यहाँ एक गली में पिछले लगभग पाँच सालों से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। 5 अप्रैल 2026 को एक बार सफाई कर्मचारी आए भी थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ़ अपना समय बिताया और वीडियो बनाकर चले गए, यह कहते हुए कि नाली इससे ज़्यादा साफ़ नहीं हो सकती। आज 22 जून 2026 तक भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है और कोई सफाई कर्मचारी वहाँ नहीं पहुँचता है, जिससे सड़क पर घास उग गई है। स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को लेकर एसडीएम को कम से कम सात-आठ बार लिखित आवेदन दिए हैं और तहसील दिवस पर भी तीन-चार बार शिकायत की है, लेकिन एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की है। एसडीएम को 15 से 20 बार फोन भी किया जा चुका है। लोगों का कहना है कि उनके बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है, मेहमानों को भी दिक्कत होती है, और घर से बाहर निकलते ही बच्चे तो क्या, बड़े भी कीचड़ में गिरकर निकलते हैं। 9 फुट की सड़क अब 5 फुट की रह गई है और उसके दोनों किनारों पर मिट्टी जमा हो गई है, जिससे नाली और सड़क दोनों ही अवरुद्ध हो गए हैं। जब कार्रवाई के लिए एसडीएम से संपर्क किया गया, तो एसडीएम ने कथित तौर पर कहा कि "यह तानाशाही या यहां पर राजनीति नहीं चलती।" इस पर निवासियों का कहना है कि तानाशाही और राजनीति तो एसडीएम कर रहे हैं, जबकि उन्हें केवल निर्माण या समाधान चाहिए। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, एक भी अधिकारी या सफाई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा है। निवासियों ने बताया है कि उनके पास एसडीएम को सूचना दिए जाने के पुख़्ता सबूत हैं, जिनमें आवेदन की रसीद कॉपी, एसडीएम के हस्ताक्षर, और थाने व फोन में रिकॉर्डिंग जैसे प्रमाण शामिल हैं। वे जल्द से जल्द सफाई की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 1 जुलाई से स्कूल खुलने वाले हैं और बच्चों के लिए इस कीचड़ से निकलना असंभव होगा, जबकि बड़े किसी तरह संभल सकते हैं।
यहाँ एक गली में पिछले लगभग पाँच सालों से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। 5 अप्रैल 2026 को एक बार सफाई कर्मचारी आए भी थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ़ अपना समय बिताया और वीडियो बनाकर चले गए, यह कहते हुए कि नाली इससे ज़्यादा साफ़ नहीं हो सकती। आज 22 जून 2026 तक भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है और कोई सफाई कर्मचारी वहाँ नहीं पहुँचता है, जिससे सड़क पर घास उग गई है। स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को लेकर एसडीएम को कम से कम सात-आठ बार लिखित आवेदन दिए हैं और तहसील दिवस पर भी तीन-चार बार शिकायत की है, लेकिन एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की है। एसडीएम को 15 से 20 बार फोन भी किया जा चुका है। लोगों का कहना है कि उनके बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है, मेहमानों को भी दिक्कत होती है, और घर से बाहर निकलते ही बच्चे तो क्या, बड़े भी कीचड़ में गिरकर
निकलते हैं। 9 फुट की सड़क अब 5 फुट की रह गई है और उसके दोनों किनारों पर मिट्टी जमा हो गई है, जिससे नाली और सड़क दोनों ही अवरुद्ध हो गए हैं। जब कार्रवाई के लिए एसडीएम से संपर्क किया गया, तो एसडीएम ने कथित तौर पर कहा कि "यह तानाशाही या यहां पर राजनीति नहीं चलती।" इस पर निवासियों का कहना है कि तानाशाही और राजनीति तो एसडीएम कर रहे हैं, जबकि उन्हें केवल निर्माण या समाधान चाहिए। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, एक भी अधिकारी या सफाई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा है। निवासियों ने बताया है कि उनके पास एसडीएम को सूचना दिए जाने के पुख़्ता सबूत हैं, जिनमें आवेदन की रसीद कॉपी, एसडीएम के हस्ताक्षर, और थाने व फोन में रिकॉर्डिंग जैसे प्रमाण शामिल हैं। वे जल्द से जल्द सफाई की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 1 जुलाई से स्कूल खुलने वाले हैं और बच्चों के लिए इस कीचड़ से निकलना असंभव होगा, जबकि बड़े किसी तरह संभल सकते हैं।
- सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहारन गांव के अंबेठा चांद स्थित कश्यप समाज की एक गली पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, यह गली पहले 9 फीट चौड़ी थी, लेकिन अब इसे घटाकर मात्र 5 फीट का कर दिया गया है। अतिक्रमण के बाद इस गली पर दोनों तरफ से मिट्टी भी डाल दी गई है, जो सड़क से नाली तक फैली हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों ने सफाई कर्मियों और एसडीएम को सात से दस बार तक आवेदन दिए हैं। हालांकि, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बताया गया है कि लेखपाल भी दो-तीन बार मौके पर आए, लेकिन हर बार बिना कोई कार्रवाई किए ही वापस लौट गए।2
- जनता से एक महत्वपूर्ण अपील की गई है कि वे भारत भूषण द्वारा उठाई गई आवाज़ का पूरा समर्थन करें। इस अपील में सभी भाई-बहनों से एकजुट होकर, उनके लाइव वीडियो को ज्यादा से ज्यादा साझा करने का आग्रह किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्पष्ट रूप से वर्तमान सरकार को जल्द से जल्द गिराना बताया गया है, जिसके लिए जनता से ऑनलाइन माध्यम से भरपूर समर्थन जुटाने का आह्वान किया जा रहा है।1
- सहारनपुर जनपद की गंगोह विधानसभा के विधायक चौधरी किरत सिंह ने इस्लामनगर-तीतरो रजवाहे की पटरी के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य का शिलान्यास किया। इस महत्वपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत ₹14 करोड़ 73 लाख है। क्षेत्रवासियों द्वारा लंबे समय से इस पटरी के चौड़ीकरण की मांग की जा रही थी, जिसकी नींव अब गंगोह विधायक द्वारा रखी गई है।1
- सहारनपुर में योग सप्ताह के अंतर्गत नगर निगम द्वारा संचालित एमआरएफ सेंटर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर आयुक्त शिपू गिरी और महापौर डॉ. अजय कुमार के निर्देशों पर हुआ, जिसमें नगर निगम के कर्मचारियों और स्टाफ ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इस आयोजन में नगर निगम के सुपरवाइजर महेंद्र, हेल्पर अमित और स्पेस सोसाइटी के सभी कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। योग कार्यक्रम का नेतृत्व स्पेस सोसाइटी की फील्ड संयोजक वंदना ने परियोजना संयोजक राकेश कुमारी के निर्देशन में किया। इस दौरान योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया गया और सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग करने का संकल्प लिया। स्पेस सोसाइटी के निदेशक (परियोजना) मदन भारती ने इस अवसर पर कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि यह मन को शांत और संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रविवार सुबह 9 बजे कार्यक्रम के समापन पर, सभी कर्मचारियों ने एक-दूसरे को योग दिवस की शुभकामनाएं दीं और स्वस्थ एवं निरोगी जीवन की कामना की। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों और अन्य कर्मचारियों को योग के महत्व के प्रति जागरूक करना था।1
- शामली जिले के कैराना में एक बैंक्वेट हॉल के मालिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी वलीमे की एक दावत में गौ मांस परोसने के आरोप में की गई है।1
- यह एक पुराने वीडियो का संदर्भ है जिसमें एआईएमआईएम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली साहब मुजफ्फरनगर में आयोजित एक समीक्षा मीटिंग कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस अवसर पर उनके साथ ब्लॉक अध्यक्ष और जिला पंचायत वार्ड नंबर 7 के भावी प्रत्याशी अकरम खान तथा अरशद राणा जी भी मौजूद थे।1
- यमुनानगर जिले के रादौर स्थित छोटा बांस की डेहा बस्ती से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो गया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बस्ती निवासी अपना सामान लेकर विभिन्न क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं। लोग टेंपो, छोटा हाथी और कैंटर जैसे वाहनों से दड़वा, कांसापुर, लाडवा, इंद्री, करनाल और ताजेवाला जैसे स्थानों पर जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ जगहों पर लोगों को सामान उतारने की अनुमति नहीं मिली, जिसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा और अब वे अन्य स्थानों की तलाश कर रहे हैं। इसी दौरान, पिछले दिनों मीडिया में काफी चर्चा में रहे डेहा बस्ती के पिटबुल कुत्ते की भी मौत की सूचना मिली है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि भीषण गर्मी, बिजली आपूर्ति बाधित रहने और बदलती परिस्थितियों के कारण कुत्ते की हालत बिगड़ गई थी। हालांकि, उसकी मौत के कारणों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।1
- यहाँ एक गली में पिछले लगभग पाँच सालों से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। 5 अप्रैल 2026 को एक बार सफाई कर्मचारी आए भी थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ़ अपना समय बिताया और वीडियो बनाकर चले गए, यह कहते हुए कि नाली इससे ज़्यादा साफ़ नहीं हो सकती। आज 22 जून 2026 तक भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है और कोई सफाई कर्मचारी वहाँ नहीं पहुँचता है, जिससे सड़क पर घास उग गई है। स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को लेकर एसडीएम को कम से कम सात-आठ बार लिखित आवेदन दिए हैं और तहसील दिवस पर भी तीन-चार बार शिकायत की है, लेकिन एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की है। एसडीएम को 15 से 20 बार फोन भी किया जा चुका है। लोगों का कहना है कि उनके बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है, मेहमानों को भी दिक्कत होती है, और घर से बाहर निकलते ही बच्चे तो क्या, बड़े भी कीचड़ में गिरकर निकलते हैं। 9 फुट की सड़क अब 5 फुट की रह गई है और उसके दोनों किनारों पर मिट्टी जमा हो गई है, जिससे नाली और सड़क दोनों ही अवरुद्ध हो गए हैं। जब कार्रवाई के लिए एसडीएम से संपर्क किया गया, तो एसडीएम ने कथित तौर पर कहा कि "यह तानाशाही या यहां पर राजनीति नहीं चलती।" इस पर निवासियों का कहना है कि तानाशाही और राजनीति तो एसडीएम कर रहे हैं, जबकि उन्हें केवल निर्माण या समाधान चाहिए। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, एक भी अधिकारी या सफाई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा है। निवासियों ने बताया है कि उनके पास एसडीएम को सूचना दिए जाने के पुख़्ता सबूत हैं, जिनमें आवेदन की रसीद कॉपी, एसडीएम के हस्ताक्षर, और थाने व फोन में रिकॉर्डिंग जैसे प्रमाण शामिल हैं। वे जल्द से जल्द सफाई की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 1 जुलाई से स्कूल खुलने वाले हैं और बच्चों के लिए इस कीचड़ से निकलना असंभव होगा, जबकि बड़े किसी तरह संभल सकते हैं।2