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मध्य प्रदेश के गुना जिले के अंतर्गत मक्सूदनगढ़ में वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन का कड़ा रुख देखने को मिला है। इस कार्रवाई के तहत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन भूमि के अतिक्रमणकारियों पर बुलडोजर चला दिया है।
नवदुनिया संवाददाता उसमान खान पत्रकार
मध्य प्रदेश के गुना जिले के अंतर्गत मक्सूदनगढ़ में वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन का कड़ा रुख देखने को मिला है। इस कार्रवाई के तहत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन भूमि के अतिक्रमणकारियों पर बुलडोजर चला दिया है।
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- गुना में 14 जुलाई को कलेक्टर श्री किशोर कन्याल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा राघौगढ़ के एसडीएम श्री अमित सोनी के नेतृत्व में 120 बीघा वन भूमि को सफलतापूर्वक अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।1
- मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के लटेरी क्षेत्र में ग्रामीणों ने अपने गांव की खराब सड़क को लेकर शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क पिछले 3 साल से खराब पड़ी है, जिसके कारण किसी भी वाहन के यहाँ से निकलने में बहुत कठिनाइयाँ होती हैं। सड़क की इस जर्जर स्थिति की वजह से भारी वाहनों के पलटने का भी लगातार खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने इस सड़क को जल्द ठीक करने का अनुरोध किया है ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।1
- विदिशा जिले में पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में सड़क सुरक्षा और जनजागरूकता को लेकर लगातार प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और एसडीओपी श्रीमती शिखा भलावी के मार्गदर्शन में एक विशेष सड़क सुरक्षा एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। गंजबासौदा के यातायात प्रभारी निरीक्षक एन.एस. सिंह लोधी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम ग्राम उहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में स्कूल के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं और स्टाफ को सड़क दुर्घटनाओं के कारणों व बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही उन्हें जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार करने, यातायात संकेतों का पालन करने और नशे की हालत में वाहन न चलाने जैसे महत्वपूर्ण नियमों को अपनी आदत में शुमार करने की सीख दी गई।1
- दतिया उप-चुनाव को लेकर पंडित जी द्वारा शायरी प्रस्तुत की गई है।1
- सिरोंज के नारायणपुर ग्राम में कृषि विकास अधिकारी द्वारा की गई छापामार कार्रवाई में एक किसान के घर से 364 बोरी अवैध खाद बरामद की गई है। इस कार्रवाई के बाद आरोपी किसान के खिलाफ रात 2 बजे आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक आदेश की धाराओं के तहत थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई से नाराज किसानों ने इसे झूठा केस बताते हुए मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर सिरोंज एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग की है। सोमवार को कृषि विकास अधिकारी ने राजस्व और पुलिस टीम के साथ नारायणपुर में एक किसान के घर पर छापा मारा था। इस छापे के दौरान किसान के पास से 347 बोरी यूरिया और 17 बोरी डीएपी (DAP) सहित कुल 364 बोरी खाद बरामद की गई। कृषि विभाग का आरोप है कि किसान ई-टोकन में चालबाजी कर ग्यारसपुर से खाद लाकर इसका अवैध रूप से भंडारण कर रहा था। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 एवं उर्वरक आदेश 1985 की धारा 7/8 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। इस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को नारायणपुर और आसपास के गांवों के किसान तहसील पहुंचे। किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर कहा कि संबंधित किसान द्वारा खाद के लिए ई-टोकन बुक कराए गए थे और खाद भी उसी के लिए लाई गई थी। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में खाद की कमी के चलते किसान मजबूरी में टोकन के आधार पर खाद लाते हैं, ऐसे में बिना जांच के सीधे केस दर्ज करना बिल्कुल गलत है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।4
- राजगढ़ पुलिस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश के साथ 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान का शुभारंभ किया है। इस अभियान के तहत 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक जिलेभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया है। इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा एक नशा मुक्त समाज का निर्माण करना है।1
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- गुना के राघोगढ़ में आदिवासियों और गरीबों के आशियाने उजाड़े जाने की कार्रवाई पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए अधिकारियों की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए गए हैं। इस कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा गया है कि कानून की मजबूरी हो सकती है, मगर इंसानियत की कोई मजबूरी नहीं होती। अधिकारियों को यह याद रखने की जरूरत है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती; यदि आज उनके पास सरकारी पद न होता, तो शायद उनका अपना परिवार भी बेघर हो रहा होता। 'जल-जंगल-जमीन हमारा है' का नारा बुलंद करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी समाज इस प्रकृति का मालिक और रक्षक दोनों है। अपनी पारंपरिक ज़मीन पर कृषि करना और सम्मान से जीवन बसर करना आदिवासियों का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसे छीनने का सरकार को कोई हक नहीं है। इस अन्याय और तानाशाही के खिलाफ सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने और #AdivasiEkta को मजबूत करने की पुरजोर अपील की गई है।1