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अशोक सम्राट ने अपने शासन में सभी राजाओं को हराकर सर्वश्रेष्ठ पद हासिल किया

3 hrs ago
user_गुरु ज्ञान
गुरु ज्ञान
इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

अशोक सम्राट ने अपने शासन में सभी राजाओं को हराकर सर्वश्रेष्ठ पद हासिल किया

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  • रविवार की सांझ जब केंद्र प्रेक्षागृह की रोशनी जली, तो मंच पर सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि समाज का आईना जीवंत हो उठा। भावनाओं, आस्था और भोलेपन के नाम पर होने वाली ठगी की मार्मिक कथा ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भरतमुनि नाट्य समारोह के तीसरे दिन सुप्रसिद्ध नाटक ‘बकरी’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। डॉ. शिशु कुमार सिंह के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक प्रख्यात साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की चर्चित रचना पर आधारित है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. धनञ्जय चोपड़ा, कोर्स कोऑर्डिनेटर सेंटर ऑफ़ मीडिया स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (प्रशासन) डॉ. आदित्य श्रीवास्तव एवं उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के चर्चित नाटक बकरी नाटक के माध्यम से दिखाया गया है कि डकैत प्रवृति के तीन युवक दुर्जन सिंह, कर्मवीर व सत्यवीर अपने पुराने धंधा को छोड़कर ठगी करने की योजना बनाते है। अपनी योजना के अनुसार गांव के दलित की बकरी को दीवान द्वारा चोरी करवा देते है। साथ ही गांव के भोली-भाली जनता से गांधी जी के बकरी के नाम पर दान लेना शुरू कर देते हैं। बकरी नाटक में बकरी जनता के रूप में आधार बनाकर नेताओं की छवि को लोगों के सामने रखा गया। नाटक में दिखाया गया है कि नेता जनता को गुमराह करते हैं और चुनाव में विजय हासिल कर लेते हैं। आम जनता हर बार ठगी जाती है। जनता निरीह नजर आती है। इस बात का प्रमाण नाटक में जनता के संवाद से स्पष्ट है। हालांकि, नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से नकली पहलुओं की पोल खोल देती है, लेकिन सवाल फिर भी अधूरा रह जाता है कि क्या पोल खोलना ही समाधान है। नौटंकी शैली में प्रस्तुत इस नाटक में कजरी, सोहर और निर्गुण जैसे लोकगीतों का सशक्त समावेश दर्शकों को लोक संस्कृति से जोड़ते हुए संदेश को और प्रभावी बनाता है। नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से सच्चाई उजागर करती है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या केवल सच सामने लाना ही पर्याप्त है, या बदलाव के लिए जागरूकता और सक्रियता भी जरूरी है। अभिनय के रूप में दीवान की भूमिका में हर्ष अग्रवाल, दुर्जन सिंह के रूप में ओमेन्द्र पुरी गोस्वामी तथा कर्मवीर के रूप में हर्षल मेश्राम ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
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    रविवार की सांझ जब केंद्र प्रेक्षागृह की रोशनी जली, तो मंच पर सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि समाज का आईना जीवंत हो उठा। भावनाओं, आस्था और भोलेपन के नाम पर होने वाली ठगी की मार्मिक कथा ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भरतमुनि नाट्य समारोह के तीसरे दिन सुप्रसिद्ध नाटक ‘बकरी’ का प्रभावशाली मंचन किया गया।
डॉ. शिशु कुमार सिंह के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक प्रख्यात साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की चर्चित रचना पर आधारित है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. धनञ्जय चोपड़ा, कोर्स कोऑर्डिनेटर सेंटर ऑफ़ मीडिया स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (प्रशासन) डॉ. आदित्य श्रीवास्तव एवं उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के चर्चित नाटक बकरी नाटक के माध्यम से दिखाया गया है कि डकैत प्रवृति के तीन युवक दुर्जन सिंह, कर्मवीर व सत्यवीर अपने पुराने धंधा को छोड़कर ठगी करने की योजना बनाते है। अपनी योजना के अनुसार गांव के दलित की बकरी को दीवान द्वारा चोरी करवा देते है। साथ ही गांव के भोली-भाली जनता से गांधी जी के बकरी के नाम पर दान लेना शुरू कर देते हैं। 
बकरी नाटक में बकरी जनता के रूप में आधार बनाकर नेताओं की छवि को लोगों के सामने रखा गया। नाटक में दिखाया गया है कि नेता जनता को गुमराह करते हैं और चुनाव में विजय हासिल कर लेते हैं। आम जनता हर बार ठगी जाती है। जनता निरीह नजर आती है। इस बात का प्रमाण नाटक में जनता के संवाद से स्पष्ट है। हालांकि, नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से नकली पहलुओं की पोल खोल देती है, लेकिन सवाल फिर भी अधूरा रह जाता है कि क्या पोल खोलना ही समाधान है। नौटंकी शैली में प्रस्तुत इस नाटक में कजरी, सोहर और निर्गुण जैसे लोकगीतों का सशक्त समावेश दर्शकों को लोक संस्कृति से जोड़ते हुए संदेश को और प्रभावी बनाता है। नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से सच्चाई उजागर करती है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या केवल सच सामने लाना ही पर्याप्त है, या बदलाव के लिए जागरूकता और सक्रियता भी जरूरी है।
अभिनय के रूप में दीवान की भूमिका में हर्ष अग्रवाल, दुर्जन सिंह के रूप में ओमेन्द्र पुरी गोस्वामी तथा कर्मवीर के रूप में हर्षल मेश्राम ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
    user_AT Samachar
    AT Samachar
    Media house प्रयागराज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by गुरु ज्ञान
    1
    Post by गुरु ज्ञान
    user_गुरु ज्ञान
    गुरु ज्ञान
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • प्रयागराज। जनपद के बारा तहसील क्षेत्र अंतर्गत थाना लालापुर के अमिलिया तरहार गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब संदिग्ध परिस्थितियों में गेहूं के खेत में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दर्जनों बीघा में खड़ी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह राख हो गई। इस घटना से जहां एक ओर किसान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, वहीं पूरे गांव में भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी किसान सुग्रीव भारतीय के खेत में दोपहर के समय अचानक आग की लपटें उठने लगीं। शुरुआत में लोगों को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन तेज हवा के चलते आग तेजी से फैलती चली गई। देखते ही देखते आसपास के खेत भी इसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी फसल धू-धू कर जलने लगी। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। बाल्टी, पाइप और उपलब्ध संसाधनों की मदद से लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर किसी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आग की चपेट में आकर दर्जनों बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। इस भीषण अग्निकांड में किसान सुग्रीव भारतीय की महीनों की मेहनत पलभर में राख हो गई। फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे गहरे सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह फसल ही उनके सालभर की आमदनी का मुख्य आधार थी, जिसके नष्ट होने से जीवन-यापन पर संकट खड़ा हो गया है। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। हालांकि, स्थानीय लोग इसे किसी प्रकार की लापरवाही या खेतों में गिरी चिंगारी का परिणाम मान रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि तेज गर्मी और सूखी फसल के कारण आग तेजी से फैल गई।
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    प्रयागराज। जनपद के बारा तहसील क्षेत्र अंतर्गत थाना लालापुर के अमिलिया तरहार गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब संदिग्ध परिस्थितियों में गेहूं के खेत में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दर्जनों बीघा में खड़ी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह राख हो गई। इस घटना से जहां एक ओर किसान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, वहीं पूरे गांव में भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी किसान सुग्रीव भारतीय के खेत में दोपहर के समय अचानक आग की लपटें उठने लगीं। शुरुआत में लोगों को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन तेज हवा के चलते आग तेजी से फैलती चली गई। देखते ही देखते आसपास के खेत भी इसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी फसल धू-धू कर जलने लगी।
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। बाल्टी, पाइप और उपलब्ध संसाधनों की मदद से लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर किसी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आग की चपेट में आकर दर्जनों बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी।
इस भीषण अग्निकांड में किसान सुग्रीव भारतीय की महीनों की मेहनत पलभर में राख हो गई। फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे गहरे सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह फसल ही उनके सालभर की आमदनी का मुख्य आधार थी, जिसके नष्ट होने से जीवन-यापन पर संकट खड़ा हो गया है।
आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। हालांकि, स्थानीय लोग इसे किसी प्रकार की लापरवाही या खेतों में गिरी चिंगारी का परिणाम मान रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि तेज गर्मी और सूखी फसल के कारण आग तेजी से फैल गई।
    user_Ashvani
    Ashvani
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by Manish Susari संपादकस्थानीयsi न्यूज़
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    Post by Manish Susari संपादकस्थानीयsi न्यूज़
    user_Manish Susari संपादकस्थानीयsi न्यूज़
    Manish Susari संपादकस्थानीयsi न्यूज़
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Questions News
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    Post by Questions News
    user_Questions News
    Questions News
    Media company इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • सोरांव तहसील क्षेत्र के उसरही गांव में शनिवार को पट्टे की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल राजकुमार सागर के सहयोग से कुछ लोगों ने एक परिवार के घर पर बुलडोजर चलाने का प्रयास किया। इस दौरान ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। पीड़ित परिवार ने बताया कि नन्हे लाल, उनके पुत्र अरविंद, वीरेंद्र, करिश्मा और पत्नी कृष्णा करीब 40 साल से इस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे थे। परिवार का आरोप है कि अचानक इस भूमि को 'नवीन परती' बताकर कब्जा करने के उद्देश्य से बुलडोजर चला दिया गया।
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    सोरांव तहसील क्षेत्र के उसरही गांव में शनिवार को पट्टे की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल राजकुमार सागर के सहयोग से कुछ लोगों ने एक परिवार के घर पर बुलडोजर चलाने का प्रयास किया। इस दौरान ग्रामीणों ने पथराव कर दिया।
पीड़ित परिवार ने बताया कि नन्हे लाल, उनके पुत्र अरविंद, वीरेंद्र, करिश्मा और पत्नी कृष्णा करीब 40 साल से इस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे थे। परिवार का आरोप है कि अचानक इस भूमि को 'नवीन परती' बताकर कब्जा करने के उद्देश्य से बुलडोजर चला दिया गया।
    user_Saima shahida Journalist
    Saima shahida Journalist
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • सांसद मे उज्वल रमण भाषण देते हुए #वायरल_विडिओ
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    सांसद मे उज्वल रमण भाषण देते हुए #वायरल_विडिओ
    user_विकलांग धर्मेद्र हलचल
    विकलांग धर्मेद्र हलचल
    सच को साबित करना जिंदगी है मेरी Allahabad, Prayagraj•
    10 hrs ago
  • Post by गुरु ज्ञान
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    Post by गुरु ज्ञान
    user_गुरु ज्ञान
    गुरु ज्ञान
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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