*अमकारी अष्टमी : नारी शक्ति की साधना और सनातन धर्म की रक्षा का महापर्व* *प्राइम न्यूज राजस्थान - धर्म विशेष* *लेखक - धर्मेन्द्र कुमार सोनी, कुशलगढ़, जिला बांसवाड़ा* राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ भारत राष्ट्रीय प्रमुख संत नरसिंह गीरी महाराज व नारी शक्ति प्रमुख श्रीमती साधना पंचाल डुंगरीपाडा से सीधी बात भारत के सनातन धर्म में अष्टमी तिथि का अपना विशेष महत्व है। जब-जब धर्म पर संकट आया, नारी शक्ति ने दुर्गा, काली, चामुंडा बनकर उसका नाश किया। उसी नारी शक्ति की उपासना का एक लोक पर्व है - *अमकारी अष्टमी*। राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के वागड़ क्षेत्र - बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, कुशलगढ़, प्रतापगढ़ में भाद्रपद और आश्विन मास की अष्टमी को अमकारी अष्टमी बड़े श्रद्धा भाव से मनाई जाती है। इस दिन माता अम्बे, महालक्ष्मी और महाकाली की विशेष पूजा होती है। और इस वर्ष इस पर्व को और भी दिव्य बना रहा है *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* और उसकी *नारी शक्ति इकाई* का संकल्प। अमकारी अष्टमी क्या है? - अर्थ और महत्व अमकारी शब्द दो शब्दों से बना है - *अम् + कारी*। अम् का अर्थ है - मां, अम्बा, अन्नपूर्णा। कारी का अर्थ है - करने वाली, रचना करने वाली। अर्थात जो पूरे विश्व का पालन-पोषण करती है, जो अन्न से लेकर प्राण तक देती है, वह अमकारी माता है। ग्रामीण मान्यता के अनुसार इस दिन *मां अमकारी* धरती पर आती हैं और अपने भक्तों के घर में अन्न के भंडार भरती हैं। किसान इस दिन नए अनाज की पहली बाली माता को चढ़ाते हैं। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति, पुत्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पुराणों में कहा गया है - _या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।_ _नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥_ अर्थात हर प्राणी में जो माता के रूप में है, उस अमकारी शक्ति को हम नमन करते हैं। अमकारी अष्टमी की पौराणिक कथा कथा के अनुसार एक बार बांसवाड़ा-डूंगरपुर के जंगलों में भयंकर अकाल पड़ा। महीनों तक बारिश नहीं हुई। खेत सूख गए। लोग भूख से तड़पने लगे। तब वागड़ के भील-गरासिया समाज की महिलाओं ने मां अम्बा की घोर तपस्या की। आठ दिन तक वे बिना अन्न-जल के पहाड़ पर बैठी रहीं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर अष्टमी के दिन माता ने *अमकारी देवी* के रूप में दर्शन दिए। माता ने अपने हाथ से जंगल में अन्न के बीज बिखेरे और कहा - "आज से इस धरती पर कभी अन्न की कमी नहीं होगी, जो भी नारी शक्ति सच्चे मन से मेरी पूजा करेगी, उसके घर में कभी भूख नहीं रहेगी।" तभी से वागड़ में अमकारी अष्टमी पर नए अनाज से मां की पूजा और कन्या पूजन की परंपरा शुरू हुई। अमकारी अष्टमी कैसे मनाई जाती है? - पूजा विधि *1. सुबह की तैयारी -* महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गोबर से घर-आंगन लीपती हैं। आम के पत्तों का तोरण लगाती हैं। *2. अमकारी माता का चौक -* मिट्टी से या चावल के आटे से चौक बनाया जाता है, उस पर 8 कमल के फूल बनाए जाते हैं, जो अष्टभुजा देवी के प्रतीक हैं। बीच में मिट्टी के कलश पर जौ उगाए जाते हैं। *3. निर्जला व्रत -* इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चांद देखने के बाद ही व्रत खोलती हैं। *4. कन्या पूजन -* इस दिन 8 कन्याओं को अमकारी माता का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, मेहंदी लगाई जाती है, और उन्हें नए कपड़े, अनाज और दक्षिणा दी जाती है। *5. भजन-कीर्तन -* रात भर गांव में महिलाएं ढोल-मंजीरे पर अमकारी माता के गीत गाती हैं - "अमकारी माता थारो भंडार भर्यो रे..." इस अमकारी अष्टमी पर विशेष - राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ की नारी शक्ति इस बार की अमकारी अष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, एक आंदोलन बन रही है, क्योंकि *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* ने इस दिन को *नारी शक्ति सम्मान दिवस* के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। यह संघ पिछले कई वर्षों से पूरे भारत में सनातन धर्म, मानवता और संस्कृति की रक्षा के लिए काम कर रहा है। इस संघ की सबसे मजबूत कड़ी है - *नारी शक्ति प्रकोष्ठ*। *संघ की नारी शक्ति ने इस अमकारी अष्टमी पर 3 बड़े संकल्प लिए हैं -* *पहला संकल्प - धर्म रक्षा -* संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश की नारी शक्ति की बहनों ने निर्णय लिया है कि इस अष्टमी पर हर जिले में 108 महिलाओं द्वारा सामूहिक हवन किया जाएगा, ताकि सनातन धर्म पर हो रहे कुठाराघात को रोका जा सके। लव जिहाद, धर्मांतरण और नशे के खिलाफ नारी शक्ति अब खुद मोर्चा संभालेगी। *दूसरा संकल्प - मानव धर्म की रक्षा -* अमकारी माता अन्न की देवी हैं। संघ की नारी शक्ति ने इस दिन 1001 गरीब परिवारों को अन्न दान करने का लक्ष्य रखा है। बांसवाड़ा, कुशलगढ़, छोटी सरवा, बड़ी सरवा, सल्लोपाट, भूंगड़ा में संघ की महिलाएं घर-घर जाकर अनाज इकट्ठा कर रही हैं और उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगी। यही सच्चा मानव धर्म है। *तीसरा संकल्प - नारी को शक्ति बनाना -* संघ का मानना है कि नारी केवल अबला नहीं, वह दुर्गा है, वह चामुंडा है। इसलिए संघ की नारी शक्ति इकाई ने गांव-गांव में जाकर महिलाओं को आत्मरक्षा, शिक्षा और स्वरोजगार का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। अमकारी अष्टमी के दिन कुशलगढ़ में नारी शक्ति द्वारा *तलवारबाजी और आत्मरक्षा का प्रदर्शन* भी किया जाएगा, ताकि हर बेटी पूरी बाई कीर की तरह निडर बन सके। अमकारी अष्टमी का संदेश आज के युग में आज जब पाश्चात्य संस्कृति हमारे त्योहारों को निगल रही है, तब अमकारी अष्टमी हमें याद दिलाती है कि - - अन्न का सम्मान करो, अन्न को बर्बाद मत करो। - नारी का सम्मान करो, क्योंकि नारी ही अमकारी है, जो सृष्टि को चलाती है। - धर्म की रक्षा हथियार से नहीं, संस्कार से होती है। और यही संदेश *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* दे रहा है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है - "जब तक नारी शक्ति जागृत नहीं होगी, तब तक सनातन धर्म सुरक्षित नहीं होगा। अमकारी अष्टमी उसी जागरण का दिन है।" उपसंहार अमकारी अष्टमी केवल व्रत-कथा नहीं, यह प्रकृति, नारी और धर्म के संगम का पर्व है। इस दिन हम माता से केवल अन्न नहीं मांगते, हम मांगते हैं - साहस, शक्ति और संस्कार। आइए इस अमकारी अष्टमी पर हम सब *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* की नारी शक्ति के साथ मिलकर संकल्प लें - हम अन्न की रक्षा करेंगे। हम नारी की रक्षा करेंगे। हम सनातन मानव धर्म की रक्षा करेंगे। *जय अमकारी माता।* *जय नारी शक्ति।* *जय सनातन मानव धर्म।* *- लेखक : धर्मेन्द्र कुमार सोनी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ, नारी शक्ति इकाई के सहयोग से।* *स्थान - कुशलगढ़, जिला बांसवाड़ा, राजस्थान*
*अमकारी अष्टमी : नारी शक्ति की साधना और सनातन धर्म की रक्षा का महापर्व* *प्राइम न्यूज राजस्थान - धर्म विशेष* *लेखक - धर्मेन्द्र कुमार सोनी, कुशलगढ़, जिला बांसवाड़ा* राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ भारत राष्ट्रीय प्रमुख संत नरसिंह गीरी महाराज व नारी शक्ति प्रमुख श्रीमती साधना पंचाल डुंगरीपाडा से सीधी बात भारत के सनातन धर्म में अष्टमी तिथि का अपना विशेष महत्व है। जब-जब धर्म पर संकट आया, नारी शक्ति ने दुर्गा, काली, चामुंडा बनकर उसका नाश किया। उसी नारी शक्ति की उपासना का एक लोक पर्व है - *अमकारी अष्टमी*। राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के वागड़ क्षेत्र - बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, कुशलगढ़, प्रतापगढ़ में भाद्रपद और आश्विन मास की अष्टमी को अमकारी अष्टमी बड़े श्रद्धा भाव से मनाई जाती है। इस दिन माता अम्बे, महालक्ष्मी और महाकाली की विशेष पूजा होती है। और इस वर्ष इस पर्व को और भी दिव्य बना रहा है *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* और उसकी *नारी शक्ति इकाई* का संकल्प। अमकारी अष्टमी क्या है? - अर्थ और महत्व अमकारी शब्द दो शब्दों से बना है - *अम् + कारी*। अम् का अर्थ है - मां, अम्बा, अन्नपूर्णा। कारी का अर्थ है - करने वाली, रचना करने वाली। अर्थात जो पूरे विश्व का पालन-पोषण करती है, जो अन्न से लेकर प्राण तक देती है, वह अमकारी माता है। ग्रामीण मान्यता के अनुसार इस दिन *मां अमकारी* धरती पर आती हैं और अपने भक्तों के घर में अन्न के भंडार भरती हैं। किसान इस दिन नए अनाज की पहली बाली माता को चढ़ाते हैं। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति, पुत्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पुराणों में कहा गया है - _या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।_ _नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥_ अर्थात हर प्राणी में जो माता के रूप में है, उस अमकारी शक्ति को हम नमन करते हैं। अमकारी अष्टमी की पौराणिक कथा कथा के अनुसार एक बार बांसवाड़ा-डूंगरपुर के जंगलों में भयंकर अकाल पड़ा। महीनों तक बारिश नहीं हुई। खेत सूख गए। लोग भूख से तड़पने लगे। तब वागड़ के भील-गरासिया समाज की महिलाओं ने मां अम्बा की घोर तपस्या की। आठ दिन तक वे बिना अन्न-जल के पहाड़ पर बैठी रहीं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर अष्टमी के दिन
माता ने *अमकारी देवी* के रूप में दर्शन दिए। माता ने अपने हाथ से जंगल में अन्न के बीज बिखेरे और कहा - "आज से इस धरती पर कभी अन्न की कमी नहीं होगी, जो भी नारी शक्ति सच्चे मन से मेरी पूजा करेगी, उसके घर में कभी भूख नहीं रहेगी।" तभी से वागड़ में अमकारी अष्टमी पर नए अनाज से मां की पूजा और कन्या पूजन की परंपरा शुरू हुई। अमकारी अष्टमी कैसे मनाई जाती है? - पूजा विधि *1. सुबह की तैयारी -* महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गोबर से घर-आंगन लीपती हैं। आम के पत्तों का तोरण लगाती हैं। *2. अमकारी माता का चौक -* मिट्टी से या चावल के आटे से चौक बनाया जाता है, उस पर 8 कमल के फूल बनाए जाते हैं, जो अष्टभुजा देवी के प्रतीक हैं। बीच में मिट्टी के कलश पर जौ उगाए जाते हैं। *3. निर्जला व्रत -* इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चांद देखने के बाद ही व्रत खोलती हैं। *4. कन्या पूजन -* इस दिन 8 कन्याओं को अमकारी माता का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, मेहंदी लगाई जाती है, और उन्हें नए कपड़े, अनाज और दक्षिणा दी जाती है। *5. भजन-कीर्तन -* रात भर गांव में महिलाएं ढोल-मंजीरे पर अमकारी माता के गीत गाती हैं - "अमकारी माता थारो भंडार भर्यो रे..." इस अमकारी अष्टमी पर विशेष - राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ की नारी शक्ति इस बार की अमकारी अष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, एक आंदोलन बन रही है, क्योंकि *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* ने इस दिन को *नारी शक्ति सम्मान दिवस* के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। यह संघ पिछले कई वर्षों से पूरे भारत में सनातन धर्म, मानवता और संस्कृति की रक्षा के लिए काम कर रहा है। इस संघ की सबसे मजबूत कड़ी है - *नारी शक्ति प्रकोष्ठ*। *संघ की नारी शक्ति ने इस अमकारी अष्टमी पर 3 बड़े संकल्प लिए हैं -* *पहला संकल्प - धर्म रक्षा -* संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश की नारी शक्ति की बहनों ने निर्णय लिया है कि इस अष्टमी पर हर जिले में 108 महिलाओं द्वारा सामूहिक हवन किया जाएगा, ताकि सनातन धर्म पर हो
रहे कुठाराघात को रोका जा सके। लव जिहाद, धर्मांतरण और नशे के खिलाफ नारी शक्ति अब खुद मोर्चा संभालेगी। *दूसरा संकल्प - मानव धर्म की रक्षा -* अमकारी माता अन्न की देवी हैं। संघ की नारी शक्ति ने इस दिन 1001 गरीब परिवारों को अन्न दान करने का लक्ष्य रखा है। बांसवाड़ा, कुशलगढ़, छोटी सरवा, बड़ी सरवा, सल्लोपाट, भूंगड़ा में संघ की महिलाएं घर-घर जाकर अनाज इकट्ठा कर रही हैं और उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगी। यही सच्चा मानव धर्म है। *तीसरा संकल्प - नारी को शक्ति बनाना -* संघ का मानना है कि नारी केवल अबला नहीं, वह दुर्गा है, वह चामुंडा है। इसलिए संघ की नारी शक्ति इकाई ने गांव-गांव में जाकर महिलाओं को आत्मरक्षा, शिक्षा और स्वरोजगार का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। अमकारी अष्टमी के दिन कुशलगढ़ में नारी शक्ति द्वारा *तलवारबाजी और आत्मरक्षा का प्रदर्शन* भी किया जाएगा, ताकि हर बेटी पूरी बाई कीर की तरह निडर बन सके। अमकारी अष्टमी का संदेश आज के युग में आज जब पाश्चात्य संस्कृति हमारे त्योहारों को निगल रही है, तब अमकारी अष्टमी हमें याद दिलाती है कि - - अन्न का सम्मान करो, अन्न को बर्बाद मत करो। - नारी का सम्मान करो, क्योंकि नारी ही अमकारी है, जो सृष्टि को चलाती है। - धर्म की रक्षा हथियार से नहीं, संस्कार से होती है। और यही संदेश *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* दे रहा है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है - "जब तक नारी शक्ति जागृत नहीं होगी, तब तक सनातन धर्म सुरक्षित नहीं होगा। अमकारी अष्टमी उसी जागरण का दिन है।" उपसंहार अमकारी अष्टमी केवल व्रत-कथा नहीं, यह प्रकृति, नारी और धर्म के संगम का पर्व है। इस दिन हम माता से केवल अन्न नहीं मांगते, हम मांगते हैं - साहस, शक्ति और संस्कार। आइए इस अमकारी अष्टमी पर हम सब *राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ* की नारी शक्ति के साथ मिलकर संकल्प लें - हम अन्न की रक्षा करेंगे। हम नारी की रक्षा करेंगे। हम सनातन मानव धर्म की रक्षा करेंगे। *जय अमकारी माता।* *जय नारी शक्ति।* *जय सनातन मानव धर्म।* *- लेखक : धर्मेन्द्र कुमार सोनी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ, नारी शक्ति इकाई के सहयोग से।* *स्थान - कुशलगढ़, जिला बांसवाड़ा, राजस्थान*
- banswada ke najdeek chidiya bhasha gali kya motira ke pass hernia gaon mein ek hamara gaon hai udhar Pani pada tha1
- भाजपा ने किया सागवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष का चेहरा सार्वजनिक सागवाड़ा नगर पालिका चुनाव 2026: भाजपा ने आशा पाटीदार को अध्यक्ष पद का चेहरा घोषित किया, उपाध्यक्ष पद पर संशय बरकरार डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगर पालिका में वर्ष 2026 के चुनावों के बाद अध्यक्ष पद को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी को नगर पालिका में बहुमत मिलने के बाद पार्टी ने अध्यक्ष पद के लिए अपना चेहरा सार्वजनिक कर दिया है, जबकि उपाध्यक्ष पद को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अशोक पटेल रानोली ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि संगठन की ओर से अध्यक्ष पद के लिए आशा पाटीदार, श्रद्धा पांचाल और रीना कंसारा के नाम तय कर उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचन विभाग को भेजे गए थे। हालांकि पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा ने आशा पाटीदार को नगर पालिका अध्यक्ष पद का अधिकृत चेहरा घोषित किया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष पद के लिए भूमिका पांचाल का नाम उपखंड कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक पटेल रानोली, सागवाड़ा नगर पालिका चुनाव प्रभारी एवं आसपुर के पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हेमंत दादा पाठक, पूर्व प्रधान ईश्वरलाल सरपोटा, पूर्व प्रधान हितेश रावल तथा वार्ड संख्या 4 के पार्षद योगेश जैन सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। कांग्रेस की ओर से नगर कांग्रेस अध्यक्ष ललित पांचाल, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष धीरज मेहता, भूमिका पांचाल सहित अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, सबसे पहले कांग्रेस ने अपना आवेदन प्रस्तुत किया, जिसके बाद लगभग दोपहर 12:35 बजे भारतीय जनता पार्टी ने अपना आवेदन जमा कराया। अब नगर पालिका अध्यक्ष पद की औपचारिक घोषणा एवं शपथ ग्रहण समारोह 21 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। वहीं उपाध्यक्ष पद को लेकर अभी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है और सभी की नजरें आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।1
- सालमगढ़ में 37वीं जिला स्तरीय शिक्षक खेलकूद व सांस्कृतिक प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ सालमगढ़ में 37वीं जिला स्तरीय शिक्षक खेलकूद व सांस्कृतिक प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ सालमगढ़। स्थानीय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को दो दिवसीय 37वीं जिला स्तरीय शिक्षक खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का रंगारंग आगाज हुआ। समारोह की शुरुआत ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) प्रतिनिधि लक्ष्मण सिंह मीणा की अध्यक्षता तथा सरपंच चंद्रिका मीणा के मुख्य आतिथ्य में हुई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति समारोह में लैम्प्स अध्यक्ष अशोक चौधरी, करणी सेना अध्यक्ष अनूप सिंह राव, पूर्व सरपंच प्रकाश मीणा, भगवती विद्या मंदिर के संचालक दिनेशचंद्र शर्मा, शिक्षक संघ के सत्यनारायण भट्ट, राहुल बैरागी, कालूराम मीणा तथा कल्पेश अहारी , प्रधानाचार्य बालूराम मीणा, महेश जाड़ावत, गोपाल मीणा, कन्हैयालाल मीणा, उदयलाल आंजना एवं भगवान लाल मीणा विशिष्ट अतिथि के रूप में मोजूद रहे सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन उद्घाटन सत्र के पश्चात आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिक्षकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। दो दिवसीय इस आयोजन में जिले भर के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक स्पर्धाओं में अपना हुनर दिखा रहे हैं। आभार प्रधानाचार्य दिपक राठोर ने किया संचालन प्रेमसिंह राजपूत ने कि1
- धंबोला विद्यालय में ओजोन दिवस पर विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में दिखाई प्रतिभा ओजोन दिवस पर विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में दिखाई प्रतिभा धंबोला। स्थानीय विद्यालय में विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर विभिन्न जागरूकता एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उप प्राचार्य अजितपाल सिंह चौहान एवं इको क्लब प्रभारी बापूलाल रोत के सानिध्य में हुआ। विद्यालय के शिक्षक एवं समस्त छात्र-छात्राएं विद्यालय परिसर स्थित नक्षत्र वाटिका में एकत्रित हुए। इस दौरान विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी, क्विज, निबंध लेखन एवं चार्ट प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर ओजोन परत के संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व, पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका तथा इसके संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया। आयोजन में अनिरुद्ध पंड्या, विद्या पंड्या, मधुसूदन, उदय पंड्या, राकेश पंड्या, मुकेश पंड्या, लक्ष्मी पाण्डोर, मंजुला रोत एवं आशा रोत सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहयोग किया।3
- प्रतापगढ़ सभापति चुनाव में ज्योति सोनी और मनीषा जैन आमने-सामने1
- कालीबाई भील राजस्थान के डूंगरपुर जिले के रास्तापाल गांव की एक वीर भील बालिका थीं, जिन्हें गुरु भक्ति और शिक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली साक्षरता की देवी के रूप में जाना कालीबाई भील राजस्थान के डूंगरपुर जिले के रास्तापाल गांव की एक वीर भील बालिका थीं, जिन्हें गुरु भक्ति और शिक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली साक्षरता की देवी के रूप में जाना1
- 17 सितंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा-समर्पण और नेतृत्व को लेकर अपनी बात रखी। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा-समर्पण और नेतृत्व को लेकर अपनी बात रखी।1
- छड़ावद में करणी सेना का संगठन विस्तार; UGC नियमों को लागू न करने की मांग के साथ EWS और आर्थिक आरक्षण पर व्यापक जन-जागरण का संकल्प छड़ावद: ग्राम छड़ावद में करणी सेना (टीम जीवन सिंह शेरपुर) के तत्वावधान में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विस्तार करने के उद्देश्य से एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया और नवनियुक्त पदाधिकारियों को दायित्व सौंपे गए। नवनियुक्त कार्यकारिणी: उपाध्यक्ष: मूलचन्द जी सिसोदिया एवं मेहताबसिंह राठौर महा सचिव: पूनमसिंह सिसोदिया संयोजक: राहुलसिंह परमार कोषाध्यक्ष: भंवरसिंह राठौर मीडिया प्रभारी: संजयसिंह बारोड़ सह-मीडिया प्रभारी: राकेशसिंह पवार सामाजिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा एवं प्रमुख माँगे: बैठक के दौरान करणी सेना के पदाधिकारियों ने समाज से जुड़े महत्वपूर्ण एवं ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला और इन्हें जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया: UGC नियम लागू न करने की माँग: वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लागू न करने की पुरजोर मांग उठाई। संगठन ने युवाओं को जागरूक करते हुए बताया कि ये नीतियाँ किस प्रकार सामान्य एवं सवर्ण समाज के युवाओं के शैक्षणिक भविष्य, अवसरों और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही हैं, इसलिए इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। EWS सरलीकरण: सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को दिए जाने वाले EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण की प्रक्रिया में आ रही प्रशासनिक जटिलताओं को दूर करने की माँग की गई। संगठन का मानना है कि जटिल नियमों और कड़े मापदंडों के कारण वास्तविक जरूरतमंद सवर्ण परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है, इसलिए इसके नियमों व प्रमाण-पत्र निर्माण प्रक्रिया का तत्काल सरलीकरण किया जाए। आर्थिक आधार पर पूर्ण आरक्षण: करणी सेना ने एक बार फिर दोहराया कि जातिगत आरक्षण के स्थान पर 'आर्थिक आधार पर आरक्षण' की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। वक्ताओं ने युवाओं को स्पष्ट किया कि वर्तमान और भविष्य में सवर्ण समाज के गरीब तबके के हितों की रक्षा के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति: कार्यक्रम में तहसील अध्यक्ष भानुप्रतापसिंह जी देवड़ा, तहसील संरक्षक धर्मेंद्रसिंह जी राठौड़, तहसील महामंत्री जितेंद्रसिंह जी राठौड़, तहसील मीडिया प्रभारी जितेंद्रसिंह जी पवार, तहसील महामंत्री राहुलसिंह जी डोडिया एवं राजवर्धन सिंह जी गुमानपुरा विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके साथ ही नगर अध्यक्ष राहुल सिंह सोलंकी, माखन सिंह पटेल, महेश पटेल, दीपक पड़ियार, उमेश रेवर, वीरेन्द्र रेवर, अर्जुन राठौड़, लालू जी चौहान, दीपक, राहुल पड़ियार, गोविन्द सिसोदिया, नरेन्द्र चौहान, बबलू पड़ियार, पंकज राठौड़, मोहन राठौर तथा धर्मेन्द्र सिसोदिया सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई व शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम का सफल समापन विक्रम सिंह पड़ियार द्वारा सभी का आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।1