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श्योपुर के श्री हजारेश्वर मेला रंगमंच पर आयोजित सावन थीम आधारित सांस्कृतिक संध्या में कलेक्टर शीला दाहीमा ने अपनी लेखनी और सुरों का जादू बिखेरा। इस सांस्कृतिक आयोजन में उन्होंने स्वयं का लिखा हुआ एक शानदार गीत गाया, जिसकी भावपूर्ण और मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद सभी दर्शकों का दिल जीत लिया। सावन के रंग में रंगे इस विशेष आयोजन के दौरान कलेक्टर की यह प्रस्तुति मुख्य आकर्षण का केंद्र रही और उनकी इस मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
Irsad News
श्योपुर के श्री हजारेश्वर मेला रंगमंच पर आयोजित सावन थीम आधारित सांस्कृतिक संध्या में कलेक्टर शीला दाहीमा ने अपनी लेखनी और सुरों का जादू बिखेरा। इस सांस्कृतिक आयोजन में उन्होंने स्वयं का लिखा हुआ एक शानदार गीत गाया, जिसकी भावपूर्ण और मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद सभी दर्शकों का दिल जीत लिया। सावन के रंग में रंगे इस विशेष आयोजन के दौरान कलेक्टर की यह प्रस्तुति मुख्य आकर्षण का केंद्र रही और उनकी इस मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
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- श्योपुर जिले के ग्राम ढोटी स्थित चंबल मुख्य दाहिनी नहर पर सोमवार को क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने कोटा बैराज से तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पांच घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने बताया कि क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होने और जर्जर बिजली व्यवस्था के कारण खरीफ की मुख्य फसल धान सहित अन्य फसलों की बुवाई और रोपाई प्रभावित हो रही है। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर दी है, उनकी फसल अब सूखने की स्थिति में पहुंच गई है, जबकि सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी काफी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले 10 जुलाई को भी कलेक्ट्रेट श्योपुर में धरना-प्रदर्शन करके चंबल मुख्य दाहिनी नहर में कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने की मांग का ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक पानी नहीं छोड़ा गया। किसानों ने इसे मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के किसानों के साथ सरासर अन्याय और भेदभाव बताया है, क्योंकि गांधी सागर बांध से राजस्थान के बूंदी और कोटा जिले के किसानों के लिए पहले ही पानी छोड़ा जा चुका है। प्रदर्शन के दौरान जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री चैतन्य चौहान धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने किसानों को विभाग द्वारा 10 और 13 जुलाई को कलेक्टर के माध्यम से शासन को भेजे गए पत्र दिखाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द पानी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बीच पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने सिंचाई मंत्री तुलसी सिलावट व जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात कर तत्काल पानी छोड़ने की मांग रखी। इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चंबल मुख्य दाहिनी नहर में तुरंत पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कोटा बैराज से चंबल मुख्य दाहिनी नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो धान और सोयाबीन समेत खरीफ की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही पानी नहीं छोड़ा गया तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व चरणबद्ध रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।4
- श्योपुर के श्री हजारेश्वर मेला रंगमंच पर आयोजित सावन थीम आधारित सांस्कृतिक संध्या में कलेक्टर शीला दाहीमा ने अपनी लेखनी और सुरों का जादू बिखेरा। इस सांस्कृतिक आयोजन में उन्होंने स्वयं का लिखा हुआ एक शानदार गीत गाया, जिसकी भावपूर्ण और मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद सभी दर्शकों का दिल जीत लिया। सावन के रंग में रंगे इस विशेष आयोजन के दौरान कलेक्टर की यह प्रस्तुति मुख्य आकर्षण का केंद्र रही और उनकी इस मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।1
- सवाई माधोपुर के खंडार में बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर गुस्साए ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला जड़ दिया है। यहाँ स्कूल में पढ़ाई कर रहे 300 विद्यार्थियों पर सिर्फ 5 शिक्षक ही तैनात हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शिक्षकों की इस भारी कमी से नाराज होकर ग्रामीणों ने अब सीधे शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।1
- सवाई माधोपुर के खंडार उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत नायपुर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सावटा में शिक्षकों की कमी और उनकी अनियमित उपस्थिति से गुस्साए ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही, विद्यालय में तैनात कुछ शिक्षक भी समय पर नहीं आते और न ही अपनी नियमित उपस्थिति दर्ज करते हैं। इस समस्या को लेकर ग्रामीण पूर्व में कई बार सीबीईओ खंडार, तहसीलदार, एसडीएम और खंडार विधायक को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी लापरवाही के विरोध में ग्रामीणों ने आज स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर अपना कड़ा विरोध जताया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्मिकों की नियुक्ति और अन्य मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।1
- सवाई माधोपुर जिले के ईसरदा गांव में आबादी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के मुख्य मार्ग से दिनभर भारी वाहन गुजरते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सड़क पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की आवाजाही अधिक होने के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा, तेज रफ्तार ट्रकों और अन्य भारी वाहनों से लगातार उड़ने वाली धूल, शोर और सड़क सुरक्षा की समस्या भी गंभीर रूप ले रही है। ग्रामीणों ने ज्ञापन के जरिए प्रशासन से मांग की है कि भारी वाहनों के लिए या तो कोई वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया जाए या फिर आबादी क्षेत्र में उनके प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की है ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा में कल गूगल अकाउंट आने वाला है। इसे लेकर अब यह देखने का इंतजार किया जा रहा है कि इस पर क्या रिएक्शन होता है।1
- ग्रामीण अंचल में रहने वाले लोगों, अपने रिश्तेदारों और गाँव के लोगों तक इसे साझा करने और पूरा देखने का विनम्र निवेदन किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और ट्रक ड्राइवरों के इस वीडियो को सभी लोगों तक पहुँचाने की अपील की गई है।1
- नदबई के करेली गांव में जलभराव, कच्चे नालों, कीचड़ और बंद रास्तों की गंभीर समस्याओं से परेशान ग्रामीणों ने सुमित अंबेश टीम के नेतृत्व में एक महाआंदोलन किया। इस आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याओं को बेहद मजबूती के साथ रखा। आंदोलन की खबर मिलते ही तहसीलदार तुरंत मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से सीधे वार्ता की। वार्ता के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। प्रशासन ने जलभराव वाले स्थानों से तुरंत पानी निकासी की व्यवस्था शुरू कराने और कच्चे रास्तों का माप लेकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया। इस सफलता पर ग्रामीणों ने इसे जनता की एकजुटता और संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। वहीं, सुमित अंबेश ने स्पष्ट किया कि जब तक गांव की सभी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक जनहित में यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।1