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Sanjay markam
More news from Chhattisgarh and nearby areas
- Post by Sanjay markam2
- @ ग्राम पंचायत :-चरकई में आज 26 जनवरी के उपलक्ष्य में 77 वां गढ़तंत्र दिवस बड़ी ही उल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया,,, जय - हिन्द🇮🇳🇮🇳🇮🇳 👏👏👏🙏@2
- कांकेर मुख्यधारा में लौटे 55 पुनर्वासी नक्सलियों ने पहली बार देखा गणतंत्र दिवस परेड, देशभक्ति फिल्म1
- *भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी जी ने प्रदेश वासियों को दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।*1
- Post by Pk Sir1
- किरंदुल एनएमडीसी में 77वां स्वतंत्रता दिवस समारोह, अव्यवस्था ने फीका किया जश्न — जनता में भारी रोष रिपोर्ट/ रवि सरकार किरंदुल स्थित एनएमडीसी परिसर में 77वां स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, लेकिन आयोजन की व्यवस्थाओं ने पूरे जश्न की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जहाँ समानता,सम्मान और जनभागीदारी की भावना झलकनी चाहिए थी,वहीं कार्यक्रम स्थल पर इसके बिल्कुल विपरीत दृश्य देखने को मिले। हालात ऐसे थे कि उपस्थित जनता को ऐसा महसूस हुआ मानो वे आधुनिक भारत में नहीं बल्कि किसी पुराने सामंती दौर में पहुंच गए हों, कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था इस कदर असंतुलित नजर आई कि एक ओर मंच के सामने चुनिंदा लोग छांव और आरामदायक स्थानों पर बैठे दिखे, जबकि दूसरी ओर सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक तेज धूप में खड़े होकर कार्यक्रम देखने को मजबूर रहे, यह स्थिति बिल्कुल राजा और प्रजा जैसी प्रतीत हो रही थी जहाँ सुविधाएँ कुछ गिने-चुने लोगों तक ही सीमित रह गई थीं और आम जनता केवल मूक दर्शक बनकर रह गई, दर्शकों की भीड़ इस तरह से बेतरतीब खड़ी थी कि पीछे मौजूद लोगों को मंच पर हो रही गतिविधियाँ बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रही थीं चारों ओर से लोगों का घेरा ऐसा लग रहा था मानो कोई *मुर्गी बाजार* लगा हो,जहाँ न कोई लाइन थी, न कोई दिशा-निर्देश और न ही कोई सुरक्षा या व्यवस्था करने वाला जिम्मेदार व्यक्ति कार्यक्रम देखने आए लोग आपस में एक-दूसरे से ऊँचाई लेकर देखने का प्रयास कर रहे थे, फिर भी अधिकांश लोग कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि मंच पर क्या हो रहा है, सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन में न तो एलसीडी स्क्रीन की व्यवस्था की गई थी और न ही ध्वनि व्यवस्था ऐसी थी कि दूर खड़े लोग भाषण या कार्यक्रम को सुन सकें,दर्शक दीर्घा में बैठे या खड़े लोग न तो झंडा फहराने का दृश्य ठीक से देख पाए और न ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों या अतिथियों के संबोधन को समझ पाए इससे आम जनता में गहरी निराशा और नाराजगी देखने को मिली, इस पूरी अव्यवस्था को लेकर *किरंदुल नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने मौके पर ही स्पष्ट और कड़ी प्रतिक्रिया दी*,उन्होंने जनता की परेशानी को देखते हुए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्था से जनता को आखिर क्या फायदा मिल रहा है, उन्होंने कहा कि लोग सुबह से कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ परेशानी, धूप और अव्यवस्था ही झेलनी पड़ी, *पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र और राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर प्रबंधन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, ऐसे आयोजन जनता के लिए होते हैं,न कि केवल प्रबंधन या अधिकारियों को दिखाने के लिए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा कार्यक्रम केवल एनएमडीसी प्रबंधन के लिए आयोजित किया गया हो,जबकि आम जनता को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया*, उन्होंने आगे कहा कि दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों को न तो मंच साफ दिखाई दे रहा था और न ही यह समझ में आ रहा था कि कार्यक्रम किस चरण में है। सूचना,दृश्य और श्रव्य व्यवस्था के अभाव में पूरा आयोजन अपनी गरिमा खो बैठा यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है, दुखी मन से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार के किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में सुसज्जित,सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए, उन्होंने यह भी कहा कि वे इस विषय को गंभीरता से लेते हुए एनएमडीसी प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष पत्र के माध्यम से तथा मौखिक रूप से अपनी बात रखेंगे, ताकि आगे किसी भी राष्ट्रीय पर्व पर जनता को इस तरह की अव्यवस्था और अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े, *अंत में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल रस्म अदायगी का दिन नहीं है,बल्कि यह जनता के सम्मान, समानता और सहभागिता का प्रतीक है, यदि ऐसे आयोजनों में आम नागरिक ही उपेक्षित महसूस करें, तो यह सोचने का विषय है और इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है*1
- छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी अपने गृहग्राम पाकेला की निवासी रीना के अल्पायु में मृत्यु होने पर क्रियाकर्म कार्यक्रम में स्व.रीना को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंची वहां उनके परिजनों से मिलकर भावुक हुई दीपिका ने उनसे कहा कि मैं रीना की कमी तो पूरी नहीं कर सकती पर मुझे अपनी बेटी समझो मैं आपके हर दुःख में आपके साथ खड़ी हूँ, जो संभव होगा वह मदद करती रहूंगी।1
- कांकेर रियासतकालीन ऐतिहासिक प्रवेश द्वार के जीर्णोद्धार का लोकार्पण1