अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा की घोर लापरवाही के कारण शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सतना की बी.एससी. फाइनल ईयर की नियमित छात्रा आंचल सिंह, पिता सूरज पाल सिंह, जो कैलाशपुर तहसील मझगवां की निवासी हैं, मानसिक रूप से परेशान हैं और उनका भविष्य अधर में लटक गया है। छात्रा को बी.एससी. द्वितीय वर्ष की परीक्षा देने के बाद भी अनुपस्थित घोषित कर दिया गया है, जिससे वह अपनी अंकसूची के लिए भटकने को मजबूर हैं। छात्रा आंचल सिंह का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2024 में आयोजित बी.एससी. द्वितीय वर्ष (मेजर-1 गणित) की परीक्षा पूरी निष्ठा के साथ दी थी और उनकी उत्तर पुस्तिका का क्रमांक 382361 है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मनमाने ढंग से उन्हें परीक्षा में अनुपस्थित दर्शा दिया गया, जिसके कारण उनकी द्वितीय वर्ष की अंकसूची जारी नहीं हो सकी है। इस गंभीर विसंगति को सुधारने के लिए छात्रा ने पूर्व में महाविद्यालय के प्राचार्य को आवेदन सौंपा था, और रीवा विश्वविद्यालय में मुख्य उत्तर पुस्तिका की खोजबीन भी कराई गई, लेकिन वहां भी कॉपी का कोई सुराग नहीं मिल सका। कॉलेज के आंतरिक मूल्यांकन रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति और परीक्षा की मुख्य उपस्थिति पत्रक में रोल नंबर 2215805089 के आगे उनके हस्ताक्षर होने के पुख्ता प्रमाण मौजूद होने के बाद भी विश्वविद्यालय स्तर पर उन्हें अनुपस्थित दर्शाया जा रहा है। थक-हारकर पीड़ित छात्रा ने अब इस मामले में न्याय पाने और अपनी अंकसूची जारी करवाने के लिए जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट सतना के समक्ष जनसुनवाई में आवेदन देकर उचित वैधानिक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा की घोर लापरवाही के कारण शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सतना की बी.एससी. फाइनल ईयर की नियमित छात्रा आंचल सिंह, पिता सूरज पाल सिंह, जो कैलाशपुर तहसील मझगवां की निवासी हैं, मानसिक रूप से परेशान हैं और उनका भविष्य अधर में लटक गया है। छात्रा को बी.एससी. द्वितीय वर्ष की परीक्षा देने के बाद भी अनुपस्थित घोषित कर दिया गया है, जिससे वह अपनी अंकसूची के लिए भटकने को मजबूर हैं। छात्रा आंचल सिंह का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2024 में आयोजित बी.एससी. द्वितीय वर्ष (मेजर-1 गणित) की परीक्षा पूरी निष्ठा के साथ दी थी और उनकी उत्तर पुस्तिका का क्रमांक 382361 है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मनमाने ढंग से उन्हें परीक्षा में अनुपस्थित दर्शा दिया गया, जिसके कारण उनकी द्वितीय वर्ष की अंकसूची जारी नहीं हो सकी है। इस गंभीर विसंगति को सुधारने के लिए छात्रा ने पूर्व में महाविद्यालय के प्राचार्य को आवेदन सौंपा था, और रीवा विश्वविद्यालय में मुख्य उत्तर पुस्तिका की खोजबीन भी कराई गई, लेकिन वहां भी कॉपी का कोई सुराग नहीं मिल सका। कॉलेज के आंतरिक मूल्यांकन रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति और परीक्षा की मुख्य उपस्थिति पत्रक में रोल नंबर 2215805089 के आगे उनके हस्ताक्षर होने के पुख्ता प्रमाण मौजूद होने के बाद भी विश्वविद्यालय स्तर पर उन्हें अनुपस्थित दर्शाया जा रहा है। थक-हारकर पीड़ित छात्रा ने अब इस मामले में न्याय पाने और अपनी अंकसूची जारी करवाने के लिए जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट सतना के समक्ष जनसुनवाई में आवेदन देकर उचित वैधानिक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
- सोशल मीडिया पर कानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पुलिसकर्मी दो युवकों को पकड़े हुए दिख रहे हैं, जिन पर पुलिस ने मोबाइल चोरी में शामिल होने का आरोप लगाया है। वीडियो के अनुसार, पुलिसकर्मी कथित तौर पर लड़कों को एक मोबाइल का डिब्बा पकड़ने के लिए दे रहे हैं, जिस पर एक युवक निडर होकर कहता है कि 'चोरी नहीं की तो डिब्बा क्यों पकड़ूं?' युवक तर्क दे रहा है कि अगर उसने चोरी नहीं की है, तो उसे पुलिस के आरोपों के सामने झुकने या सबूत के तौर पर डिब्बा पकड़ने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है। यह वीडियो इंटरनेट पर व्यापक बहस का विषय बन गया है, जहां कुछ लोग इसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर तंज के रूप में देख रहे हैं, वहीं आम जनता पुलिस की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठा रही है। #KanpurPolice, #ViralVideo, #UPPolice, #Justice, #CrimeNews जैसे हैशटैग्स के साथ यह वीडियो चर्चा में है, और लोग इस बात की मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से इन युवकों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या किसी निर्दोष को इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या जबरन सबूत थमाना सही है?1
- पन्ना जिले के ककरहटी नाला पार स्थित गर्ग परिवार द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आज अंतिम दिन था। इस पावन अवसर पर, सैकड़ों की संख्या में भक्तजनों ने भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कथा के समापन के बाद, कल कन्या भोज के साथ एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।1
- पवई विधानसभा क्षेत्र के बनौली से दनवारा मोड़ तक का व्यस्त मार्ग क्षेत्र के 'विकास मॉडल' की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसे देखकर राहगीर प्रतिदिन इस 'विकास' को महसूस कर रहे हैं। सड़कों की इस कथित 'शानदार' स्थिति पर जनता सवाल उठा रही है, पूछ रही है कि जब सड़कें ऐसी हैं, तो आखिर और किस तरह के विकास की आवश्यकता है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मैहर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जिला प्रशासन के तत्वावधान में एक भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः 6:15 बजे से सुबह 8:00 बजे तक चला, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों और नगरवासियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद गणेश सिंह, मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, भाजपा जिला अध्यक्ष कमलेश सुहाने, मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी, एसडीएम दिव्या पटेल, एडिशनल एसपी चंचल नागर, तहसीलदार जितेंद्र पटेल और नगर पालिका सीएमओ प्रिंस अग्रवाल सहित सांसद प्रतिनिधि संतोष सोनी, कुलदीप तिवारी, मंजू पांडे, अम्बुज द्विवेदी, सत्य भानपटेल, इंद्रजीत सिंह मैनी, सन्नी जायसवाल, मंजू सर तथा बड़ी संख्या में अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। वक्ताओं ने योग को भारत की प्राचीन संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला, जिसके बाद सभी ने नियमित योग करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण भी किया गया। सांसद, विधायक और मैहर कलेक्टर ने स्वयं पौधारोपण कर लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। पूरे आयोजन में विद्यालय परिवार, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे, जहाँ उत्साह, अनुशासन और जनभागीदारी का उत्कृष्ट वातावरण देखने को मिला।4
- मैहर विधायक श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी ने एक अनूठी पहल की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य मैहर में होने वाले हर काम में पूरी पारदर्शिता लाना है।1
- मैहर देहात थाना क्षेत्र के ग्राम भटगावां में 'गुंडाराज' जारी है। इसी कारण महिपाल दहिया के पूरे परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है। यह गंभीर स्थिति देहात थाना के अंतर्गत आने वाले भटगावां गांव में बनी हुई है, जहां न्याय की प्रतीक्षा अब भी जारी है।2
- मैहर जिले के अमरपाटन में संचालित मानसी गैस एजेंसी पर हाल ही में हुई प्रशासनिक कार्रवाई और FIR दर्ज होने के बाद स्थानीय गैस उपभोक्ताओं की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इस सख्त कार्रवाई के चलते अमरपाटन के हजारों गैस कनेक्शनों को यहाँ से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एजेंसी बंद होने के कारण अब आम लोगों को घरेलू गैस सिलेंडर भरवाने के लिए भीषण गर्मी और व्यस्तता के बीच 25 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। अमरपाटन और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आए परेशान उपभोक्ताओं ने बताया कि एजेंसी संचालक की गलती या प्रशासनिक कमियों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की गुहार लगाई है, ताकि इस मामले का पूरी तरह समाधान होने तक स्थानीय स्तर पर ही गैस सिलेंडरों का वितरण सुनिश्चित किया जा सके और लोगों को अनावश्यक भटकना न पड़े। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इतनी दूर जाने से न केवल उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन जनता की इस बेहद जरूरी मांग पर क्या कदम उठाता है।1
- मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक सरकारी तालाब के गहराकरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो इंटरव्यू में, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि "सरकारी तालाब" के नाम पर निजी स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि तालाब से खोदी गई मिट्टी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे तालाब के जल संवर्धन और जनहित के मूल उद्देश्य का दुरुपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए सरकारी तालाब के इस इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति जताई है। इंटरव्यू में यह भी बताया गया है कि तालाब की खुदाई में लगी जेसीबी का भुगतान सरकारी प्रक्रिया के बजाय निजी तौर पर किया जा रहा है, जो इस पूरे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। स्थानीय निवासियों और इंटरव्यू देने वाले व्यक्ति ने इस पूरे मामले के मूल्यांकन की मांग की है, ताकि इसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले की गहन जांच हो और यदि तालाब की खुदाई की जा रही है, तो वह केवल नियमानुसार और जनहित में ही होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।1