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आज दिनांक 1--1--2026। को नर्मदे परिक्रमा पथ पर पतंग का चाईनीज डोर से फंसे हुए पक्षी को भारतीय किसान संघ के उपाध्यक्ष भाई नाजिम खान एवं परिक्रमा वासी गगन मुनि महादेव सेन ने सभी के सहयोग से नये साल पर जीवन की रक्षा की साथ ही सभी सै निवेदन है कि चाईनीज डोर का प्रयोग न करें 9826393014अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क इ
रिपोर्टर भगवान सिंह चौहान
आज दिनांक 1--1--2026। को नर्मदे परिक्रमा पथ पर पतंग का चाईनीज डोर से फंसे हुए पक्षी को भारतीय किसान संघ के उपाध्यक्ष भाई नाजिम खान एवं परिक्रमा वासी गगन मुनि महादेव सेन ने सभी के सहयोग से नये साल पर जीवन की रक्षा की साथ ही सभी सै निवेदन है कि चाईनीज डोर का प्रयोग न करें 9826393014अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क इ
- User6576Madhya Pradesh😤17 min ago
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
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- महाराष्ट्र से आई पालकी यात्रा का सेंधवा में स्वागत रात्री विश्राम कर भजन कीर्तन किये यह यात्रा 70 दिनो मे काशी पहुचेगी सेंधवा 1 जनवरी गुरूवार (ब्युरो) सर्वधर्म समभाव का संदेश देते हुए सभी धर्मों के बीच प्रेम, शांति और सद्भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित श्री क्षेत्र ओतूर (उत्तमापूर) से श्री क्षेत्र काशी की पदयात्रा पालकी का सेंधवा में चौदहवें दिन 31 दिसंबर को भक्तिमय वातावरण में आगमन हुआ। लगभग 400 वर्ष पूर्व सद्गुरु बाबाजी चैतेन्य महाराज ने ओतूर से काशी तक करीब 800 किलोमीटर की पदयात्रा कर काशी विश्वेश्वर मंदिर में दर्शन एवं कीर्तन किया था। उसी ऐतिहासिक और अध्यात्मिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से पिछले 20 वर्षों से यह 70 दिनों की पदयात्रा पालकी नियमित रूप से आयोजित की जा रही है। इस वर्ष पालकी 17 दिसम्बर 2025 को श्री क्षेत्र ओतुर से काशी(वाराणसी) के लिए प्रस्थान हुई । विभिन गांवों से होकर गुजरते हुए यह पदयात्रा (दिन्डी) भक्ती, नामस्मरण, कीर्तन और सामाजिक समरसता का संदेश फैलाते हुए आगे बढ़ रही है यह दिन्डी(पालकी) 13 फरवरी को श्री क्षेत्र वाराणसी (काशी) पहुंचेगी। जहां 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्री का पर्व बड़े भक्तीभाव से मनाया जाएगा। इसके अगले दिन भजन कीर्तन और महाप्रसाद के बाद वापसी यात्रा प्रारंभ होकर ओतूर में पालकी का भक्तीमय वातावरण में समापन होगा। सेंधवा में पालकी के आगमन पर शहरवासियों ने अत्यंत उत्साह के साथ स्वागत किया ताल, बृदंग की गूंज और हरिनाम के जयघोष से पूरा शहर भक्ती रस में सराबोर हो गया। सेंधवा निवासी मंगल निकुम ने बताया कि पालकी श्री क्षेत्र ओतूर से प्रारंभ होकर विभिन्न गांवों से होते हुए एक दिन का रात्रि विश्राम सेंधवा में होता हैं जहां पदयात्रियों द्वारा भजन कीर्तन किया जाता हैं, रात को ठहरने एवं भोजन की व्यवस्था की जाकर दूसरे दिन प्रातः बाबा चैतन्य महाराज का पूजन व अभिषेक कर पालकी यात्रा आगे के लिए प्रस्थान करती हैं। राजेंद्र निकुम ने बताया कि विगत 16 वर्षों से निरंतर पालकी पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत के लिए परिवार, समाजजनों ,मित्रों तथा पड़ोसियों का सहयोग प्राप्त होता हैं।4
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