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पांढुर्णा जिले में पर्यावरण और जल संरक्षण के कार्यों से जुड़े नीरज वानखड़े ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने 108 सीताफल के बीजों को एक ही सीड्स बॉल में रखकर देश का सबसे बड़ा सीड्स बॉल तैयार किया है, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। नीरज वानखड़े कई वर्षों से पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रहे हैं। वह बंजर भूमि, पहाड़ियों और जंगलों में सीड्स बॉल फेंकते हैं, ताकि वहां प्रकृति के अनुकूल नए वृक्ष पनप सकें। इस वर्ष उन्होंने 50 हजार सीताफल और 5 हजार बिहाड़ा व रीठा के बीजों का उपयोग कर कुल 55 हजार सीड्स बॉल बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनकी इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि जंगलों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका के साधन भी जुटाना है। सीताफल के पेड़ों से भविष्य में ग्रामीणों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, साथ ही वन्य जीवों को प्राकृतिक भोजन भी मिल सकेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी नीरज वानखड़े की सक्रियता सराहनीय रही है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोर रिचार्ज और वेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। इन महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें 'वाटर हीरो' के खिताब से सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने 65 हजार मास्क वितरित कर समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। उस समय भी देश का सबसे लंबा फेस मास्क बनाकर उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। नीरज वानखड़े के ये कार्य आज समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

22 hrs ago
user_NILESH KALASKAR
NILESH KALASKAR
Farmer Pandhurna, Chhindwara•
22 hrs ago

पांढुर्णा जिले में पर्यावरण और जल संरक्षण के कार्यों से जुड़े नीरज वानखड़े ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने 108 सीताफल के बीजों को एक ही सीड्स बॉल में रखकर देश का सबसे बड़ा सीड्स बॉल तैयार किया है, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। नीरज वानखड़े कई वर्षों से पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रहे हैं। वह बंजर भूमि, पहाड़ियों और जंगलों में सीड्स बॉल फेंकते हैं, ताकि वहां प्रकृति के अनुकूल नए वृक्ष पनप सकें। इस वर्ष उन्होंने 50 हजार सीताफल और 5 हजार बिहाड़ा व रीठा के बीजों का उपयोग कर कुल 55 हजार सीड्स बॉल बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनकी इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि जंगलों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका के साधन भी जुटाना है। सीताफल के पेड़ों से भविष्य में ग्रामीणों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, साथ ही वन्य जीवों को प्राकृतिक भोजन भी मिल सकेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी नीरज वानखड़े की सक्रियता सराहनीय रही है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोर रिचार्ज और वेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। इन महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें 'वाटर हीरो' के खिताब से सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने 65 हजार मास्क वितरित कर समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। उस समय भी देश का सबसे लंबा फेस मास्क बनाकर उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। नीरज वानखड़े के ये कार्य आज समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

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  • पांढुर्णा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भंदारगोंदी में इन दिनों विकास कार्यों की सुस्त गति चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेष रूप से पंचायत का वार्ड क्रमांक 3 बदहाली का शिकार है, जहाँ दिलीप राऊत और रत्नाकर डोईजोड वाली गलियों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि विकास उनसे कोसों दूर है। वार्ड वासी प्रांजल ठाकरे ने स्पष्ट तौर पर बताया कि पंचायत चुनाव के बाद से वे लगातार वार्ड 3 में नाली निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बार-बार केवल कोरे आश्वासन देकर टालने की कोशिश की जा रही है। बरसात का मौसम आते ही दिलीप राऊत और रत्नाकर डोईजोड के घरों के सामने की गलियां जलभराव के कारण समस्याओं का गढ़ बन जाती हैं। गलियों में जगह-जगह गंदा पानी जमा रहने से हर समय संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इस नारकीय स्थिति से वार्ड 3 के निवासी अब बेहद आक्रोशित हैं। ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि हर साल सरकारी फंड आने के बावजूद उनकी बरसों पुरानी जायज मांगें पूरी क्यों नहीं हो रही हैं। पिछले चार सालों में विकास कार्य के नाम पर केवल दो-तीन काम ही धरातल पर दिखाई दिए हैं। इस पूरे मामले पर जब उपसरपंच भूषण बेलखड़े से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि नाली निर्माण का प्रस्ताव पंचायत में लिया जा चुका है। हालांकि, ग्रामीण इन पुराने आश्वासनों से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है, ताकि विकास कार्यों में हो रही देरी की वास्तविक वजह सामने आ सके। वार्ड वासियों का कहना है कि उन्हें कागजी प्रस्ताव नहीं, बल्कि जल्द से जल्द नाली का निर्माण चाहिए, ताकि वे इस बदहाल स्थिति से बाहर निकल सकें। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर गंभीरता दिखाएगा या ग्रामीणों को और इंतजार करना पड़ेगा।
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    पांढुर्णा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भंदारगोंदी में इन दिनों विकास कार्यों की सुस्त गति चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेष रूप से पंचायत का वार्ड क्रमांक 3 बदहाली का शिकार है, जहाँ दिलीप राऊत और रत्नाकर डोईजोड वाली गलियों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि विकास उनसे कोसों दूर है। वार्ड वासी प्रांजल ठाकरे ने स्पष्ट तौर पर बताया कि पंचायत चुनाव के बाद से वे लगातार वार्ड 3 में नाली निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बार-बार केवल कोरे आश्वासन देकर टालने की कोशिश की जा रही है।

बरसात का मौसम आते ही दिलीप राऊत और रत्नाकर डोईजोड के घरों के सामने की गलियां जलभराव के कारण समस्याओं का गढ़ बन जाती हैं। गलियों में जगह-जगह गंदा पानी जमा रहने से हर समय संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इस नारकीय स्थिति से वार्ड 3 के निवासी अब बेहद आक्रोशित हैं। ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि हर साल सरकारी फंड आने के बावजूद उनकी बरसों पुरानी जायज मांगें पूरी क्यों नहीं हो रही हैं। पिछले चार सालों में विकास कार्य के नाम पर केवल दो-तीन काम ही धरातल पर दिखाई दिए हैं।

इस पूरे मामले पर जब उपसरपंच भूषण बेलखड़े से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि नाली निर्माण का प्रस्ताव पंचायत में लिया जा चुका है। हालांकि, ग्रामीण इन पुराने आश्वासनों से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है, ताकि विकास कार्यों में हो रही देरी की वास्तविक वजह सामने आ सके। वार्ड वासियों का कहना है कि उन्हें कागजी प्रस्ताव नहीं, बल्कि जल्द से जल्द नाली का निर्माण चाहिए, ताकि वे इस बदहाल स्थिति से बाहर निकल सकें। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर गंभीरता दिखाएगा या ग्रामीणों को और इंतजार करना पड़ेगा।
    user_NILESH KALASKAR
    NILESH KALASKAR
    Farmer Pandhurna, Chhindwara•
    27 min ago
  • नगरपालिका अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण ताप्ती सरोवर पर बन रहे स्लुज गेट का निर्माण कार्य तय समय-सीमा में पूरा नहीं हो पाया है, जिससे सरोवर के खाली होने का खतरा मंडराने लगा है। यदि काम पूरा होने से पहले बारिश होती है, तो सरोवर का पानी बह जाने से यह खतरा और भी गहरा सकता है। शनिवार को सभापति निर्मला उबनारे और पार्षद अंजलि शिवहरे ने स्लुज गेट निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान तकनीकी निगरानी के लिए नगरपालिका का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिस पर पार्षदों ने कड़ी नाराजगी जताई। सभापति निर्मला उबनारे ने अधिकारियों पर इस महत्वपूर्ण कार्य को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण कार्य 'कछुआ चाल' से चल रहा है और तकनीकी निगरानी में भी लापरवाही बरती जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्षद अंजलि शिवहरे ने अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली को निर्माण में देरी का कारण बताया और कहा कि धीमी गति के चलते काम के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश की स्थिति में पानी रोकने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। कांग्रेस पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से भविष्य में ताप्ती सरोवर खाली होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगरपालिका के अधिकारियों की होगी।
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    नगरपालिका अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण ताप्ती सरोवर पर बन रहे स्लुज गेट का निर्माण कार्य तय समय-सीमा में पूरा नहीं हो पाया है, जिससे सरोवर के खाली होने का खतरा मंडराने लगा है। यदि काम पूरा होने से पहले बारिश होती है, तो सरोवर का पानी बह जाने से यह खतरा और भी गहरा सकता है।

शनिवार को सभापति निर्मला उबनारे और पार्षद अंजलि शिवहरे ने स्लुज गेट निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान तकनीकी निगरानी के लिए नगरपालिका का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिस पर पार्षदों ने कड़ी नाराजगी जताई। सभापति निर्मला उबनारे ने अधिकारियों पर इस महत्वपूर्ण कार्य को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण कार्य 'कछुआ चाल' से चल रहा है और तकनीकी निगरानी में भी लापरवाही बरती जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्षद अंजलि शिवहरे ने अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली को निर्माण में देरी का कारण बताया और कहा कि धीमी गति के चलते काम के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश की स्थिति में पानी रोकने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है।

कांग्रेस पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से भविष्य में ताप्ती सरोवर खाली होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगरपालिका के अधिकारियों की होगी।
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter Multai, Betul•
    1 hr ago
  • मुलताई में मुहर्रम पर्व को लेकर शांति समिति की एक बैठक संपन्न हुई। यह बैठक थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार, तहसीलदार संजय सिंह बरैया और नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू सिंह परिहार की उपस्थिति में आयोजित की गई।
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    मुलताई में मुहर्रम पर्व को लेकर शांति समिति की एक बैठक संपन्न हुई। यह बैठक थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार, तहसीलदार संजय सिंह बरैया और नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू सिंह परिहार की उपस्थिति में आयोजित की गई।
    user_Kashinath Sahu
    Kashinath Sahu
    Local News Reporter Multai, Betul•
    20 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के बिछुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से धड़ाम हो गई है, जहाँ एक बुजुर्ग महिला कई घंटों तक ऑक्सीजन के बिना साँसों के लिए तड़पती रही। अस्पताल में न तो रात के समय ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था, न ही डॉक्टर और स्टाफ मौजूद थे, और एंबुलेंस का भी कोई अता-पता नहीं था। मजबूरन परिजनों को बाहर से निजी ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाना पड़ा और निजी वाहन से मरीज को छिंदवाड़ा रेफर करना पड़ा, जिससे उनकी जान बच सकी। यह घटना बिछुआ अस्पताल की घोर लापरवाही को उजागर करती है, जहाँ मरीजों को इलाज की बजाय मौत का इंतजार करना पड़ता है। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बिछुआ अस्पताल में रात होते ही स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर चली जाती है। एक गंभीर मरीज 3 घंटे से अधिक समय तक बिस्तर पर तड़पता रहा, जबकि हाथ में कैनुला लगा था और ऑक्सीजन मास्क की सख्त जरूरत थी। आश्चर्यजनक रूप से, अस्पताल में एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, और सरकारी ऑक्सीजन प्लांट महज एक शोपीस बनकर रह गया है, जिसके सिलेंडर खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि रात के समय अस्पताल में कोई जिम्मेदार स्टाफ — न डॉक्टर, न नर्स, न वार्ड बॉय — मौजूद नहीं था, जिससे परिजनों को मदद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा और चिल्लाना पड़ा। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि BMO (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) की गैर-जिम्मेदारी ही इस बदहाली की जड़ है। BMO कथित तौर पर रोज़ाना सुबह हाजिरी लगाकर शाम होते ही अपने घर चले जाते हैं, जिससे रात में अस्पताल भगवान भरोसे रहता है। शासन के नियमों के अनुसार BMO को 24x7 अस्पताल में मौजूद रहना चाहिए और आपात स्थिति में रात में भी ड्यूटी देनी चाहिए, लेकिन बिछुआ में ये नियम ताक पर रख दिए गए हैं। ग्रामीण इसे BMO की लापरवाही का नतीजा मान रहे हैं, जिसने बिछुआ अस्पताल को मरीजों के लिए 'मौत का फरमान' बना दिया है। इस गंभीर लापरवाही के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। वे सवाल उठा रहे हैं कि 3 घंटे तक मरीज के तड़पने के दौरान अस्पताल का इंचार्ज कहाँ था, ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों नहीं था, और सरकारी एंबुलेंस क्यों नदारद थी। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से तुरंत बिछुआ अस्पताल का रात में औचक निरीक्षण करने, दोषी BMO और लापरवाह स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई करने, 24 घंटे डॉक्टर-स्टाफ की ड्यूटी सुनिश्चित करने और ऑक्सीजन प्लांट को तुरंत चालू करने की मांग की गई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगली खबर किसी मरीज की लाश की होगी, और उसके लिए सीधे तौर पर BMO की 'डेली अप-डाउन' वाली लापरवाही ही जिम्मेदार होगी।
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    मध्य प्रदेश के बिछुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से धड़ाम हो गई है, जहाँ एक बुजुर्ग महिला कई घंटों तक ऑक्सीजन के बिना साँसों के लिए तड़पती रही। अस्पताल में न तो रात के समय ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था, न ही डॉक्टर और स्टाफ मौजूद थे, और एंबुलेंस का भी कोई अता-पता नहीं था। मजबूरन परिजनों को बाहर से निजी ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाना पड़ा और निजी वाहन से मरीज को छिंदवाड़ा रेफर करना पड़ा, जिससे उनकी जान बच सकी। यह घटना बिछुआ अस्पताल की घोर लापरवाही को उजागर करती है, जहाँ मरीजों को इलाज की बजाय मौत का इंतजार करना पड़ता है।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बिछुआ अस्पताल में रात होते ही स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर चली जाती है। एक गंभीर मरीज 3 घंटे से अधिक समय तक बिस्तर पर तड़पता रहा, जबकि हाथ में कैनुला लगा था और ऑक्सीजन मास्क की सख्त जरूरत थी। आश्चर्यजनक रूप से, अस्पताल में एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, और सरकारी ऑक्सीजन प्लांट महज एक शोपीस बनकर रह गया है, जिसके सिलेंडर खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि रात के समय अस्पताल में कोई जिम्मेदार स्टाफ — न डॉक्टर, न नर्स, न वार्ड बॉय — मौजूद नहीं था, जिससे परिजनों को मदद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा और चिल्लाना पड़ा।

स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि BMO (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) की गैर-जिम्मेदारी ही इस बदहाली की जड़ है। BMO कथित तौर पर रोज़ाना सुबह हाजिरी लगाकर शाम होते ही अपने घर चले जाते हैं, जिससे रात में अस्पताल भगवान भरोसे रहता है। शासन के नियमों के अनुसार BMO को 24x7 अस्पताल में मौजूद रहना चाहिए और आपात स्थिति में रात में भी ड्यूटी देनी चाहिए, लेकिन बिछुआ में ये नियम ताक पर रख दिए गए हैं। ग्रामीण इसे BMO की लापरवाही का नतीजा मान रहे हैं, जिसने बिछुआ अस्पताल को मरीजों के लिए 'मौत का फरमान' बना दिया है।

इस गंभीर लापरवाही के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। वे सवाल उठा रहे हैं कि 3 घंटे तक मरीज के तड़पने के दौरान अस्पताल का इंचार्ज कहाँ था, ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों नहीं था, और सरकारी एंबुलेंस क्यों नदारद थी। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से तुरंत बिछुआ अस्पताल का रात में औचक निरीक्षण करने, दोषी BMO और लापरवाह स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई करने, 24 घंटे डॉक्टर-स्टाफ की ड्यूटी सुनिश्चित करने और ऑक्सीजन प्लांट को तुरंत चालू करने की मांग की गई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगली खबर किसी मरीज की लाश की होगी, और उसके लिए सीधे तौर पर BMO की 'डेली अप-डाउन' वाली लापरवाही ही जिम्मेदार होगी।
    user_Baljeet Chouhan
    Baljeet Chouhan
    Credit reporting agency बिछुआ, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एक कुकिंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न रसोइयों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता के संबंध में यह जानकारी परासिया संवाददाता शेख फरीद द्वारा दी गई है।
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    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एक कुकिंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न रसोइयों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता के संबंध में यह जानकारी परासिया संवाददाता शेख फरीद द्वारा दी गई है।
    user_भारत खबर लाइव सच्ची खबर का शहर
    भारत खबर लाइव सच्ची खबर का शहर
    छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • छिंदवाड़ा जिले के परासिया में आज दोपहर 12 बजे नगर कांग्रेस कमेटी परासिया के तत्वावधान में मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार की कथित "खराब नीतियों और विफलताओं" के विरोध में एक पुतला दहन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन परासिया विधायक सोहनलाल वाल्मीकि और कांग्रेस अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह के नेतृत्व में, तथा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और नकुल नाथ के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। नगर कांग्रेस अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे के प्रमुख कारणों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश में बढ़ती महंगाई, नियमों की आड़ में किसानों पर हो रहे अत्याचार, और अमेरिका द्वारा तीन नागरिकों की हत्या पर केंद्र सरकार की चुप्पी जैसे राष्ट्रीय मुद्दे क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। स्थानीय स्तर पर, परासिया शहर में पिछले 15 दिनों से भीषण पानी की समस्या बनी हुई है, जहां गंदा, मटमैला और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। इसके अतिरिक्त, शहर में साफ-सफाई का अभाव है, महीनों से वार्डों में टीप्पर नहीं जा रहे, बरसात से पहले नालियों और नालों की सफाई नहीं की गई है, इंडियन गैस की बुकिंग और वितरण में समस्याएँ हैं, और बिजली के बिलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इन सभी मुद्दों के कारण क्षेत्रवासियों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कांग्रेस कार्यालय से एक रैली के रूप में हुई, जिसमें कांग्रेस पदाधिकारी नारे लगाते हुए तहसील कार्यालय के सामने पहुंचे। यहां पुलिस के साथ पुतला दहन को लेकर काफी मशक्कत हुई। इस अवसर पर परासिया विधायक सोहनलाल वाल्मीकि, नगर कांग्रेस अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह, समन्वयक बसंत मालवीय, वरिष्ठ यमुना दुबे, गोविंद चौबे, नगर महिला अध्यक्ष सावित्री वर्मा, पार्षद पूनम कैथवास, पार्षद प्रतिभा सोनी, पार्षद रुक्मा बसोड, मंजू सोनी, जगदीश चौरसिया, सुरेश डेहरिया, इशाक खान, उत्कर्ष वाल्मीकि, मुकुल दुबे, स्वप्निल करानिया, शंकर लाल साहू, मनीष बैन, बल्ला प्रसाद मदरे, दर्शन अरोरा, अकलाखक ख़ान, अशोक शर्मा, टीकाराम साहू, सुरेन्द्र झाड़े, मोंटी खान, अशोक शर्मा, राजा श्रीवास्तव, बिरजू सैन, श्रीमती भावना साहू, श्रीमती उर्मिला रजक, उमेश हिवसे, पूनाराम डेहरिया, इंदू खान, पप्पू मालवीय, सुधीर यादव, रियाज खान, रामसेवक उइके, शफीक सिद्दकी, सोनू गुप्ता, नफीस खान, गौरा बाजी, धीरज श्रीवास्तव, संजय सोनी, शब्बीर खान, सुरेश भाऊ, रीना बाबरिया, शफीक सिद्दकी, पूनाराम डेहरिया, मोहसिन खान, फैमुनिशा सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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    छिंदवाड़ा जिले के परासिया में आज दोपहर 12 बजे नगर कांग्रेस कमेटी परासिया के तत्वावधान में मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार की कथित "खराब नीतियों और विफलताओं" के विरोध में एक पुतला दहन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन परासिया विधायक सोहनलाल वाल्मीकि और कांग्रेस अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह के नेतृत्व में, तथा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और नकुल नाथ के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

नगर कांग्रेस अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह ने इस विरोध प्रदर्शन के पीछे के प्रमुख कारणों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश में बढ़ती महंगाई, नियमों की आड़ में किसानों पर हो रहे अत्याचार, और अमेरिका द्वारा तीन नागरिकों की हत्या पर केंद्र सरकार की चुप्पी जैसे राष्ट्रीय मुद्दे क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। स्थानीय स्तर पर, परासिया शहर में पिछले 15 दिनों से भीषण पानी की समस्या बनी हुई है, जहां गंदा, मटमैला और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। इसके अतिरिक्त, शहर में साफ-सफाई का अभाव है, महीनों से वार्डों में टीप्पर नहीं जा रहे, बरसात से पहले नालियों और नालों की सफाई नहीं की गई है, इंडियन गैस की बुकिंग और वितरण में समस्याएँ हैं, और बिजली के बिलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इन सभी मुद्दों के कारण क्षेत्रवासियों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कांग्रेस कार्यालय से एक रैली के रूप में हुई, जिसमें कांग्रेस पदाधिकारी नारे लगाते हुए तहसील कार्यालय के सामने पहुंचे। यहां पुलिस के साथ पुतला दहन को लेकर काफी मशक्कत हुई। इस अवसर पर परासिया विधायक सोहनलाल वाल्मीकि, नगर कांग्रेस अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह, समन्वयक बसंत मालवीय, वरिष्ठ यमुना दुबे, गोविंद चौबे, नगर महिला अध्यक्ष सावित्री वर्मा, पार्षद पूनम कैथवास, पार्षद प्रतिभा सोनी, पार्षद रुक्मा बसोड, मंजू सोनी, जगदीश चौरसिया, सुरेश डेहरिया, इशाक खान, उत्कर्ष वाल्मीकि, मुकुल दुबे, स्वप्निल करानिया, शंकर लाल साहू, मनीष बैन, बल्ला प्रसाद मदरे, दर्शन अरोरा, अकलाखक ख़ान, अशोक शर्मा, टीकाराम साहू, सुरेन्द्र झाड़े, मोंटी खान, अशोक शर्मा, राजा श्रीवास्तव, बिरजू सैन, श्रीमती भावना साहू, श्रीमती उर्मिला रजक, उमेश हिवसे, पूनाराम डेहरिया, इंदू खान, पप्पू मालवीय, सुधीर यादव, रियाज खान, रामसेवक उइके, शफीक सिद्दकी, सोनू गुप्ता, नफीस खान, गौरा बाजी, धीरज श्रीवास्तव, संजय सोनी, शब्बीर खान, सुरेश भाऊ, रीना बाबरिया, शफीक सिद्दकी, पूनाराम डेहरिया, मोहसिन खान, फैमुनिशा सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
    user_यश भारत
    यश भारत
    Local News Reporter छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • वर्तमान समय में किसानों को खाद को लेकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे जुड़ी एक और घटना सामने आई है। गुनखेड निवासी किसान उर्मिला माकोडे के परिजन को ई-टोकन में दर्शाए गए भैंसदेही विकासखंड के खामला गांव से एक बोरी यूरिया खरीदने के लिए 85 किलोमीटर दूर जाना पड़ा। इस लंबी यात्रा के कारण नाराज किसान ने कृषि अधिकारी से मामले की शिकायत की है। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए ई-टोकन प्रणाली शुरू की है, लेकिन इस प्रणाली के कारण किसानों को जबरदस्त समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि इस प्रणाली में सुधार किया जाए और सहकारिता समितियों में पर्याप्त खाद का स्टॉक रखा जाए, ताकि खाद का वितरण वहीं से हो सके।
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    वर्तमान समय में किसानों को खाद को लेकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे जुड़ी एक और घटना सामने आई है। गुनखेड निवासी किसान उर्मिला माकोडे के परिजन को ई-टोकन में दर्शाए गए भैंसदेही विकासखंड के खामला गांव से एक बोरी यूरिया खरीदने के लिए 85 किलोमीटर दूर जाना पड़ा। इस लंबी यात्रा के कारण नाराज किसान ने कृषि अधिकारी से मामले की शिकायत की है।

यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए ई-टोकन प्रणाली शुरू की है, लेकिन इस प्रणाली के कारण किसानों को जबरदस्त समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि इस प्रणाली में सुधार किया जाए और सहकारिता समितियों में पर्याप्त खाद का स्टॉक रखा जाए, ताकि खाद का वितरण वहीं से हो सके।
    user_आठनेर रिपोर्टर
    आठनेर रिपोर्टर
    पत्रकारिता आठनेर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • पांढुर्णा जिले में पर्यावरण और जल संरक्षण के कार्यों से जुड़े नीरज वानखड़े ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने 108 सीताफल के बीजों को एक ही सीड्स बॉल में रखकर देश का सबसे बड़ा सीड्स बॉल तैयार किया है, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। नीरज वानखड़े कई वर्षों से पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रहे हैं। वह बंजर भूमि, पहाड़ियों और जंगलों में सीड्स बॉल फेंकते हैं, ताकि वहां प्रकृति के अनुकूल नए वृक्ष पनप सकें। इस वर्ष उन्होंने 50 हजार सीताफल और 5 हजार बिहाड़ा व रीठा के बीजों का उपयोग कर कुल 55 हजार सीड्स बॉल बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनकी इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि जंगलों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका के साधन भी जुटाना है। सीताफल के पेड़ों से भविष्य में ग्रामीणों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, साथ ही वन्य जीवों को प्राकृतिक भोजन भी मिल सकेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी नीरज वानखड़े की सक्रियता सराहनीय रही है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोर रिचार्ज और वेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। इन महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें 'वाटर हीरो' के खिताब से सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने 65 हजार मास्क वितरित कर समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। उस समय भी देश का सबसे लंबा फेस मास्क बनाकर उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। नीरज वानखड़े के ये कार्य आज समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
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    पांढुर्णा जिले में पर्यावरण और जल संरक्षण के कार्यों से जुड़े नीरज वानखड़े ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने 108 सीताफल के बीजों को एक ही सीड्स बॉल में रखकर देश का सबसे बड़ा सीड्स बॉल तैयार किया है, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।

नीरज वानखड़े कई वर्षों से पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रहे हैं। वह बंजर भूमि, पहाड़ियों और जंगलों में सीड्स बॉल फेंकते हैं, ताकि वहां प्रकृति के अनुकूल नए वृक्ष पनप सकें। इस वर्ष उन्होंने 50 हजार सीताफल और 5 हजार बिहाड़ा व रीठा के बीजों का उपयोग कर कुल 55 हजार सीड्स बॉल बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है।

उनकी इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि जंगलों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका के साधन भी जुटाना है। सीताफल के पेड़ों से भविष्य में ग्रामीणों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, साथ ही वन्य जीवों को प्राकृतिक भोजन भी मिल सकेगा।

जल संरक्षण के क्षेत्र में भी नीरज वानखड़े की सक्रियता सराहनीय रही है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोर रिचार्ज और वेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। इन महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें 'वाटर हीरो' के खिताब से सम्मानित किया है।

इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने 65 हजार मास्क वितरित कर समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। उस समय भी देश का सबसे लंबा फेस मास्क बनाकर उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। नीरज वानखड़े के ये कार्य आज समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
    user_NILESH KALASKAR
    NILESH KALASKAR
    Farmer Pandhurna, Chhindwara•
    22 hrs ago
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