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- दत्तागंज कानपुर रोड स्थित सुंदरपुर में सड़क की हालत पिछले दो सालों से खराब है। इस बदहाल सड़क के कारण तारा का दिल टूट गया है।1
- मध्यप्रदेश के निवाली नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भक्ति और आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि दोनों विशाल पंडाल छोटे पड़ गए। शनिवार, 20 जून को कथा श्रवण के लिए हजारों श्रद्धालु भीषण गर्मी में भी पंडाल के बाहर खड़े रहे, जिसके लिए आयोजकों ने कूलर और एसी की विशेष व्यवस्था की। जैसे-जैसे कथा अपने अंतिम चरण में पहुँच रही है, मातृशक्ति सहित श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते आने वाले दिनों में पंडाल की सीमा बढ़ाने का अनुमान है। पूरे नगर में 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' का पावन उद्घोष गूँज रहा है और केसरिया पताकाओं से सजे वाहनों की आवाजाही से निवाली क्षेत्र एक बड़े तीर्थस्थल जैसा प्रतीत हो रहा है। इस दौरान पानसेमल क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्याम बरडे और राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सिसोदिया ने भी कथा में उपस्थित होकर व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। दोपहर 2 बजे परम पूज्य पंडित किशोर नागर जी महाराज ('बड़े गुरु जी') की कथा का शुभारंभ हुआ, इससे पूर्व इंदौर से आए भूतड़ा जी ने उनका भावपूर्ण स्वागत-वंदन किया। व्यासपीठ से पंडित किशोर नागर जी ने भक्त और भगवान के दिव्य संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिव्यांग भक्त और अबोध बालक के आँसुओं में साक्षात भगवान बसते हैं। उन्होंने मनुष्य को जीवन में झुककर चलने की सीख दी, जिससे पापों का शमन होता है, और अपनी सोच को इतना पावन रखने को कहा कि गंदे नाले में भी गंगा मैया के दर्शन हो सकें। महाराज श्री ने पूतना मोक्ष के प्रसंग को समझाते हुए बताया कि चाकू या कुल्हाड़ी के घाव तो भर जाते हैं, लेकिन 'अपने ही जूते' से लगे घाव कभी नहीं भरते, जिसका सीधा अर्थ है कि अपनों द्वारा दिए गए घाव जीवन भर रहते हैं और आज समाज में अपनों से ही सर्वाधिक डर है, वे ही आपका नाम कटवाने में लगे हैं। उन्होंने शबरी माता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के पूछने पर शबरी जी ने कहा था कि 'अपनों को भूलो और दूसरों को याद करो'। महाराज जी ने जोर देकर कहा कि कथा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हृदय धोने का महापात्र है, जिसकी पूर्णता तभी होती है जब वक्ता के बोलते समय श्रोताओं की आँखों से प्रेमाश्रु बहें। कथा के दौरान महाराज श्री ने जब प्रभु और भक्त के रिश्ते को समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी विवाह या विशेष आयोजन में भोजनालय वाला दूसरों को मुफ्त में भोजन कराता है, ठीक वैसे ही जब परमात्मा का भक्त इस भवसागर में परेशान होता है, तो प्रभु स्वयं धरती पर उतरकर उसे पार लगाते हैं। इस दौरान 'जीवन पछतावा है, ना आवा है ना जावा है' और 'मेरा क्या बिगड़ेगा गिरधारी, जाएगी लाज तुम्हारी' जैसे भजनों पर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमे। वहीं, भरत-कैकेयी संवाद और पूतना मोक्ष के प्रसंग को महाराज श्री ने इतने सहज और करुण भाव से प्रस्तुत किया कि पंडाल में मौजूद हर आँख नम हो गई। इस महाआयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि निवाली का हर छोटा-बड़ा परिवार बिना किसी संकोच और शर्म के, जी-जान से सेवा कार्य में जुटा रहा, हर इंसान खुद को धन्य मानकर सेवा कर रहा था। आज के इस विशाल भंडारे और भोजन की संपूर्ण व्यवस्था निवाली के राठौड़ समाज द्वारा बेहद सुचारू रूप से की गई, जिसकी सभी ने सराहना की। कथा में कल भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं एवं छप्पन भोग प्रसंग का विशेष आकर्षण रहेगा।4
- बुरहानपुर में गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच प्रशासन और गणेश मंडलों के बीच गंभीर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने प्रतिबंधित प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी और निर्धारित 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली गणेश प्रतिमाओं पर कार्रवाई करते हुए कई बड़ी प्रतिमाएं जब्त की हैं। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी निर्देशों और जिला प्रशासन द्वारा जारी 10 फीट से ऊंची प्रतिमाओं पर रोक के तहत की गई है। तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने शिकायतें मिलने के बाद विभिन्न मूर्ति निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया था कि प्रतिबंध के बावजूद पीओपी का उपयोग हो रहा है और 16 से 18 फीट तक ऊंची प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं; जांच में नियम उल्लंघन पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद मूर्तिकारों और गणेश मंडलों में भारी नाराजगी और आक्रोश फैल गया है। विरोध स्वरूप बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपकर प्रतिबंधों पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि गणेश उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा है, और बड़ी प्रतिमाएं इस पर्व का प्रमुख आकर्षण होती हैं। उन्होंने कहा कि अचानक की गई इस कार्रवाई से उत्सव की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और उन्होंने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं तथा परंपराओं को ध्यान में रखते हुए आदेशों में राहत देने का आग्रह किया, ताकि उत्सव पहले की तरह भव्यता से मनाया जा सके। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागड़ी के अनुसार, पिछले वर्षों में बड़ी प्रतिमाओं के परिवहन, स्थापना और विसर्जन के दौरान कई दुर्घटनाएं और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियां सामने आई थीं, जिसके कारण इस बार पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले में 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली प्रतिमाओं को न तो स्थापित करने की अनुमति मिलेगी और न ही उन्हें अन्य जिलों या राज्यों में भेजा जा सकेगा। हालांकि, प्रशासन ने गणेश मंडलों का ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और मामले पर विचार करने की बात कही है।1
- नीट (NEET) परीक्षा से पहले स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इस संबंध में, कलेक्टर और एसपी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों का जायजा लिया और उनकी गहनता से जांच की।1
- नागलवाड़ी उद्वहन सिंचाई परियोजना से पर्याप्त पानी न मिलने से नाराज़ किसानों ने दोमाडा स्थित डिवीजन कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया है। किसानों का आरोप है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, इसका लाभ अधिकतर किसानों तक नहीं पहुँच पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति में बाधा, तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित संचालन के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके अलावा, कई जगहों पर जल वितरण पेटियां भी खेतों से 1,000 से 2,000 फीट दूर स्थापित की गई हैं, जिससे सिंचाई करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरनारत किसानों ने परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नियमित रूप से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की कड़ी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी ये माँगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे।1
- बड़वानी जिला मुख्यालय पर 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (NEET) परीक्षा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी क्रम में, कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने शनिवार को बड़वानी शहर में बनाए गए विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, बैठक व्यवस्था और कंट्रोल रूम का जायजा लिया और सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, एसडीएम श्री भूपेन्द्र रावत, नोडल व डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान और सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर भी उपस्थित थे। इस वर्ष जिले के कुल 3,845 अभ्यर्थी नीट परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं, जिनके लिए शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस बार एनटीए (NTA) द्वारा सभी सामान्य अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, जबकि प्रमाणित दिव्यांग अभ्यर्थियों को एक घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर ने बताया कि अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड का प्रिंट-आउट, पोस्ट कार्ड साइज फोटो और वैध पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आधार कार्ड) साथ लाना अनिवार्य है। परीक्षा हॉल में एनटीए द्वारा ही काला बॉल पॉइंट पेन प्रदान किया जाएगा। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। फ्रिस्किंग प्रक्रिया के दौरान छात्र का फिंगरप्रिंट और लाइव फोटो के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक फेल होता है, तो छात्र अंडरटेकिंग फॉर्म भरकर परीक्षा दे सकेंगे। तलाशी में समय बचाने के लिए कड़ा ड्रेस कोड भी लागू रहेगा, जिसके तहत परीक्षार्थियों को हल्के रंग के, आधी बाजू वाले कपड़े पहनने होंगे। बंद जूते पहनना पूरी तरह प्रतिबंधित है, केवल चप्पल या सैंडल ही मान्य होंगे। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर सामान रखने हेतु क्लॉक रूम और अभिभावकों के लिए प्रतीक्षा कक्ष भी बनाए गए हैं।3
- नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के विधानसभा अध्यक्ष चंदन सिंह ने खंडवा से मुंदी तक जाने वाली जर्जर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया है कि लगभग 35 किलोमीटर लंबा यह मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिसके कारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति से वाहन चालकों को आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, और जो सफर पहले कम समय में तय होता था, अब उसमें घंटों लग रहे हैं। स्थानीय नागरिक, किसान, विद्यार्थी और व्यापारी सभी इस मार्ग की खराब हालत से जूझ रहे हैं। एनएसयूआई नेता चंदन सिंह ने आरोप लगाया कि लंबे समय से इस सड़क के निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और न ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि खंडवा-मुंदी मार्ग का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को आवागमन में राहत मिल सके और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि जल्द ही इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा।1
- Post by Soun1