मध्य प्रदेश के कुल्लू बरखेड़ा गांव में अब विकास की एक नई कहानी लिखी जा रही है, जहाँ NGO SayTrees की पहल से प्रदेश का सबसे बड़ा तालाब बनाया जाएगा। इस परियोजना को "पानी, हरियाली और विकास" की नई क्रांति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण, हरियाली और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। NGO SayTrees पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और जल बचाने जैसे सराहनीय कार्यों के लिए जानी जाती है और इसने देश के कई राज्यों में हरियाली अभियान चलाकर हजारों पेड़ लगाए हैं। अब संस्था कुल्लू बरखेड़ा में यह विशाल तालाब बनाकर ग्रामीण विकास की एक मिसाल पेश करने जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के कारण उनकी खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस तालाब के निर्माण से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और गांव में एक बार फिर हरियाली लौटेगी। यह तालाब न केवल खेती को मजबूत करेगा, बल्कि मछली पालन, पशुपालन और अन्य छोटे रोजगारों को भी बढ़ावा देगा। आने वाले समय में यह स्थान पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। गांव के लोगों ने NGO SayTrees की इस पहल की जमकर प्रशंसा की है, यह कहते हुए कि संस्था सिर्फ वादे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर उतरकर गांव और पर्यावरण के लिए वास्तविक काम कर रही है। संस्था द्वारा लगाए गए पौधों की कई वर्षों तक देखरेख भी की जाती है, ताकि हरियाली स्थायी बनी रहे। जल संकट के इस दौर में कुल्लू बरखेड़ा में बनने वाला यह विशाल तालाब आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जिससे गांव को नई पहचान मिलने के साथ-साथ यह पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनेगा। कुल्लू बरखेड़ा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि विकास, हरियाली और जल संरक्षण की एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।
मध्य प्रदेश के कुल्लू बरखेड़ा गांव में अब विकास की एक नई कहानी लिखी जा रही है, जहाँ NGO SayTrees की पहल से प्रदेश का सबसे बड़ा तालाब बनाया जाएगा। इस परियोजना को "पानी, हरियाली और विकास" की नई क्रांति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण, हरियाली और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। NGO SayTrees पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और जल बचाने जैसे सराहनीय कार्यों के लिए जानी जाती है और इसने देश के कई राज्यों में हरियाली अभियान चलाकर हजारों पेड़ लगाए हैं। अब संस्था कुल्लू बरखेड़ा में यह विशाल तालाब बनाकर ग्रामीण विकास की एक मिसाल पेश करने जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के कारण उनकी खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस तालाब के निर्माण से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और गांव में एक बार फिर हरियाली लौटेगी। यह तालाब न केवल खेती को मजबूत करेगा, बल्कि मछली पालन, पशुपालन और अन्य छोटे रोजगारों को भी बढ़ावा देगा। आने वाले समय में यह स्थान पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। गांव के लोगों ने NGO SayTrees की इस पहल की जमकर प्रशंसा की है, यह कहते हुए कि संस्था सिर्फ वादे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर उतरकर गांव और पर्यावरण के लिए वास्तविक काम कर रही है। संस्था द्वारा लगाए गए पौधों की कई वर्षों तक देखरेख भी की जाती है, ताकि हरियाली स्थायी बनी रहे। जल संकट के इस दौर में कुल्लू बरखेड़ा में बनने वाला यह विशाल तालाब आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जिससे गांव को नई पहचान मिलने के साथ-साथ यह पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनेगा। कुल्लू बरखेड़ा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि विकास, हरियाली और जल संरक्षण की एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।
- मध्य प्रदेश के कुल्लू बरखेड़ा गांव में अब विकास की एक नई कहानी लिखी जा रही है, जहाँ NGO SayTrees की पहल से प्रदेश का सबसे बड़ा तालाब बनाया जाएगा। इस परियोजना को "पानी, हरियाली और विकास" की नई क्रांति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण, हरियाली और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। NGO SayTrees पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और जल बचाने जैसे सराहनीय कार्यों के लिए जानी जाती है और इसने देश के कई राज्यों में हरियाली अभियान चलाकर हजारों पेड़ लगाए हैं। अब संस्था कुल्लू बरखेड़ा में यह विशाल तालाब बनाकर ग्रामीण विकास की एक मिसाल पेश करने जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के कारण उनकी खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस तालाब के निर्माण से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और गांव में एक बार फिर हरियाली लौटेगी। यह तालाब न केवल खेती को मजबूत करेगा, बल्कि मछली पालन, पशुपालन और अन्य छोटे रोजगारों को भी बढ़ावा देगा। आने वाले समय में यह स्थान पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। गांव के लोगों ने NGO SayTrees की इस पहल की जमकर प्रशंसा की है, यह कहते हुए कि संस्था सिर्फ वादे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर उतरकर गांव और पर्यावरण के लिए वास्तविक काम कर रही है। संस्था द्वारा लगाए गए पौधों की कई वर्षों तक देखरेख भी की जाती है, ताकि हरियाली स्थायी बनी रहे। जल संकट के इस दौर में कुल्लू बरखेड़ा में बनने वाला यह विशाल तालाब आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जिससे गांव को नई पहचान मिलने के साथ-साथ यह पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनेगा। कुल्लू बरखेड़ा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि विकास, हरियाली और जल संरक्षण की एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।1
- अभिनेत्री कंगना रनौत ने रणवीर सिंह के समर्थन में सामने आकर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा उन पर लगाए गए कथित प्रतिबंध के मुद्दे पर अपनी बात रखी है। कंगना रनौत ने इस संदर्भ में टिप्पणी करते हुए कहा कि, जब किसी व्यक्ति की हैसियत और कद बढ़ता है तो उसके दुश्मन भी बनने लगते हैं।1
- कटनी के निमिहा मोहल्ला स्थित आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल धाम में माँ विंध्यवासिनी की असीम कृपा से संतान सुख प्राप्त होने की खुशी में एक भव्य सोलह श्रृंगार एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। यह आयोजन जबलपुर के पनागर क्षेत्र निवासी श्री सुमित केवट और कटनी के आधारकाप निवासी खुशबू निषाद को संतान सुख की प्राप्ति के उपलक्ष्य में, माता रानी के श्री चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु संपन्न हुआ। यह मंगलमय आयोजन दिनांक 31 मई 2026, दिन रविवार को सायंकाल 7 बजे विंध्याचल धाम निमिहा मोहल्ला में हुआ। इस शुभ अवसर पर, माँ विंध्यवासिनी का दिव्य सोलह श्रृंगार गाने-बजाने और भक्तिमय भजनों के साथ श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया। मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था, तथा भक्तों के लिए विशेष पूजा-अर्चना एवं भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी। आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदिर परिवार, निमिहा मोहल्ला, कटनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सभी श्रद्धालु परिवार सहित सादर आमंत्रित हुए। भक्तों ने माँ विंध्यवासिनी के दरबार में उपस्थित होकर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया और इस मंगलमय आयोजन में सहभागिता की। इस दौरान मंदिर में चुनरी यात्रा के साथ सोलह श्रृंगार चढ़ाया गया।4
- कटनी नगर में माँ विंध्यवासिनी की भव्य महाआरती हर महीने आयोजित की जाती है। यह विशेष महाआरती प्रत्येक पूर्णिमा स्नान दान के अवसर पर होती है, जिसमें भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।1
- कटनी जिले के आदिवासी अंचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैगवां में कक्षा 9वीं एवं 11वीं की द्वितीय परीक्षा के दिन शिक्षा के प्रति एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली। बुधवार की सुबह जब विद्यालय खुला, तो परीक्षा कक्ष लगभग खाली था और निर्धारित समय पर केवल एक छात्रा ही परीक्षा देने पहुँची थी, जिससे विद्यालय परिवार चिंतित हो उठा। इस स्थिति से हार न मानते हुए, प्राचार्य श्री विपिन तिवारी ने स्वयं जिम्मेदारी संभाली और एक सहयोगी शिक्षक के साथ अपने निजी वाहन से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बस्तियों खुसरा और रामपुरा पहुँचे। वहाँ उन्होंने पाया कि कुछ विद्यार्थी अभी नींद में थे, तो कुछ बिना किसी चिंता के इधर-उधर घूम रहे थे, वहीं अभिभावकों में भी परीक्षा को लेकर विशेष जागरूकता का अभाव दिखाई दिया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया, प्रेरित किया और अपने वाहन से उन्हें विद्यालय लाकर परीक्षा में शामिल कराया। यह उल्लेखनीय है कि इनमें से कई विद्यार्थियों ने परीक्षा शुल्क तक जमा नहीं किया था, फिर भी उनका भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए गए। यह घटना कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में आदिवासी अंचलों में शिक्षा की अलख जगाने के लगातार जारी अभियान का हिस्सा है। यह दर्शाता है कि जब शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और अभिभावक की भूमिका निभाता है, तभी शिक्षा की रोशनी दूर-दराज़ बस्तियों तक पहुँचती है। इस पहल से यह बात सच साबित हुई कि जब शिक्षक घर-घर पहुँचता है, तभी विद्यार्थी परीक्षा कक्ष तक पहुँच पाता है और तभी शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती है।1
- मैहर जिले के ग्राम पंचायत बढेरूहा में राजस्व विभाग और पटवारी की लापरवाही के कारण एक किसान अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित किसान का आरोप है कि उसकी भूमि की कई बार नाप कराई जा चुकी है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज होने के बावजूद उसे आज तक मौके पर उसकी वास्तविक जमीन नहीं मिल पाई है। किसान कामता प्रसाद पटेल का कहना है कि उनकी जमीन पर सड़क निर्माण कर दिया गया है, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते, कई बार अधिकारियों से शिकायत करने और भूमि की नाप कराने के बावजूद, उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसी क्रम में, पीड़ित कामता प्रसाद पटेल ने जिला कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी जमीन पर सड़क का निर्माण हुआ है, तो उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।4
- सतना में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाई गईं "स्मार्ट" जुगनू लाइटें केवल दो दिनों तक ही चमक पाईं और फिर पूरी तरह ठप पड़ गईं। इस विफलता पर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने करोड़ों रुपये का गबन किया है और शहर को अंधेरे में धकेल दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये लाइटें सिर्फ उद्घाटन समारोह तक ही रोशन थीं, जिसके बाद अब खंभों पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार लटकता हुआ दिखाई दे रहा है।1
- बिहार से जुड़े एक मामले को लेकर न्यायिक प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में, यह देखकर चिंता व्यक्त की गई है कि किसी व्यक्ति को 'इस उम्र' में जेल भेजा गया है। पोस्ट में इस कदम को लेकर पूछा गया है कि क्या यह वास्तविक न्याय है या केवल कागज़ी औपचारिकता, क्योंकि इसे देखकर लोगों का सिस्टम से भरोसा उठ सकता है।1