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जोधपुर से मिली एक बड़ी खबर के अनुसार, पुलिस ने भारी मात्रा में अफीम जब्त करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के पास से कुल 115 किलो अफीम बरामद की गई है।
Amrit Rajpurohit
जोधपुर से मिली एक बड़ी खबर के अनुसार, पुलिस ने भारी मात्रा में अफीम जब्त करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के पास से कुल 115 किलो अफीम बरामद की गई है।
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- NEET परीक्षा के दौरान योगी की पुलिस ने एक सराहनीय कार्य किया है। जानकारी के अनुसार, एक छात्रा गलती से किसी और परीक्षा केंद्र पर पहुँच गई थी। इस स्थिति में, पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे अपनी कार में बिठाकर सही परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया। इतना ही नहीं, छात्रा को देरी होने के बावजूद परीक्षा में बैठने दिया गया और उसने अपना एग्जाम सफलतापूर्वक दिया।1
- आज, 22 जून 2026 को चित्तौड़गढ़ स्थित श्रीसांवलिया सेठ के लाइव श्रंगार दर्शन उपलब्ध हैं, जिसके लिए 'जय हो!' का उद्घोष किया गया है। इसके अतिरिक्त, उपयोगकर्ताओं को सूचित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी खबरें देखने और उन्हें साझा करके कमाई करने हेतु शुरू ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।1
- महेश नवमी के अवसर पर निकलने वाली भव्य शोभायात्रा की तैयारियों में मातृशक्ति पूरे उत्साह के साथ जुटी हुई है। इस शोभायात्रा के लिए मातृशक्ति ने ढोल-नगाड़ों के साथ परेड अभ्यास किया, जिसमें उत्सव का माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।1
- एक टूर्नामेंट में नए प्लेयर बैजेस को लेकर खूब चर्चा हो रही है। ये बैजेस इस समय टूर्नामेंट से संबंधित बातचीत का मुख्य विषय बन गए हैं।1
- अफीम किसान संघ राजस्थान–मध्यप्रदेश के तत्वावधान में 21 जून 2026, रविवार को डूंगला तहसील क्षेत्र के अफीम किसान मुखियाओं की बैठक एलवा माता मंदिर, डूंगला में आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में अफीम किसानों ने डोडा चूरा नष्टीकरण आदेश, पिछले वर्षों के डोडा चूरा की मांग और पट्टे रोकने की धमकियों का कड़ा विरोध जताया। किसानों ने सरकार से उनके हित में तत्काल निर्णय लेने की मांग की, जबकि कपासन से आए प्रतिनिधिमंडल का किसानों ने उपरणा पहनाकर स्वागत किया। अफीम किसान संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी ने किसानों को संबोधित करते हुए आगामी आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने घोषणा की कि अफीम किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 23 जून 2026 को सुबह 10 बजे डूंगला से एक विशाल अफीम किसान जागृति रैली निकाली जाएगी। यह रैली डूंगला से शुरू होकर बड़ी सादड़ी, कानोड़, बिल्डर, वल्लभनगर, मावली, भोपाल सागर, कपासन, राशमी, भदेसर, निम्बाहेड़ा, बेगूं, गंगरार और भीलवाड़ा जैसे विभिन्न स्थानों से होते हुए 26 जून की सुबह चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट पहुंचेगी। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर किसान अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे, जिसके बाद वहीं पर महापड़ाव शुरू किया जाएगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि यह महापड़ाव तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी 10 सूत्रीय मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती। अफीम किसान संघ ने रैली और महापड़ाव में अधिक से अधिक किसानों, जनप्रतिनिधियों, विधायकों, सांसदों, व्यापारियों और आमजन से सहयोग एवं समर्थन की अपील की है। संघ के अनुसार, रैली के दौरान विभिन्न स्थानों पर किसानों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया जाएगा और महापड़ाव में अलग-अलग तहसीलों के किसान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शामिल होकर आंदोलन को मजबूत करेंगे।1
- दहेज मृत्यु के एक मामले को झूठा पाए जाने के बाद एक नया और गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है। मामले की जाँच के दौरान जब्त किए गए करोड़ों रुपये के जेवर आखिर कहाँ गए? इस सवाल के जवाब में अधिकारियों द्वारा “बंदर ले गए” कहने से जनता में भारी रोष और अविश्वास का माहौल है। इस हैरान कर देने वाले जवाब के बाद अब जनता पूछ रही है कि आखिर इतना शातिर कौन निकला—बंदर, या कोई और? करोड़ों की कीमत के जेवरों के गायब होने और ऐसा बेतुका जवाब मिलने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आम लोग मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। यह भी रेखांकित किया गया है कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है।1
- केन्द्रीय श्रम संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर सोमवार दोपहर करीब 12 बजे भारतीय ट्रेड यूनियन सीटू (CITU) सहित अन्य श्रमिक संगठनों के नेतृत्व में श्रमिकों ने मुखर्जी पार्क से एक विशाल रैली निकाली। यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहाँ श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार की श्रम नीतियों, निजीकरण और लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई, जिसके बाद प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को 12 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा गया। सभा को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड) लागू की हैं, जो मजदूरों के हितों के बजाय बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही हैं। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि बैंक, बीमा, रेलवे, एयरलाइंस, कोयला और स्टील जैसे सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर उन्हें देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है, जिसका देशभर के मजदूर और कर्मचारी संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। श्रमिक नेताओं ने कहा कि संगठित संघर्षों के कारण केंद्र सरकार को कई बार अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ा है, और वे आगे भी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। ज्ञापन में रखी गई 12 प्रमुख मांगों में मजदूर विरोधी बताए जा रहे चारों लेबर कोड को तत्काल वापस लेना, सरकारी संपत्तियों के निजीकरण पर रोक लगाना तथा नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त करना शामिल है। श्रमिकों ने संयुक्त किसान मोर्चा के छह सूत्रीय मांग पत्र को स्वीकार करने और कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, सभी श्रमिकों, जिनमें योजना कर्मी भी शामिल हैं, के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, सभी को रोजगार की गारंटी देने और बेरोजगारों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की अपील की गई। मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने के साथ-साथ शहरी बेरोजगारों को भी इस योजना के दायरे में लाने की मांग रखी गई। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण तथा उत्पाद शुल्क में कटौती की भी बात कही गई। ज्ञापन में ठेका एवं योजना कर्मियों को स्थायी करने, समान काम के लिए समान वेतन लागू करने, तथा वृद्धजन, विधवा एवं दिव्यांगजन पेंशन बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई। मजदूर आंदोलनों में पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप पर रोक लगाने और आठ घंटे कार्य दिवस को सख्ती से लागू कर ओवरटाइम का दोगुना भुगतान व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। श्रमिक नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।1
- विदिशा से सामने आई एक हृदय विदारक घटना ने कई लोगों को भावुक कर दिया है, जहाँ री-नीट परीक्षा देने आईं तीन छात्राएँ परीक्षा में शामिल नहीं हो पाईं। इन छात्राओं को बायोमेट्रिक संबंधी दिक्कतों और उनके प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) में हुई गलतियों के कारण परीक्षा से वंचित रहना पड़ा। इस घटना से जुड़ीं हर छात्रा के पीछे उनके माता-पिता भी मौजूद थे, जिनकी बरसों की उम्मीदें, त्याग और सपने इन परीक्षाओं से जुड़े थे। जिसने भी यह दुखद पल देखा, वह भावुक हो गया। इस पूरे वाकये को देखते हुए, “सिस्टम” की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, और यह पूछा गया है कि आखिर इसे जनता के हित में कब बनाया जाएगा।1