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सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में यह सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रत्यास्थता सीमा (elasticity limit) क्या होती है।
विज्ञान शिक्षण संस्थान मिश्रबत
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में यह सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रत्यास्थता सीमा (elasticity limit) क्या होती है।
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- लुधियाना जगराओं मंडी से सरकार से यह गुजारिश की गई है कि काम के दौरान खाने और सोने का समय निर्धारित किया जाए। यहाँ मूँग दाल का सीजन छठे महीने में शुरू होता है और दो महीने तक चलता है, जिसमें सुबह उठकर फ्रेश होकर सीधे काम पर लग जाना पड़ता है और खाने तथा सोने की कोई सीमा नहीं रहती है। सरकार से अपील की गई है कि वह सुबह कम से कम 10:00 बजे भोजन करने का और रात को कम से कम 10:00 बजे सोने का समय तय करे। इस खबर को सरकार तक पहुँचाने की मांग की गई है।1
- पश्चिम चंपारण के बेतिया में मझौलिया रेलवे गुमटी के पास पंचायत के वार्ड संख्या 04 में सड़क पर बने जानलेवा गड्ढे को भरने के लिए एक युवक खुद आगे आया है। युवा समाजसेवी मनीष कुमार भास्कर उर्फ मोनू ने अपने निजी खर्च पर सड़क पर दो ट्रेलर मिट्टी और राबिस गिरवाया। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद कुदाल लेकर मिट्टी और राबिस को फैलाकर सड़क को समतल किया। युवक की इस अनूठी पहल की ग्रामीणों ने जमकर सराहना की है और इसे जनहित में उठाया गया एक बड़ा कदम बताया है। दरअसल, लगातार हो रही बारिश और भारी वाहनों के आवागमन के कारण रेलवे गुमटी से लेकर मझौलिया गांव तक की सड़क पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुकी थी। इस खराब स्थिति के बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस सड़क की मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठाई। आखिरकार पूर्व समाजसेवी स्वर्गीय सुदामा साह के पुत्र मनीष कुमार ने खुद इस कार्य को अंजाम दिया, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। मनीष कुमार ने बताया कि वह यह कार्य पूरी तरह से सेवा भाव से कर रहे हैं। इससे पहले भी वह नाले की सफाई कराकर सुर्खियों में आ चुके हैं।1
- बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के जोगापट्टी प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ को लेकर लोगों में भारी हड़कंप मचा हुआ है और उनकी परेशानियां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते स्थानीय जनता में सरकार के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई भी सहायता या सरकारी भाटा नहीं मिल रहा है। इस संकट के समय में लोग किसी तरह नाव के सहारे अपना घर और परिवार चला रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए कि आखिर इस बाढ़ ग्रसित क्षेत्र में लोग किस प्रकार अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि जब वे सरकार चुनने के लिए वोट करते हैं, तो सरकार का भी यह कर्तव्य है कि वह केवल शहरी इलाकों पर ही ध्यान न दे। सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों और दीयरवर्ती क्षेत्रों की जनता पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए ताकि उन्हें इस विपदा से राहत मिल सके। (रिपोर्ट: नागेंद्र कुमार)1
- पश्चिम चंपारण के बेतिया में देश को अंदर से दीमक की तरह खाने वाले 'काले अंग्रेजों' के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है। ऐसे लोगों को देश के लिए दीमक के समान बताया गया है जो इसे लगातार भीतर से खाए जा रहे हैं और अंदर ही अंदर पूरी तरह से खोखला करने में लगे हुए हैं।1
- मनीष कश्यप दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे हैं।1
- पश्चिम चंपारण के पुलिस अधीक्षक ने जिले के नवलपुर, मनुआपुल और योगापट्टी थानों का औचक निरीक्षण कर वहां की कानून-व्यवस्था तथा पुलिस कार्यप्रणाली का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने थाना परिसर, मालखाना, हाजत, सीसीटीवी व्यवस्था और साफ-सफाई का गहन अवलोकन किया। इसके साथ ही अपराध एवं आगंतुक पंजी सहित अन्य आवश्यक अभिलेखों की विस्तृत समीक्षा की गई और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि वे आम नागरिकों के साथ विनम्र और संवेदनशील व्यवहार करें। उन्होंने प्राप्त शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करने के साथ-साथ थानों में स्वच्छता, अनुशासन और बेहतर कार्य संस्कृति बनाए रखने पर जोर दिया। इस अवसर पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-1, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-2, पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) बेतिया और संबंधित थानों के थानाध्यक्षों सहित सभी पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।1
- बलिया के सुखपुरा में बदहाल बिजली व्यवस्था और अन्य जनसमस्याओं को लेकर बांसडीह विधायक केतकी सिंह के घेराव की घोषणा करने वाले समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष रोहित सिंह को पुलिस ने एहतियातन उनके आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया। विधायक के कार्यक्रम से ठीक पहले की गई पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधायक के निर्धारित कार्यक्रम को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। दरअसल, रोहित सिंह ने पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल, सुखपुरा के माध्यम से विधायक को ज्ञापन सौंपकर नगर की जर्जर बिजली व्यवस्था, अनियमित विद्युत कटौती, 33 हजार केवी विद्युत लाइन बदलने, किसानों के लिए नहर में पानी उपलब्ध कराने, सुखपुरा चौराहे से पानी की टंकी तक नाला निर्माण और सामुदायिक शौचालय निर्माण की मांगें उठाई थीं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो विधायक के सुखपुरा आने पर उनका लोकतांत्रिक तरीके से घेराव किया जाएगा। इसी घोषणा के बाद पुलिस टीम ने उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें पूरे कार्यक्रम के दौरान घर के अंदर ही रहने की हिदायत दी। प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का सरासर हनन करार दिया है। हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद सपा नेता रोहित सिंह ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जनता की आवाज उठाने वालों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुखपुरा की बिजली व्यवस्था लंबे समय से बदहाल है और लगातार कटौती व जर्जर लाइनों के कारण आम जनता और किसान परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इन गंभीर समस्याओं के समाधान के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हाउस अरेस्ट की इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है।1
- पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड स्थित पिपरपाती पुल पर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला ने अचानक पुल से नीचे नदी में छलांग लगा दी। महिला को नदी में गिरते देख मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, लेकिन तेज बहाव के कारण कोई भी नदी में उतरने का साहस नहीं जुटा पा रहा था। इसी बीच बढ़ईया गांव के निवासी असफाक आलम अपने दोस्तों के साथ वहां पहुंचे और बिना एक पल गंवाए अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में कूद गए। उन्होंने हिम्मत और सूझबूझ का परिचय देते हुए बीच नदी में डूब रही घबराई हुई महिला को संभाला और उसे सुरक्षित किनारे तक लेकर आए। नदी किनारे पहुंचने के बाद ग्रामीणों के सहयोग से महिला को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया, जिससे उसकी हालत सामान्य हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों को राहत मिली और प्राथमिक देखभाल के बाद महिला को उनके साथ सुरक्षित घर भेज दिया गया। फिलहाल महिला द्वारा उठाए गए इस कदम के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में असफाक आलम और उनके साथियों की बहादुरी की जमकर सराहना की जा रही है और ग्रामीणों ने प्रशासन से इन जांबाज युवकों को सम्मानित करने की मांग की है ताकि समाज में इंसानियत और सेवा की भावना को और बढ़ावा मिल सके।1