धौलपुर के अधन्नपुर में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास परम पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी सुमधुर और ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं - महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। महाराज लोकेशानंद ने महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि महारास कोई सांसारिक क्रीड़ा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव के अहंकार को नष्ट करने, भक्तों की इच्छा पूरी करने और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को परासौली में महारास रचाया था। कंस वध प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं, तब ईश्वर का अवतार होता है; भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा जाकर अत्याचारी कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की। इस प्रसंग के माध्यम से समाज से बुराइयों और अहंकार को मिटाने का संदेश दिया गया। कथा का मुख्य आकर्षण रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग रहा। लोकेशानंद महाराज ने रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और जीव का भगवान से मिलन ही रुक्मिणी विवाह है। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान कृष्ण के गुणों और रूप पर मोहित थीं और उन्हें ही अपना पति मान चुकी थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह जबरन शिशुपाल से कराना चाहा, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्री कृष्ण को द्वारका संदेश भेजा। भगवान ने उनके अटूट विश्वास और भक्ति का मान रखते हुए उनका हरण किया और उन्हें अपनी पटरानी बनाया। यह प्रसंग सिखाता है कि जो पूरी तरह भगवान के शरणागत होता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद अरेला सहित सीपी शर्मा, राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, अशोक रावत, देवकीनंदन अरेला, पुरुषोत्तम, संतोष, कृष्णकांत, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र तथा अन्य श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस मौके पर दूर-दराज से आए अतिथियों व श्रद्धालुओं ने कथाव्यास से आशीर्वाद लिया। कथा के समापन पर महाआरती की गई और सभी भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
धौलपुर के अधन्नपुर में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास परम पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी सुमधुर और ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं - महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। महाराज लोकेशानंद ने महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि महारास कोई सांसारिक क्रीड़ा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव के अहंकार को नष्ट करने, भक्तों की इच्छा पूरी करने और आत्मा का
परमात्मा से मिलन कराने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को परासौली में महारास रचाया था। कंस वध प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं, तब ईश्वर का अवतार होता है; भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा जाकर अत्याचारी कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की। इस प्रसंग के माध्यम से समाज से बुराइयों और अहंकार को मिटाने का संदेश दिया गया। कथा का मुख्य आकर्षण रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग रहा। लोकेशानंद महाराज ने रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते
हुए कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और जीव का भगवान से मिलन ही रुक्मिणी विवाह है। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान कृष्ण के गुणों और रूप पर मोहित थीं और उन्हें ही अपना पति मान चुकी थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह जबरन शिशुपाल से कराना चाहा, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्री कृष्ण को द्वारका संदेश भेजा। भगवान ने उनके अटूट विश्वास और भक्ति का मान रखते हुए उनका हरण किया और उन्हें अपनी पटरानी बनाया। यह प्रसंग सिखाता
है कि जो पूरी तरह भगवान के शरणागत होता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद अरेला सहित सीपी शर्मा, राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, अशोक रावत, देवकीनंदन अरेला, पुरुषोत्तम, संतोष, कृष्णकांत, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र तथा अन्य श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस मौके पर दूर-दराज से आए अतिथियों व श्रद्धालुओं ने कथाव्यास से आशीर्वाद लिया। कथा के समापन पर महाआरती की गई और सभी भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
- धौलपुर जिले के मरेना कस्बे में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभायात्रा और वाहन रैली का आयोजन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। यह यात्रा मरेना इंद्रावली मोड़ से शुरू हुई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और धर्मप्रेमी शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पागल बाबा 1008 उपस्थित रहे, जिन्होंने भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना करने के बाद शोभायात्रा और रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर नीरजा शर्मा, प्रिंस होडवाल, अनुराग मुदगल, अनुपम तिवारी, महेश बोहरे और पवन चंसोरिया जैसे अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। आयोजक समिति ने सभी अतिथियों का माला, साफा और भगवान परशुराम जी की तस्वीर भेंट कर स्वागत-सम्मान किया। संयोजक रिंकू उपाध्याय ने बताया कि शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां, डोला और वाहन रैली विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यात्रा का मरेना, पहाड़ी मछरिया चौराहा, मछरिया और सिहोली में श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। शोभायात्रा का समापन हनुमान पुरा स्थित भगवान परशुराम मंदिर पर हुआ, जहाँ सभी धर्मप्रेमियों ने भगवान परशुराम जी के दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की। इस आयोजन में कोषाध्यक्ष रामू मुदगल, उपाध्यक्ष अमित लहचोरिया, हरेश शर्मा, राजू पहलवान, अनिकेत, कृष्णकांत शुक्ला और अमन दीक्षित सहित हजारों धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।4
- भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) राजस्थान के नवनियुक्त प्रदेश मंत्री बीके कुशवाहा का अभिनंदन किया गया है। इस अवसर पर उन्हें साफा और माला पहनाकर सम्मानित किया गया।1
- धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास परम पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी सुमधुर और ओजस्वी वाणी में भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं - महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह - का अत्यंत मार्मिक वर्णन प्रस्तुत किया। लोकेशानंद महाराज ने महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि महारास कोई सांसारिक क्रीड़ा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। उन्होंने समझाया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव के अहंकार को नष्ट करने, भक्तों की इच्छा पूरी करने और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को परासौली में महारास रचाया था। कंस वध का प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाते हैं, तब ईश्वर का अवतार होता है; भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा जाकर अत्याचारी कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समाज से बुराइयों और अहंकार को मिटाने का संदेश दिया। कथा के आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद अरेला सहित सीपी शर्मा, राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, अशोक रावत, देवकीनंदन अरेला, पुरुषोत्तम, संतोष, कृष्णकांत, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र तथा अन्य श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। कथा का मुख्य आकर्षण रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग रहा, जिसके आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और जीव का भगवान से मिलन ही रुक्मिणी विवाह है। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान कृष्ण के गुणों और रूप पर मोहित थीं और उन्हें ही अपना पति मान चुकी थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह जबरन शिशुपाल से कराना चाहा, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्री कृष्ण को द्वारका संदेश भेजा। भगवान ने उनके अटूट विश्वास और भक्ति का मान रखते हुए उनका हरण किया और उन्हें अपनी पटरानी बनाया। यह प्रसंग सिखाता है कि जो पूरी तरह भगवान के शरणागत होता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। इस मौके पर दूर-दराज से आए अतिथियों व श्रद्धालुओं ने कथाव्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के समापन पर महाआरती की गई और सभी उपस्थित भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।4
- धौलपुर के अधन्नपुर में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास परम पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी सुमधुर और ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं - महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। महाराज लोकेशानंद ने महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि महारास कोई सांसारिक क्रीड़ा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव के अहंकार को नष्ट करने, भक्तों की इच्छा पूरी करने और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को परासौली में महारास रचाया था। कंस वध प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं, तब ईश्वर का अवतार होता है; भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा जाकर अत्याचारी कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की। इस प्रसंग के माध्यम से समाज से बुराइयों और अहंकार को मिटाने का संदेश दिया गया। कथा का मुख्य आकर्षण रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग रहा। लोकेशानंद महाराज ने रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और जीव का भगवान से मिलन ही रुक्मिणी विवाह है। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान कृष्ण के गुणों और रूप पर मोहित थीं और उन्हें ही अपना पति मान चुकी थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह जबरन शिशुपाल से कराना चाहा, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्री कृष्ण को द्वारका संदेश भेजा। भगवान ने उनके अटूट विश्वास और भक्ति का मान रखते हुए उनका हरण किया और उन्हें अपनी पटरानी बनाया। यह प्रसंग सिखाता है कि जो पूरी तरह भगवान के शरणागत होता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद अरेला सहित सीपी शर्मा, राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, अशोक रावत, देवकीनंदन अरेला, पुरुषोत्तम, संतोष, कृष्णकांत, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र तथा अन्य श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस मौके पर दूर-दराज से आए अतिथियों व श्रद्धालुओं ने कथाव्यास से आशीर्वाद लिया। कथा के समापन पर महाआरती की गई और सभी भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।4
- धौलपुर जिले के सेपऊ उपखंड के ग्राम राजौरा कला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। कथा के विशेष सत्र के दौरान, कथावाचक ने भगवान श्री कृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं और छप्पन भोग के साथ पावन गोवर्धन पूजा प्रसंग का अत्यंत संगीतमय एवं भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान, पूरा पंडाल 'गिरिराज धारण की जय' और 'बांके बिहारी लाल की जय' के जयकारों से गूंज उठा, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का विवरण देते हुए बताया कि प्रभु की ये लीलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के कल्याण का गहरा संदेश लिए हुए हैं। माखन चोरी, मैया यशोदा के साथ बाल-हठ, और पूतना वध जैसे प्रसंगों को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा के मुख्य आकर्षण गोवर्धन पूजा के अवसर पर पंडाल में भगवान गोवर्धन की भव्य झांकी सजाई गई। कथावाचक ने विस्तार से इंद्र के अहंकार को भंग करने और ब्रजवासियों की सुरक्षा के लिए भगवान कृष्ण द्वारा अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा सुनाई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गोवर्धन पूजा का आयोजन हमें प्रकृति, पर्यावरण और गोवंश के संरक्षण की प्रेरणा देता है। कथावाचक ने जोर देते हुए कहा, "भगवान ने उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर यह संदेश दिया कि जब समाज संगठित होता है, तो बड़ी से बड़ी विपदा को भी टाला जा सकता है।" इस भक्तिमय आयोजन के दौरान लगातार स्वागत का सिलसिला भी चलता रहा, जिसमें मुख्य रूप से धौलपुर से पधारे CLAI भारतीय जीवन बीमा निगम के रामकुमार शर्मा और उनकी टीम ने कथा व्यास के साथ-साथ मौन पाठ व परीक्षित बने मनोज शर्मा जी के माता-पिताजी का भी माला एवं साफा पहनाकर भव्य स्वागत किया।4
- अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के आह्वान पर आज लगातार दूसरे दिन कर्मचारियों ने राजस्थान सरकार की नीतियों के खिलाफ तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने उपखण्ड कार्यालय और तहसील कार्यालय पर 1 घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कर्मचारी हितों पर किए जा रहे कथित कुठाराघात के विरोध में किया गया। महासंघ के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा ने स्पष्ट किया कि सरकार लगातार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं पर चोट कर रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकना, बीमा कंपनियों के प्रवेश को रोकना और समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तुरंत हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, महासंघ का 25 सूत्री मांग पत्र भी सरकार को सौंपा गया है। डॉ. मीणा ने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया कि कर्मचारियों को अपने जीपीएफ से पैसा निकालने के लिए 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिसे कर्मचारियों के साथ कुठाराघात बताया गया। इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों और भारी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। इनमें डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव (जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष), गोपाल कृष्ण शर्मा (आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष), टीकम सिंह जाट (शिक्षक संघ महामंत्री), आईएलआर सुनील कुमार परमार, जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा, कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा, और अध्यापक अशोक कुमार मीणा सहित कई पदाधिकारी शामिल थे, जिन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर कर्मचारियों की आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान, उपखंड कार्यालय बाड़ी और तहसील कार्यालय बाड़ी पर सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की कड़ी निंदा की। नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए और 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।1
- मध्य प्रदेश के मुरैना में मंगलवार सुबह दो छात्रों पर गोली चलने की घटना के संबंध में नई जानकारी सामने आई है। पहले ऐसी खबरें थीं कि किसी बदमाश ने जानबूझकर छात्रों पर गोली चलाई है, लेकिन अब यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक दुर्घटना थी। दरअसल, चलती स्कूटर पर गन लोड करने के दौरान अनजाने में फायरिंग हो गई, जिससे यह घटना हुई।1
- धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर कथा व्यास लोकेशानंद महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं, विशेषकर महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। महाराज लोकेशानंद ने महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि यह कोई सांसारिक क्रीड़ा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव के अहंकार को नष्ट करने, भक्तों की इच्छा पूरी करने और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को परासौली में महारास रचाया था। कंस वध के प्रसंग में महाराज जी ने बताया कि जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाते हैं, तब ईश्वर का अवतार होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा जाकर अत्याचारी कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की, जिसके माध्यम से समाज से बुराइयों और अहंकार को मिटाने का संदेश दिया गया। कथा का मुख्य आकर्षण रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग रहा। इसके आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और जीव का भगवान से मिलन ही रुक्मिणी विवाह है। उन्होंने विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी की कथा सुनाई, जो भगवान कृष्ण के गुणों और रूप पर मोहित होकर उन्हें अपना पति मान चुकी थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह जबरन शिशुपाल से कराना चाहा, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को द्वारका संदेश भेजा। भगवान ने उनके अटूट विश्वास और भक्ति का मान रखते हुए उनका हरण किया और उन्हें अपनी पटरानी बनाया। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिली कि जो पूरी तरह भगवान के शरणागत होता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। इस अवसर पर आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद अरेला सहित सीपी शर्मा, राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, अशोक रावत, देवकीनंदन अरेला, पुरुषोत्तम, संतोष, कृष्णकांत, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र तथा अन्य श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। दूर-दराज से आए अतिथियों व श्रद्धालुओं ने कथा व्यास से आशीर्वाद लिया और कथा का समापन महाआरती व प्रसादी वितरण के साथ किया गया।4