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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के उतरौला में हुए अहरौला हत्याकांड में पीड़ित को अभी तक सहायता नहीं मिली है। इस संबंध में सवाल उठाया गया है कि बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने पीड़ित को सहायता न मिलने की स्थिति पर क्या बयान दिया है।
समय व्यूज राष्ट्रीय समाचार
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के उतरौला में हुए अहरौला हत्याकांड में पीड़ित को अभी तक सहायता नहीं मिली है। इस संबंध में सवाल उठाया गया है कि बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने पीड़ित को सहायता न मिलने की स्थिति पर क्या बयान दिया है।
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- बलरामपुर जिले के पंचायत सहायकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन अपर जिला अधिकारी न्यायिक श्री शिव नारायण सिंह को सौंपा है, जिसमें उनके मानदेय और सेवा शर्तों को अपर्याप्त और असंतोषजनक बताया गया है। इस दौरान समाजसेवी युगल किशोर शुक्ल ने पंचायत सहायकों का मोर्चा संभाला और उनका समर्थन किया। ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायत सहायक प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विभिन्न डिजिटल, प्रशासनिक और जनहित के कार्यों का निरंतर निर्वहन करते हुए शासन की योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में पंचायत सहायकों को मात्र ₹6000 प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है, जो बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की आवश्यकताओं के हिसाब से अत्यंत कम है। इस अल्प मानदेय में एक परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन करना बेहद कठिन हो गया है, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत सहायकों ने अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए पाँच मुख्य मांगें रखी हैं: मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष ₹30,000 प्रतिमाह किया जाए या कम से कम उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम कुशल मजदूरी दर लागू की जाए; अनुबंध प्रणाली समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली बनाई जाए; विवाह उपरांत महिला पंचायत सहायकों हेतु स्थानांतरण/समायोजन नीति लागू की जाए; ग्राम पंचायत अधिकारी/ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया में पंचायत सहायकों को 50% आरक्षण प्रदान किया जाए; और पंचायत सहायकों एवं उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए। पंचायत सहायकों ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की अपील की है, विश्वास व्यक्त करते हुए कि प्रदेश सरकार उनकी समस्याओं का सकारात्मक एवं न्यायोचित समाधान करेगी। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि निर्धारित समयावधि में उनकी मांगों पर उचित विचार एवं आवश्यक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो समस्त पंचायत सहायक अपनी समस्याओं की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करने हेतु दिनांक 15 जून 2026 को ईको गार्डेन, लखनऊ में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने के लिए विवश होंगे। इस अवसर पर पंचायत सहायक यूनियन के जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता के साथ समाजसेवी युगल किशोर शुक्ल एडवोकेट एवं पूर्व सांसद प्रत्याशी लोकसभा श्रावस्ती और जिले भर के पंचायत सहायक मौजूद रहे। युगल किशोर शुक्ल ने इस नौकरी को 'सांप के गले में छछुंदर' के समान बताया, जिसमें ग्राम पंचायत के होनहार मेधावी युवा सेवा दे रहे हैं और आर्थिक शोषण झेल रहे हैं।1
- दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लगने के कारण दर्जनों लोगों की मौत हो गई है। इस अग्निकांड में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।1
- पत्रकार अंजना ने YouTube पर पढ़ाने वाले एक टीचर के साथ 'बहुत गलत' काम किया है। इस घटना को लेकर लोग अपनी तीव्र प्रतिक्रिया और हैरानी जता रहे हैं।1
- यहां सेवा के दौरान कभी भी दुर्घटना होने की आशंका व्यक्त की गई है, जहाँ लगातार किसी भी समय बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।1
- समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बांसी तहसील पहुँचकर महामहिम राज्यपाल महोदय को एक ज्ञापन प्रेषित किया। यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। इस कार्यक्रम का निर्देशन समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष लालजी यादव ने किया, जबकि इसका नेतृत्व समाजवादी पार्टी के प्रदेश सदस्य कमाल अहमद खान ने किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।1
- कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बातें रखी गईं या क्या घोषणाएँ की गईं, इस संबंध में कोई विवरण सामने नहीं आया है।1
- उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक महोदय से हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाई है। परिवार ने अपील की है कि उनके मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह भी स्पष्ट मांग की है कि पूरे मामले का सच सामने लाया जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।1
- सिद्धार्थनगर जिले के जोगिया विकास खंड की ग्राम पंचायत रामापुर में लाखों रुपये की लागत से बना पंचायत भवन बदहाली का शिकार हो गया है। लगभग ₹35 लाख की लागत से निर्मित इस भवन में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है, जहाँ न तो खिड़कियां लगी हैं और न ही दरवाजे। कई स्थानों पर टाइल्स टूटी हुई हैं, और शौचालय का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। भवन के भीतर स्थापित लाइब्रेरी की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ रखी पुस्तकों पर धूल और गंदगी की परत जमी है, और कई किताबों में दीमक व अन्य कीड़े लग चुके हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह लाइब्रेरी अपनी उपयोगिता खोती दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन में न तो कोई अधिकारी नियमित रूप से पहुंचता है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। इस मामले में जब खंड विकास अधिकारी जोगिया, रामानंद वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सहायक खंड विकास अधिकारी (पंचायत) प्रदीप सिंह से बात करने को कहा। प्रदीप सिंह ने भी स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए सरकारी नंबर पर कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही कोई कॉल बैक प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंचायत भवन, जिसे सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और जनसेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। सिद्धार्थनगर जिले के आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बावजूद, जहाँ विकास कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रयास और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, ग्राम पंचायत रामापुर की यह स्थिति विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।1
- आगरा में एक जवान ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक डूबती हुई महिला का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। इस बहादुरी भरे कार्य के लिए, पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने जवान की विशेष रूप से प्रशंसा की है।2