पानीपत-रोहतक हाईवे पर नौल्था में बनने वाला फ्लाईओवर ग्रामीणों के लिए नाक का बाल बन गया है। इस समस्या को लेकर नौल्था, ब्राह्मण माजरा, बॉर्डर, डिडवाड़ी और बलाना गांव के लोगों ने ग्राम सचिवालय में एक बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता खड़े श्री महाराज सोमनाथ ने की, जिसमें सभी ग्रामीणों ने एकमत होकर फैसला लिया कि सरकार को नौल्था में बनने वाले इस फ्लाईओवर को मिट्टी का बनाने के बजाय पिलर पर बनाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके के आसपास करीब 150 इंडस्ट्रीज स्थापित हैं, जहां रोजाना भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। पिलर का पुल बनने से इन गाड़ियों के आने-जाने में सुविधा होगी और यहां स्थित 100 से ज्यादा दुकानों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। यदि बिना पिलर के मिट्टी का पुल बनाया गया, तो ग्रामीणों के साथ-साथ फैक्टरी मालिकों को भी भारी परेशानी होगी। इस क्षेत्र में एक यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, जवाहर नवोदय स्कूल, सरकारी स्कूल, आईटीआई और पानीपत जिले की सबसे बड़ी गौशाला के साथ कई अन्य व्यापारिक संस्थान भी स्थित हैं, जिनका आवागमन इस फैसले से प्रभावित होगा। इन सभी समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने खड़े श्री महाराज अमरनाथ के नेतृत्व में हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से पिलर का फ्लाईओवर बनाने की मांग की है। इसी कड़ी में ग्रामीणों ने 20 जुलाई को जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उनके व्यस्त होने के कारण एसडीम मनदीप सिंह को मांग पत्र सौंपकर केंद्र सरकार से इस मांग को पूरा करने की अपील की गई है। मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने धरना शुरू करने की सख्त चेतावनी दी है।
पानीपत-रोहतक हाईवे पर नौल्था में बनने वाला फ्लाईओवर ग्रामीणों के लिए नाक का बाल बन गया है। इस समस्या को लेकर नौल्था, ब्राह्मण माजरा, बॉर्डर, डिडवाड़ी और बलाना गांव के लोगों ने ग्राम सचिवालय में एक बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता खड़े श्री महाराज सोमनाथ ने की, जिसमें सभी ग्रामीणों ने एकमत होकर फैसला लिया कि सरकार को नौल्था में बनने वाले इस फ्लाईओवर को मिट्टी का बनाने के बजाय पिलर पर बनाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके के आसपास करीब 150 इंडस्ट्रीज स्थापित हैं, जहां रोजाना भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। पिलर का पुल बनने से इन गाड़ियों के आने-जाने में सुविधा होगी और यहां स्थित 100 से ज्यादा दुकानों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। यदि बिना पिलर के मिट्टी का पुल बनाया गया, तो
ग्रामीणों के साथ-साथ फैक्टरी मालिकों को भी भारी परेशानी होगी। इस क्षेत्र में एक यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, जवाहर नवोदय स्कूल, सरकारी स्कूल, आईटीआई और पानीपत जिले की सबसे बड़ी गौशाला के साथ कई अन्य व्यापारिक संस्थान भी स्थित हैं, जिनका आवागमन इस फैसले से प्रभावित होगा। इन सभी समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने खड़े श्री महाराज अमरनाथ के नेतृत्व में हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से पिलर का फ्लाईओवर बनाने की मांग की है। इसी कड़ी में ग्रामीणों ने 20 जुलाई को जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उनके व्यस्त होने के कारण एसडीम मनदीप सिंह को मांग पत्र सौंपकर केंद्र सरकार से इस मांग को पूरा करने की अपील की गई है। मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने धरना शुरू करने की सख्त चेतावनी दी है।
- पानीपत-रोहतक हाईवे पर नौल्था में बनने वाला फ्लाईओवर ग्रामीणों के लिए नाक का बाल बन गया है। इस समस्या को लेकर नौल्था, ब्राह्मण माजरा, बॉर्डर, डिडवाड़ी और बलाना गांव के लोगों ने ग्राम सचिवालय में एक बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता खड़े श्री महाराज सोमनाथ ने की, जिसमें सभी ग्रामीणों ने एकमत होकर फैसला लिया कि सरकार को नौल्था में बनने वाले इस फ्लाईओवर को मिट्टी का बनाने के बजाय पिलर पर बनाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके के आसपास करीब 150 इंडस्ट्रीज स्थापित हैं, जहां रोजाना भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। पिलर का पुल बनने से इन गाड़ियों के आने-जाने में सुविधा होगी और यहां स्थित 100 से ज्यादा दुकानों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। यदि बिना पिलर के मिट्टी का पुल बनाया गया, तो ग्रामीणों के साथ-साथ फैक्टरी मालिकों को भी भारी परेशानी होगी। इस क्षेत्र में एक यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, जवाहर नवोदय स्कूल, सरकारी स्कूल, आईटीआई और पानीपत जिले की सबसे बड़ी गौशाला के साथ कई अन्य व्यापारिक संस्थान भी स्थित हैं, जिनका आवागमन इस फैसले से प्रभावित होगा। इन सभी समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने खड़े श्री महाराज अमरनाथ के नेतृत्व में हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से पिलर का फ्लाईओवर बनाने की मांग की है। इसी कड़ी में ग्रामीणों ने 20 जुलाई को जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उनके व्यस्त होने के कारण एसडीम मनदीप सिंह को मांग पत्र सौंपकर केंद्र सरकार से इस मांग को पूरा करने की अपील की गई है। मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने धरना शुरू करने की सख्त चेतावनी दी है।2
- सरकार इथेनॉल को लेकर एक नई योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत आने वाले समय में इसका इस्तेमाल खाना पकाने के ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसके लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्तावित नीति में सब्सिडी और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया जा सकता है। इथेनॉल को एक ग्रीन फ्यूल माना जाता है, जिसे चीनी और अनाज के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है। हालांकि, जहां एक तरफ इसे खाना पकाने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण E20 को लेकर वाहन मालिकों की चिंताएं भी सामने आती रही हैं।1
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपने 32 वर्षीय पति अतुल पवार को जहरीले सांप से डसवाकर हत्या करने वाली 30 वर्षीय पत्नी दामिनी ने पुलिस पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले और बेखौफ खुलासे किए हैं। दामिनी का कहना है कि उसे अपने पति की मौत का कोई गम नहीं है क्योंकि उसका किसी दूसरी महिला के साथ अफेयर था और टोकने पर वह उसे बुरी तरह पीटता था। दामिनी ने खुद कमाने के बावजूद प्रताड़ना से तंग आकर स्कूल वैन ड्राइवर तुषार से दोस्ती कर ली थी। पति से छुटकारा पाने और उसकी हत्या को एक सामान्य हादसा दिखाने के लिए दामिनी ने मेरठ की ही रविता नाम की महिला के मामले से प्रेरणा ली, जिसने अपने पति को सांप से कटवाया था। दामिनी ने गूगल पर सबसे ज्यादा जहरीले सांप के बारे में सर्च किया और करैत सांप का प्लान बनाया। इस साजिश को अंजाम देने के लिए उसने अपने प्रेमी तुषार के साथ मिलकर 5 लाख रुपये में दो सपेरों, सोनू और उदय को काम पर रखा। तुषार ने 7 जुलाई को सपेरों को ₹15,000 एडवांस भी दे दिए थे और सांप को डिब्बे में बंद कर स्कूल में ही छिपाकर रखा गया था। 16 जुलाई की रात जब अतुल घर आया, तो दामिनी ने उसे दूध में नींद की 12-15 गोलियां मिलाकर दे दीं। अतुल के गहरे नशे में सोने के बाद, 17 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे दामिनी ने तुषार को कॉल किया। इसके बाद तुषार, सोनू और उदय चुपचाप घर के अंदर आए और सोते हुए अतुल के बेड पर चादर के नीचे सांप को दबाकर छोड़ दिया, जिसने अतुल को डस लिया। वारदात को अंजाम देकर आरोपी चले गए, जिसके बाद दामिनी ने शोर मचाकर ससुराल वालों को फोन किया कि उसके पति को सांप ने काट लिया है और वह बेसुध हैं। दामिनी ने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद उनका प्लान अतुल के ₹20 लाख के मेडिकल बीमा और उसकी 36 बीघा जमीन को हासिल करने का था, जिससे वह और तुषार शादी करके अपने बेटे मानिक के साथ एक नई जिंदगी शुरू कर सकें। इससे पहले दामिनी ने ससुराल वालों से ज्योतिष का बहाना बनाकर अतुल के साथ अलग किराए के मकान में रहने का नाटक रचा था, जहां वह स्कूल में बतौर प्रिंसिपल काम करती थी। हालांकि, पुलिस और पोस्टमॉर्टम की बात सामने आने पर वैन ड्राइवर तुषार घबराकर मौके से भाग गया था, जिसे पुलिस ने सर्विलांस के जरिए 17 जुलाई (शुक्रवार) की रात को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शनिवार, 18 जुलाई को दामिनी को भी कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है और मामले की जांच कर रही है।1
- करनाल में डीसी आनंद कुमार शर्मा ने छात्रों के साथ मिलकर मिड डे मील का खाना खाया। डीसी आनंद कुमार शर्मा ने खुद बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया और मिड डे मील के खाने की गुणवत्ता की जांच की।1
- उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सिल्वर नगर धनोरा में स्थानीय लोगों का बहुत ही बुरा हाल है। यहाँ स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों के घरों के अंदर पानी भर जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।1
- यूपी के रहने वाले त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव मिला है। सोमवार सुबह वह पुलिस मुख्यालय में अचेत मिले थे, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ ने सुसाइड किया है। उनका शव फिलहाल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है और पुलिस व फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर जांच कर रही हैं। अनुराग धनखड़ ने अपने करियर के दौरान 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच भी की थी। अनुराग धनखड़ मूल रूप से बागपत शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। वह करीब एक साल पहले अपने पिता सतपाल धनखड़ के निधन पर आखिरी बार अपने गांव आए थे। गांव में उनका पैतृक मकान फिलहाल बंद है और वहां परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता। उनके भाई राजकुमार धनखड़ ने बताया कि उनका परिवार करीब 5 साल पहले गांव से बड़ौत जाकर बस गया था। इस परिवार का प्रशासनिक पृष्ठभूमि से गहरा नाता रहा है; उनके बाबा हीरा सिंह धनखड़ सुपरिटेंडेंट जेलर थे, उनके चाचा सतपाल धनखड़ दो बार ग्राम प्रधान रहे और परिवार के एक अन्य सदस्य जय सिंह भी जेलर रहे हैं। उनकी मां रगबीरी बड़ौत में रहती हैं, जिनकी बेटे के निधन की खबर सुनकर तबीयत बिगड़ गई है। इस दुखद सूचना के बाद परिवार के लोग त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए हैं। डीजीपी अनुराग धनखड़ के परिवार में उनकी पत्नी कल्पना और एक बेटा अभिषेक हैं, जो वर्तमान में कनाडा में रहते हैं। उनके दो भाई हैं, जिनमें से बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होकर दिल्ली में रहते हैं, जबकि छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में खिलौने की दुकान चलाते हैं। अनुराग का जन्म और बचपन बिहारीपुर गांव में ही बीता था, जहां उन्होंने गांव के प्राइमरी स्कूल से पांचवीं तक और फिर सरूरपुर खेड़की के इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी (कृषि) की शिक्षा ली। उनके सहपाठी और मित्र रमेश कुमार ने बताया कि अनुराग वॉलीबॉल के एक अच्छे खिलाड़ी थे और अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दिल्ली चले गए थे।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है।1