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मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक सरकारी तालाब के गहराकरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो इंटरव्यू में, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि "सरकारी तालाब" के नाम पर निजी स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि तालाब से खोदी गई मिट्टी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे तालाब के जल संवर्धन और जनहित के मूल उद्देश्य का दुरुपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए सरकारी तालाब के इस इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति जताई है। इंटरव्यू में यह भी बताया गया है कि तालाब की खुदाई में लगी जेसीबी का भुगतान सरकारी प्रक्रिया के बजाय निजी तौर पर किया जा रहा है, जो इस पूरे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। स्थानीय निवासियों और इंटरव्यू देने वाले व्यक्ति ने इस पूरे मामले के मूल्यांकन की मांग की है, ताकि इसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले की गहन जांच हो और यदि तालाब की खुदाई की जा रही है, तो वह केवल नियमानुसार और जनहित में ही होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

6 hrs ago
user_Unchehra news
Unchehra news
News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
6 hrs ago

मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक सरकारी तालाब के गहराकरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो इंटरव्यू में, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि "सरकारी तालाब" के नाम पर निजी स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि तालाब से खोदी गई मिट्टी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे तालाब के जल संवर्धन और जनहित के मूल उद्देश्य का दुरुपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए सरकारी तालाब के इस इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति जताई है। इंटरव्यू में यह भी बताया गया है कि तालाब की खुदाई में लगी जेसीबी का भुगतान सरकारी प्रक्रिया के बजाय निजी तौर पर किया जा रहा है, जो इस पूरे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। स्थानीय निवासियों और इंटरव्यू देने वाले व्यक्ति ने इस पूरे मामले के मूल्यांकन की मांग की है, ताकि इसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले की गहन जांच हो और यदि तालाब की खुदाई की जा रही है, तो वह केवल नियमानुसार और जनहित में ही होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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  • मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक सरकारी तालाब के गहराकरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो इंटरव्यू में, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि "सरकारी तालाब" के नाम पर निजी स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि तालाब से खोदी गई मिट्टी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे तालाब के जल संवर्धन और जनहित के मूल उद्देश्य का दुरुपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए सरकारी तालाब के इस इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति जताई है। इंटरव्यू में यह भी बताया गया है कि तालाब की खुदाई में लगी जेसीबी का भुगतान सरकारी प्रक्रिया के बजाय निजी तौर पर किया जा रहा है, जो इस पूरे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। स्थानीय निवासियों और इंटरव्यू देने वाले व्यक्ति ने इस पूरे मामले के मूल्यांकन की मांग की है, ताकि इसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले की गहन जांच हो और यदि तालाब की खुदाई की जा रही है, तो वह केवल नियमानुसार और जनहित में ही होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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    मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक सरकारी तालाब के गहराकरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो इंटरव्यू में, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि "सरकारी तालाब" के नाम पर निजी स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि तालाब से खोदी गई मिट्टी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे तालाब के जल संवर्धन और जनहित के मूल उद्देश्य का दुरुपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए सरकारी तालाब के इस इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति जताई है।

इंटरव्यू में यह भी बताया गया है कि तालाब की खुदाई में लगी जेसीबी का भुगतान सरकारी प्रक्रिया के बजाय निजी तौर पर किया जा रहा है, जो इस पूरे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। स्थानीय निवासियों और इंटरव्यू देने वाले व्यक्ति ने इस पूरे मामले के मूल्यांकन की मांग की है, ताकि इसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले की गहन जांच हो और यदि तालाब की खुदाई की जा रही है, तो वह केवल नियमानुसार और जनहित में ही होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    user_Unchehra news
    Unchehra news
    News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • महाराष्ट्र में एक निर्माणाधीन हनुमान मंदिर की छत गिरने से एक दुखद दुर्घटना हुई है। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। मलबे से निकाले गए लगभग 25 घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।
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    महाराष्ट्र में एक निर्माणाधीन हनुमान मंदिर की छत गिरने से एक दुखद दुर्घटना हुई है। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। मलबे से निकाले गए लगभग 25 घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।
    user_Sharda Shrivastava
    Sharda Shrivastava
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम इटमा में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ हाल ही में बनी पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि घटना के समय वहाँ मौजूद लोग समय रहते हट गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसमें सीमेंट की जगह चूने की डस्ट और निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल की गई थी। उनका कहना है कि इसी कारण टंकी मामूली दबाव भी नहीं झेल सकी और अपने आप ढह गई, जिसके बाद ग्राम पंचायत इटमा के सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ कराया गया होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती, और यदि टंकी गिरने के समय वहाँ अधिक लोग मौजूद होते तो बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा निर्माण कार्य में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई है।
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    मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम इटमा में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ हाल ही में बनी पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि घटना के समय वहाँ मौजूद लोग समय रहते हट गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसमें सीमेंट की जगह चूने की डस्ट और निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल की गई थी। उनका कहना है कि इसी कारण टंकी मामूली दबाव भी नहीं झेल सकी और अपने आप ढह गई, जिसके बाद ग्राम पंचायत इटमा के सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ कराया गया होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती, और यदि टंकी गिरने के समय वहाँ अधिक लोग मौजूद होते तो बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था।

इस घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा निर्माण कार्य में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई है।
    user_प्रकाश कुमार सोनी
    प्रकाश कुमार सोनी
    Court reporter Maihar, Satna•
    4 hrs ago
  • मैहर के वार्ड 1 में स्थानीय सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बार-बार यह प्रश्न किया जा रहा है कि क्षेत्र में दिख रही स्थिति वास्तविक सफाई का उदाहरण है या केवल एक दिखावा और छलावा मात्र है।
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    मैहर के वार्ड 1 में स्थानीय सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बार-बार यह प्रश्न किया जा रहा है कि क्षेत्र में दिख रही स्थिति वास्तविक सफाई का उदाहरण है या केवल एक दिखावा और छलावा मात्र है।
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    6 hrs ago
  • जनपद पंचायत मैहर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत इटमा में ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि इस घटना के समय आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। इस घटना ने न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर हो रहे विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की टंकी के निर्माण में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई और मजबूत निर्माण के बजाय घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। इसी कारण टंकी पानी का सामान्य दबाव भी नहीं सह सकी और कुछ ही दिनों में धराशायी हो गई। टंकी गिरने के बाद पूरे गांव में पंचायत के कार्यों को लेकर भारी नाराजगी और आक्रोश है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच किसने की और पूरा होने के बाद भुगतान किस आधार पर किया गया, जबकि इतनी जल्दी पूरी संरचना ढह गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक टंकी का गिरना नहीं है, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती तो यह स्थिति नहीं बनती। घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करवाने तथा दोषी ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्राम पंचायत इटमा की यह गिरी हुई पानी की टंकी अब सिर्फ मलबा नहीं, बल्कि उन अनसुलझे सवालों का ढेर है जिनका जवाब ग्रामीण प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से मांग रहे हैं। अनिल कुशवाहा के अनुसार, यह टंकी गिरने के साथ ही विकास कार्यों की सच्चाई भी उजागर हो गई है, जिससे यह टंकी भ्रष्टाचार का स्मारक बन गई है।
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    जनपद पंचायत मैहर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत इटमा में ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि इस घटना के समय आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। इस घटना ने न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर हो रहे विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की टंकी के निर्माण में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई और मजबूत निर्माण के बजाय घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। इसी कारण टंकी पानी का सामान्य दबाव भी नहीं सह सकी और कुछ ही दिनों में धराशायी हो गई। टंकी गिरने के बाद पूरे गांव में पंचायत के कार्यों को लेकर भारी नाराजगी और आक्रोश है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच किसने की और पूरा होने के बाद भुगतान किस आधार पर किया गया, जबकि इतनी जल्दी पूरी संरचना ढह गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक टंकी का गिरना नहीं है, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती तो यह स्थिति नहीं बनती। घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करवाने तथा दोषी ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम पंचायत इटमा की यह गिरी हुई पानी की टंकी अब सिर्फ मलबा नहीं, बल्कि उन अनसुलझे सवालों का ढेर है जिनका जवाब ग्रामीण प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से मांग रहे हैं। अनिल कुशवाहा के अनुसार, यह टंकी गिरने के साथ ही विकास कार्यों की सच्चाई भी उजागर हो गई है, जिससे यह टंकी भ्रष्टाचार का स्मारक बन गई है।
    user_पत्रकार अनिल कुशवाहा मैहर MP
    पत्रकार अनिल कुशवाहा मैहर MP
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के इटमा गाँव में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में बनाई गई एक पानी की टंकी, निर्माण के कुछ ही दिनों बाद अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि घटना के समय मौके पर मौजूद लोग समय रहते हट गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टंकी गिरते समय एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। ग्रामीणों ने इस घटना के लिए पानी की टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उनका स्पष्ट आरोप है कि सीमेंट की जगह चूने की डस्ट और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण टंकी मामूली दबाव भी नहीं झेल सकी और अपने आप ढह गई। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्राम पंचायत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत इटमा के सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुसार कराया गया होता, तो ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि टंकी गिरने के समय वहाँ अधिक लोग मौजूद होते, तो एक बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था। घटना के बाद ग्रामीणों ने इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और निर्माण कार्य में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की तत्काल मांग की है।
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    मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के इटमा गाँव में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में बनाई गई एक पानी की टंकी, निर्माण के कुछ ही दिनों बाद अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि घटना के समय मौके पर मौजूद लोग समय रहते हट गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टंकी गिरते समय एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया।

ग्रामीणों ने इस घटना के लिए पानी की टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उनका स्पष्ट आरोप है कि सीमेंट की जगह चूने की डस्ट और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण टंकी मामूली दबाव भी नहीं झेल सकी और अपने आप ढह गई। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्राम पंचायत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत इटमा के सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुसार कराया गया होता, तो ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि टंकी गिरने के समय वहाँ अधिक लोग मौजूद होते, तो एक बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था।

घटना के बाद ग्रामीणों ने इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और निर्माण कार्य में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की तत्काल मांग की है।
    user_Satyaprakash Media Maihar
    Satyaprakash Media Maihar
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • कटनी जिले के बड़वारा-देवरीहटाई मार्ग पर शनिवार सुबह डोलोमाइट पत्थरों से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के बीचों-बीच पलट गया, जिससे चालक घायल हो गया। यह घटना बड़वारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंदन ग्राम के पास मुख्य मार्ग पर हुई, जहाँ एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। प्रत्यदर्शियों के अनुसार, यह ट्रक देवरीहटाई की ओर जा रहा था और सड़क की जर्जर हालत तथा उसमें बने गहरे गड्ढे इस हादसे का मुख्य कारण बने। गड्ढों को बचाने के प्रयास में ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गया। हादसे की भयावहता का अंदाजा एक वायरल वीडियो क्लिप में भी देखा जा सकता है, जिसमें ट्रक पूरी तरह से पलटा हुआ दिख रहा है। सौभाग्य से, घटना के समय सड़क पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। ट्रक पलटने से घायल चालक को स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कर बाहर निकाला। उसे मामूली चोटें आई हैं और प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। हादसे के कारण सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया। सूचना मिलते ही बड़वारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सुचारू बनाने के लिए क्रेन की मदद से पलटे हुए ट्रक को हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह बड़वारा क्षेत्र में जर्जर सड़कों के कारण हुआ कोई पहला हादसा नहीं है। स्थानीय निवासियों में सड़क की खराब हालत को लेकर लंबे समय से आक्रोश है। उन्होंने कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मरम्मत की मांग की है, लेकिन अभी तक सड़क का कार्य शुरू नहीं हुआ है। निवासियों का कहना है कि यह मार्ग खनन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिस पर भारी वाहनों का दबाव रहता है, और खराब सड़कों के कारण यहाँ अक्सर छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। प्रशासन की उदासीनता के कारण आज एक और बड़ा हादसा होते-होते बचा। स्थानीय लोगों ने एक बार फिर प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की पुरजोर मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के गंभीर हादसों को रोका जा सके।
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    कटनी जिले के बड़वारा-देवरीहटाई मार्ग पर शनिवार सुबह डोलोमाइट पत्थरों से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के बीचों-बीच पलट गया, जिससे चालक घायल हो गया। यह घटना बड़वारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंदन ग्राम के पास मुख्य मार्ग पर हुई, जहाँ एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।

प्रत्यदर्शियों के अनुसार, यह ट्रक देवरीहटाई की ओर जा रहा था और सड़क की जर्जर हालत तथा उसमें बने गहरे गड्ढे इस हादसे का मुख्य कारण बने। गड्ढों को बचाने के प्रयास में ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गया। हादसे की भयावहता का अंदाजा एक वायरल वीडियो क्लिप में भी देखा जा सकता है, जिसमें ट्रक पूरी तरह से पलटा हुआ दिख रहा है। सौभाग्य से, घटना के समय सड़क पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

ट्रक पलटने से घायल चालक को स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कर बाहर निकाला। उसे मामूली चोटें आई हैं और प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। हादसे के कारण सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया। सूचना मिलते ही बड़वारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सुचारू बनाने के लिए क्रेन की मदद से पलटे हुए ट्रक को हटाने की कार्रवाई शुरू की।

यह बड़वारा क्षेत्र में जर्जर सड़कों के कारण हुआ कोई पहला हादसा नहीं है। स्थानीय निवासियों में सड़क की खराब हालत को लेकर लंबे समय से आक्रोश है। उन्होंने कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मरम्मत की मांग की है, लेकिन अभी तक सड़क का कार्य शुरू नहीं हुआ है। निवासियों का कहना है कि यह मार्ग खनन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिस पर भारी वाहनों का दबाव रहता है, और खराब सड़कों के कारण यहाँ अक्सर छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

प्रशासन की उदासीनता के कारण आज एक और बड़ा हादसा होते-होते बचा। स्थानीय लोगों ने एक बार फिर प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की पुरजोर मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के गंभीर हादसों को रोका जा सके।
    user_MADHYA BHARAT NEWS
    MADHYA BHARAT NEWS
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
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