उदयपुर संभाग के दूसरे सबसे बड़े सोम कमला आंबा बांध के निर्माण को करीब 40 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए परिवारों को आज भी आवासीय पट्टे नहीं मिल पाए हैं। अमृतिया पंचायत क्षेत्र से उजाड़े गए करीब 50 से 60 परिवार पिछले पांच दशकों से अपने आवासीय पट्टों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जिसके कारण वे सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीणों ने अब अमृतिया पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में न्याय की गुहार लगाई है। सोम कमला आंबा बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1980 के दशक में हुआ था। उस दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले कई बड़े गांवों के लोगों को मुआवजा देकर अन्यत्र विस्थापित किया गया था। तब सरकार और प्रशासन ने इन प्रभावित परिवारों को आवासीय पट्टे देकर पुनर्स्थापित करने का पक्का वादा किया था, लेकिन आधी सदी बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) नसीब नहीं हो सका है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी इस मांग को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय और सरकार द्वारा समय-समय पर आयोजित होने वाले महंगाई राहत या प्रशासन गांवों के संग जैसे शिविरों में दर्जनों बार गुहार लगा चुके हैं। कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की कथित हठधर्मिता और ढुलमुल रवैये के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पाईं। ग्रामीणों ने बताया कि आवासीय पट्टा जैसे वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें किसी भी सरकारी योजना का सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है, चाहे वह आवास योजना हो या अन्य मूलभूत सुविधाएं। पट्टे के अभाव में सब अटक जाता है, और ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं इन परिवारों के लिए महज एक दिखावा साबित हो रही हैं। अमृतिया पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने शासन व प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। इस गंभीर मामले को लेकर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई तो कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। आसपुर एसडीएम ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों के आवासीय पट्टों की फाइल तहसीलदार द्वारा उनके पास भेजी गई है, जिसमें कुछ खामियां हैं, जिन्हें दूर करवाते हुए जल्द ही ग्रामीणों को राहत दी जाएगी। वहीं, गांव में आयोजित हुए 'ग्राम सेवा शिविर' में पहुंचे जिला कलेक्टर के सामने भी ग्रामीणों ने अपनी यह व्यथा रखी, जिस पर कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि पूरे प्रकरण को दिखवाया जा रहा है और नियमानुसार जल्द से जल्द ग्रामीणों को राहत प्रदान की जाएगी। अमृतिया पंचायत के इस 'ग्राम सेवा शिविर' में जिला कलेक्टर के आश्वासन और तहसीलदार द्वारा फाइल आगे बढ़ाने से न्याय की एक उम्मीद तो जगी है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या यह आश्वासन वाकई हकीकत में बदलता है या फिर इन विस्थापित ग्रामीणों का इंतजार और बढ़ेगा।
उदयपुर संभाग के दूसरे सबसे बड़े सोम कमला आंबा बांध के निर्माण को करीब 40 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए परिवारों को आज भी आवासीय पट्टे नहीं मिल पाए हैं। अमृतिया पंचायत क्षेत्र से उजाड़े गए करीब 50 से 60 परिवार पिछले पांच दशकों से अपने आवासीय पट्टों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जिसके कारण वे सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीणों ने अब अमृतिया पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में न्याय की गुहार लगाई है। सोम कमला आंबा बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1980 के दशक में हुआ था। उस दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले कई बड़े गांवों के लोगों को मुआवजा देकर अन्यत्र विस्थापित किया गया था। तब सरकार और प्रशासन ने इन प्रभावित परिवारों को आवासीय पट्टे देकर पुनर्स्थापित करने का पक्का वादा किया था, लेकिन आधी सदी बीत जाने के बाद
भी इन परिवारों को जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) नसीब नहीं हो सका है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी इस मांग को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय और सरकार द्वारा समय-समय पर आयोजित होने वाले महंगाई राहत या प्रशासन गांवों के संग जैसे शिविरों में दर्जनों बार गुहार लगा चुके हैं। कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की कथित हठधर्मिता और ढुलमुल रवैये के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पाईं। ग्रामीणों ने बताया कि आवासीय पट्टा जैसे वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें किसी भी सरकारी योजना का सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है, चाहे वह आवास योजना हो या अन्य मूलभूत सुविधाएं। पट्टे के अभाव में सब अटक जाता है, और ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं इन परिवारों के लिए महज एक दिखावा साबित हो रही हैं। अमृतिया पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने शासन व प्रशासन से
न्याय की गुहार लगाई। इस गंभीर मामले को लेकर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई तो कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। आसपुर एसडीएम ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों के आवासीय पट्टों की फाइल तहसीलदार द्वारा उनके पास भेजी गई है, जिसमें कुछ खामियां हैं, जिन्हें दूर करवाते हुए जल्द ही ग्रामीणों को राहत दी जाएगी। वहीं, गांव में आयोजित हुए 'ग्राम सेवा शिविर' में पहुंचे जिला कलेक्टर के सामने भी ग्रामीणों ने अपनी यह व्यथा रखी, जिस पर कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि पूरे प्रकरण को दिखवाया जा रहा है और नियमानुसार जल्द से जल्द ग्रामीणों को राहत प्रदान की जाएगी। अमृतिया पंचायत के इस 'ग्राम सेवा शिविर' में जिला कलेक्टर के आश्वासन और तहसीलदार द्वारा फाइल आगे बढ़ाने से न्याय की एक उम्मीद तो जगी है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या यह आश्वासन वाकई हकीकत में बदलता है या फिर इन विस्थापित ग्रामीणों का इंतजार और बढ़ेगा।
- आसपुर के सोम कमला आबा बांध के ग्रामीण पिछले 40 वर्षों से आवासीय पट्टों का इंतजार कर रहे हैं, जिसके कारण वे विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए करीब 50 से 60 परिवार, जो अमृतिया ग्राम पंचायत क्षेत्र से उजाड़े गए थे, पिछले पांच दशकों से अपने आवासीय पट्टों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1980 से ही उन्हें यह उम्मीद थी कि पूर्व में सरकार और प्रशासन आवासीय पट्टे देकर उन्हें पुनर्स्थापित करने का अपना वादा पूरा करेगा। पट्टे न मिलने के कारण इन ग्रामीणों ने अब पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में न्याय की गुहार लगाई है। इस मामले को लेकर विधायक उमेश डामोर ने जिला कलेक्टर देशल दान को ग्रामीणों की परेशानी से अवगत कराया है। विधायक ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि गरीब लोगों को उनके आशियाने का मालिकाना हक दिया जाए, ताकि उनका 40 साल का लंबा इंतजार खत्म हो सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाए।1
- वडोदरा में अदानी गैस पंप लाइन रोड पर रात में की गई सवारी और नाइट व्यू का एक मजेदार अनुभव साझा किया गया है। पोस्ट में प्रेग्नेंट कॉम्प्लेक्स, अदानी गैस पंप लाइन रोड और क्रैश कोर्स सर्किल जैसे स्थानों पर रात में घूमने और शानदार नज़ारों का आनंद लेने का जिक्र है। यह पोस्ट विशुद्ध रूप से मनोरंजन के उद्देश्य से डाली गई है, ताकि लोग नाइट राइड के इस आनंददायक अनुभव का मजा ले सकें। इसमें वडोदरा के नाइट व्यू को बेहद मजेदार बताते हुए लोगों को कभी इस क्षेत्र में आकर सवारी करने और मनोरंजन का आनंद लेने का सीधा निमंत्रण दिया गया है।1
- डूंगरपुर पुलिस ने 'ऑपरेशन स्वच्छता' के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए गुजरात सीमा पर स्थित रतनपुर बॉर्डर से करीब 30 लाख रुपये मूल्य की अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की है। इस दौरान पुलिस ने बाड़मेर के रहने वाले दो शातिर तस्करों को भी मौके से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई डूंगरपुर जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देश पर बिछीवाड़ा थाना पुलिस और रतनपुर पुलिस चौकी ने संयुक्त रूप से की। पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि उदयपुर से अहमदाबाद की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे-48 (NH-48) के रास्ते गुजरात में अवैध शराब ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर रतनपुर चौकी प्रभारी अब्दुल मुनाफ और उनकी टीम ने नाकाबंदी की। तलाशी के दौरान संदिग्ध कंटेनर (नंबर NL 01 AF 7183) को रोका गया, जिसमें ऊपर से प्लास्टिक की बाल्टियां और टेबल भरे हुए दिखाई दिए। हालांकि, गहन जांच पर पुलिस को उसके पीछे छिपा एक गुप्त केबिन मिला, जिसमें अवैध शराब का बड़ा जखीरा छुपाया गया था। इस गुप्त केबिन से हरियाणा और चंडीगढ़ निर्मित अंग्रेजी शराब के कुल 252 कार्टन जब्त किए गए। जब्त शराब में 'फॉर सेल ओनली इन हरियाणा' और 'फॉर सेल ओनली इन चंडीगढ़' मार्क वाली महंगी ब्रांड की शराब और वोडका शामिल है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने में बिछीवाड़ा थानाधिकारी कैलाशचन्द्र सोनी के नेतृत्व में उपनिरीक्षक अब्दुल मुनाफ, कांस्टेबल जोगेन्द्रसिंह (नंबर 720), कुन्दनसिंह (नंबर 426), युवराजसिंह (नंबर 748), कपिल (नंबर 490) और गौरव (नंबर 951) की मुख्य भूमिका रही।1
- डूंगरपुर जिले की अमृतिया ग्राम पंचायत में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का जिला कलक्टर श्री देशलदान ने अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। शिविर में ग्रामीणों को आवासीय भूमि के पट्टे वितरित कर लाभान्वित किया गया, जिससे कई स्थानीय लोगों को सहायता मिली। इस अवसर पर आसपुर विधायक उमेश मीणा, आसपुर उपखंड अधिकारी बाबूलाल जाट, तहसीलदार योगेंद्र वैष्णव और ब्लॉक विकास अधिकारी सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।4
- Post by Bapulal Ahari1
- समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने आज छाणी मंगरी स्थित गोविंदगर महाराज के धाम पर दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र में शांति और अमन की स्थापना के साथ-साथ अच्छी बारिश के लिए भी विशेष प्रार्थना की। अहारी ने अपनी इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया।1
- आगामी त्योहारों के मद्देनज़र बांसवाड़ा पुलिस पूरी तरह से सतर्क हो गई है। इसी क्रम में, जिलेभर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा का माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च का आयोजन किया गया।1
- उदयपुर संभाग के दूसरे सबसे बड़े सोम कमला आंबा बांध के निर्माण को करीब 40 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए परिवारों को आज भी आवासीय पट्टे नहीं मिल पाए हैं। अमृतिया पंचायत क्षेत्र से उजाड़े गए करीब 50 से 60 परिवार पिछले पांच दशकों से अपने आवासीय पट्टों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जिसके कारण वे सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीणों ने अब अमृतिया पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में न्याय की गुहार लगाई है। सोम कमला आंबा बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1980 के दशक में हुआ था। उस दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले कई बड़े गांवों के लोगों को मुआवजा देकर अन्यत्र विस्थापित किया गया था। तब सरकार और प्रशासन ने इन प्रभावित परिवारों को आवासीय पट्टे देकर पुनर्स्थापित करने का पक्का वादा किया था, लेकिन आधी सदी बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) नसीब नहीं हो सका है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी इस मांग को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय और सरकार द्वारा समय-समय पर आयोजित होने वाले महंगाई राहत या प्रशासन गांवों के संग जैसे शिविरों में दर्जनों बार गुहार लगा चुके हैं। कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की कथित हठधर्मिता और ढुलमुल रवैये के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पाईं। ग्रामीणों ने बताया कि आवासीय पट्टा जैसे वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें किसी भी सरकारी योजना का सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है, चाहे वह आवास योजना हो या अन्य मूलभूत सुविधाएं। पट्टे के अभाव में सब अटक जाता है, और ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं इन परिवारों के लिए महज एक दिखावा साबित हो रही हैं। अमृतिया पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने शासन व प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। इस गंभीर मामले को लेकर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई तो कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। आसपुर एसडीएम ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों के आवासीय पट्टों की फाइल तहसीलदार द्वारा उनके पास भेजी गई है, जिसमें कुछ खामियां हैं, जिन्हें दूर करवाते हुए जल्द ही ग्रामीणों को राहत दी जाएगी। वहीं, गांव में आयोजित हुए 'ग्राम सेवा शिविर' में पहुंचे जिला कलेक्टर के सामने भी ग्रामीणों ने अपनी यह व्यथा रखी, जिस पर कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि पूरे प्रकरण को दिखवाया जा रहा है और नियमानुसार जल्द से जल्द ग्रामीणों को राहत प्रदान की जाएगी। अमृतिया पंचायत के इस 'ग्राम सेवा शिविर' में जिला कलेक्टर के आश्वासन और तहसीलदार द्वारा फाइल आगे बढ़ाने से न्याय की एक उम्मीद तो जगी है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या यह आश्वासन वाकई हकीकत में बदलता है या फिर इन विस्थापित ग्रामीणों का इंतजार और बढ़ेगा।3