अस्थिर शिक्षा नीतियों और सरप्लस शिक्षक व्यवस्था के चक्र में फंसा शिक्षक कानपुर देहात। बेसिक शिक्षा विभाग में बार-बार बदलते नियमों, गणना के आधारों और नए आदेशों के कारण पूरी व्यवस्था एक अंतहीन चक्र में उलझकर रह गई है। विभाग द्वारा अपने ही नियमों के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को कुछ वर्षों बाद अचानक नए आदेशों के आधार पर सरप्लस घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद विरोध प्रदर्शन, अदालती प्रक्रियाएं, न्यायिक टिप्पणियां और नए शासनादेशों का एक ऐसा सिलसिला शुरू होता है जो खत्म होने का नाम नहीं लेता। इस पूरी प्रशासनिक अनिश्चितता में सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई का हो रहा है और शिक्षक मानसिक असुरक्षा के दौर से गुजर रहे हैं। शिक्षा का अधिकार कानून का मूल उद्देश्य प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना था ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे हालांकि समय के साथ नीतिगत ध्यान प्रत्येक विद्यालय से हटकर पूरे प्रदेश के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है। अब यह देखने की प्रवृत्ति हावी हो गई है कि पूरे राज्य में कुल कितने शिक्षक हैं जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अलग-अलग स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की वास्तविक जरूरत को नजरअंदाज किया जा रहा है। न्यूनतम शिक्षक संख्या का नियम भी अब गुणवत्ता सुधारने के बजाय केवल एक प्रशासनिक आंकड़ों के खेल तक सीमित रह गया है। नीति में स्थायित्व और पूर्वानुमेयता का अभाव शिक्षकों के प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। जब हर कुछ महीनों में विषय, स्कूल, ब्लॉक या जिले के स्तर पर सरप्लस की गणना के नियम बदलते हैं तो शिक्षक का ध्यान पठन-पाठन से हटकर अपने संभावित स्थानांतरण और कानूनी लड़ाइयों पर चला जाता है। लगातार मानसिक असुरक्षा और पोस्टिंग के डर के माहौल में कोई भी शिक्षक अपनी पूर्ण क्षमता से पढ़ा नहीं पाता जिससे शिक्षा का स्तर गिरता है। वर्षों तक अपनी सेवाएं देने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसी शिक्षक पर अचानक सरप्लस या अतिरिक्त का ठप्पा लगा देना उनके मनोबल को बुरी तरह प्रभावित करता है। किसी भी संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था के लिए यह उचित नहीं है कि वह अपने ही द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को लगातार अनिश्चितता में रखे। यदि राज्य में कहीं शिक्षकों के वितरण में असंतुलन है तो उसका समाधान संस्थागत, पारदर्शी और सम्मानजनक तरीकों से होना चाहिए न कि बार-बार शिक्षकों पर सरप्लस का थप्पा लगाकर। समस्या का समाधान बार-बार नए छिटपुट आदेश जारी करने में नहीं बल्कि एक समग्र और दीर्घकालिक शिक्षा नीति में है। जरूरत एक ऐसी नीति की है जो पिछले सभी शासनादेशों, अदालती फैसलों, आरटीई की मूल भावना, वास्तविक छात्र संख्या और स्थानीय जरूरतों का अध्ययन करके बनाई जाए। इस प्रक्रिया में शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षा अधिकारियों, विशेषज्ञों और अभिभावकों की राय शामिल होनी चाहिए। एक ऐसी नीति जो कम से कम 5 से 10 वर्षों तक स्थिर रहे ताकि शिक्षक अपना समय अदालतों और कागजी गणनाओं में गंवाने के बजाय पूरी तरह बच्चों को पढ़ाने में लगा सकें।
अस्थिर शिक्षा नीतियों और सरप्लस शिक्षक व्यवस्था के चक्र में फंसा शिक्षक कानपुर देहात। बेसिक शिक्षा विभाग में बार-बार बदलते नियमों, गणना के आधारों और नए आदेशों के कारण पूरी व्यवस्था एक अंतहीन चक्र में उलझकर रह गई है। विभाग द्वारा अपने ही नियमों के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को कुछ वर्षों बाद अचानक नए आदेशों के आधार पर सरप्लस घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद विरोध प्रदर्शन, अदालती प्रक्रियाएं, न्यायिक टिप्पणियां और नए शासनादेशों का एक ऐसा सिलसिला शुरू होता है जो खत्म होने का नाम नहीं लेता। इस पूरी प्रशासनिक अनिश्चितता में सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई का हो रहा है और शिक्षक मानसिक असुरक्षा के दौर से गुजर रहे हैं। शिक्षा का अधिकार कानून का मूल उद्देश्य प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना था ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे हालांकि समय के साथ नीतिगत ध्यान प्रत्येक विद्यालय से हटकर पूरे प्रदेश के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है। अब यह देखने की प्रवृत्ति हावी हो गई है कि पूरे राज्य में कुल कितने शिक्षक हैं जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अलग-अलग स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की वास्तविक जरूरत को नजरअंदाज किया जा रहा है। न्यूनतम शिक्षक संख्या का नियम भी अब गुणवत्ता सुधारने के बजाय केवल एक प्रशासनिक आंकड़ों के खेल तक सीमित रह गया है। नीति में स्थायित्व और पूर्वानुमेयता का अभाव शिक्षकों के प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। जब हर कुछ महीनों में विषय, स्कूल, ब्लॉक या जिले के स्तर पर सरप्लस की गणना के नियम बदलते हैं तो शिक्षक का ध्यान पठन-पाठन से हटकर अपने संभावित स्थानांतरण और कानूनी लड़ाइयों पर चला जाता है। लगातार मानसिक असुरक्षा और पोस्टिंग के डर के माहौल में कोई भी शिक्षक अपनी पूर्ण क्षमता से पढ़ा नहीं पाता जिससे शिक्षा का स्तर गिरता है। वर्षों तक अपनी सेवाएं देने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसी शिक्षक पर अचानक सरप्लस या अतिरिक्त का ठप्पा लगा देना उनके मनोबल को बुरी तरह प्रभावित करता है। किसी भी संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था के लिए यह उचित नहीं है कि वह अपने ही द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को लगातार अनिश्चितता में रखे। यदि राज्य में कहीं शिक्षकों के वितरण में असंतुलन है तो उसका समाधान संस्थागत, पारदर्शी और सम्मानजनक तरीकों से होना चाहिए न कि बार-बार शिक्षकों पर सरप्लस का थप्पा लगाकर। समस्या का समाधान बार-बार नए छिटपुट आदेश जारी करने में नहीं बल्कि एक समग्र और दीर्घकालिक शिक्षा नीति में है। जरूरत एक ऐसी नीति की है जो पिछले सभी शासनादेशों, अदालती फैसलों, आरटीई की मूल भावना, वास्तविक छात्र संख्या और स्थानीय जरूरतों का अध्ययन करके बनाई जाए। इस प्रक्रिया में शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षा अधिकारियों, विशेषज्ञों और अभिभावकों की राय शामिल होनी चाहिए। एक ऐसी नीति जो कम से कम 5 से 10 वर्षों तक स्थिर रहे ताकि शिक्षक अपना समय अदालतों और कागजी गणनाओं में गंवाने के बजाय पूरी तरह बच्चों को पढ़ाने में लगा सकें।
- *शिकायतों का निर्धारित समयसीमा के भीतर करें गुणवत्तापूर्ण निस्तारण: जिलाधिकारी* *जिलाधिकारी ने संपूर्ण समाधान दिवस डेरापुर में सुनीं जनसमस्याएं, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के दिए निर्देश।* कानपुर देहात, 1 अगस्त 2026 जनपद की समस्त तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिला स्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी कपिल सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी न्यायिक दिग्विजय सिंह ने तहसील डेरापुर में आमजन की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण के त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। तहसील डेरापुर में आयोजित समाधान दिवस के दौरान कुल 251 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 05 शिकायत का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों का निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा शिकायतकर्ता की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत का मौके पर जाकर परीक्षण किया जाए और समाधान के उपरांत शिकायतकर्ता से वार्ता कर उसका फीडबैक भी लिया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा उदासीनता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भूमि विवाद से जुड़े मामलों में राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री संदर्भ, जनप्रतिनिधियों के संदर्भ, आईजीआरएस तथा तहसील दिवस में प्राप्त सभी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल दिया। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने कार्यालयों में प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक नियमित जनसुनवाई करें, शिकायत पंजिका का संधारण करें, प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें तथा आमजन के साथ संवेदनशील एवं शिष्ट व्यवहार सुनिश्चित करें। जनसुनवाई के दौरान दो शिकायतकर्ताओं राकेश कुमार निवासी ग्राम टिकनगांव झींझक व अमित बाजपेई निवासी ग्राम सैफाबाद द्वारा जिलाधिकारी को खतौनी में नाम संशोधन संबंधी प्रार्थना पत्र दिया गया जिस पर जिलाधिकारी ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए संशोधित सही खतौनी शिकायतकर्ताओं को सौंपी, शिकायतकर्ताओ द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की गई। वहीं जिलाधिकारी द्वारा तहसील डेरापुर अंतर्गत संचालित गौशालाओं का जिला स्तरीय अधिकारियों को निरीक्षण कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जनपद की अन्य तहसीलों में भी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित कर शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को सुना गया तथा उनके निस्तारण हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिग्विजय सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 जयगोविन्द, उप जिलाधिकारी डेरापुर, क्षेत्राधिकारी, जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी, जिला परियोजना अधिकारी डीआरडीए अनिरूद्ध सिंह सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।1
- हरदोई गूजर में 24 लाख का मरघट निर्माण! जमीन पर न निर्माण, न ढांचा—ऑनलाइन रिकॉर्ड में भुगतान का खेल? जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर से सरकारी विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उपलब्ध ‘मेरी पंचायत’ ऑनलाइन रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट में मरघट निर्माण से संबंधित कार्यों पर लाखों रुपये के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य मौके पर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में Marghat Nirman कार्य के लिए अनुमानित लागत ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। वहीं भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है। एक अन्य रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से क्रमशः ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है। इन सभी रिकॉर्डों की वास्तविकता और कार्य की भौतिक स्थिति की आधिकारिक जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल—24 लाख खर्च हुए तो मरघट कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य नहीं दिख रहा। मौके पर सिर्फ झाड़ियां/देशी झंकार जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्ज है तो— क्या खंड विकास अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था? क्या ग्राम पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य का सत्यापन किया? यदि निरीक्षण हुआ था तो निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या पाई गई? बिना निर्माण के भुगतान कैसे हुआ? क्या माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मौजूद हैं? क्या भुगतान से पहले जियो-टैग/फोटो के आधार पर सत्यापन किया गया? एक ही कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान किस आधार पर किए गए? क्या संबंधित ठेकेदार/फर्म ने वास्तव में मौके पर काम कराया? यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति कहां है? रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत की जांच जरूरी यह मामला केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है। यदि जांच में रिकॉर्ड के मुताबिक भुगतान और जमीन पर कार्य के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। खबर चलने के बाद क्या जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराएगा? क्या तकनीकी टीम से नाप-जोख कराकर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर लाखों रुपये का मरघट निर्माण जमीन पर कहां हुआ? यह जांच का विषय है—सरकारी धन का एक-एक रुपया जनता के टैक्स से आता है। आपके गांव में भी विकास कार्यों के नाम पर ऐसा कोई मामला सामने आया है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो को आखिर तक देखिए और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जालौन #उरई #डकोर #हरदोईगूजर #ग्रामपंचायत #मेरीपंचायत #मरघटनिर्माण #विकासकार्य #सरकारीधन #सरकारीपैसा #भ्रष्टाचार #विकासमेंभ्रष्टाचार #पंचायतभ्रष्टाचार #पंचायत #ग्रामप्रधान #सचिव #खंडविकासअधिकारी #BDO #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #डकोरन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडरियलिटी #जनताकीसच्चाई #जांचकीमांग #सरकारीयोजना #सरकारीखर्च #विकासकाकार्य #उत्तरप्रदेश1
- 🎤jalaun : समाधान दिवस में कुल 35 शिकायतें दर्ज 5 शिकायतों का मौके पर हुआ निस्तारण🖥️ 📌SDM ने अधिकारियों हुये सख्त,शिकायत निस्तारण में नहीं चलेगी हीलाहवाली* जनपद जालौन के जालौन तहसील सभागार में एसडीएम राकेश कुमार सोनी की अध्यक्षता एवं सीओ अजय कुमार सिंह की मौजूदगी में का आयोजन किया गया। समाधान दिवस में कुल 35 फरियादियों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। जिनमें से 5 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।प्राप्त शिकायतों में राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, विकास विभाग, बिजली विभाग की और नगर पालिका की शिकायत शामिल रही।इनमें राजस्व विभाग की 4 और पुलिस विभाग की 1 शिकायत का मौके पर निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपते हुए एसडीएम ने निर्देश दिए कि शिकायतों का मौके पर जाकर निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निस्तारण की आख्या शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि उसे बार-बार अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें।एसडीएम राकेश कुमार सोनी ने स्पष्ट कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान तहसीलदार तारा, नायब तहसीलदार सत्येंद्र कुमार, पंचायत से महेंद्र कुमार, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. राजीव दुबे सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्ट -जनपद जालौन से soni news के लिए अमित कुमार।2
- Jalaun : DM राजेश पाण्डेय पंहुचे कुकुरगांव स्कूल! बच्चों ने सुनाए पहाड़े और कविता!!. प्राथमिक विद्यालय कुकुरगांव पहुंचे जिलाधिकारी, बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता परखी ब्लैकबोर्ड पर स्वयं प्रश्न, उत्तर लिखवाकर जांची विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, पहाड़े, कविता और अंग्रेजी-हिंदी ज्ञान से हुए संतुष्ट जनपद में प्राथमिक विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने प्राथमिक विद्यालय कुकुरगांव का औचक निरीक्षण कर विद्यालय में संचालित पठन-पाठन व्यवस्था का गहन जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीधे कक्षा में पहुंचकर छात्र-छात्राओं से संवाद किया तथा उनकी शैक्षणिक दक्षता का स्वयं परीक्षण किया। जिलाधिकारी ने कक्षा 3, 4 एवं 5 के विद्यार्थियों को ब्लैकबोर्ड पर बुलाकर विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न लिखवाए तथा उनका उत्तर देने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास और सहजता के साथ सभी प्रश्नों के सही एवं स्पष्ट उत्तर लिखकर अपनी शैक्षणिक तैयारी का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की समझ, लेखन क्षमता और आत्मविश्वास को देखकर जिलाधिकारी ने उनकी सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से 13, 14, 15 एवं 19 के पहाड़े भी सुनाए, जिन्हें बच्चों ने बिना किसी हिचकिचाहट के धाराप्रवाह सुनाकर अपनी गणितीय दक्षता का परिचय दिया। इसके अलावा बच्चों ने हिंदी एवं अंग्रेजी में कविताओं का भी प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया, जिससे उनकी भाषाई क्षमता और शिक्षकों द्वारा कराए जा रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। जिलाधिकारी ने शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए नियमित अभ्यास, नवाचारी शिक्षण पद्धति तथा अनुशासित वातावरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि सभी बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह सहित अध्यापिकाएं मौजूद रहे।1
- रुरा थाना क्षेत्र में अलग अलग जगहों पर लड़ाई झगड़े के विवाद के मामले में पुलिस ने दो लोगों पर की शांतिभंग की कार्यवाही रुरा थाना क्षेत्र में अलग अलग जगहों पर लड़ाई झगड़ा हो गया था। वहीं दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर आरोप लगाकर शिकायती पत्र दिया गया।वहीं पुलिस ने जांच पड़ताल कर माहौल बिगाड़ने के आरोप में दो लोगों पर शांतिभंग की कार्यवाही की।थाना प्रभारी सुधीर भारद्वाज ने बताया कि दो लोगों पर शांतिभंग की कार्यवाही की गई ।1