महा-ब्रेकिंग: तरीबुल्दा घाट बना ‘खनन का कुरुक्षेत्र’, यमुना की चीख—क्या अब भी सोएगा सिस्टम? कालपी (जालौन)। तरीबुल्दा घाट पर हालात अब खबर नहीं, खुला विद्रोह बन चुके हैं। यमुना नदी की छाती पर पोकलैंड मशीनें ऐसे चल रही हैं जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो। दिन हो या रात, घाट पर मशीनों की गर्जना और ओवरलोड ट्रकों की रफ्तार बता रही है कि यहां सत्ता नहीं, सीधे माफियाओं का राज चल रहा है। 24 अप्रैल 2026 को मौके की तस्वीर साफ है—खनन बिना ब्रेक जारी, प्रशासन खामोश और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग जैसे आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। सवाल सीधा है—क्या यह सब बिना संरक्षण के संभव है? तरीबुल्दा घाट पर यमुना का स्वरूप तेजी से खत्म हो रहा है। नदी की धारा को मोड़कर गहराई तक खनन किया जा रहा है, जिससे पानी गड्ढों में सिमटता जा रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है, पक्षियों का ठिकाना उजड़ रहा है और किसानों की सिंचाई पर सीधा असर पड़ रहा है। गांवों की हालत भी बदतर है। ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तोड़कर खंडहर बना दिया है। धूल और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हादसों का खतरा हर पल सिर पर मंडरा रहा है। ग्रामीण विरोध करते हैं, लेकिन खनन रुकने के बजाय रास्ते बदल दिए जाते हैं—मानो सिस्टम को चुनौती दी जा रही हो। सबसे बड़ा सवाल अब यही है— क्या प्रशासन को यह सब दिख नहीं रहा? या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? कौन है जो इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहा है? यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि खुली लूट, पर्यावरण पर हमला और कानून व्यवस्था की सीधी हार है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यमुना का अस्तित्व सिर्फ कागजों तक सिमट जाएगा और जिम्मेदार इतिहास के कटघरे में खड़े होंगे। तरीबुल्दा घाट पर यमुना चीख रही है… अब फैसला प्रशासन को करना है—कार्रवाई होगी या खामोशी ही सबसे बड़ा अपराध बनी रहेगी? महा-ब्रेकिंग: तरीबुल्दा घाट बना ‘खनन का कुरुक्षेत्र’, यमुना की चीख—क्या अब भी सोएगा सिस्टम? कालपी (जालौन)। तरीबुल्दा घाट पर हालात अब खबर नहीं, खुला विद्रोह बन चुके हैं। यमुना नदी की छाती पर पोकलैंड मशीनें ऐसे चल रही हैं जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो। दिन हो या रात, घाट पर मशीनों की गर्जना और ओवरलोड ट्रकों की रफ्तार बता रही है कि यहां सत्ता नहीं, सीधे माफियाओं का राज चल रहा है। 24 अप्रैल 2026 को मौके की तस्वीर साफ है—खनन बिना ब्रेक जारी, प्रशासन खामोश और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग जैसे आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। सवाल सीधा है—क्या यह सब बिना संरक्षण के संभव है? तरीबुल्दा घाट पर यमुना का स्वरूप तेजी से खत्म हो रहा है। नदी की धारा को मोड़कर गहराई तक खनन किया जा रहा है, जिससे पानी गड्ढों में सिमटता जा रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है, पक्षियों का ठिकाना उजड़ रहा है और किसानों की सिंचाई पर सीधा असर पड़ रहा है। गांवों की हालत भी बदतर है। ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तोड़कर खंडहर बना दिया है। धूल और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हादसों का खतरा हर पल सिर पर मंडरा रहा है। ग्रामीण विरोध करते हैं, लेकिन खनन रुकने के बजाय रास्ते बदल दिए जाते हैं—मानो सिस्टम को चुनौती दी जा रही हो। सबसे बड़ा सवाल अब यही है— क्या प्रशासन को यह सब दिख नहीं रहा? या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? कौन है जो इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहा है? यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि खुली लूट, पर्यावरण पर हमला और कानून व्यवस्था की सीधी हार है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यमुना का अस्तित्व सिर्फ कागजों तक सिमट जाएगा और जिम्मेदार इतिहास के कटघरे में खड़े होंगे। तरीबुल्दा घाट पर यमुना चीख रही है… अब फैसला प्रशासन को करना है—कार्रवाई होगी या खामोशी ही सबसे बड़ा अपराध बनी रहेगी?
महा-ब्रेकिंग: तरीबुल्दा घाट बना ‘खनन का कुरुक्षेत्र’, यमुना की चीख—क्या अब भी सोएगा सिस्टम? कालपी (जालौन)। तरीबुल्दा घाट पर हालात अब खबर नहीं, खुला विद्रोह बन चुके हैं। यमुना नदी की छाती पर पोकलैंड मशीनें ऐसे चल रही हैं जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो। दिन हो या रात, घाट पर मशीनों की गर्जना और ओवरलोड ट्रकों की रफ्तार बता रही है कि यहां सत्ता नहीं, सीधे माफियाओं का राज चल रहा है। 24 अप्रैल 2026 को मौके की तस्वीर साफ है—खनन बिना ब्रेक जारी, प्रशासन खामोश और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग जैसे आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। सवाल सीधा है—क्या यह सब बिना संरक्षण के संभव है? तरीबुल्दा घाट पर यमुना का स्वरूप तेजी से खत्म हो रहा है। नदी की धारा को मोड़कर गहराई तक खनन किया जा रहा है, जिससे पानी गड्ढों में सिमटता जा रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है, पक्षियों का ठिकाना उजड़ रहा है और किसानों की सिंचाई पर सीधा असर पड़ रहा है। गांवों की हालत भी बदतर है। ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तोड़कर खंडहर बना दिया है। धूल और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हादसों का खतरा हर पल सिर पर मंडरा रहा है। ग्रामीण विरोध करते हैं, लेकिन खनन रुकने के बजाय रास्ते बदल दिए जाते हैं—मानो सिस्टम को चुनौती दी जा रही हो। सबसे बड़ा सवाल अब यही है— क्या प्रशासन को यह सब दिख नहीं रहा? या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? कौन है जो इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहा है? यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि खुली लूट, पर्यावरण पर हमला और कानून व्यवस्था की सीधी हार है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यमुना का अस्तित्व सिर्फ कागजों तक सिमट जाएगा और जिम्मेदार इतिहास के कटघरे में खड़े होंगे। तरीबुल्दा घाट पर यमुना चीख रही है… अब फैसला प्रशासन को करना है—कार्रवाई होगी या खामोशी ही सबसे बड़ा अपराध बनी रहेगी? महा-ब्रेकिंग: तरीबुल्दा घाट बना ‘खनन का कुरुक्षेत्र’, यमुना की चीख—क्या अब भी सोएगा सिस्टम? कालपी (जालौन)। तरीबुल्दा घाट पर हालात अब खबर नहीं, खुला विद्रोह बन चुके हैं। यमुना नदी की छाती पर पोकलैंड मशीनें ऐसे चल रही हैं जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो। दिन हो या रात, घाट पर मशीनों की गर्जना और ओवरलोड ट्रकों की रफ्तार बता रही है कि यहां सत्ता नहीं, सीधे माफियाओं का राज चल रहा है। 24 अप्रैल 2026 को मौके की तस्वीर साफ है—खनन बिना ब्रेक जारी, प्रशासन खामोश और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग जैसे आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। सवाल सीधा है—क्या यह सब बिना संरक्षण के संभव है? तरीबुल्दा घाट पर यमुना का स्वरूप तेजी से खत्म हो रहा है। नदी की धारा को मोड़कर गहराई तक खनन किया जा रहा है, जिससे पानी गड्ढों में सिमटता जा रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है, पक्षियों का ठिकाना उजड़ रहा है और किसानों की सिंचाई पर सीधा असर पड़ रहा है। गांवों की हालत भी बदतर है। ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तोड़कर खंडहर बना दिया है। धूल और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हादसों का खतरा हर पल सिर पर मंडरा रहा है। ग्रामीण विरोध करते हैं, लेकिन खनन रुकने के बजाय रास्ते बदल दिए जाते हैं—मानो सिस्टम को चुनौती दी जा रही हो। सबसे बड़ा सवाल अब यही है— क्या प्रशासन को यह सब दिख नहीं रहा? या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? कौन है जो इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहा है? यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि खुली लूट, पर्यावरण पर हमला और कानून व्यवस्था की सीधी हार है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यमुना का अस्तित्व सिर्फ कागजों तक सिमट जाएगा और जिम्मेदार इतिहास के कटघरे में खड़े होंगे। तरीबुल्दा घाट पर यमुना चीख रही है… अब फैसला प्रशासन को करना है—कार्रवाई होगी या खामोशी ही सबसे बड़ा अपराध बनी रहेगी?
- महा-ब्रेकिंग: तरीबुल्दा घाट बना ‘खनन का कुरुक्षेत्र’, यमुना की चीख—क्या अब भी सोएगा सिस्टम? कालपी (जालौन)। तरीबुल्दा घाट पर हालात अब खबर नहीं, खुला विद्रोह बन चुके हैं। यमुना नदी की छाती पर पोकलैंड मशीनें ऐसे चल रही हैं जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो। दिन हो या रात, घाट पर मशीनों की गर्जना और ओवरलोड ट्रकों की रफ्तार बता रही है कि यहां सत्ता नहीं, सीधे माफियाओं का राज चल रहा है। 24 अप्रैल 2026 को मौके की तस्वीर साफ है—खनन बिना ब्रेक जारी, प्रशासन खामोश और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग जैसे आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। सवाल सीधा है—क्या यह सब बिना संरक्षण के संभव है? तरीबुल्दा घाट पर यमुना का स्वरूप तेजी से खत्म हो रहा है। नदी की धारा को मोड़कर गहराई तक खनन किया जा रहा है, जिससे पानी गड्ढों में सिमटता जा रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है, पक्षियों का ठिकाना उजड़ रहा है और किसानों की सिंचाई पर सीधा असर पड़ रहा है। गांवों की हालत भी बदतर है। ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तोड़कर खंडहर बना दिया है। धूल और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हादसों का खतरा हर पल सिर पर मंडरा रहा है। ग्रामीण विरोध करते हैं, लेकिन खनन रुकने के बजाय रास्ते बदल दिए जाते हैं—मानो सिस्टम को चुनौती दी जा रही हो। सबसे बड़ा सवाल अब यही है— क्या प्रशासन को यह सब दिख नहीं रहा? या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? कौन है जो इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहा है? यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि खुली लूट, पर्यावरण पर हमला और कानून व्यवस्था की सीधी हार है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यमुना का अस्तित्व सिर्फ कागजों तक सिमट जाएगा और जिम्मेदार इतिहास के कटघरे में खड़े होंगे। तरीबुल्दा घाट पर यमुना चीख रही है… अब फैसला प्रशासन को करना है—कार्रवाई होगी या खामोशी ही सबसे बड़ा अपराध बनी रहेगी?1
- थाना दिवस में पहुंचे जिलाधिकारी ने तहसील का किया औचक निरीक्षण, एसडीएम कोर्ट, शौचालय, पानी आदि जगहों का किया बारीकी से निरीक्षण, साफ सफाई व्यवस्था में जाहिर की नाराजगी, अधीनस्थों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश, औचक निरीक्षण के दौरान परिसर में मचा रहा हड़कंप, मामला मौदहा तहसील का।4
- हमीरपुर। पुलिस व एसओजी/सर्विलांस टीम के संयुक्त प्रयास से गत 21 अप्रैल को सुमेरपुर क्षेत्र में नेशनल हाइवे किनारे मिली अज्ञात महिला की हत्या का खुलासा करते हुए आरोपी ट्रक चालक को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त ट्रक भी बरामद किया है। पुलिस के अनुसार 21 अप्रैल को हाईवे किनारे एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना पर टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य संकलन किया। शव की शिनाख्त के प्रयास किए गए तथा पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी हाउस में सुरक्षित रखवाया गया। बाद में मृतका की पहचान बिनगवां कानपुर नगर निवासी पूजा 28 वर्ष के रूप में उसके पति शिवमंगल ने की। इस मामले में पुलिस ने 23 अप्रैल को धारा 103(1), 238 बीएनएस के तहत अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर ट्रक संख्या UP78 डीटी 8815 संदिग्ध मिला। जांच में ट्रक चालक महेन्द्र कुमार पाल निवासी भीतरगांव, कानपुर नगर (दक्षिण) का नाम सामने आया। पुलिस ने शनिवार सुबह करीब 4.55 बजे इटरा मोड़ के पास से आरोपी महेन्द्र कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया।पूंछतांछ में आरोपी ने बताया कि वह मृतका को पहले से जानता था। 21 अप्रैल को रूमा (कानपुर) से माल लादकर जबलपुर जाते समय उसने महिला को ट्रक में बैठा लिया। सुमेरपुर के एक ढाबे पर खाना खाने के दौरान दोनों में विवाद हुआ। आगे लीणा नाले के पास विवाद बढ़ने पर आरोपी ने शराब के नशे में दुपट्टे से गला कस दिया और मृत समझकर महिला को सड़क किनारे फेंककर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक बरामद कर विधिक कार्यवाही करते हुये आरोपी को न्यायालय में पेश किया है। पुलिस व सर्विलांस टीम में प्रभारी निरीक्षक योगेश तिवारी, एसएसआई दुर्गेश कुमार राय, आरक्षी राहुल कुमार, दिलीप कुमार, अमित कुमार, एसओजी प्रभारी एसआई सचिन शर्मा, आरक्षी अतुल कुमार, सुरेंद्र मिश्रा, रवि पटेल, कृष्ण कुमार गुप्ता सहित सर्विलांस टीम शामिल रहे।2
- हमीरपुर:-कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होमगार्ड भर्ती परीक्षा शुरू, सघन चेकिंग के बाद अभ्यर्थियों को दिया गया परीक्षा केंद्रों में प्रवेश, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सम्पन्न होगी होमगार्ड भर्ती परीक्षा, सुरक्षा के लिहाज से परीक्षा केंद्रों के आसपास की दुकानों कराया गया बंद, दो पालियों में सम्पन्न कराई जा रही है होमगार्ड भर्ती परीक्षा, होमगार्ड परीक्षा के लिए जिले में बनाए गये 4 परीक्षा केंद्र, सभी परीक्षा केंद्रों में भारी पुलिस बल तैनात,3
- घाटमपुर-सजेती पुलिस ने लगभग 2 लाख रुपये कीमत के तांबे के तार के साथ चार चोरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया है।सजेती थाना प्रभारी अनुज कुमार ने बताया कि पुलिस चेकिंग के दौरान इन चोरों को सजेती थाना क्षेत्र के चतुरीपुर गांव से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सुनील कुमार (32), नवाज शरीफ (23), सोनू (33) और सुशील कुमार (26) शामिल हैं। ये सभी चतुरीपुर गांव के निवासी हैं।1
- घाटमपुर। क्षेत्र में हुई भीषण आग की घटना में श्री राम किशन गुप्ता जी के आकस्मिक निधन तथा उनके पूरे परिवार के गंभीर रूप से झुलसने से नगर में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दर्दनाक हादसे में करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ, वहीं मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई लोग घायल हो गए। घटना ने पूरे व्यापारी समाज को झकझोर कर रख दिया है। व्यापारियों के बीच इस घटना को केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी और पीड़ा का क्षण माना जा रहा है। संवेदनशीलता और एकता का परिचय देते हुए व्यापारियों से अपील की गई है कि वे इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हों। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल कानपुर जिले के मंत्री ललित सोनी एवं घाटमपुर विधायक श्रीमती सरोज कुरील ने पीड़ित परिवार के परिजनों से मुलाकात की और हर संभव सहयोग व सहायता का आश्वासन दिया। घटना से आहत होकर कई व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और दिनभर पीड़ित परिवार के घर लोगों का आना-जाना लगा रहा। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि घटना के समय उन्होंने आग बुझाने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन विकराल आग पर काबू पाना संभव नहीं हो सका। कुछ व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नगरपालिका द्वारा सड़क पर खंभे लगाए जाने के कारण अग्निशमन विभाग की गाड़ियां समय पर मौके तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे नुकसान और बढ़ गया। घाटमपुर के क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने घटना की सूचना तत्काल जिला अध्यक्ष महेश वर्मा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दी। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा, अमरनाथ गुप्ता, अमित सोनी ,विपिन ओमर, ओसामा मिर्जा, रामेश्वर स्वर्णकार, आदर्श, गुड्डू ओमर, महेश ओमर आदि ने बताया घाटमपुर में इतनी बड़ी पहली घटना है जिसमें धन के साथ जनहानि भी हुई है व्यापारी समाज ने प्रशासन से घटना की जांच कर आवश्यक व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।5
- hamare ghar se kafi dur pani lana pasta hai joki bahut hi kathin hai krapya karke ak nal lagwane ki krapa kare to mahan Dya hogi kafi ghar paste hai pani lane me dikkat hoti hai.1
- STORY- ट्रक चालक ने की महिला की हत्या, हाईवे किनारे फेंका शव, खुलासा LOCATION- HAMIRPUR-UP DATE- 25-04-2026 REPORT- अत्री यादव की रिपोर्ट ANCHOR :- यूपी के हमीरपुर में हाईवे किनारे मिली महिला की लाश का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है… जहां एक ट्रक चालक ने महिला की दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या कर दी… और शव को सड़क किनारे फेंककर फरार हो गया… पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है… V/O :- पूरा मामला सुमेरपुर थाना क्षेत्र का है… जहां 21 अप्रैल की शाम हाईवे किनारे एक अज्ञात महिला का शव मिलने से हड़कंप मच गया था… सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और पहचान के प्रयास शुरू किए… V/O :- जांच के दौरान महिला की पहचान कानपुर नगर निवासी के रूप में हुई… जिसके बाद सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई…पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली… जिसमें एक संदिग्ध ट्रक नजर आया… V/O :-ट्रक को ट्रेस कर चालक महेंद्र पाल को गिरफ्तार किया गया… पूछताछ में आरोपी ने बताया कि महिला उसके साथ ट्रक में थी… सुमेरपुर के एक ढाबे में खाना खाने के बाद दोनों के बीच विवाद हुआ… जो बढ़ने पर आरोपी ने दुपट्टे से महिला का गला दबा दिया… जिससे उसकी मौत हो गई… V/O :- बताया गया कि हत्या ट्रक के अंदर ही की गई… इसके बाद आरोपी ने शव को हाईवे किनारे फेंक दिया और मौके से फरार हो गया… पुलिस ने घटना में प्रयुक्त ट्रक को कब्जे में ले लिया है… BYTE- मृगांक शेखर पाठक (पुलिस अधीक्षक, हमीरपुर) V/O :- मामले के खुलासे के लिए एसओजी और थाना पुलिस की टीमें लगाई गई थीं… टोल टैक्स और अन्य स्थानों के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी तक पहुंचा गया… फिलहाल आरोपी को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल लाया गया है… और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है… F_V/O :- बहरहाल, हाईवे पर मिली इस लाश की गुत्थी सुलझने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है… लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस तरह की वारदातों पर लगाम कब लगेगी… हमीरपुर उत्तर प्रदेश अत्री कुमार यादव की रिपोर्ट1