बैतूल जिले के विकासखंड में स्थित ग्राम पंचायत धुडिया में 40 लाख रुपये की लागत से बन रहा अमृत सरोवर तालाब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। ग्रामीणों ने इस निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिले के अधिकारियों से शिकायत की है। ग्रामीणों ने पहले विकासखंड के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और जनपद पंचायत सीईओ से शिकायत की थी। इसके बाद उन्होंने बैतूल जिले में जनसुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर और जिला जनपद पंचायत सीईओ के समक्ष भी अपनी बात रखी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा कार्यस्थल पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, और सबसे गंभीर आरोप यह है कि जांच अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। अमृत सरोवर योजना के मुख्य नियमों के अनुसार, तालाब की जल धारण क्षमता उच्च होनी चाहिए, निर्माण कार्य में स्थानीय ग्रामीण और पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। साथ ही, तालाब के चारों ओर पक्के घाट, सीढ़ियां बनाकर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाता है और इसका उपयोग सिंचाई तथा वैज्ञानिक मछली पालन जैसे आर्थिक उद्देश्यों के लिए भी होता है। निर्माण में स्थानीय काली मिट्टी, मोरम, बजरी, पत्थर की पिचिंग, सीमेंट-कंक्रीट और ईंटें जैसी प्रमुख सामग्री का उपयोग होता है, वहीं मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बरगद, पीपल, नीम और बांस के पौधे लगाए जाते हैं। ग्रामीणों की शिकायत से स्पष्ट होता है कि कार्यस्थल पर इन सभी नियमों और सामग्री के उपयोग संबंधी प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है।
बैतूल जिले के विकासखंड में स्थित ग्राम पंचायत धुडिया में 40 लाख रुपये की लागत से बन रहा अमृत सरोवर तालाब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। ग्रामीणों ने इस निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिले के अधिकारियों से शिकायत की है। ग्रामीणों ने पहले विकासखंड के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और जनपद पंचायत सीईओ से शिकायत की थी। इसके बाद उन्होंने बैतूल जिले में जनसुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर और जिला जनपद पंचायत सीईओ के समक्ष भी अपनी बात रखी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा कार्यस्थल पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, और सबसे गंभीर आरोप यह है कि जांच अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। अमृत सरोवर योजना के
मुख्य नियमों के अनुसार, तालाब की जल धारण क्षमता उच्च होनी चाहिए, निर्माण कार्य में स्थानीय ग्रामीण और पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। साथ ही, तालाब के चारों ओर पक्के घाट, सीढ़ियां बनाकर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाता है और इसका उपयोग सिंचाई तथा वैज्ञानिक मछली पालन जैसे आर्थिक उद्देश्यों के लिए भी होता है। निर्माण में स्थानीय काली मिट्टी, मोरम, बजरी, पत्थर की पिचिंग, सीमेंट-कंक्रीट और ईंटें जैसी प्रमुख सामग्री का उपयोग होता है, वहीं मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बरगद, पीपल, नीम और बांस के पौधे लगाए जाते हैं। ग्रामीणों की शिकायत से स्पष्ट होता है कि कार्यस्थल पर इन सभी नियमों और सामग्री के उपयोग संबंधी प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है।
- मुलताई क्षेत्र के ग्राम चिखलीकला में सोमवार दोपहर लगभग 3:20 बजे शिवबा बधिए के खेत में बने जानवरों के कोठे में अचानक आग लग गई। इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आग की चपेट में आने से सिंचाई पाइप, कृषि उपकरण, गोबर खाद और जलाऊ लकड़ी जलकर खाक हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही नगर परिषद की फायर टीम तत्काल मौके पर पहुंची। फायर ड्राइवर राहुल चंडालिया और फायरमैन गिरीश पिपले तथा सुमित पुरी ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया, जिससे आग को आसपास के क्षेत्र में फैलने से रोका जा सका। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना नहीं है, हालांकि किसान को कृषि सामग्री का नुकसान हुआ है।1
- मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के द्वितीय चरण में 25 मई, 2026 को गंगा दशहरा के अवसर पर विकासखंड पांढुर्णा की ग्राम पंचायत खेड़ीकला के ग्राम खेड़ी पंडेवार में एक भव्य गंगा दशहरा उत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जन जागरूकता फैलाना था। राज्यसभा सांसद श्रीमती माया सिंह नारोलिया ने दीप प्रज्वलित कर और कन्या पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जहाँ अतिथियों का स्वागत पर्यावरण का संदेश देते हुए पौधों के माध्यम से किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ और जनपद पंचायत सीईओ श्री विनय प्रकाश ठाकुर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए जल स्रोतों को बचाने और उन्हें पुनर्जीवित करने की आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सभी से वर्षा जल संचयन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने ग्राम खेड़ी पंडेवार में तालाब के गहरीकरण के लिए स्वयं प्रेरित होकर न केवल श्रमदान किया, बल्कि अर्थदान देकर भी एक अनूठी मिसाल पेश की। ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के इस प्रयास से यह आयोजन एक जन आंदोलन में बदल गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में अपर कलेक्टर श्री नीलमणि अग्निहोत्री, जनपद अध्यक्ष श्रीमती लता बाई तुमडाम, वाटर हीरो श्री नीरज वानखेड़े और जन अभियान परिषद के ब्लॉक समन्वयक श्री दिलीप आठनेरे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- हरदा के टिमरनी नगर में सकल जैन समाज ने हाल ही में हुई जैन आर्यिकाओं की सड़क दुर्घटना में मौत पर गहरा दुःख और रोष व्यक्त किया है। समाज के महिला, पुरुषों और बच्चों ने एक मौन रैली निकालकर इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम एसडीएम संजीव कुमार नागू को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि चारपहिया वाहन चालक द्वारा लापरवाही से टक्कर मारे जाने के कारण आर्यिकाओं का दुःखद निधन हुआ। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि समाज इस घटना को मात्र एक सड़क दुर्घटना नहीं मान रहा, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिपों के आधार पर इसमें गहरी आशंका और चिंता व्याप्त है। जैन समाज ने इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि जैन साधु-संत निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते, बल्कि समाज में शांति और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं एवं हमले संपूर्ण समाज के लिए चिंताजनक विषय हैं। सकल जैन समाज ने इस संबंध में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिसमें एसआईटी या न्यायिक जांच शामिल हो, सभी सीसीटीवी, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं, दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए, और यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें तो कठोर धाराएं लगाई जाएं। दूसरी मांग 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू करने की है, जिसमें विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए। तीसरी मांग 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की है, ताकि साधु-संतों के लिए मार्ग पर प्रशासनिक समन्वय, पुलिस सहयोग एवं ट्रैफिक नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।4
- अखिल भारतीय राज्य सरकारी चतुर्थ श्रेणी महासंघ के आह्वान पर, मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ जिला पांढुर्णा ने सौंसर में खंड चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल सौंसर को 11 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। संघ के जिला सचिव श्री राजु खंडाईत ने बीसीएम श्रीराम अहिरवार की उपस्थिति में यह ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन में आशा कार्यकर्ता और आशा सहयोगियों के लिए प्रतिमाह ₹30,000 वेतन सहित विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों की मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगों में 8वें वेतन आयोग में ग्रुप डी कर्मचारियों को न्यूनतम 40% वेतन वृद्धि, राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान 8वें वेतन आयोग का लाभ, और श्रम विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, रिक्त ग्रुप डी पदों पर सीधी भर्ती, आंगनवाड़ी, आशा, मध्यान्ह भोजन रसोईया और कोटवार कर्मचारियों को न्यूनतम ₹30,000 वेतन, पंचायत एवं नगरीय निकाय कर्मचारियों को शासकीय कर्मचारी घोषित करना, तथा आउटसोर्स भर्ती पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। संघ ने 10 वर्ष पूर्ण कर चुके दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारियों के नियमितीकरण, सभी राज्यों में ग्रुप डी कर्मचारियों के लिए समान वेतन एवं भत्ते, नई पेंशन योजना को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने, और 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के लिए खाद्यान्न व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की है। संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि इन मांगों को लेकर आगामी 7 जून 2026, रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर प्रांगण में राष्ट्रीय स्तर पर धरना-आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मध्यान्ह भोजन रसोईया, कोटवार, आउटसोर्स कर्मचारी, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन कर्मचारी और सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को लेकर आवाज़ बुलंद की जाएगी। संघ पदाधिकारियों ने सभी से अधिक से अधिक संख्या में नई दिल्ली पहुंचकर इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र वाघमारे, संघ के मार्गदर्शक अनंता तायवाडे, प्रविण ढोमने, भागचंद वाहने, ललिता भांगे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कल्पना गुर्वे, माया बडवाईक, योगिता काकड़े, रामरती उईके, इंदिरा कुमरे, अनु इवनाती, सुनिता पंडे, सपना जैवार जैसी कई आशा कार्यकर्ता एवं सहयोगी भी मौजूद थीं।2
- नर्मदापुरम जिले के पिपरिया तहसील में जनसुनवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। ग्राम धनश्री का एक ग्रामीण जब अपनी शिकायत लेकर पहुँचा, तो मुख्यमंत्री पर की गई किसी टिप्पणी को लेकर वहाँ मौजूद अधिकारी और कर्मचारी इस कदर नाराज़ हुए कि उन्होंने अपना आपा खो दिया। मदद करने और बात सुनने की बजाय, ग्रामीण को सरेआम भद्दी गालियाँ दी गईं और उसे धक्के मारकर कक्ष से बाहर निकाल दिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिससे सरकारी तंत्र के इस रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह पूछा जा रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने की सज़ा सरेआम गाली देना है और इस अधिकारी पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।1
- मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया और अप्रत्याशित मोड़ सामने आया है, जहाँ एक पूर्व भाजपा विधायक ने खुद को 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जोड़ लिया है।1
- मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, चिचोली के चिरापाटला के पास इथेनॉल से भरा एक टैंकर अनियंत्रित हो गया। इस घटना के कारण, एक व्यक्ति 'प्लेंडो' घायल हो गए।1
- लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने सोमवार, 25 मई 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जनरल वार्ड, महिला वार्ड, ड्रेसिंग वार्ड सहित अन्य वार्डों का जायजा लिया और भर्ती मरीजों से संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके अतिरिक्त, उन्होंने रसोई शाला और प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया तथा उनके संचालन के विषय में मुलताई के बीएमओ से विवरण प्राप्त किया। श्री पटेल ने पोषण पुनर्वास केंद्र का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद निर्देश दिए कि केंद्र का प्रभावी संचालन किया जाए। उन्होंने कहा कि फील्ड से कुपोषण के प्रकरणों को तत्परता से पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भेजा जाए और तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने कुपोषण को जड़ से समाप्त करने की दिशा में प्रभावी प्रयास करने पर जोर दिया। इस दौरान, उन्होंने बालक इंद्रेश कोड़ी से बातचीत की और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। उन्होंने बच्चों की डाइट और फील्ड पर उनकी पहचान कैसे की जाती है, इस संबंध में जानकारी ली और प्राथमिकता के आधार पर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में शिफ्ट करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षक श्री वीरेन्द्र जैन, सीएमएचओ डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े, एसडीएम श्री राजीव कहार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।3
- मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत, आज 25 मई 2026 को सौसर में सामाजिक नवांकुर संस्था यूथ ऑफ सौसर एसोसिएशन द्वारा गंगा दशहरा उत्सव मनाया गया। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन के निर्देशानुसार घोघरा वाटरफॉल में आयोजित किया गया। संस्था के सदस्यों ने वाटरफॉल के घाट के आसपास फैली पन्नी और कचरे की सफाई करके स्वच्छता का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस सफाई अभियान के बाद, कार्यकर्ताओं ने गंगाजल भरकर प्रसिद्ध शिव गुफा मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया और विधि-विधान से माँ गंगा का पूजन संपन्न किया। इस अवसर पर जनमानस को नदियों को स्वच्छ और संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में योगेश सोमकुंवर, गोपाल कोठे, हेमंत हिवरकर, अश्विनी सहारे, पंकज रंगारे, वृक्षमित्र अरुण गुरुजी ठाकरे, दिनेश पाटिल, सुभाष हरदे, आरती हरदे, सुनील डोंगरे, सुभाष ठाकरे, दिनेश सोमकुंवर, शारदा निकम, सीएमसीएलडीपी छात्र निधि लोनकर, राहुल नागपुरे, अमित सातपुते, माधुरी डोंगरे, पुरुषोत्तम पवनकर सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल रहे।1