30 लोग वर्षों से माइंस के बीच जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं बागेश्वर के कांडा क्षेत्र के बखेत गांव में करीब 30 लोग वर्षों से माइंस के बीच जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। बारिश होते ही इन परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। घरों के अंदर पानी भरने के साथ ही लगातार खिसकती जमीन और कमजोर हो चुकी दीवारें हादसे की आशंका बढ़ा रही हैं। वीओ 1 - ग्रामीणों के मुताबिक, बखेत में आबादी के दोनों ओर माइंस होने के कारण जमीन लगातार अस्थिर हो रही है। हल्की बारिश में भी घरों के भीतर पानी घुस जाता है। कई मकानों की छतें टपक रही हैं और परिवार बर्तनों में पानी जमा कर रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ घर के भीतर से पानी आता है तो दूसरी तरफ छत से पानी टपकता है। वीओ 2- सबसे ज्यादा चिंता मंजू देवी के परिवार को लेकर है। उनके घर में पांच बच्चे हैं। मकान की दीवारों से पत्थर गिरने लगे हैं, जबकि आंगन की स्थिति भी बेहद खराब है। परिवार के लिए शौचालय की सुविधा तक पर्याप्त नहीं है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजन हर समय चिंतित रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन खिसकने की समस्या नई नहीं है। दशकों से वे सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि बरसात के दौरान हर दिन किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। वीओ 3- ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) में करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं, तो खनन प्रभावित और जोखिम वाले क्षेत्र में रहने वाले इन परिवारों के पुनर्वास के लिए फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। उनकी मांग है कि प्रशासन मौके का स्थलीय निरीक्षण कर जल्द से जल्द उन्हें सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर.. जिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय ने कहा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में टीम भेजकर स्थिति की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
30 लोग वर्षों से माइंस के बीच जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं बागेश्वर के कांडा क्षेत्र के बखेत गांव में करीब 30 लोग वर्षों से माइंस के बीच जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। बारिश होते ही इन परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। घरों के अंदर पानी भरने के साथ ही लगातार खिसकती जमीन और कमजोर हो चुकी दीवारें हादसे की आशंका बढ़ा रही हैं। वीओ 1 - ग्रामीणों के मुताबिक, बखेत में आबादी के दोनों ओर माइंस होने के कारण जमीन लगातार अस्थिर हो रही है। हल्की बारिश में भी घरों के भीतर पानी घुस जाता है। कई मकानों की छतें टपक रही हैं और परिवार बर्तनों में पानी जमा कर रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ घर के भीतर से पानी आता है तो दूसरी तरफ छत से पानी टपकता है। वीओ 2- सबसे ज्यादा चिंता मंजू देवी के परिवार को लेकर है। उनके घर में पांच बच्चे हैं। मकान की दीवारों से पत्थर गिरने लगे हैं, जबकि आंगन की स्थिति भी बेहद खराब है। परिवार के लिए शौचालय की सुविधा तक पर्याप्त नहीं है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजन हर समय चिंतित रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन खिसकने की समस्या नई नहीं है। दशकों से वे सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि बरसात के दौरान हर दिन किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। वीओ 3- ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) में करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं, तो खनन प्रभावित और जोखिम वाले क्षेत्र में रहने वाले इन परिवारों के पुनर्वास के लिए फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। उनकी मांग है कि प्रशासन मौके का स्थलीय निरीक्षण कर जल्द से जल्द उन्हें सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर.. जिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय ने कहा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में टीम भेजकर स्थिति की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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- महेशपुरा में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, किराना दुकानों से लिए सैंपल बाजपुर। खाद्य सुरक्षा विभाग ने शनिवार को महेशपुरा बाजार में औचक चेकिंग अभियान चलाया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपर्णा शाह के नेतृत्व में टीम ने सैनी किराना स्टोर से सरसों तेल, बेसन व मिर्च पाउडर तथा सान्वी किराना स्टोर से बिस्कुट व काले नमक के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे। वहीं शराफत चिकन शॉप और साईं चाउमीन शॉप में सफाई व्यवस्था को लेकर संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। टीम ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।1
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- डंपर की चपेट में आने से युवा अधिवक्ता की मौत, बड़ा भाई गंभीर घायल डंपर की चपेट में आने से युवा अधिवक्ता की मौत, बड़ा भाई गंभीर घायल ठाकुरद्वारा। काशीपुर मुरादाबाद हाईवे पर शनिवार की सुबह लगभग 11:00 बजे कोतवाली क्षेत्र के ग्राम आजाद नगर के निकट मुरादाबाद की दिशा से आ रहे हैं तेज दफ्तर डंपर ने बाइक सवार दो अधिवक्ता भाइयों की बाइक को टक्कर मार दी। पीछे बैठे अधिवक्ता सड़क पर गिरे और उनके सर के ऊपर से डंपर का पहिया उतरने से उनकी कुचल कर मौके पर ही मौत हो गई जबकि बाइक चला रहे बड़े भाई गंभीर घायल हो गए। काकरखेड़ा निवासी युवा अधिवक्ता नाजिम की डंपर की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि उनके बड़े भाई एवं अधिवक्ता आसिफ अली मलिक गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों भाई ठाकुरद्वारा तहसील में वकालत की प्रैक्टिस करते थे। दोनों अपने घर से ठाकुरद्वारा आ रहे थे। पुलिस ने डंपर को कब्जे में ले लिया। मृतक अधिवक्ता के शव को पीएम के लिए भेजा गया है जबकि घायल को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। कोतवाली क्षेत्र के डिलारी के ग्राम काकर खेड़ा निवासी अधिवक्ता आसिफ अली मलिक 30 अपने छोटे भाई नाजिम 25 के साथ बाइक से ठाकुरद्वारा तहसील आ रहे थे। बताया जाता है कि जैसे ही दोनों आजादनगर क्षेत्र में पहुंचे, तभी मुरादाबाद की दिशा से पीछे से तेज रफ्तार से आए एक डंपर ने पीछे से उनकी बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि छोटे भाई नाजिम की मौके पर ही मौत हो गई, बताते हैं कि उनके गिरते ही डंपर का पहिया उनके सिर के ऊपर से गुजर गया। जबकि आसिफ गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना पर मौजूद लोगों ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी तो पुलिस ने घायल अधिवक्ता आसिफ अली को उपचार के लिए राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक नाजिम के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। सड़क दुर्घटना में युवा अधिवक्ता की असामयिक मौत की खबर मिलते ही अधिवक्ता समाज एवं क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ठाकुरद्वारा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी आबिद अली, महासचिव सतीश वत्सल, शमीम कुरैशी, मुजाहिद अली, कासिम अली अंसारी आदि राज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए और सपा विधायक नवाब जान तत्काल वहां पहुंचे और चिकित्सकों से घायल वरिष्ठ अधिवक्ता की बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए कहा जबकि प्रभारी निरीक्षक मनोज परमार से डंपरों से लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर इनके दिन में संचालन पर रोक लगाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखने के लिए कहा। रालोद नेता एवं पूर्व विधायक विजय यादव भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना देने के साथ ही डंपर के संचालक को लेकर सख्त रुख अपनाने के लिए प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार से बातचीत की।वहीं परिजनों ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर डंपर चालक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। प्रभारी निरीक्षक मनोज परमार ने बताया कि डंपर पकड़ लिया गया है।1
- 06/092026 टांडा में बारिश रोकने का नाम नहीं ले रही हे आज टांडा में पूरा दिन बारिश का प्रकोप2
- देश आज चाँद पर पहुँच गया है , लेकिन टिहरी के इस गांव तक आज तक सड़क नहीं पहुंची! टिहरी गढ़वाल :देश आज चाँद पर पहुँच गया है , लेकिन टिहरी के इस गांव तक आज तक सड़क नहीं पहुंची! ग्राम पंचायत सिलोडा, उपली रमोली, विधानसभा प्रतापनगर, जनपद टिहरी गढ़वाल के अंतिम गांव में आज भी सड़क नहीं होने की वजह से लोगों को डंडी कंडि का सहारा लेकर सड़क मार्ग तक लाना पड़ता है आजादी के दशकों बाद और उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी यहां के ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। लगातार बारिश और खराब मौसम के बीच जब किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ती है, बुजुर्ग बीमार पड़ते हैं, जंगल में घास काटते समय कोई महिला दुर्घटनाग्रस्त होती है या किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होती है, तो उसे डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। जिस दुर्गम और फिसलन भरे रास्ते पर सामान्य व्यक्ति का चलना तक मुश्किल है, उसी रास्ते पर लाचार मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जिंदगी दांव पर लगाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी है। समय पर उपचार न मिलने के कारण कई बार रास्ते में ही अनहोनी होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। सवाल सरकार से है—आखिर इन ग्रामीणों का गुनाह क्या है? क्या सड़क सिर्फ शहरों और सड़कों से जुड़े गांवों का अधिकार है? क्या पहाड़ के अंतिम छोर पर रहने वाला ग्रामीण इस मूलभूत सुविधा का हकदार नहीं है? क्या चुनाव के समय किए गए वादे और घोषणाएं सिर्फ वोट लेने तक सीमित हैं? पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन सिलोडा जैसे सीमांत गांवों की तस्वीर नहीं बदली। उन्होंने कहा कि यह गांव टिहरी और उत्तरकाशी जनपद की सीमा से लगा हुआ अंतिम क्षेत्र है। भाजपा की तथाकथित ‘डबल इंजन’ सरकार ने गांव तक सड़क पहुंचाने की कई बार घोषणाएं कीं, लेकिन घोषणाओं के बावजूद आज भी ग्रामीण उसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर हैं। यह विकास के दावों की नहीं, सरकार की जमीनी नाकामी की तस्वीर है। राकेश राणा ने कहा कि सरकार को घोषणाओं और जुमलों से बाहर निकलकर सिलोडा गांव तक सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू करना चाहिए। पहाड़ के ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। उन्हें हर बार चुनाव के समय आश्वासन और चुनाव के बाद उपेक्षा स्वीकार नहीं है। अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, इंसानी जिंदगी का है। सरकार बताए सिलोडा के ग्रामीणों को सड़क कब मिलेगी? और आखिर कितनी जिंदगियां डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाई जाएंगी?1
- नजीबाबाद में साइबर ठगों का कारनामा: व्यापारी के बैंक खाते से उड़ाए 79 हजार रुपये, 6 बार में निकाली रकम #BijnorNews #Najibabad #CyberCrime #CyberFraud #UPPolice #BankFraud1
- ग्राम सदरूद्दीन नगर में पिंजरे में कैद हुआ आदमखोर गुलदार देखने वालों की लगी भारीभीड़ बिजनौर नेहत्तर क्षेत्र के पढ़ने वाली ग्राम सदरूद्दीन नगर में वन विभाग के द्वारा लगाए गए पिंजरे में गुलदार फंसने की जैसे ही क्षेत्र वासी को खबर मिली वहां भीड़ जमा हो गई एक किसान ने सुबह अपने खेत पर जाकर देखा तो पिंजरे में गुलदार कैद हुआ मिला जैसे ही उसने गांव के मौजूद लोगों को इसकी सूचना दी देखने वालों का तांता लग गया मोहम्मद सलीम मलिक की खास रिपोर्ट1