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ट्रंप ने सरेआम कहा- नरेंद्र मोदी मुझे 'सर' कहता है, मैं जब चाहूं उसका करियर खत्म कर सकता हूं। ⦿ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा इसलिए कह रहा है, क्योंकि उसके हाथ में Epstein फाइल हैं, जिसमें मोदी की पूरी सच्चाई है ⦿ ट्रंप ने अमेरिका में अडानी पर क्रिमिनल केस भी कर दिया है, क्योंकि वो जानता है कि यही BJP का फाइनेंशियल सिस्टम है अब हालात ये हैं- ट्रंप की मर्जी के बिना भारत किसी देश से तेल भी नहीं खरीद सकता। नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के हाथ में भारत की Energy security और डाटा थमा दिया है। ये नरेंद्र मोदी के Compromised होने का नतीजा है। : नेता विपक्ष श्री Rahul Gandhi 📍 असम

7 hrs ago
user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
Local News Reporter Mauganj, Rewa•
7 hrs ago

ट्रंप ने सरेआम कहा- नरेंद्र मोदी मुझे 'सर' कहता है, मैं जब चाहूं उसका करियर खत्म कर सकता हूं। ⦿ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा इसलिए कह रहा है, क्योंकि उसके हाथ में Epstein फाइल हैं, जिसमें मोदी की पूरी सच्चाई है ⦿ ट्रंप ने अमेरिका में अडानी पर क्रिमिनल केस भी कर दिया है, क्योंकि वो जानता है कि यही BJP का फाइनेंशियल सिस्टम है अब हालात ये हैं- ट्रंप की मर्जी के बिना भारत किसी देश से तेल भी नहीं खरीद सकता। नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के हाथ में भारत की Energy security और डाटा थमा दिया है। ये नरेंद्र मोदी के Compromised होने का नतीजा है। : नेता विपक्ष श्री Rahul Gandhi 📍 असम

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  • ट्रंप ने सरेआम कहा- नरेंद्र मोदी मुझे 'सर' कहता है, मैं जब चाहूं उसका करियर खत्म कर सकता हूं। ⦿ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा इसलिए कह रहा है, क्योंकि उसके हाथ में Epstein फाइल हैं, जिसमें मोदी की पूरी सच्चाई है ⦿ ट्रंप ने अमेरिका में अडानी पर क्रिमिनल केस भी कर दिया है, क्योंकि वो जानता है कि यही BJP का फाइनेंशियल सिस्टम है अब हालात ये हैं- ट्रंप की मर्जी के बिना भारत किसी देश से तेल भी नहीं खरीद सकता। नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के हाथ में भारत की Energy security और डाटा थमा दिया है। ये नरेंद्र मोदी के Compromised होने का नतीजा है। : नेता विपक्ष श्री Rahul Gandhi 📍 असम
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    ट्रंप ने सरेआम कहा- नरेंद्र मोदी मुझे 'सर' कहता है, मैं जब चाहूं उसका करियर खत्म कर सकता हूं।
⦿ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा इसलिए कह रहा है, क्योंकि उसके हाथ में Epstein फाइल हैं, जिसमें मोदी की पूरी सच्चाई है
⦿ ट्रंप ने अमेरिका में अडानी पर क्रिमिनल केस भी कर दिया है, क्योंकि वो जानता है कि यही BJP का फाइनेंशियल सिस्टम है
अब हालात ये हैं- 
ट्रंप की मर्जी के बिना भारत किसी देश से तेल भी नहीं खरीद सकता। नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के हाथ में भारत की Energy security और डाटा थमा दिया है।
ये नरेंद्र मोदी के Compromised होने का नतीजा है। 
: नेता विपक्ष श्री Rahul Gandhi 
📍 असम
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    Local News Reporter Mauganj, Rewa•
    7 hrs ago
  • Post by Sona Rohit
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    Post by Sona Rohit
    user_Sona Rohit
    Sona Rohit
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    31 min ago
  • Post by बुद्धसेन चौरसिया
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    Post by बुद्धसेन चौरसिया
    user_बुद्धसेन चौरसिया
    बुद्धसेन चौरसिया
    Photographer रायपुर - करचुलियां, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के सीधी जिले की इस पावन धरा को कभी "सिद्धभूमि" कहा जाता था। एक ऐसी भूमि जहाँ ऋषि-मुनियों की तपस्या की गूँज थी, जहाँ बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से थे और जहाँ सफेद बाघ 'मोहन' की दहाड़ ने पूरी दुनिया में जिले का नाम रौशन किया। लेकिन आज इसी सीधी जिले के सीने पर एक गहरा ज़ख्म है—"सूखा नदी"। वो नदी जिसे कभी 'जीवनदायिनी' कहा जाता था, आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नदी चुन्हा गांव से निकलकर सोन नदी की गोद में समा जाती है। सालों से एक अटूट मान्यता चली आ रही है कि इसके जल में स्नान करने से बच्चों का कुपोषण और एनीमिया जैसा 'सूखा रोग' जड़ से खत्म हो जाता है। लोग इसे आस्था की धार मानते हैं, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर तस्वीर कुछ और ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जो पानी कभी अमृत था, वो अब सीवेज और कचरे के मिलने से ज़हर बन चुका है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन गंदे पानी में मासूमों को नहलाना उन्हें फंगल इन्फेक्शन और बीमारियों के दलदल में धकेलने जैसा है। विडंबना देखिए, जो नदी आस्था का केंद्र थी, उसे विकास की भूख ने 'नाला' बना दिया। और इस बर्बादी की आग में घी डालने का काम किया 'करौंदिया उत्तर टोला' के उन भू-माफियाओं ने, जिन्होंने कानून की आँखों में धूल झोंककर सरकारी तंत्र के साथ ऐसा 'मधुर संबंध' बनाया कि रातों-रात भूगोल ही बदल दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिए कि राजस्व विभाग के पटवारी की कलम ने वो जादू दिखाया कि खसरा नंबर 385 से 389 के बीच का वो सार्वजनिक रास्ता, जहाँ से पीढ़ियों का आना-जाना था, उसे सरकारी नक्शे से ही साफ़ कर दिया गया। लाखों की 'सेवा राशि' के बदले आम आदमी के हक को चंद रसूखदारों के हाथों बेच दिया गया और प्रशासनिक तंत्र तमाशबीन बना रहा। यही नहीं, पूर्व कलेक्टर अभिषेक सिंह ने जिस नदी के लिए सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों का सपना बुना था, आज उसी सरकारी निवेश पर माफियाओं की गिद्ध दृष्टि जमी है। प्रशासन लंबे समय तक मौन रहा, लेकिन ये 'मौन व्रत' तब टूटा जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हंटर चला। सीधी के औचक निरीक्षण के दौरान जब मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक ढिलाई देखी, तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और तत्कालीन कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह एक सीधा संदेश था कि जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे। अब जिला प्रशासन की कमान नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा के हाथों में है और करौंदिया की जनता टकटकी लगाए देख रही है कि क्या 'विकास' के नाम पर आए ये नए साहब उस 'जादुई नक्शे' के पीछे छिपे पटवारी और रसूखदारों के असली चेहरों को बेनकाब कर पाएंगे? क्षेत्रीय विधायक रीती पाठक ने भी अब ललकार दिया है कि अतिक्रमणकारी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल आज भी वही खड़ा है कि क्या हमारी आस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी? क्या 'जीवनदायिनी' सूखा नदी फिर से अपनी कल-कल करती स्वच्छ धारा पा सकेगी, या फिर भू-माफियाओं के लालच में एक गंदा नाला बनकर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी? अब फैसला प्रशासन की इच्छाशक्ति और सीधी की जागरूक जनता को करना है।
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    मध्य प्रदेश के सीधी जिले की इस पावन धरा को कभी "सिद्धभूमि" कहा जाता था। एक ऐसी भूमि जहाँ ऋषि-मुनियों की तपस्या की गूँज थी, जहाँ बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से थे और जहाँ सफेद बाघ 'मोहन' की दहाड़ ने पूरी दुनिया में जिले का नाम रौशन किया। लेकिन आज इसी सीधी जिले के सीने पर एक गहरा ज़ख्म है—"सूखा नदी"। वो नदी जिसे कभी 'जीवनदायिनी' कहा जाता था, आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नदी चुन्हा गांव से निकलकर सोन नदी की गोद में समा जाती है। सालों से एक अटूट मान्यता चली आ रही है कि इसके जल में स्नान करने से बच्चों का कुपोषण और एनीमिया जैसा 'सूखा रोग' जड़ से खत्म हो जाता है। लोग इसे आस्था की धार मानते हैं, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर तस्वीर कुछ और ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जो पानी कभी अमृत था, वो अब सीवेज और कचरे के मिलने से ज़हर बन चुका है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन गंदे पानी में मासूमों को नहलाना उन्हें फंगल इन्फेक्शन और बीमारियों के दलदल में धकेलने जैसा है।
विडंबना देखिए, जो नदी आस्था का केंद्र थी, उसे विकास की भूख ने 'नाला' बना दिया। और इस बर्बादी की आग में घी डालने का काम किया 'करौंदिया उत्तर टोला' के उन भू-माफियाओं ने, जिन्होंने कानून की आँखों में धूल झोंककर सरकारी तंत्र के साथ ऐसा 'मधुर संबंध' बनाया कि रातों-रात भूगोल ही बदल दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिए कि राजस्व विभाग के पटवारी की कलम ने वो जादू दिखाया कि खसरा नंबर 385 से 389 के बीच का वो सार्वजनिक रास्ता, जहाँ से पीढ़ियों का आना-जाना था, उसे सरकारी नक्शे से ही साफ़ कर दिया गया। लाखों की 'सेवा राशि' के बदले आम आदमी के हक को चंद रसूखदारों के हाथों बेच दिया गया और प्रशासनिक तंत्र तमाशबीन बना रहा। यही नहीं, पूर्व कलेक्टर अभिषेक सिंह ने जिस नदी के लिए सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों का सपना बुना था, आज उसी सरकारी निवेश पर माफियाओं की गिद्ध दृष्टि जमी है। प्रशासन लंबे समय तक मौन रहा, लेकिन ये 'मौन व्रत' तब टूटा जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हंटर चला। सीधी के औचक निरीक्षण के दौरान जब मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक ढिलाई देखी, तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और तत्कालीन कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह एक सीधा संदेश था कि जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे।
अब जिला प्रशासन की कमान नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा के हाथों में है और करौंदिया की जनता टकटकी लगाए देख रही है कि क्या 'विकास' के नाम पर आए ये नए साहब उस 'जादुई नक्शे' के पीछे छिपे पटवारी और रसूखदारों के असली चेहरों को बेनकाब कर पाएंगे? क्षेत्रीय विधायक रीती पाठक ने भी अब ललकार दिया है कि अतिक्रमणकारी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल आज भी वही खड़ा है कि क्या हमारी आस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी? क्या 'जीवनदायिनी' सूखा नदी फिर से अपनी कल-कल करती स्वच्छ धारा पा सकेगी, या फिर भू-माफियाओं के लालच में एक गंदा नाला बनकर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी? अब फैसला प्रशासन की इच्छाशक्ति और सीधी की जागरूक जनता को करना है।
    user_पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    Local News Reporter गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • Post by Ishu kesharwani
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    Post by Ishu kesharwani
    user_Ishu kesharwani
    Ishu kesharwani
    त्योंथर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • कौंधियारा क्षेत्र के जारी क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 पर आज सोमवार दोपहर 12:00 के आसपास सेल टैक्स विभाग की सघन चेकिंग के दौरान एक ट्रक पकड़ा गया, जिसमें भारी मात्रा में सीमेंट शीट लदी थी। जांच के दौरान चालक आवश्यक दस्तावेज नहीं दिखा सका। प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने बताया कि वह प्रयागराज से रीवा (मध्य प्रदेश) माल लेकर जा रहा था। विभाग को संदेह है कि माल का परिवहन बिना वैध कागजी प्रक्रिया के किया जा रहा था। फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
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    कौंधियारा क्षेत्र के जारी क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 पर आज सोमवार दोपहर 12:00 के आसपास सेल टैक्स विभाग की सघन चेकिंग के दौरान एक ट्रक पकड़ा गया, जिसमें भारी मात्रा में सीमेंट शीट लदी थी। जांच के दौरान चालक आवश्यक दस्तावेज नहीं दिखा सका।
प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने बताया कि वह प्रयागराज से रीवा (मध्य प्रदेश) माल लेकर जा रहा था। विभाग को संदेह है कि माल का परिवहन बिना वैध कागजी प्रक्रिया के किया जा रहा था। फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
    user_Rohit Sharma
    Rohit Sharma
    निष्पक्षता से खबर को प्रकाशित करना मेरा बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • रीवा विकास की खुली पोल सूत्रों की माने तो रीवा शहर के बड़ी पुल और छोटी पुल का निर्माण कार्य करीब 10 पंचवर्षीय हो चुका है लेकिन पुल पर कहीं भी आज तक दरार नहीं आई है बाईपास बिहार नदी पर 5 साल पहले बनी करोड़ों की पुल पर दरार आने के कारण प्रशासन द्वारा इलाहाबाद बनारस आने जाने वाले वाहनों को डायवर्ट किया गया है लेकिन यह तो भ्रष्टाचार की पोल खोल कर सामने आ गई की कांग्रेस के कार्यकाल की पुल पर दरारें नहीं आई लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में बनी हुई नदी पुल पर दरार आ चुकी है भाजपा विधायक और सांसद तथा रीवा मंत्री राजेंद्र शुक्ला द्वारा विकास कार्य की बात कही जाती है लेकिन यहां तो आम जनता के सामने प्रशासन की पोल खुल गई है यह तो रामराज की सरकार है गुणवत्ता कितना प्रदेश में है यह तो आम जनता देख रही है
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    रीवा विकास की खुली पोल सूत्रों की माने तो रीवा शहर के बड़ी पुल और छोटी पुल का निर्माण कार्य करीब 10 पंचवर्षीय हो चुका है लेकिन पुल पर कहीं भी आज तक दरार नहीं आई है बाईपास बिहार नदी पर 5 साल पहले बनी करोड़ों की पुल पर दरार आने के कारण प्रशासन द्वारा इलाहाबाद बनारस आने जाने वाले वाहनों को डायवर्ट किया गया है लेकिन यह तो भ्रष्टाचार की पोल खोल कर सामने आ गई की कांग्रेस के कार्यकाल की पुल पर दरारें नहीं आई लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में बनी हुई नदी पुल पर दरार आ चुकी है भाजपा विधायक और सांसद तथा रीवा मंत्री राजेंद्र शुक्ला द्वारा विकास कार्य की बात कही जाती है लेकिन यहां तो आम जनता के सामने प्रशासन की पोल खुल गई है यह तो रामराज की सरकार है गुणवत्ता कितना प्रदेश में है यह तो आम जनता देख रही है
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • *पत्रकारों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कुछ कहा सुनिए,,,,*
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    *पत्रकारों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कुछ कहा सुनिए,,,,*
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    Local News Reporter Mauganj, Rewa•
    7 hrs ago
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