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कोडरमा जिले के सदर अस्पताल में खून की जांच शुरू होने की खबर सामने आई है। इस घटना को लेकर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कदम लोगों के लिए किसी बड़ी परेशानी का सबब बना है।
RAHUL KUMAR
कोडरमा जिले के सदर अस्पताल में खून की जांच शुरू होने की खबर सामने आई है। इस घटना को लेकर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कदम लोगों के लिए किसी बड़ी परेशानी का सबब बना है।
More news from झारखंड and nearby areas
- एक पोस्ट में जनता को 'कॉकरोच जनता' की संज्ञा देते हुए उनकी सच्चाई पर निशाना साधा गया है। पोस्ट में कहा गया है कि वहाँ मौजूद सभी लोग अनपढ़ थे, जो किसी एक व्यक्ति की बात को बिना सोचे-समझे पीछे से दोहराते हैं, जिससे उनकी समझ और स्वतंत्र विचार की कमी उजागर होती है।1
- हज़ारीबाग ज़िले के चौपारण थाना परिसर में दिनांक 10 और 11 जून को सुरक्षा जवान के पदों के लिए एक विशेष भर्ती अभियान आयोजित किया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित तिथि पर सुबह 11 बजे तक पहुंचना अनिवार्य है। भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आधार कार्ड, 10वीं की मार्कशीट, एक फोटो कॉपी और 350 रुपये का फॉर्म चार्ज साथ लाना होगा। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार 9800089697 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- हजारीबाग पुलिस ने साधु का वेश धारण कर महिलाओं से ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सदर एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि एक महिला के साथ हुई ठगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कदम उठाए और क्षितिज अस्पताल के पास एक टोटो पर सवार इन तीनों आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया कि वे झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और अपशगुन का डर दिखाकर महिलाओं को बहलाते थे, जिसके बाद उनसे सोने के जेवर और अन्य कीमती सामान ठग लेते थे। पुलिस ने ठगी किए गए सोने के जेवर और एक जितिया को भी बरामद कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मलेट्री लाठौर, अखिलेश लाठौर और तितई लाठौर के रूप में हुई है, जो बिहार के रोहतास जिले के आमछार थाना क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस इस मामले में यह भी जांच कर रही है कि कहीं जिले में इस तरह का कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है। पुलिस ने आम जनता से सतर्क रहने और अजनबियों पर आसानी से भरोसा न करने की अपील की है।2
- झारखंड में विस्थापन का मुद्दा एक गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है, जिसके तहत हाल ही में विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित कोनार डैम परियोजना के विस्थापित रैयतों का दर्द एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय पर सैकड़ों की संख्या में इन विस्थापितों ने घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग पुनर्वास के तहत आवंटित भूमि का मालिकाना हक दिलाना है, जिसे लेकर उन्होंने उपायुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा। विस्थापितों का कहना है कि उन्हें पुनर्वास तो मिला, लेकिन लगभग सात दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें उनकी जमीन का वैधानिक अधिकार नहीं मिला है। आंदोलनकारियों ने अपनी समस्याओं को बयां करते हुए बताया कि कोनार डैम परियोजना के लिए वर्ष 1946 में भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ था और 1952 में डैम बनकर तैयार हो गया। इसके बाद उन्हें पुनर्वास स्थल पर बसाया गया, लेकिन आवंटित भूमि का आज तक दाखिल-खारिज नहीं हुआ है और न ही उनके नाम से रसीद निर्गत की गई है। इस अभाव के कारण उन्हें पहचान का संकट झेलना पड़ रहा है, और आवासीय, जाति व आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज बनवाने में भी कठिनाई होती है। उन्होंने वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की, क्योंकि वैध दस्तावेजों के बिना इसमें शामिल होना मुश्किल है। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जब भी कोई अंचल अधिकारी उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करता है, उसका तबादला कर दिया जाता है, जिससे उनके कार्यों में बाधा आती है। उन्होंने वर्तमान अंचल अधिकारी नित्यानंद दास के तबादले के प्रयास का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि कुछ बिचौलियों और कंपनी से जुड़े प्रभावशाली लोगों के हितों के कारण उन्हें जानबूझकर भूमिहीन बनाए रखा जा रहा है। विस्थापितों के अनुसार, 70 साल बाद भी मालिकाना हक न मिलना व्यवस्था की बड़ी विफलता है, और उन्हें आशंका है कि दस्तावेजों के अभाव में उनकी मूल पहचान और अधिकार दोनों संकट में पड़ सकते हैं। उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा तथा न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। सात दशक से अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे कोनार डैम विस्थापितों का यह आंदोलन केवल जमीन का सवाल नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और न्याय की उस लड़ाई का प्रतीक है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी जारी है। इस घेराव में नवाटांड़, बनासो, गरहमुर्गी, महतोईया, बरहमोरिया, उदयपुर, नवादा, कुसुंभा, गोविंदपुर, परसाटांड़, कारीटांड़ सहित अनेक गांवों से हजारों की संख्या में रैयत-विस्थापित शामिल हुए, जिनमें सुशील महतो, माही पटेल, हीरामन महतो, चंद्रशेखर पटेल, सुरेश राम, राजू महतो, इश्तियाक अहमद, कैलाश महतो, डूमरचंद महतो, कालीचरण महतो, टेकलाल महतो, वासुराम मेहता, नेमचंद महतो, किशोर महतो, विशेश्वर महतो, पिंकी देवी, मोहिनी देवी, सीता देवी, चिंता कुमारी, बृजी देवी, चितु राम, चंचला देवी, अमित राज, नेहा कुमारी और शांति देवी जैसे लोग प्रमुख थे।1
- हजारीबाग जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, जिला प्रशासन ने खतरनाक मोड़ों और ब्लैक स्पॉट का गहन निरीक्षण किया है। यह महत्वपूर्ण कार्रवाई उपायुक्त हेमंत सती के निर्देश पर जिला सड़क सुरक्षा टीम और संबंधित अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। निरीक्षण दल में जिला परिवहन पदाधिकारी, यातायात पुलिस उपाधीक्षक, मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) और जिला सड़क सुरक्षा टीम के सदस्य शामिल थे। इस टीम ने जिले के उन कई स्थानों का दौरा किया जहाँ अक्सर सड़क हादसे होते हैं या दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जांच के दौरान, मासीपिढ़ी चौक, डेमोटांड़ और मोरंगी क्षेत्र में वाहनों की तेज रफ्तार को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण पाया गया। वहीं, यूपी मोड़ पर सड़क की अधिक ढलान और अंधा मोड़ होने के कारण दुर्घटना का खतरा विशेष रूप से अधिक देखा गया। निरीक्षण के बाद, टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को तत्काल निर्देश दिए कि चिन्हित स्थानों पर जल्द से जल्द चेतावनी बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर और गति सीमा के संकेतक लगाए जाएं, ताकि वाहन चालकों को पहले से जानकारी मिल सके और हादसों में कमी आए। इसके अतिरिक्त, मोरंगी स्थित एक पेट्रोल पंप के संचालक को भी सड़क सुरक्षा मानकों का पालन करने और पंप के आसपास सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय निर्धारित गति सीमा का पालन करें, सड़क संकेतों पर ध्यान दें और विशेषकर मोड़ तथा ढलान वाले क्षेत्रों में अत्यधिक सावधानी बरतें। प्रशासन का मानना है कि लोगों में जागरूकता और बेहतर सुरक्षा इंतजामों के समन्वय से सड़क दुर्घटनाओं को काफी हद तक सफलतापूर्वक रोका जा सकता है।1
- कोडरमा में जेजे कॉलेज को विनोबा भावे विश्वविद्यालय से स्थानांतरित किए जाने के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए हैं। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए रांची-पटना रोड को जाम कर दिया है।1
- कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बड़ा खुलासा किया है। पार्टी ने दिल्ली में आयोजित एक रैली में उपस्थित लोगों की संख्या पर सवाल उठाए हैं, यह जानने की मांग की है कि वास्तव में कितने लोग मौजूद थे। इस संबंध में पूरी रिपोर्ट का इंतजार है।1
- धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया। इस मौके पर उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी समाज के उत्थान में उनके अतुलनीय योगदान को विशेष रूप से याद किया गया।1