गुना के राघोगढ़ में आदिवासियों और गरीबों के आशियाने उजाड़े जाने की कार्रवाई पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए अधिकारियों की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए गए हैं। इस कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा गया है कि कानून की मजबूरी हो सकती है, मगर इंसानियत की कोई मजबूरी नहीं होती। अधिकारियों को यह याद रखने की जरूरत है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती; यदि आज उनके पास सरकारी पद न होता, तो शायद उनका अपना परिवार भी बेघर हो रहा होता। 'जल-जंगल-जमीन हमारा है' का नारा बुलंद करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी समाज इस प्रकृति का मालिक और रक्षक दोनों है। अपनी पारंपरिक ज़मीन पर कृषि करना और सम्मान से जीवन बसर करना आदिवासियों का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसे छीनने का सरकार को कोई हक नहीं है। इस अन्याय और तानाशाही के खिलाफ सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने और #AdivasiEkta को मजबूत करने की पुरजोर अपील की गई है।
गुना के राघोगढ़ में आदिवासियों और गरीबों के आशियाने उजाड़े जाने की कार्रवाई पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए अधिकारियों की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए गए हैं। इस कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा गया है कि कानून की मजबूरी हो सकती है, मगर इंसानियत की कोई मजबूरी नहीं होती। अधिकारियों को यह याद रखने की जरूरत है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती; यदि आज उनके पास सरकारी पद न होता, तो शायद उनका अपना परिवार भी बेघर हो रहा होता। 'जल-जंगल-जमीन हमारा है' का नारा बुलंद करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी समाज इस प्रकृति का मालिक और रक्षक दोनों है। अपनी पारंपरिक ज़मीन पर कृषि करना और सम्मान से जीवन बसर करना आदिवासियों का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसे छीनने का सरकार को कोई हक नहीं है। इस अन्याय और तानाशाही के खिलाफ सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने और #AdivasiEkta को मजबूत करने की पुरजोर अपील की गई है।
- गुना में 14 जुलाई को कलेक्टर श्री किशोर कन्याल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा राघौगढ़ के एसडीएम श्री अमित सोनी के नेतृत्व में 120 बीघा वन भूमि को सफलतापूर्वक अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में कैटवॉक का आयोजन किया गया।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद में ड्यूटी के दौरान एक विद्युत निगम कर्मचारी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, उपखंड कार्यालय छीपाबड़ौद के कर्मचारी महेश कुमार चक्रधारी जब 13 जुलाई 2026 को एक ट्रांसफार्मर ठीक करने गए थे, तब खजुरिया निवासी देवकीनंदन ने उनके साथ कथित तौर पर मारपीट, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इस घटना के विरोध में राजस्थान विद्युत तकनीकी कर्मचारी एसोसिएशन, उपखंड छीपाबड़ौद ने छीपाबड़ौद थाने में शिकायत दर्ज कराकर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि इस घटना के कारण निगम कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है, जिससे शासकीय कार्य भी प्रभावित हुआ है। एसोसिएशन ने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला गंभीर मामला बताया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में थाना अधिकारी योगेश चौहान ने बताया कि मामले की शिकायत दर्ज कर ली गई है और शीघ्र ही उचित कार्रवाई की जाएगी।2
- मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के लटेरी क्षेत्र में ग्रामीणों ने अपने गांव की खराब सड़क को लेकर शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क पिछले 3 साल से खराब पड़ी है, जिसके कारण किसी भी वाहन के यहाँ से निकलने में बहुत कठिनाइयाँ होती हैं। सड़क की इस जर्जर स्थिति की वजह से भारी वाहनों के पलटने का भी लगातार खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने इस सड़क को जल्द ठीक करने का अनुरोध किया है ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।1
- गुना के राघोगढ़ में आदिवासियों और गरीबों के आशियाने उजाड़े जाने की कार्रवाई पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए अधिकारियों की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए गए हैं। इस कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा गया है कि कानून की मजबूरी हो सकती है, मगर इंसानियत की कोई मजबूरी नहीं होती। अधिकारियों को यह याद रखने की जरूरत है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती; यदि आज उनके पास सरकारी पद न होता, तो शायद उनका अपना परिवार भी बेघर हो रहा होता। 'जल-जंगल-जमीन हमारा है' का नारा बुलंद करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी समाज इस प्रकृति का मालिक और रक्षक दोनों है। अपनी पारंपरिक ज़मीन पर कृषि करना और सम्मान से जीवन बसर करना आदिवासियों का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसे छीनने का सरकार को कोई हक नहीं है। इस अन्याय और तानाशाही के खिलाफ सभी से एकजुट होकर आवाज उठाने और #AdivasiEkta को मजबूत करने की पुरजोर अपील की गई है।1