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सिद्धार्थनगर जिले के जोगिया विकास खंड की ग्राम पंचायत रामापुर में लाखों रुपये की लागत से बना पंचायत भवन बदहाली का शिकार हो गया है। लगभग ₹35 लाख की लागत से निर्मित इस भवन में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है, जहाँ न तो खिड़कियां लगी हैं और न ही दरवाजे। कई स्थानों पर टाइल्स टूटी हुई हैं, और शौचालय का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। भवन के भीतर स्थापित लाइब्रेरी की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ रखी पुस्तकों पर धूल और गंदगी की परत जमी है, और कई किताबों में दीमक व अन्य कीड़े लग चुके हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह लाइब्रेरी अपनी उपयोगिता खोती दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन में न तो कोई अधिकारी नियमित रूप से पहुंचता है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। इस मामले में जब खंड विकास अधिकारी जोगिया, रामानंद वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सहायक खंड विकास अधिकारी (पंचायत) प्रदीप सिंह से बात करने को कहा। प्रदीप सिंह ने भी स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए सरकारी नंबर पर कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही कोई कॉल बैक प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंचायत भवन, जिसे सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और जनसेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। सिद्धार्थनगर जिले के आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बावजूद, जहाँ विकास कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रयास और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, ग्राम पंचायत रामापुर की यह स्थिति विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

2 hrs ago
user_पत्रकारिता
पत्रकारिता
Local News Reporter बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

सिद्धार्थनगर जिले के जोगिया विकास खंड की ग्राम पंचायत रामापुर में लाखों रुपये की लागत से बना पंचायत भवन बदहाली का शिकार हो गया है। लगभग ₹35 लाख की लागत से निर्मित इस भवन में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है, जहाँ न तो खिड़कियां लगी हैं और न ही दरवाजे। कई स्थानों पर टाइल्स टूटी हुई हैं, और शौचालय का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। भवन के भीतर स्थापित लाइब्रेरी की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ रखी पुस्तकों पर धूल और गंदगी की परत जमी है, और कई किताबों में दीमक व अन्य कीड़े लग चुके हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह लाइब्रेरी अपनी उपयोगिता खोती दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन में न तो कोई अधिकारी नियमित रूप से पहुंचता है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। इस मामले में जब खंड विकास अधिकारी जोगिया, रामानंद वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सहायक खंड विकास अधिकारी (पंचायत) प्रदीप सिंह से बात करने को कहा। प्रदीप सिंह ने भी स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए सरकारी नंबर पर कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही कोई कॉल बैक प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंचायत भवन, जिसे सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और जनसेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। सिद्धार्थनगर जिले के आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बावजूद, जहाँ विकास कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रयास और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, ग्राम पंचायत रामापुर की यह स्थिति विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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  • समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बांसी तहसील पहुँचकर महामहिम राज्यपाल महोदय को एक ज्ञापन प्रेषित किया। यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। इस कार्यक्रम का निर्देशन समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष लालजी यादव ने किया, जबकि इसका नेतृत्व समाजवादी पार्टी के प्रदेश सदस्य कमाल अहमद खान ने किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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    समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बांसी तहसील पहुँचकर महामहिम राज्यपाल महोदय को एक ज्ञापन प्रेषित किया। यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। इस कार्यक्रम का निर्देशन समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष लालजी यादव ने किया, जबकि इसका नेतृत्व समाजवादी पार्टी के प्रदेश सदस्य कमाल अहमद खान ने किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
    user_Rashid Malik
    Rashid Malik
    बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    54 min ago
  • सिद्धार्थनगर जिले के जोगिया विकास खंड की ग्राम पंचायत रामापुर में लाखों रुपये की लागत से बना पंचायत भवन बदहाली का शिकार हो गया है। लगभग ₹35 लाख की लागत से निर्मित इस भवन में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है, जहाँ न तो खिड़कियां लगी हैं और न ही दरवाजे। कई स्थानों पर टाइल्स टूटी हुई हैं, और शौचालय का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। भवन के भीतर स्थापित लाइब्रेरी की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ रखी पुस्तकों पर धूल और गंदगी की परत जमी है, और कई किताबों में दीमक व अन्य कीड़े लग चुके हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह लाइब्रेरी अपनी उपयोगिता खोती दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन में न तो कोई अधिकारी नियमित रूप से पहुंचता है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। इस मामले में जब खंड विकास अधिकारी जोगिया, रामानंद वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सहायक खंड विकास अधिकारी (पंचायत) प्रदीप सिंह से बात करने को कहा। प्रदीप सिंह ने भी स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए सरकारी नंबर पर कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही कोई कॉल बैक प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंचायत भवन, जिसे सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और जनसेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। सिद्धार्थनगर जिले के आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बावजूद, जहाँ विकास कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रयास और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, ग्राम पंचायत रामापुर की यह स्थिति विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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    सिद्धार्थनगर जिले के जोगिया विकास खंड की ग्राम पंचायत रामापुर में लाखों रुपये की लागत से बना पंचायत भवन बदहाली का शिकार हो गया है। लगभग ₹35 लाख की लागत से निर्मित इस भवन में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है, जहाँ न तो खिड़कियां लगी हैं और न ही दरवाजे। कई स्थानों पर टाइल्स टूटी हुई हैं, और शौचालय का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। भवन के भीतर स्थापित लाइब्रेरी की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ रखी पुस्तकों पर धूल और गंदगी की परत जमी है, और कई किताबों में दीमक व अन्य कीड़े लग चुके हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह लाइब्रेरी अपनी उपयोगिता खोती दिख रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन में न तो कोई अधिकारी नियमित रूप से पहुंचता है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। इस मामले में जब खंड विकास अधिकारी जोगिया, रामानंद वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सहायक खंड विकास अधिकारी (पंचायत) प्रदीप सिंह से बात करने को कहा। प्रदीप सिंह ने भी स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए सरकारी नंबर पर कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही कोई कॉल बैक प्राप्त हुआ।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंचायत भवन, जिसे सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और जनसेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। सिद्धार्थनगर जिले के आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बावजूद, जहाँ विकास कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रयास और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, ग्राम पंचायत रामापुर की यह स्थिति विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    Local News Reporter बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बुधवार को सिद्धार्थनगर के बांसी तहसील मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष लालजी यादव और प्रदेश सदस्य कमाल अहमद खान के नेतृत्व में विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सपा कार्यालय से सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला, नारेबाजी करते हुए तहसील पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने बढ़ती महंगाई, डीजल-पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि, किसानों की समस्याओं, नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण, वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की रिहाई, तथा खेसरहा थाना प्रभारी को हटाए जाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश में आम जनता, किसान, युवा और व्यापारी वर्ग विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, महंगाई लगातार बढ़ रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। तहसील परिसर पहुँचकर जिलाध्यक्ष लालजी यादव और कमाल अहमद खान ने राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बांसी निखिल चक्रवर्ती को पढ़कर सुनाया और सौंपा। इस ज्ञापन में जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। उपजिलाधिकारी निखिल चक्रवर्ती ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए आश्वासन दिया कि उनके स्तर से संबंधित मांगों पर नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई की जाएगी और अन्य मांगों को शासन स्तर पर भेजा जाएगा। सपा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो समाजवादी पार्टी जनआंदोलन को और तेज करेगी। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के कई पदाधिकारी, वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान तहसील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही।
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    बुधवार को सिद्धार्थनगर के बांसी तहसील मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष लालजी यादव और प्रदेश सदस्य कमाल अहमद खान के नेतृत्व में विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सपा कार्यालय से सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला, नारेबाजी करते हुए तहसील पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने बढ़ती महंगाई, डीजल-पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि, किसानों की समस्याओं, नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण, वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की रिहाई, तथा खेसरहा थाना प्रभारी को हटाए जाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश में आम जनता, किसान, युवा और व्यापारी वर्ग विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, महंगाई लगातार बढ़ रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

तहसील परिसर पहुँचकर जिलाध्यक्ष लालजी यादव और कमाल अहमद खान ने राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बांसी निखिल चक्रवर्ती को पढ़कर सुनाया और सौंपा। इस ज्ञापन में जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। उपजिलाधिकारी निखिल चक्रवर्ती ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए आश्वासन दिया कि उनके स्तर से संबंधित मांगों पर नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई की जाएगी और अन्य मांगों को शासन स्तर पर भेजा जाएगा। सपा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो समाजवादी पार्टी जनआंदोलन को और तेज करेगी। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के कई पदाधिकारी, वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान तहसील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही।
    user_Ankur gupta
    Ankur gupta
    Local News Reporter बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सिद्धार्थनगर जिले के बांसी तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत नेऊसा के जगमोहनी गांव से रेलवे ठेकेदार की मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों के आरोपानुसार, यहाँ एक रेलवे ठेकेदार द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पोखरे की अवैध खुदाई की जा रही है, जहाँ रात के अंधेरे में पोखरे से मिट्टी खोदकर उसे रेलवे कार्य में बेचा जा रहा है। इस अवैध खुदाई से न केवल राजस्व को चूना लग रहा है, बल्कि गांव में बड़े हादसे का खतरा भी पैदा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि खुदाई का काम मुख्य रूप से रात के समय किया जाता है, जिससे पोखरा इतना गहरा हो गया है कि वह अब एक गहरे कुएं में तब्दील होता जा रहा है। ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि आने वाले बरसात के मौसम में पोखरा पानी से लबालब भर जाएगा, और अगर कोई मवेशी, जानवर या बच्चे इसमें जाते हैं तो उनका डूबना तय है, जो उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इस अवैध खनन और मनमानी को लेकर जगमोहनी गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि इस अवैध खुदाई को तुरंत रोका जाए, ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, और पोखरे को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन इस मामले में कब तक सुध लेता है और ठेकेदार की इस मनमानी पर कब लगाम कसी जाती है।
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    सिद्धार्थनगर जिले के बांसी तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत नेऊसा के जगमोहनी गांव से रेलवे ठेकेदार की मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों के आरोपानुसार, यहाँ एक रेलवे ठेकेदार द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पोखरे की अवैध खुदाई की जा रही है, जहाँ रात के अंधेरे में पोखरे से मिट्टी खोदकर उसे रेलवे कार्य में बेचा जा रहा है।

इस अवैध खुदाई से न केवल राजस्व को चूना लग रहा है, बल्कि गांव में बड़े हादसे का खतरा भी पैदा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि खुदाई का काम मुख्य रूप से रात के समय किया जाता है, जिससे पोखरा इतना गहरा हो गया है कि वह अब एक गहरे कुएं में तब्दील होता जा रहा है। ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि आने वाले बरसात के मौसम में पोखरा पानी से लबालब भर जाएगा, और अगर कोई मवेशी, जानवर या बच्चे इसमें जाते हैं तो उनका डूबना तय है, जो उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

इस अवैध खनन और मनमानी को लेकर जगमोहनी गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि इस अवैध खुदाई को तुरंत रोका जाए, ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, और पोखरे को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन इस मामले में कब तक सुध लेता है और ठेकेदार की इस मनमानी पर कब लगाम कसी जाती है।
    user_Ajeet kumar maurya
    Ajeet kumar maurya
    Court reporter बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • सिद्धार्थनगर जिले में एक मदरसे में नौकरी दिलाने के बहाने ₹17 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यह घटना इटवा तहसील के भदोखर स्थित जामिया अरबिया हशमतिया अहले सुन्नत मेराजुल उलूम मदरसे से जुड़ी है। पीड़ित की शिकायत के बाद, शोहरतगढ़ पुलिस ने इस मामले में मदरसे के पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित गुलाम मोईनुद्दीन ने बताया कि पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान ने उन्हें मदरसे में नौकरी दिलवाने का झांसा दिया था और इस एवज में उनसे ₹17 लाख लिए थे। यह राशि बैंक खाते के माध्यम से और नकद दोनों तरह से दी गई थी। गुलाम मोईनुद्दीन का कहना है कि पैसे लेने के बावजूद उन्हें न तो नौकरी दी गई और न ही उनके पैसे वापस किए गए, बल्कि लगातार टालमटोल की जाती रही। काफी प्रयासों के बाद भी जब उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने शोहरतगढ़ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले को संज्ञान में लेते हुए, शोहरतगढ़ पुलिस ने तत्काल मोहसिन खान और तीन अन्य लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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    सिद्धार्थनगर जिले में एक मदरसे में नौकरी दिलाने के बहाने ₹17 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यह घटना इटवा तहसील के भदोखर स्थित जामिया अरबिया हशमतिया अहले सुन्नत मेराजुल उलूम मदरसे से जुड़ी है। पीड़ित की शिकायत के बाद, शोहरतगढ़ पुलिस ने इस मामले में मदरसे के पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित गुलाम मोईनुद्दीन ने बताया कि पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान ने उन्हें मदरसे में नौकरी दिलवाने का झांसा दिया था और इस एवज में उनसे ₹17 लाख लिए थे। यह राशि बैंक खाते के माध्यम से और नकद दोनों तरह से दी गई थी। गुलाम मोईनुद्दीन का कहना है कि पैसे लेने के बावजूद उन्हें न तो नौकरी दी गई और न ही उनके पैसे वापस किए गए, बल्कि लगातार टालमटोल की जाती रही। काफी प्रयासों के बाद भी जब उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने शोहरतगढ़ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

मामले को संज्ञान में लेते हुए, शोहरतगढ़ पुलिस ने तत्काल मोहसिन खान और तीन अन्य लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    user_आदित्य कुमार सिंह
    आदित्य कुमार सिंह
    Local News Reporter इटवा, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • यहां सेवा के दौरान कभी भी दुर्घटना होने की आशंका व्यक्त की गई है, जहाँ लगातार किसी भी समय बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।
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    यहां सेवा के दौरान कभी भी दुर्घटना होने की आशंका व्यक्त की गई है, जहाँ लगातार किसी भी समय बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।
    user_Jamal akhtar
    Jamal akhtar
    रुधौली, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • सिद्धार्थनगर से भगवा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने हिंदुत्व के विषय पर एक बयान दिया है।
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    सिद्धार्थनगर से भगवा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने हिंदुत्व के विषय पर एक बयान दिया है।
    user_SDR Express News
    SDR Express News
    Local News Reporter नौगढ़, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • सिद्धार्थनगर जिले में एक मदरसे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 17 लाख रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। यह घटना इटवा तहसील क्षेत्र के भदोखर स्थित जामिया अरबिया हशमतिया अहले सुन्नत मेराजुल उलूम मदरसे से जुड़ी है। पीड़ित की शिकायत के आधार पर, शोहरतगढ़ पुलिस ने मदरसे के पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान सहित चार लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ित गुलाम मोईनुद्दीन ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान ने उन्हें मदरसे में नौकरी दिलाने का वादा करके 17 लाख रुपये ठगे। उन्होंने बताया कि यह पूरी रकम बैंक खाते के माध्यम से और नकद दोनों तरह से दी गई थी। पीड़ित के अनुसार, पैसे लेने के बावजूद उन्हें न तो कोई नियुक्ति मिली और न ही उनके रुपये वापस किए गए। आरोपित लगातार उन्हें टालमटोल करते रहे। काफी समय तक इंतजार करने और कोशिश करने के बाद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो गुलाम मोईनुद्दीन ने शोहरतगढ़ थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है। शोहरतगढ़ पुलिस ने बताया कि मोहसिन खान और अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं और इकट्ठा किए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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    सिद्धार्थनगर जिले में एक मदरसे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 17 लाख रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। यह घटना इटवा तहसील क्षेत्र के भदोखर स्थित जामिया अरबिया हशमतिया अहले सुन्नत मेराजुल उलूम मदरसे से जुड़ी है। पीड़ित की शिकायत के आधार पर, शोहरतगढ़ पुलिस ने मदरसे के पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान सहित चार लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित गुलाम मोईनुद्दीन ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रबंधक मोहसिन खान ने उन्हें मदरसे में नौकरी दिलाने का वादा करके 17 लाख रुपये ठगे। उन्होंने बताया कि यह पूरी रकम बैंक खाते के माध्यम से और नकद दोनों तरह से दी गई थी। पीड़ित के अनुसार, पैसे लेने के बावजूद उन्हें न तो कोई नियुक्ति मिली और न ही उनके रुपये वापस किए गए। आरोपित लगातार उन्हें टालमटोल करते रहे। काफी समय तक इंतजार करने और कोशिश करने के बाद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो गुलाम मोईनुद्दीन ने शोहरतगढ़ थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई।

पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है। शोहरतगढ़ पुलिस ने बताया कि मोहसिन खान और अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं और इकट्ठा किए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    user_Aditya Tv Channel Singh
    Aditya Tv Channel Singh
    पत्रकार डोमरियागंज, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
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