती है। पुलिस ने इस मामले की जांच की है और डायल 112 ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन केवल 'थाने बुलाने' या 'सक्षम न्यायालय' जाने की सलाह एक बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। जनता अब मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने और उन 'जादूगर' बाबुओं और पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही है, जिन्होंने इस 'एनालॉग' घोटाले को अंजाम दिया है। यह सवाल उठाया गया है कि क्या यह मामला भी एक और 'व्यंग्यात्मक' कहानी बनकर रह जाएगा, या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 'अशिक्षा' को 'लूटने का लाइसेंस' न समझा जाए।
- जनता की शिकायतों पर एक विधायक के स्वयं सड़क का निरीक्षण करने पहुंचने से यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।1
- अंबिकापुर स्थित राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय में बुधवार दोपहर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम पहुंच गई, जहां वे वर्ष 2011-12 में उजागर हुए करोड़ों रुपए के फर्नीचर घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाल रहे हैं। यह कार्रवाई घोटाले की जांच को तेज करने और वांछित साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से की जा रही है। करीब 15 वर्ष पूर्व राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत करोड़ों रुपए के फर्नीचर खरीदे गए थे, जिन्हें स्कूलों में वितरित किया गया था। हालांकि, इन फर्नीचर की गुणवत्ता और कीमत को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद जांच में एक बड़ा घोटाला सामने आया। वर्ष 2011-12 में उजागर हुए इस घोटाले में विभाग के 6-7 अधिकारियों के साथ-साथ फर्नीचर और अन्य सामान की आपूर्ति करने वाली 12 फर्मों की मिलीभगत का खुलासा हुआ था। इस मामले में आईपीसी की धारा 420 और 120 (बी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) और 13 (2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच के बावजूद, कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी तक बरामद नहीं हो सके थे। आरोपियों को बचने से रोकने के लिए इस करोड़ों रुपए के फर्नीचर घोटाले की जांच का जिम्मा एसीबी को सौंपा गया था। एसीबी ने विभाग से घोटाले से संबंधित कुछ दस्तावेज मांगे थे, लेकिन विभाग द्वारा उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसी कारण बुधवार दोपहर एसीबी की टीम सीधे कार्यालय पहुंची। टीम द्वारा फिलहाल दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है, हालांकि अब तक क्या मिला है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि यदि ये वांछित दस्तावेज मिल जाते हैं, तो तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा सकेंगे, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।1
- रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत ग्राम पोंडी के जंगल से निकलकर आधा दर्जन से अधिक जंगली हाथियों का एक झुंड खेतों की ओर पहुंच गया है। हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही, हाथी मित्र दल ने आसपास के ग्रामीणों को तुरंत सतर्क किया है और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है। हाथी मित्र दल के अनुसार, हाथियों का यह दल इस समय गांव के समीप खेतों और जंगल क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इसी कारण ग्रामीणों से आग्रह किया गया है कि वे डोरी बीनने, जाम तोड़ने या अन्य वनोपज संग्रहण के लिए जंगल की ओर न जाएं। इसके अतिरिक्त, उन्हें रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचने और हाथियों के नजदीक जाने या उन्हें छेड़ने का कोई भी प्रयास न करने की विशेष सलाह दी गई है। वन विभाग और हाथी मित्र दल लगातार हाथियों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों से किसी भी आपात स्थिति या हाथियों से संबंधित सूचना मिलने पर तत्काल वन विभाग अथवा हाथी मित्र दल को सूचित करने का आग्रह किया गया है। हाथी मित्र दल ने सभी ग्रामीणों से अपील की है, "कृपया सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। हाथियों से पर्याप्त दूरी बनाए रखें तथा जंगल क्षेत्र में जाने से बचें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।"1
- कोरबा जिले के कटघोरा में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह सरकार छत्तीसगढ़ राज्य को अपराध का गढ़ बना रही है।1
- रायगढ़-ओडिशा हाईवे पर शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस अभियान के तहत, नशे की हालत में वाहन चला रहे पाँच ड्राइवरों को पकड़ा गया है। इन सभी पकड़े गए ड्राइवरों पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया है।1
- बारिश के बाद अम्बिकापुर की सड़कों की बदहाली पर तीखा व्यंग्य किया गया है। सोशल मीडिया पोस्ट में कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि बारिश के कारण अम्बिकापुर की सड़कें अब सड़क नहीं, बल्कि मानो एक बड़े स्विमिंग पूल में बदल गई हैं। इस स्थिति को देखते हुए, पोस्ट में यह कहकर मज़ाक उड़ाया गया है कि अब लोगों को इन सड़कों को पार करने के लिए तैर कर जाना पड़ेगा।1
- जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बालाझार में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जहाँ एक परिवार ने कथित तौर पर सिर्फ एक एकड़ जमीन बेचने का वादा किया था, लेकिन रजिस्ट्री कागजात में 1.77 एकड़ जमीन दर्ज कर दी गई। इससे पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उन्हें लगता है कि 0.77 एकड़ जमीन मुफ्त में हथिया ली गई है। इस 'महाघोटाले' को देखकर 'जादूगर' पटवारियों और रजिस्ट्री बाबुओं के 'काला जादू' की बात कही जा रही है, और इसका प्रमाण '10114233650.jpg' में छपी खबर को बताया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि अनपढ़ होने का फायदा उठाकर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया है। इस घटना को 'प्रशासनिक गणित' की विफलता और 'डिजिटल इंडिया' के पारदर्शिता के दावों पर 'तमाचा' बताया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या रजिस्ट्री विभाग में कोई जांच-पड़ताल नहीं होती और क्या पटवारी, तहसीलदार तथा रजिस्ट्री बाबू ऐसे 'जादुई' सौदों के दौरान सिर्फ 'मूकदर्शक' बने रहते हैं, या उनकी भी इसमें कोई 'हिस्सेदारी' है। यह मामला सिर्फ जमीन के हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार ने कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों में एक नाबालिग बेटी को धमकी देना, अदालत में विचाराधीन मामले के बावजूद घर तोड़ने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल करना, और 2 लाख रुपये का चेक बाउंस होना शामिल है, जिसे 'धोखाधड़ी' का खुला मामला बताया गया है। इस पूरे प्रकरण को कुछ लोग 'विवादित' कह सकते हैं, लेकिन जब पूरी प्रशासनिक मशीनरी की सांठगांठ नजर आती है, तो यह एक 'सुनियोजित' साजिश अधिक लगती है। पुलिस ने इस मामले की जांच की है और डायल 112 ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन केवल 'थाने बुलाने' या 'सक्षम न्यायालय' जाने की सलाह एक बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। जनता अब मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने और उन 'जादूगर' बाबुओं और पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही है, जिन्होंने इस 'एनालॉग' घोटाले को अंजाम दिया है। यह सवाल उठाया गया है कि क्या यह मामला भी एक और 'व्यंग्यात्मक' कहानी बनकर रह जाएगा, या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 'अशिक्षा' को 'लूटने का लाइसेंस' न समझा जाए।2