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उड़ीसा से बिहार जा रहा था गांजा, बलरामपुर में पुलिस ने पकड़ी 50 लाख से ज्यादा की खेप

4 hrs ago
user_Balrampur
Balrampur
Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
4 hrs ago

उड़ीसा से बिहार जा रहा था गांजा, बलरामपुर में पुलिस ने पकड़ी 50 लाख से ज्यादा की खेप

More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
  • उड़ीसा से बिहार जा रहा था गांजा, बलरामपुर में पुलिस ने पकड़ी 50 लाख से ज्यादा की खेप
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    उड़ीसा से बिहार जा रहा था गांजा, बलरामपुर में पुलिस ने पकड़ी 50 लाख से ज्यादा की खेप
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • बलरामपुर जिला प्रसाशन नै किया श्रमदान सेंदुर नदी घाट का की किया गया सफाई बलरामपुर जिला प्रसाशन नै किया श्रमदान सेंदुर नदी घाट का की किया गया सफाई
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    बलरामपुर जिला प्रसाशन नै किया श्रमदान सेंदुर नदी घाट का की किया गया सफाई 
बलरामपुर जिला प्रसाशन नै किया श्रमदान सेंदुर नदी घाट का की किया गया सफाई
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • शाम ढलते ही बेता गांव में जंगली हाथी की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत चिनिया से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनिया थाना क्षेत्र के बेता गांव में गुरुवार देर शाम एक जंगली हाथी के पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। जंगल के किनारे बसे टोले में हाथी के पहुंचने और चिंघाड़ने की आवाज सुनकर ग्रामीण एकजुट हो गए। लोगों ने टॉर्च की रोशनी और हाथों में मशाल लेकर हाथी को गांव से दूर जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया। हाथी की मौजूदगी को लेकर ग्रामीण रातभर सतर्क रहे और बारी-बारी से निगरानी करते रहे। ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगली हाथियों के आतंक से निजात दिलाने तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। खबर लिखे जाने तक ग्रामीणों की एकजुटता के बाद हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया था।
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    शाम ढलते ही बेता गांव में जंगली हाथी की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत
चिनिया से हेमंत कुमार की रिपोर्ट
चिनिया थाना क्षेत्र के बेता गांव में गुरुवार देर शाम एक जंगली हाथी के पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। जंगल के किनारे बसे टोले में हाथी के पहुंचने और चिंघाड़ने की आवाज सुनकर ग्रामीण एकजुट हो गए। लोगों ने टॉर्च की रोशनी और हाथों में मशाल लेकर हाथी को गांव से दूर जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया।
हाथी की मौजूदगी को लेकर ग्रामीण रातभर सतर्क रहे और बारी-बारी से निगरानी करते रहे। ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगली हाथियों के आतंक से निजात दिलाने तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। खबर लिखे जाने तक ग्रामीणों की एकजुटता के बाद हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया था।
    user_Hemant Kumar.  (7294972353)
    Hemant Kumar. (7294972353)
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    5 hrs ago
  • रंका के युवा निशानेबाज अध्ययन सिंह का राष्ट्रीय एसजीएफआई प्रतियोगिता के लिए चयन, रंका अनुमंडल समेत जिला में खुशी इस संबंध में आज गुरूवार तीन बजे अध्ययन सिंह के पिता धिरज कुमार सिंह ने बतलाए कि 70वें एसजीएफआई (School Games Federation of India) के तहत रांची के खेलगांव स्थित तिकैत उमराव शूटिंग रेंज में आयोजित राज्य स्तरीय ओपन ट्रायल में रंका के युवा निशानेबाज अध्ययन सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। अंडर-14 बालक वर्ग में उन्होंने 400 में 298 अंक प्राप्त कर नेशनल एसजीएफआई प्रतियोगिता के लिए अपना चयन सुनिश्चित किया। अध्ययन की इस उपलब्धि से रंका अनुमंडल सहित पूरे गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है। जिले से इस स्तर पर एकमात्र खिलाड़ी का चयन होना गौरव की बात है। अध्ययन सिंह बीपी डीएवी गढ़वा में कक्षा छह के छात्र हैं। वे रंका गढ़ के समाज सेवी मिलन सार एवं निशानेबाज स्वर्गीय सुशील कुमार सिंह के पौत्र तथा धीरज कुमार सिंह के पुत्र हैं। उनके अध्ययन की सफलता पर सतेन्द्र कुमार यादव, डीएवी विद्यालय के शिक्षक आमियो मुखर्जी, शम्भु त्रिपाठी, एसएन दुबे, बुनियादी संकुल संसाधन सेवी देवेंद्र नाथ उपाध्याय आदि अन्य लोगों ने बधाई देते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन की कामना की। लोगों ने कहा कि उनकी उपलब्धि रंका के ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
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    रंका के युवा निशानेबाज अध्ययन सिंह का राष्ट्रीय एसजीएफआई प्रतियोगिता के लिए चयन, रंका अनुमंडल समेत जिला में खुशी

इस संबंध में आज गुरूवार तीन बजे अध्ययन सिंह के पिता धिरज कुमार सिंह ने बतलाए कि
 70वें एसजीएफआई (School Games Federation of India) के तहत  रांची के खेलगांव स्थित तिकैत उमराव शूटिंग रेंज में आयोजित राज्य स्तरीय ओपन ट्रायल में रंका के युवा निशानेबाज अध्ययन सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। अंडर-14 बालक वर्ग में उन्होंने 400 में 298 अंक प्राप्त कर नेशनल एसजीएफआई प्रतियोगिता के लिए अपना चयन सुनिश्चित किया।
अध्ययन की इस उपलब्धि से रंका अनुमंडल सहित पूरे गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है। जिले से  इस स्तर पर एकमात्र खिलाड़ी का चयन होना गौरव की बात है। अध्ययन सिंह बीपी डीएवी गढ़वा में कक्षा छह के छात्र हैं। वे रंका गढ़ के समाज सेवी  मिलन सार एवं निशानेबाज स्वर्गीय सुशील कुमार सिंह के पौत्र तथा धीरज कुमार सिंह के पुत्र हैं। उनके 
अध्ययन की सफलता पर सतेन्द्र कुमार यादव, डीएवी विद्यालय के शिक्षक आमियो मुखर्जी, शम्भु त्रिपाठी, एसएन दुबे, बुनियादी संकुल संसाधन सेवी देवेंद्र नाथ उपाध्याय आदि अन्य लोगों ने बधाई देते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन की कामना की। लोगों ने कहा कि उनकी उपलब्धि रंका के ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • वाड्रफ नगर में चल रहे काले धंधा को उजागर करने वाले आदित्य दुबे /विक्रमादित्य दुबे पे कुछ और नहीं 151 के धारे में अंदर करवाकर जो कि झूठा केश मामला कुछ और हैं दबाने की कोशिश की जा रही क्या पुलिस भी कुछ दोगला पत्रकार का दे रही। साथ कानून पर से उठता भरोसा। अगर पत्रकारिता करने की सजा यह है तो जनता की खबर को गांजा इंजेक्शन कोरेक्स वनरेक्स या तो गलत अपराध के फर्जी वन पट्टा का मैटर उठा कर गलत किया हुं एक बार आप मेरा बैक date का केश तो देखिए
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    वाड्रफ नगर में चल रहे काले धंधा को उजागर करने वाले  आदित्य दुबे /विक्रमादित्य दुबे पे  कुछ और नहीं 151 के धारे में अंदर करवाकर जो कि झूठा केश मामला कुछ और हैं दबाने की कोशिश की जा रही क्या पुलिस भी  कुछ दोगला पत्रकार का दे रही। साथ
कानून पर से उठता भरोसा। अगर पत्रकारिता करने की सजा यह है तो  जनता की खबर को गांजा इंजेक्शन कोरेक्स वनरेक्स  या तो गलत अपराध के फर्जी वन पट्टा  का  मैटर उठा कर गलत किया हुं  एक बार आप मेरा बैक date का केश तो देखिए
    user_जनता की ख़बर
    जनता की ख़बर
    Local News Reporter वाड्रफनगर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    16 hrs ago
  • बिहार के भोजपुरी में बाढ़ आने से शत्रुघन कुमार यादव खेसारी लाल यादव बाढ़ से पूरी लोगों को मदद करते हुए दिख रहे हैं और
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    बिहार के भोजपुरी में बाढ़ आने से शत्रुघन कुमार यादव खेसारी लाल यादव
बाढ़ से पूरी लोगों को मदद करते हुए दिख रहे हैं और
    user_Yaduvanshi karan
    Yaduvanshi karan
    Lawyer दंदई, गढ़वा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • अरुण कुमार गुप्ता जी के प्रवचन, (भाषण) मैं पंडित जी के धोग कथा पर पुरजोर प्रहार किया गया है l भारत में सामाजिक वर्गीकरण (जिसे प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था कहा गया) का सबसे पहला वर्णन ऋग्वेद के 10वें मंडल के 'पुरुष सूक्त' में मिलता है। ऐतिहासिक रूप से इसकी शुरुआत लगभग 1500 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व के बीच मानी जाती है। [1, 2, 3, 4] जिस पदानुक्रम (ऊंच-नीच) और जिन कठोर नियमों की आप बात कर रहे हैं, जहाँ ब्राह्मण (पंडित) को सबसे उच्च व पूजनीय, वैश्य और क्षत्रिय को मध्यम, और शूद्र को सबसे नीचे सेवक के रूप में दर्शाया गया है, वह मुख्य रूप से मनुस्मृति (Manusmriti) नामक ग्रंथ में विस्तार से लिखा गया है। [1, 2] इस व्यवस्था के क्रमिक विकास और ग्रंथों में इसके उल्लेख को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है: 1. सबसे पहला वर्णन: ऋग्वेद (पुरुष सूक्त) ग्रंथ और समय: हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद (Rigveda) के 10वें मंडल के 90वें सूक्त, जिसे 'पुरुष सूक्त' कहा जाता है, में पहली बार चार वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है। [1, 2] क्या लिखा है: इसमें एक विराट पुरुष (ब्रह्मांडीय पुरुष) की कल्पना की गई है और प्रतीकात्मक रूप से बताया गया है कि उसके मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए। [1, 2] मूल स्वरूप: इतिहासकारों और वैदिक विद्वानों के अनुसार, ऋग्वेद के समय यह व्यवस्था जन्म पर आधारित नहीं थी, बल्कि गुण और कर्म (Profession) पर आधारित थी। समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्यों का बंटवारा किया गया था, न कि ऊंच-नीच तय करने के लिए। [1, 2, 3, 4] 2. कठोर सामाजिक पदानुक्रम (ऊंच-नीच): मनुस्मृति ग्रंथ और समय: समय बीतने के साथ उत्तर-वैदिक काल और गुप्त काल के आते-आते यह व्यवस्था बदलने लगी। लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व (2nd Century BCE) से दूसरी शताब्दी ईस्वी (2nd Century CE) के दौरान मनुस्मृति (Manusmriti) नाम का कानूनी/सामाजिक ग्रंथ संकलित किया गया。 [1] क्या लिखा है: मनुस्मृति में सामाजिक पदानुक्रम को कानूनी और धार्मिक रूप से बहुत कठोर बना दिया गया। इसी किताब में यह व्यवस्था दी गई कि: ब्राह्मण (उच्च वर्ण): इन्हें सबसे पवित्र, बौद्धिक मार्गदर्शक और पूजनीय माना गया क्योंकि वे धार्मिक अनुष्ठान और वेदों का अध्ययन करते थे। क्षत्रिय और वैश्य (मध्यम वर्ण): राजा/योद्धा (क्षत्रिय) और व्यापारी/किसान (वैश्य) को समाज के मध्य भाग (सुरक्षा और अर्थव्यवस्था) के रूप में रखा गया। शूद्र (निम्न वर्ण): इन्हें पदानुक्रम में सबसे नीचे रखा गया और इनका मुख्य कर्तव्य बाकी के तीन वर्णों की सेवा करना बताया गया। इन्हें वेदों के अध्ययन और कई सामाजिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया। [1, 2, 3, 4, 5, 6] वर्ण और जाति में अंतर यह ध्यान देना जरूरी है कि मूल ग्रंथों में जिसे 'वर्ण' (चार मुख्य वर्ग) कहा गया था, वह बाद के कालखंडों में हजारों स्थानीय और जन्म-आधारित 'जातियों' (Jatis) में टूट गया। मध्यकाल और आधुनिक काल (ब्रिटिश जनगणना के दौरान) आते-आते यह व्यवस्था पूरी तरह जन्मजात और अत्यधिक भेदभावपूर्ण हो गई। भारतीय संविधान के निर्माण के समय डॉ. बी.आर. आंबेडकर और अन्य महापुरुषों ने इस भेदभाव और मनुस्मृति की इन असमान नीतियों की कड़ी आलोचना की थी।
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    अरुण कुमार गुप्ता जी के प्रवचन, (भाषण) मैं पंडित जी के धोग कथा पर पुरजोर प्रहार किया गया है l
भारत में सामाजिक वर्गीकरण (जिसे प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था कहा गया) का सबसे पहला वर्णन ऋग्वेद के 10वें मंडल के 'पुरुष सूक्त' में मिलता है। ऐतिहासिक रूप से इसकी शुरुआत लगभग 1500 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व के बीच मानी जाती है। [1, 2, 3, 4]
जिस पदानुक्रम (ऊंच-नीच) और जिन कठोर नियमों की आप बात कर रहे हैं, जहाँ ब्राह्मण (पंडित) को सबसे उच्च व पूजनीय, वैश्य और क्षत्रिय को मध्यम, और शूद्र को सबसे नीचे सेवक के रूप में दर्शाया गया है, वह मुख्य रूप से मनुस्मृति (Manusmriti) नामक ग्रंथ में विस्तार से लिखा गया है। [1, 2]
इस व्यवस्था के क्रमिक विकास और ग्रंथों में इसके उल्लेख को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. सबसे पहला वर्णन: ऋग्वेद (पुरुष सूक्त)
ग्रंथ और समय: हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद (Rigveda) के 10वें मंडल के 90वें सूक्त, जिसे 'पुरुष सूक्त' कहा जाता है, में पहली बार चार वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है। [1, 2]
क्या लिखा है: इसमें एक विराट पुरुष (ब्रह्मांडीय पुरुष) की कल्पना की गई है और प्रतीकात्मक रूप से बताया गया है कि उसके मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए। [1, 2]
मूल स्वरूप: इतिहासकारों और वैदिक विद्वानों के अनुसार, ऋग्वेद के समय यह व्यवस्था जन्म पर आधारित नहीं थी, बल्कि गुण और कर्म (Profession) पर आधारित थी। समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्यों का बंटवारा किया गया था, न कि ऊंच-नीच तय करने के लिए। [1, 2, 3, 4]
2. कठोर सामाजिक पदानुक्रम (ऊंच-नीच): मनुस्मृति
ग्रंथ और समय: समय बीतने के साथ उत्तर-वैदिक काल और गुप्त काल के आते-आते यह व्यवस्था बदलने लगी। लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व (2nd Century BCE) से दूसरी शताब्दी ईस्वी (2nd Century CE) के दौरान मनुस्मृति (Manusmriti) नाम का कानूनी/सामाजिक ग्रंथ संकलित किया गया。 [1]
क्या लिखा है: मनुस्मृति में सामाजिक पदानुक्रम को कानूनी और धार्मिक रूप से बहुत कठोर बना दिया गया। इसी किताब में यह व्यवस्था दी गई कि:
ब्राह्मण (उच्च वर्ण): इन्हें सबसे पवित्र, बौद्धिक मार्गदर्शक और पूजनीय माना गया क्योंकि वे धार्मिक अनुष्ठान और वेदों का अध्ययन करते थे।
क्षत्रिय और वैश्य (मध्यम वर्ण): राजा/योद्धा (क्षत्रिय) और व्यापारी/किसान (वैश्य) को समाज के मध्य भाग (सुरक्षा और अर्थव्यवस्था) के रूप में रखा गया।
शूद्र (निम्न वर्ण): इन्हें पदानुक्रम में सबसे नीचे रखा गया और इनका मुख्य कर्तव्य बाकी के तीन वर्णों की सेवा करना बताया गया। इन्हें वेदों के अध्ययन और कई सामाजिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया। [1, 2, 3, 4, 5, 6]
वर्ण और जाति में अंतर
यह ध्यान देना जरूरी है कि मूल ग्रंथों में जिसे 'वर्ण' (चार मुख्य वर्ग) कहा गया था, वह बाद के कालखंडों में हजारों स्थानीय और जन्म-आधारित 'जातियों' (Jatis) में टूट गया। मध्यकाल और आधुनिक काल (ब्रिटिश जनगणना के दौरान) आते-आते यह व्यवस्था पूरी तरह जन्मजात और अत्यधिक भेदभावपूर्ण हो गई। भारतीय संविधान के निर्माण के समय डॉ. बी.आर. आंबेडकर और अन्य महापुरुषों ने इस भेदभाव और मनुस्मृति की इन असमान नीतियों की कड़ी आलोचना की थी।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    6 hrs ago
  • बिहार में बाढ़ आने के कारण शत्रुघन कुमार यादव उर्फ खेसारी लाल यादव बिहार में बाढ़ से पीड़ित लोगों के लिए मदद करते हुए
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    बिहार में बाढ़ आने के कारण शत्रुघन कुमार यादव उर्फ खेसारी लाल यादव
बिहार में बाढ़ से पीड़ित लोगों के लिए मदद करते हुए
    user_Yaduvanshi karan
    Yaduvanshi karan
    Lawyer दंदई, गढ़वा, झारखंड•
    9 hrs ago
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