पूर्वी चंपारण के पीपराकोठी थाना क्षेत्र के सिरसिया गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 17 वर्षीय किशोर पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। पवन सिरसिया निवासी विजय प्रसाद यादव का पुत्र था। यह हादसा उस समय हुआ जब वह धान की रोपनी में लगे मजदूरों के लिए भोजन लेकर खेत की ओर जा रहा था। इसी बीच अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए पवन एक ताड़ के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया, तभी तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और पवन उसका शिकार हो गया, जिससे उसका शरीर झुलस गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पवन अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था, और उसके पीछे परिवार में तीन छोटे भाई और एक बहन हैं। इस असामयिक मौत से पीड़ित परिवार टूट गया है और पूरे गांव में शोक पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आपदा राहत योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
पूर्वी चंपारण के पीपराकोठी थाना क्षेत्र के सिरसिया गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 17 वर्षीय किशोर पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। पवन सिरसिया निवासी विजय प्रसाद यादव का पुत्र था। यह हादसा उस समय हुआ जब वह धान की रोपनी में लगे मजदूरों के लिए भोजन लेकर खेत की ओर जा रहा था। इसी
बीच अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए पवन एक ताड़ के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया, तभी तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और पवन उसका शिकार हो गया, जिससे उसका शरीर झुलस गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए
भेज दिया है। पवन अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था, और उसके पीछे परिवार में तीन छोटे भाई और एक बहन हैं। इस असामयिक मौत से पीड़ित परिवार टूट गया है और पूरे गांव में शोक पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आपदा राहत योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
- पूर्वी चंपारण के पीपराकोठी थाना क्षेत्र के सिरसिया गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 17 वर्षीय किशोर पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। पवन सिरसिया निवासी विजय प्रसाद यादव का पुत्र था। यह हादसा उस समय हुआ जब वह धान की रोपनी में लगे मजदूरों के लिए भोजन लेकर खेत की ओर जा रहा था। इसी बीच अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए पवन एक ताड़ के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया, तभी तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और पवन उसका शिकार हो गया, जिससे उसका शरीर झुलस गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पवन अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था, और उसके पीछे परिवार में तीन छोटे भाई और एक बहन हैं। इस असामयिक मौत से पीड़ित परिवार टूट गया है और पूरे गांव में शोक पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आपदा राहत योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।3
- पूर्वी चंपारण के कोटवा प्रखण्ड क्षेत्र के सिरसिया में ठनका गिरने से एक युवक की मौत हो गई है। इस हादसे के बाद युवक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।1
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- पूर्वी चम्पारण के पकड़ीदयाल में दवा लेने निकली साली अपने जीजा के साथ लापता हो गई है। घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे परिजनों की चिंता काफी बढ़ गई है। फिलहाल पुलिस लापता दोनों लोगों की तलाश में जुटी हुई है।1
- मुजफ्फरपुर के साहेबगंज CHC परिसर में करीब चार दशक पूर्व बना महिला अस्पताल अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस जर्जर ढांचे को तोड़कर अब यहां नया भवन बनाने की मांग की जा रही है।1
- Post by मोतिहारी जिला के न्यूज़4
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- बिहार के पीपराकोठी स्थित महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का 98वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान परिसर में पौधारोपण, स्वच्छता अभियान और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के दौरान परिसर में पपीता, आम, अमरूद और केले सहित कुल 262 फलदार पौधे लगाए गए। इसके बाद वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और किसानों ने मिलकर परिसर से गाजर घास (पार्थेनियम) हटाकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र सिंह ने भारतीय कृषि के विकास में आईसीएआर के पिछले 98 वर्षों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया और किसानों से आधुनिक व वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में डॉ. एस. के. पुर्बे, डॉ. एस. के. सिंह और डॉ. वी. एस. मीणा ने किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और जलवायु के अनुकूल खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत डॉ. अमोल के. जाधव के नेतृत्व में उच्च तकनीक सब्जी बीज उत्पादन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को सब्जी बीज किट वितरित की गईं। इस पूरे कार्यक्रम में कुल 70 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 40 महिलाएं और 30 पुरुष शामिल थे। इसमें अनुसूचित जाति वर्ग के 40 किसान प्रशिक्षण और बीज किट वितरण से लाभान्वित हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लैमेला ओझा और डॉ. शुभम मुखर्जी ने किया और अंत में सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छ, हरित और वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।4