चित्तौड़गढ़ जिले के चिकारड़ा क्षेत्र में प्री-मानसून की अच्छी शुरुआत के बाद लंबे समय से बारिश न होने के कारण किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। जहां अगेती बुवाई करने वाले किसानों की मक्का, सोयाबीन और मूंगफली की फसलें अच्छी स्थिति में हैं और निराई-गुड़ाई की अवस्था तक पहुंच चुकी हैं, वहीं मानसून के इंतजार में देरी से बुवाई करने वाले किसानों की फसलें पर्याप्त नमी के अभाव में संघर्ष कर रही हैं। कई किसानों को तो पानी की कमी के चलते दोबारा बुवाई करनी पड़ी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और खेती की लागत भी बढ़ गई है। इस संकट के बीच किसान दिन-रात मेहनत कर अपनी फसलों को बचाने और बेहतर उत्पादन की उम्मीद बनाए रखने में जुटे हुए हैं। बारिश के इस लंबे अंतराल का उपयोग करते हुए खेतों से खरपतवार हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। आधुनिक कृषि मशीनों की भारी मांग और कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसान बैलों से चलने वाले पारंपरिक कुलपे और अन्य देसी कृषि उपकरणों का सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा, जिन किसानों के पास कुएं या अन्य जलस्रोत उपलब्ध हैं, वे स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से फसलों की सिंचाई कर उन्हें जीवनदान देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही पौधों की बढ़वार बनाए रखने के लिए यूरिया व अन्य आवश्यक उर्वरकों का छिड़काव भी किया जा रहा है। किसान शंकरलाल और उदयलाल के अनुसार, क्षेत्र में मक्का, सोयाबीन और मूंगफली की करीब 80 प्रतिशत फसलें फिलहाल अच्छी स्थिति में दिखाई दे रही हैं, लेकिन यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि रविवार को सुबह से ही आसमान में बादलों का आना-जाना लगा रहा और तेज हवाओं के साथ उमस भरा मौसम बना रहा, लेकिन संतोषजनक बारिश नहीं हुई। पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर ग्रामीण किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए इंद्रदेव से मेहरबानी की गुहार लगा रहे हैं ताकि उनकी मेहनत रंग ला सके।
चित्तौड़गढ़ जिले के चिकारड़ा क्षेत्र में प्री-मानसून की अच्छी शुरुआत के बाद लंबे समय से बारिश न होने के कारण किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। जहां अगेती बुवाई करने वाले किसानों की मक्का, सोयाबीन और मूंगफली की फसलें अच्छी स्थिति में हैं और निराई-गुड़ाई की अवस्था तक पहुंच चुकी हैं, वहीं मानसून के इंतजार में देरी से बुवाई करने वाले किसानों की फसलें पर्याप्त नमी के अभाव में संघर्ष कर रही हैं। कई किसानों को तो पानी की कमी के
चलते दोबारा बुवाई करनी पड़ी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और खेती की लागत भी बढ़ गई है। इस संकट के बीच किसान दिन-रात मेहनत कर अपनी फसलों को बचाने और बेहतर उत्पादन की उम्मीद बनाए रखने में जुटे हुए हैं। बारिश के इस लंबे अंतराल का उपयोग करते हुए खेतों से खरपतवार हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। आधुनिक कृषि मशीनों की भारी मांग और कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसान बैलों से चलने
वाले पारंपरिक कुलपे और अन्य देसी कृषि उपकरणों का सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा, जिन किसानों के पास कुएं या अन्य जलस्रोत उपलब्ध हैं, वे स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से फसलों की सिंचाई कर उन्हें जीवनदान देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही पौधों की बढ़वार बनाए रखने के लिए यूरिया व अन्य आवश्यक उर्वरकों का छिड़काव भी किया जा रहा है। किसान शंकरलाल और उदयलाल के अनुसार, क्षेत्र में मक्का, सोयाबीन और मूंगफली की करीब 80 प्रतिशत फसलें फिलहाल अच्छी
स्थिति में दिखाई दे रही हैं, लेकिन यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि रविवार को सुबह से ही आसमान में बादलों का आना-जाना लगा रहा और तेज हवाओं के साथ उमस भरा मौसम बना रहा, लेकिन संतोषजनक बारिश नहीं हुई। पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर ग्रामीण किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए इंद्रदेव से मेहरबानी की गुहार लगा रहे हैं ताकि उनकी मेहनत रंग ला सके।
- चित्तौड़गढ़ जिले के चिकारड़ा क्षेत्र में प्री-मानसून की अच्छी शुरुआत के बाद लंबे समय से बारिश न होने के कारण किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। जहां अगेती बुवाई करने वाले किसानों की मक्का, सोयाबीन और मूंगफली की फसलें अच्छी स्थिति में हैं और निराई-गुड़ाई की अवस्था तक पहुंच चुकी हैं, वहीं मानसून के इंतजार में देरी से बुवाई करने वाले किसानों की फसलें पर्याप्त नमी के अभाव में संघर्ष कर रही हैं। कई किसानों को तो पानी की कमी के चलते दोबारा बुवाई करनी पड़ी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और खेती की लागत भी बढ़ गई है। इस संकट के बीच किसान दिन-रात मेहनत कर अपनी फसलों को बचाने और बेहतर उत्पादन की उम्मीद बनाए रखने में जुटे हुए हैं। बारिश के इस लंबे अंतराल का उपयोग करते हुए खेतों से खरपतवार हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। आधुनिक कृषि मशीनों की भारी मांग और कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसान बैलों से चलने वाले पारंपरिक कुलपे और अन्य देसी कृषि उपकरणों का सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा, जिन किसानों के पास कुएं या अन्य जलस्रोत उपलब्ध हैं, वे स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से फसलों की सिंचाई कर उन्हें जीवनदान देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही पौधों की बढ़वार बनाए रखने के लिए यूरिया व अन्य आवश्यक उर्वरकों का छिड़काव भी किया जा रहा है। किसान शंकरलाल और उदयलाल के अनुसार, क्षेत्र में मक्का, सोयाबीन और मूंगफली की करीब 80 प्रतिशत फसलें फिलहाल अच्छी स्थिति में दिखाई दे रही हैं, लेकिन यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि रविवार को सुबह से ही आसमान में बादलों का आना-जाना लगा रहा और तेज हवाओं के साथ उमस भरा मौसम बना रहा, लेकिन संतोषजनक बारिश नहीं हुई। पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर ग्रामीण किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए इंद्रदेव से मेहरबानी की गुहार लगा रहे हैं ताकि उनकी मेहनत रंग ला सके।4
- चितौड़गढ़ के गांधी नगर में आकाशवाणी चौराहा स्थित आयुष हॉस्पिटल से एक सफल इलाज की कहानी खुद की जुबानी साझा की गई है। इसमें अत्यधिक दर्द से पीड़ित रहे व्यक्ति ने अपने सफल उपचार के पूरे अनुभव को खुद बयां किया है।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड क्षेत्र में पीपलवास ग्राम पंचायत मुख्यालय स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के मुख्य द्वार पर ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं ने तालाबंदी कर दी है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई स्थानांतरण सूची के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और छात्रों ने स्कूल के शिक्षकों को भी परिसर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इस स्कूल में कक्षा 1 से 12 तक कुल 350 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इस वर्ष यहां कार्यरत तीन लेक्चरर और तीन सेकंड ग्रेड अध्यापकों का तबादला हो गया है, जबकि एक सेकंड ग्रेड अध्यापक का पद पहले से ही रिक्त था। इस तरह विद्यालय में कुल सात शिक्षकों के पद खाली हो गए हैं, जिससे शैक्षणिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके अतिरिक्त भदेसर उपखंड मुख्यालय के मॉडल स्कूल और घनेत विद्यालय सहित क्षेत्र के कई अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक रिक्त पदों पर शिक्षकों की तुरंत नियुक्ति नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए जल्द नियुक्ति की मांग की है। ग्रामीणों ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, संस्था प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है।1
- उदयपुर में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत डबोक थाना पुलिस और डीएसटी ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक सियाज कार से 53.40 ग्राम अवैध एमडी ड्रग्स बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने मौके से अवैध ड्रग्स के साथ ही सियाज कार को भी जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में की गई है। इस पूरे अभियान को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रजत विश्नोई और वृत्ताधिकारी चांदमल सिघारिया के सुपरविजन में थानाधिकारी गोपालनाथ के नेतृत्व वाली टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।1
- प्रतापगढ़ के धरियावद स्थित राजकीय महाविद्यालय में भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा (BPVM) ने अपना 11वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास और गौरव के साथ मनाया। 18 जुलाई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के संघर्ष, सेवा और समर्पण के 11 सफल वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया गया। इन वर्षों में संगठन ने छात्र-छात्राओं के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता, सामाजिक चेतना, आदिवासी समाज के उत्थान और भीलप्रदेश राज्य गठन की संवैधानिक मांग को मजबूती से उठाने का काम किया है। इस विशेष अवसर पर भीलप्रदेश राज्य की आवाज बुलंद करने वाले BPMM के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक निलेश बरोड़ मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ एक प्रेरणादायक परिचर्चा की, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों को संगठन के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली, अनुशासन और नियमों की जानकारी दी। अपने संबोधन में निलेश बरोड़ ने शिक्षा के महत्व, छात्र नेतृत्व, संगठन की मजबूती और भीलप्रदेश आंदोलन को सशक्त बनाने पर विचार रखे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में कॉलेज इकाई के अध्यक्ष डीसी बरोड़, प्रतापगढ़ जिला सह संयोजक भीमराज बरगोट, इकाई उपाध्यक्ष रमेश कलासुआ, इकाई सचिव दिनेश निनामा, सुनील और कॉलेज के कई छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस अवसर पर भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा परिवार से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व साथियों को 11वें स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गईं।3
- मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सरकारी शिक्षकों के प्रमोशन का नया फॉर्मूला तैयार किया है। इस नए नियम के तहत विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पहले ही आयोजित कर ली जाएगी, लेकिन शिक्षकों को पदोन्नति का वास्तविक लाभ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करने के बाद ही मिलेगा। हालांकि, जैसे ही संबंधित शिक्षक टीईटी परीक्षा पास करेगा, उसे उसकी डीपीसी की प्रभावी तिथि से ही पदोन्नति का लाभ दे दिया जाएगा, जिससे उसकी वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और अन्य सेवा संबंधी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। इस नए बदलाव का सबसे बड़ा असर वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए करीब 1.5 लाख प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब प्रमोशन पाने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। मध्य प्रदेश में कुल प्राथमिक शिक्षकों की संख्या लगभग 1.70 लाख और माध्यमिक शिक्षकों की संख्या लगभग 1.45 लाख है। नियमों के अनुसार, वर्ष 2016 से पहले नियमित प्रमोशन पाकर हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में पहुंच चुके शिक्षकों को टीईटी नहीं देनी होगी। वहीं, जो शिक्षक वर्तमान में केवल उच्च पद प्रभार पर कार्यरत हैं और उनका मूल पद माध्यमिक शिक्षक है, उन्हें नियमित प्रमोशन के लिए टीईटी पास करना ही होगा। व्यापम के माध्यम से वर्ष 2005 से पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर नियुक्त हुए शिक्षकों को भी प्रमोशन के लिए अलग से टीईटी पास करनी होगी, हालांकि सरकार इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में राहत मांगने की तैयारी कर रही है। इसके अतिरिक्त, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम का समय बचा है (ऐसे करीब 17 हजार शिक्षक हैं), उन्हें सामान्य रूप से छूट है, लेकिन यदि वे पदोन्नति का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें भी टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि संचालनालय विधिक रूप से संपूर्ण प्रक्रिया का परीक्षण कर रहा है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।1
- चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ क्षेत्र की आज की 7 बड़ी खबरें सामने आई हैं। इसमें मुख्य रूप से पुलक सागर महाराज, कमल मीणा का ज्ञापन, जाड़ावत का हमला और कांग्रेस संगठन विस्तार की खबरें शामिल हैं। इसके साथ ही चैतन्य स्कूल की उपलब्धि, एथलेटिक्स प्रतियोगिता और डीएसटी की बड़ी कार्रवाई भी आज की प्रमुख खबरों में रही। इस जानकारी के साथ ही लोगों से चैनल को फॉलो करना न भूलने की अपील की गई है।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला में जैन दिवाकर पूज्य गुरुदेव की असीम अनुकम्पा और लोहपुरुष धर्ममुनि महाराज की आज्ञानुवर्ती सुशिष्या धर्मसिहनी प्रवचन प्रभाविका धैर्यप्रभा महाराज आदि ठाणा-6 का रविवार को भव्य एवं श्रद्धामय मंगल प्रवेश हुआ। इस धार्मिक आयोजन में राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। प्रातः 9 बजे अरिहंत भवन से भव्य मंगल प्रवेश यात्रा प्रारंभ हुई, जो मुख्य मार्ग, बस स्टैंड और मुख्य बाजार से होते हुए आनंद यश भवन पहुंची और वहां से जैन स्थानक में प्रवेश किया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ साध्वीवृंद का भव्य स्वागत किया और पुष्पवर्षा कर मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। जैन स्थानक पहुंचने पर जयपुर, नीमच और मंदसौर सहित विभिन्न जैन संघों ने अगले चातुर्मास के लिए विनती प्रस्तुत की। इस अवसर पर बहु मंडल और बालिका मंडल द्वारा आकर्षक धार्मिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसके बाद धैर्यप्रभा महाराज ने मंगलिक सुनाते हुए धर्म, संयम और सदाचार का संदेश दिया। इस मंगल प्रवेश कार्यक्रम में नीमच, मंदसौर, बड़ीसादड़ी, जावरा, निंबाहेड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, इंदौर, जयपुर, हरियाणा, ब्यावर सहित अनेक जैन संघों के श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इस दौरान डूंगला के कोटा निवासी शांतिलाल, सुनील कुमार, अनिल कुमार और रौनक कुमार दक परिवार की ओर से स्वर्गीय प्रेमबाई की पुण्य स्मृति में ₹1.21 लाख की भेंट अर्पित की गई। रविवार, 19 जुलाई को अरिहंत भवन में नियमित सामायिक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। इस सामायिक और मंगल प्रवेश में शामिल श्रद्धालुओं के लिए अल्पाहार की व्यवस्था बाबूलाल, सुरेश कुमार, रमेश कुमार, ललित कुमार, अंकित कुमार और रौनक कुमार मेहता द्वारा की गई, जबकि भोजन की व्यवस्था बसंतीलाल, विमल कुमार और अक्षत कुमार मेहता द्वारा की गई। कार्यक्रम में दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीए आई.एम. सेठिया, संगठन महामंत्री सिद्धाराज सिंघवी, श्रीसंघ डूंगला के अध्यक्ष शांतिलाल मेहता और मंत्री कनकमल दक सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। श्रीसंघ की ओर से बताया गया कि आगामी 26 जुलाई से धर्मसिहनी धैर्यप्रभा महाराज के नियमित प्रवचन प्रारंभ होंगे, जिनमें धर्म, अध्यात्म, संस्कार एवं जीवन मूल्यों पर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।4