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उत्तर प्रदेश सरकार ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रदेश के 28 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) का तबादला कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण जनपदों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। राजधानी लखनऊ में देवेंद्र पांडे को नया DIOS नियुक्त किया गया है, जबकि अमिता सिंह को बाराबंकी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संतोष राय को प्रयागराज, अरविंद पाठक को हरदोई और जयकरण यादव को सहारनपुर का DIOS बनाया गया है। इसी क्रम में, कौस्तुभ सिंह को अंबेडकरनगर, प्रवीण तिवारी को कानपुर, देवेंद्र सिंह को प्रभारी DIOS जौनपुर, रविंद्र तोमर को प्रभारी DIOS आगरा तथा चंद्रशेखर को नोएडा का DIOS नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, डीपी सिंह को गाजियाबाद, मोदिता पांडे को प्रभारी DIOS फिरोजाबाद, मनोज मिश्रा को बलिया, बाबूलाल मौर्य को प्रभारी DIOS कौशांबी, विजय कुमार को प्रभारी DIOS पीलीभीत, जगदीश शुक्ला को मेरठ, राजवीर दिवाकर को प्रभारी DIOS कासगंज तथा धर्मेंद्र सिंह को चंदौली का DIOS बनाया गया है। शिक्षा विभाग में हुए इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल को व्यवस्था में सुधार लाने और कार्यों की गति बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह तबादला सूची विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

1 hr ago
user_Amarjeet Panday
Amarjeet Panday
Security Guard सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

उत्तर प्रदेश सरकार ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रदेश के 28 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) का तबादला कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण जनपदों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। राजधानी लखनऊ में देवेंद्र पांडे को नया DIOS नियुक्त किया गया है, जबकि अमिता सिंह को बाराबंकी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संतोष राय को प्रयागराज, अरविंद पाठक को हरदोई और जयकरण यादव को सहारनपुर का DIOS बनाया गया है। इसी क्रम में, कौस्तुभ सिंह को अंबेडकरनगर, प्रवीण तिवारी को कानपुर, देवेंद्र सिंह को प्रभारी DIOS जौनपुर, रविंद्र तोमर को प्रभारी DIOS आगरा तथा चंद्रशेखर को नोएडा का DIOS नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, डीपी सिंह को गाजियाबाद, मोदिता पांडे को प्रभारी DIOS फिरोजाबाद, मनोज मिश्रा को बलिया, बाबूलाल मौर्य को प्रभारी DIOS कौशांबी, विजय कुमार को प्रभारी DIOS पीलीभीत, जगदीश शुक्ला को मेरठ, राजवीर दिवाकर को प्रभारी DIOS कासगंज तथा धर्मेंद्र सिंह को चंदौली का DIOS बनाया गया है। शिक्षा विभाग में हुए इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल को व्यवस्था में सुधार लाने और कार्यों की गति बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह तबादला सूची विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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  • एक ओर जहाँ आधुनिकता के इस दौर में लोग लकड़ी, स्टील और प्लास्टिक से बने तैयार फर्नीचर को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं चारपाई बुनने की पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे समय में भी कुछ बुजुर्ग कारीगर अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इस पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हाथ से रस्सियों को एक-एक कर मज़बूत तरीके से बुनना आसान काम नहीं है, इसमें वर्षों का अनुभव, धैर्य और अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है। आज की युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कार्य से दूर होती जा रही है, जिससे यह कला संकट में दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गाँवों में लगभग हर घर में चारपाई होती थी और कारीगरों की अच्छी माँग रहती थी, लेकिन आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते चलन ने इस व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके बावजूद, कुछ समर्पित कारीगर आज भी अपने पुश्तैनी हुनर को बचाने के लिए जुटे हुए हैं। चारपाई बुनने की यह कला केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की एक महत्वपूर्ण पहचान भी है, जिसे संरक्षित किया जाना बेहद आवश्यक है।
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    एक ओर जहाँ आधुनिकता के इस दौर में लोग लकड़ी, स्टील और प्लास्टिक से बने तैयार फर्नीचर को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं चारपाई बुनने की पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे समय में भी कुछ बुजुर्ग कारीगर अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इस पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हाथ से रस्सियों को एक-एक कर मज़बूत तरीके से बुनना आसान काम नहीं है, इसमें वर्षों का अनुभव, धैर्य और अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है।

आज की युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कार्य से दूर होती जा रही है, जिससे यह कला संकट में दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गाँवों में लगभग हर घर में चारपाई होती थी और कारीगरों की अच्छी माँग रहती थी, लेकिन आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते चलन ने इस व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है।

इसके बावजूद, कुछ समर्पित कारीगर आज भी अपने पुश्तैनी हुनर को बचाने के लिए जुटे हुए हैं। चारपाई बुनने की यह कला केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की एक महत्वपूर्ण पहचान भी है, जिसे संरक्षित किया जाना बेहद आवश्यक है।
    user_दीपक गुप्ता रिपोर्टर
    दीपक गुप्ता रिपोर्टर
    जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • हरदोई के गोपामऊ से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने एक खुले मंच से कहा कि चुनाव विकास से नहीं, बल्कि तिकड़म से जीते जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगला चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सहित हर संभव तिकड़म का प्रयोग किया जाना चाहिए। हालांकि, इस बात की पुष्टि मूल पोस्ट करने वाले द्वारा नहीं की गई है, लेकिन वीडियो में विधायक का यह बयान साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
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    हरदोई के गोपामऊ से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने एक खुले मंच से कहा कि चुनाव विकास से नहीं, बल्कि तिकड़म से जीते जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगला चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सहित हर संभव तिकड़म का प्रयोग किया जाना चाहिए।

हालांकि, इस बात की पुष्टि मूल पोस्ट करने वाले द्वारा नहीं की गई है, लेकिन वीडियो में विधायक का यह बयान साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
    user_Ashok verma
    Ashok verma
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • अमेठी के कोतवाली क्षेत्र स्थित कुशीताली गांव में घर के सामने खड़ंजा निर्माण को लेकर चाचा और भतीजे के बीच विवाद सामने आया है। एक पक्ष ने जबरन जमीन पर कब्जे और महिलाओं के साथ अभद्रता का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह कार्य केवल आवागमन की सुविधा के लिए कराया जा रहा है। गांव निवासी शिक्षक अरविंद कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह उनके घर के सामने कुछ लोग मुंह पर गमछा बांधकर पहुंचे और जबरन खड़ंजा लगाने लगे। उस समय वह जनगणना ड्यूटी पर घर से बाहर थे। जब घर पर मौजूद महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह उनके घर के सामने का रास्ता है और दूसरा पक्ष कब्जे की नीयत से निर्माण करा रहा था। इस संबंध में अमेठी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, दूसरे पक्ष के प्रशांत पांडेय ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता उनके सगे चाचा हैं और दोनों परिवार अगल-बगल रहते हैं। उन्होंने बताया कि जिस जगह खड़ंजा लगाया गया है, वहां लंबे समय से जलभराव की समस्या है, जिससे बरसात और अन्य दिनों में भी ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कत होती है। प्रशांत पांडेय के अनुसार, इस मार्ग का निर्माण पूर्व विधायक गायत्री प्रसाद प्रजापति के कार्यकाल में विधायक निधि से आरसीसी सड़क के रूप में हुआ था, लेकिन एक हिस्से में पानी भरने लगा था। इसलिए सिर्फ जलभराव वाले हिस्से पर ही खड़ंजा लगाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण का उद्देश्य किसी की भूमि पर कब्जा करना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को जलभराव से राहत दिलाना और आवागमन को सुगम बनाना है। प्रशांत पांडेय ने अपने चाचा के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मामले को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दिया जा रहा है। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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    अमेठी के कोतवाली क्षेत्र स्थित कुशीताली गांव में घर के सामने खड़ंजा निर्माण को लेकर चाचा और भतीजे के बीच विवाद सामने आया है। एक पक्ष ने जबरन जमीन पर कब्जे और महिलाओं के साथ अभद्रता का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह कार्य केवल आवागमन की सुविधा के लिए कराया जा रहा है।

गांव निवासी शिक्षक अरविंद कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह उनके घर के सामने कुछ लोग मुंह पर गमछा बांधकर पहुंचे और जबरन खड़ंजा लगाने लगे। उस समय वह जनगणना ड्यूटी पर घर से बाहर थे। जब घर पर मौजूद महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह उनके घर के सामने का रास्ता है और दूसरा पक्ष कब्जे की नीयत से निर्माण करा रहा था। इस संबंध में अमेठी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है।

वहीं, दूसरे पक्ष के प्रशांत पांडेय ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता उनके सगे चाचा हैं और दोनों परिवार अगल-बगल रहते हैं। उन्होंने बताया कि जिस जगह खड़ंजा लगाया गया है, वहां लंबे समय से जलभराव की समस्या है, जिससे बरसात और अन्य दिनों में भी ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कत होती है। प्रशांत पांडेय के अनुसार, इस मार्ग का निर्माण पूर्व विधायक गायत्री प्रसाद प्रजापति के कार्यकाल में विधायक निधि से आरसीसी सड़क के रूप में हुआ था, लेकिन एक हिस्से में पानी भरने लगा था। इसलिए सिर्फ जलभराव वाले हिस्से पर ही खड़ंजा लगाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण का उद्देश्य किसी की भूमि पर कब्जा करना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को जलभराव से राहत दिलाना और आवागमन को सुगम बनाना है। प्रशांत पांडेय ने अपने चाचा के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मामले को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दिया जा रहा है।

घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
    user_Aditya Mishra
    Aditya Mishra
    पत्रकार अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • दशाश्वमेध घाट पर आयोजित गंगा आरती में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान दशाश्वमेध पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए मुस्तैदी से काम किया, ताकि व्यवस्था बनी रहे।
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    दशाश्वमेध घाट पर आयोजित गंगा आरती में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान दशाश्वमेध पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए मुस्तैदी से काम किया, ताकि व्यवस्था बनी रहे।
    user_Pawan Kumar Tiwari
    Pawan Kumar Tiwari
    Local News Reporter अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • डॉक्टर साहब की "अदृश्य चिकित्सा"! अस्पताल में सिर्फ नाम, इलाज फार्मासिस्ट के के लिए नहीं, बल्कि 8 महीने से डॉक्टर के दर्शन के लिए धैर्य खो रहे हैं! ​📌 मुख्य बातें: ​बरसाती सूरज जैसे डॉक्टर: 8 महीने पहले ज्वाइनिंग के दिन डॉक्टर साहब ऐसे आए और गायब हुए, जैसे बरसात में कुछ पलों के लिए सूरज दिखता है। ​फार्मासिस्ट के कंधे पर बोझ: डॉक्टर साहब सरकारी कागजों और रजिस्टर में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर पूरा अस्पताल अकेले फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। ​ग्रामीणों का तीखा सवाल: जब आपातकाल में डॉक्टर की जरूरत पड़े, तो मरीज किसे ढूंढे—अस्पताल के खाली केबिन को या सरकारी फाइलों में दबे उनके नाम को? डॉक्टर साहब की "अदृश्य चिकित्सा"! अस्पताल में सिर्फ नाम, इलाज फार्मासिस्ट के भरोसे ​अम्बेडकरनगर (कहरा सलेमपुर): कहते हैं आयुर्वेद में बीमारी ठीक होने में धैर्य रखना पड़ता है, लेकिन कहरा सलेमपुर आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीज बीमारी के लिए नहीं, बल्कि 8 महीने से डॉक्टर के दर्शन के लिए धैर्य खो रहे हैं! ​📌 मुख्य बातें: ​बरसाती सूरज जैसे डॉक्टर: 8 महीने पहले ज्वाइनिंग के दिन डॉक्टर साहब ऐसे आए और गायब हुए, जैसे बरसात में कुछ पलों के लिए सूरज दिखता है। ​फार्मासिस्ट के कंधे पर बोझ: डॉक्टर साहब सरकारी कागजों और रजिस्टर में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर पूरा अस्पताल अकेले फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। ​ग्रामीणों का तीखा सवाल: जब आपातकाल में डॉक्टर की जरूरत पड़े, तो मरीज किसे ढूंढे—अस्पताल के खाली केबिन को या सरकारी फाइलों में दबे उनके नाम को?
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    डॉक्टर साहब की "अदृश्य चिकित्सा"! अस्पताल में सिर्फ नाम, इलाज फार्मासिस्ट के  के लिए नहीं, बल्कि 8 महीने से डॉक्टर के दर्शन के लिए धैर्य खो रहे हैं!

​📌 मुख्य बातें:

​बरसाती सूरज जैसे डॉक्टर: 8 महीने पहले ज्वाइनिंग के दिन डॉक्टर साहब ऐसे आए और गायब हुए, जैसे बरसात में कुछ पलों के लिए सूरज दिखता है।

​फार्मासिस्ट के कंधे पर बोझ: डॉक्टर साहब सरकारी कागजों और रजिस्टर में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर पूरा अस्पताल अकेले फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है।

​ग्रामीणों का तीखा सवाल: जब आपातकाल में डॉक्टर की जरूरत पड़े, तो मरीज किसे ढूंढे—अस्पताल के खाली केबिन को या सरकारी फाइलों में दबे उनके नाम को?


डॉक्टर साहब की "अदृश्य चिकित्सा"! अस्पताल में सिर्फ नाम, इलाज फार्मासिस्ट के भरोसे
​अम्बेडकरनगर (कहरा सलेमपुर): कहते हैं आयुर्वेद में बीमारी ठीक होने में धैर्य रखना पड़ता है, लेकिन कहरा सलेमपुर आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीज बीमारी के लिए नहीं, बल्कि 8 महीने से डॉक्टर के दर्शन के लिए धैर्य खो रहे हैं!
​📌 मुख्य बातें:
​बरसाती सूरज जैसे डॉक्टर: 8 महीने पहले ज्वाइनिंग के दिन डॉक्टर साहब ऐसे आए और गायब हुए, जैसे बरसात में कुछ पलों के लिए सूरज दिखता है।
​फार्मासिस्ट के कंधे पर बोझ: डॉक्टर साहब सरकारी कागजों और रजिस्टर में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर पूरा अस्पताल अकेले फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है।
​ग्रामीणों का तीखा सवाल: जब आपातकाल में डॉक्टर की जरूरत पड़े, तो मरीज किसे ढूंढे—अस्पताल के खाली केबिन को या सरकारी फाइलों में दबे उनके नाम को?
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Farmer जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में पुलिस पूछताछ के दौरान एक बेहद खौफनाक खुलासा हुआ है, जिसने हर किसी की रूह कंपा दी है। पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद पानी के लिए तड़प रहे मुख्य आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए चौंकाने वाले सच उगले हैं। पूछताछ में आरोपी विराज ने बताया कि वह मासूम आरव को सीधे गोली से उड़ाने की साजिश रचकर बदायूं से फ़िरोज़ाबाद आया था। वह पूरी तैयारी के साथ आया था, लेकिन ऐन वक्त पर उसका इरादा बदल गया। कातिल विराज ने खुलासा किया कि दिन के उजाले में गोली चलने की आवाज से लोगों के इकट्ठा होने और पकड़े जाने का उसे गहरा डर था। इसी डर की वजह से उसने ऐन मौके पर गोली मारने का इरादा बदल दिया। इसके बाद, वह मासूम को एक सुनसान गली में ले गया, जहां कोई देखने वाला नहीं था। वहां उसने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए डेढ़ साल के बच्चे को सड़क पर कई बार पटक-पटक कर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड में मासूम शिकार डेढ़ साल का आरव था, जिसे बदायूं के रहने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने मारा। पुलिस एनकाउंटर में आरोपी घायल हुआ, जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह एनकाउंटर के बाद पानी के लिए तड़पता दिखाई दे रहा था। इस हत्याकांड का पूरा सच अब सबके सामने आ चुका है और पुलिस आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
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    उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में पुलिस पूछताछ के दौरान एक बेहद खौफनाक खुलासा हुआ है, जिसने हर किसी की रूह कंपा दी है। पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद पानी के लिए तड़प रहे मुख्य आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए चौंकाने वाले सच उगले हैं।

पूछताछ में आरोपी विराज ने बताया कि वह मासूम आरव को सीधे गोली से उड़ाने की साजिश रचकर बदायूं से फ़िरोज़ाबाद आया था। वह पूरी तैयारी के साथ आया था, लेकिन ऐन वक्त पर उसका इरादा बदल गया। कातिल विराज ने खुलासा किया कि दिन के उजाले में गोली चलने की आवाज से लोगों के इकट्ठा होने और पकड़े जाने का उसे गहरा डर था। इसी डर की वजह से उसने ऐन मौके पर गोली मारने का इरादा बदल दिया। इसके बाद, वह मासूम को एक सुनसान गली में ले गया, जहां कोई देखने वाला नहीं था। वहां उसने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए डेढ़ साल के बच्चे को सड़क पर कई बार पटक-पटक कर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।

इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड में मासूम शिकार डेढ़ साल का आरव था, जिसे बदायूं के रहने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने मारा। पुलिस एनकाउंटर में आरोपी घायल हुआ, जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह एनकाउंटर के बाद पानी के लिए तड़पता दिखाई दे रहा था। इस हत्याकांड का पूरा सच अब सबके सामने आ चुका है और पुलिस आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Farmer जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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