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अरवल शहर में यादव जी की लव स्टोरी फिल्म को लेकर विरोध आक्रोश मार्च करते बाबा साहब अंबेडकर प्रतिमा से बस स्टैंड तक आक्रोश मार्च निकला गया एवं डायरेक्टर अंकित बड़ाना का पुतला दहन किया गया कार्यक्रम का नेतृत्व रेल आंदोलन के सूत्रधार मनोज सिंह यादव एवं वीर लोरिक अहीर विचार मंच के कार्यकर्ता कर रहे थे जातीय भावना को बदनाम करने के लिए साजिश है सिनेमा सिनेमा को बंद करने एवं डायरेक्टर अंकित बडाना प्रगति तिवारी विश्व मोहन एवं सभी पत्रों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए मांग करते हुए अरवल शहर में आक्रोश मार्च एवं पुतला दहन करते वीर लोरीक अहिर विचार मंच के सदस्य गण

1 hr ago
user_Satveer Singh
Satveer Singh
Journalist अरवल, अरवल, बिहार•
1 hr ago

अरवल शहर में यादव जी की लव स्टोरी फिल्म को लेकर विरोध आक्रोश मार्च करते बाबा साहब अंबेडकर प्रतिमा से बस स्टैंड तक आक्रोश मार्च निकला गया एवं डायरेक्टर अंकित बड़ाना का पुतला दहन किया गया कार्यक्रम का नेतृत्व रेल आंदोलन के सूत्रधार मनोज सिंह यादव एवं वीर लोरिक अहीर विचार मंच के कार्यकर्ता कर रहे थे जातीय भावना को बदनाम करने के लिए साजिश है सिनेमा सिनेमा को बंद करने एवं डायरेक्टर अंकित बडाना प्रगति तिवारी विश्व मोहन एवं सभी पत्रों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए मांग करते हुए अरवल शहर में आक्रोश मार्च एवं पुतला दहन करते वीर लोरीक अहिर विचार मंच के सदस्य गण

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  • अरवल शहर में यादव जी की लव स्टोरी फिल्म को लेकर विरोध आक्रोश मार्च करते बाबा साहब अंबेडकर प्रतिमा से बस स्टैंड तक आक्रोश मार्च निकला गया एवं डायरेक्टर अंकित बड़ाना का पुतला दहन किया गया कार्यक्रम का नेतृत्व रेल आंदोलन के सूत्रधार मनोज सिंह यादव एवं वीर लोरिक अहीर विचार मंच के कार्यकर्ता कर रहे थे जातीय भावना को बदनाम करने के लिए साजिश है सिनेमा सिनेमा को बंद करने एवं डायरेक्टर अंकित बडाना प्रगति तिवारी विश्व मोहन एवं सभी पत्रों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए मांग करते हुए अरवल शहर में आक्रोश मार्च एवं पुतला दहन करते वीर लोरीक अहिर विचार मंच के सदस्य गण
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    अरवल शहर में यादव जी की लव स्टोरी फिल्म को लेकर विरोध आक्रोश मार्च करते 
बाबा साहब अंबेडकर प्रतिमा से बस स्टैंड तक आक्रोश मार्च निकला गया एवं डायरेक्टर अंकित बड़ाना का पुतला दहन किया गया
कार्यक्रम का नेतृत्व रेल आंदोलन के सूत्रधार मनोज सिंह यादव एवं वीर लोरिक अहीर विचार मंच के कार्यकर्ता कर रहे थे
जातीय भावना को बदनाम करने के लिए साजिश है सिनेमा
सिनेमा को बंद करने एवं डायरेक्टर अंकित बडाना प्रगति तिवारी विश्व मोहन एवं सभी पत्रों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए मांग करते हुए
अरवल शहर में आक्रोश मार्च एवं पुतला दहन करते वीर लोरीक अहिर विचार मंच के सदस्य गण
    user_Satveer Singh
    Satveer Singh
    Journalist अरवल, अरवल, बिहार•
    1 hr ago
  • कीर्तन हो,तो ऐसा #harekirtan #harekrishna #public news #news #bihar
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    कीर्तन हो,तो ऐसा #harekirtan #harekrishna #public news #news #bihar
    user_Golu Kumar Soni
    Golu Kumar Soni
    Artist करपी, अरवल, बिहार•
    2 hrs ago
  • पटना जिला के पालीगंज में JDU के प्रखंड अध्यक्ष पद से रविंद्र शर्मा 308 वोट से जीते इस मौके पर नरेंद्र चंद्रवंशी, विनोद चंद्रवंशी, मुन्ना चंद्रवंशी सहित सैकड़ो लोग मौजूद थे
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    पटना जिला के पालीगंज में JDU के प्रखंड अध्यक्ष पद से रविंद्र शर्मा 308 वोट से जीते इस मौके पर नरेंद्र चंद्रवंशी, विनोद चंद्रवंशी, मुन्ना चंद्रवंशी सहित सैकड़ो लोग मौजूद थे
    user_संध्या न्यूज़ NH139 पालीगंज
    संध्या न्यूज़ NH139 पालीगंज
    पालीगंज, पटना, बिहार•
    8 hrs ago
  • Sant Gadge Baba Bhajan | दिल को छू लेने वाला भक्ति गीत 🙏 Sant Gadge Baba Song | आत्मा को शांति देने वाला भजन Heart Touching Sant Gadge Baba Bhajan | सुनते ही मन शांत हो जाएगा
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    Sant Gadge Baba Bhajan | दिल को छू लेने वाला भक्ति गीत 🙏
Sant Gadge Baba Song | आत्मा को शांति देने वाला भजन
Heart Touching Sant Gadge Baba Bhajan | सुनते ही मन शांत हो जाएगा
    user_Kanchankumar Biharwala
    Kanchankumar Biharwala
    Media and information sciences faculty सोनभद्र बंशी सूर्यपुर, अरवल, बिहार•
    18 hrs ago
  • #लाइव धरना के बिच में बैठे प्रभात सिंह ने
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    #लाइव धरना के बिच में बैठे प्रभात सिंह ने
    user_Bihar News 24
    Bihar News 24
    Journalist Bhojpur, Bihar•
    18 min ago
  • अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस " के अवसर पर भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता के लिए " भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा " द्वारा जिलाधिकारी भोजपुर के समक्ष एक दिवसीय धरना जय प्रकाश नारायण प्रतिमा स्थल पर दिया गया। प्रकाशनार्थ ... आरा: आज दिनांक 21 फरवरी 2026 को " अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस " के अवसर पर भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता के लिए " भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा " द्वारा जिलाधिकारी भोजपुर के समक्ष एक दिवसीय धरना जय प्रकाश नारायण प्रतिमा स्थल पर दिया गया। धरना का शुभारंभ भोजपुरी के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। भोजपुरी भाषा के लिए महत्वपूर्ण इस धरना की अध्यक्षता भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान, आरा के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेन्द्र सिंह और संचालन भोजपुरी शोध एवं विकास ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी कृष्ण यादव " कृष्णेन्दु " ने किया। धरना को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ कुमार शीलभद्र ने " अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस " की उत्पति को विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा को समृद्ध करने के लिए रचनात्मक और आंदोलनात्मक, दोनों तरह से काम करना होगा। भोजपुरिया सेना के अध्यक्ष प्रभात सिंह ने कहा कि भोजपुरी भाषा को लेकर भोजपुरिया समाज में नकारात्मक माहौल है। कॉन्वेंट विद्यालय में कोई कार्यक्रम आयोजित होता है तो अभिभावक बहुत ही ज्यादा विरोध करते हैं। सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन के सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मानव ने कहा कि भोजपुरी भाषा के पुरखों को याद करना भी एक आन्दोलन ही है। हाल ही में हमारे बीच से भोजपुरी भाषा के बेहतरीन कवि पवन श्रीवास्तव का निधन हुआ है, हमें उनके याद में भी कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। लगातार कार्यक्रम होने से आन्दोलन को बल मिलता है। भोजपुरिया जन मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के तर्ज पर बिहार विधानसभा में भी भोजपुरी भाषा के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषा को भी मान्यता मिलना चाहिए। बिहार में भोजपुरी अकादमी बन्द पड़ी है, इसे जल्द ही सुचारू रूप से चालू किया जाना चाहिए। इसके लिए हमलोगों को बिहार सरकार को ज्ञापन देना चाहिए। चर्चित नाट्य संस्था नवोदय संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ रंगकर्मी डी. राजन ने कहा कि भोजपुरी भाषा का आन्दोलन अपने घर से शुरू करना होगा। आरा जंक्शन पर भोजपुरी भाषा में गाड़ियों सम्बन्धी उद्घोषणा होना चाहिए। हमलोगोंं को इसके लिए भी आरा रेलवे स्टेशन पर धरना - प्रदर्शन करना चाहिए। आन्दोलन में प्रतिबद्धता होगी तभी हमें सफ़लता मिलेगी। भोजपुरी भाषा के स्वाभाविक कवि जन्मेजय ओझा " मंज़र " ने कहा कि आप जहां कहीं भी दो भोजपुरिया मिले अपने मातृभाषा भोजपुरी में ही बात करें। भोजपुरी भाषा बहुत ही समृद्ध और मारक क्षमता वाला माध्यम है। कवि दूधेश्वर नाथ मिश्र ने कहा कि भोजपुरी भाषा के विकास के लिए पढ़ाई, लिखाई, गायन, वादन और कविताई आदि का लगातार आयोजन होते रहना चाहिए। स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, भोजपुर के सहायक अध्यापक डॉ निलम्बुज सरोज ने कहा कि किसी भी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने के लिए कोई निर्धारित मापदण्ड नहीं है। भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए राजनीतिक पहल कमज़ोर है। हम लोगों को अपने जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाना चाहिए। चर्चित गीतकार / लेखक कुमार अजय सिंह ने कहा कि अपने मातृभाषा भोजपुरी को लेकर भोजपुरिया समाज में हीनभावना व्याप्त है। जबकि भोजपुरी भाषा ने अंतराष्ट्रीय भाषा का स्वरूप ले लिया है। इसे भारत में संवैधानिक मान्यता मिलना ही चाहिए। भोजपुर जिले के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता, सामाजिक संस्था यथार्थ के सचिव भास्कर मिश्र ने कहा कि भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और राजनीतिक आन्दोलन साथ - साथ होना चाहिए। भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता के लिए संसद भवन और भोजपुरिया सांसद लोग का घेराव करना होगा। कायस्थ क्रांतिकारी विचार मंच के अध्यक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता मणिभूषण श्रीवास्तव ने कहा कि भोजपुरी भाषा के लिए बेहतरीन लिपि को भी तैयार करना होगा। पहले की भोजपुरी कैथी लिपि में लिखी जाती थी। कैथी लिपि मर रही है, उसे भी पुनजीर्वित करना पड़ेगा। कैथी लिपि भोजपुरी भाषा की अपनी लिपि है। चर्चित गायक धनी पाण्डेय ने कहा कि भोजपुरी भाषा को लिखना - पढ़ना भी जरूरी है। हमलोग इस धरना में भोजपुरी भाषा में बोल रहे हैं, लेकिन समाचार आयेगा किसी अन्य भाषा में। भोजपुरी भाषा का अपना अख़बार होना चाहिए। शिक्षाविद विजय कुमार राय ने कहा कि भोजपुरी भाषा के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर को भारत रत्न पुरस्कार मिलना चाहिए। अलग भोजपुरांचल राज्य की स्थापना होनी चाहिए, जहां का राज्य भाषा भोजपुरी होगी। अध्यक्षीय भाषण में पत्रकार नरेन्द्र सिंह ने कहा कि भोजपुरी भाषा जन संख्या, साहित्य, संस्कृति और राजनीति में अन्य किसी भी भाषा से समृद्ध है। भोजपुरिया क्षेत्र के जनप्रतिनिधि लोग को पिछले आन्दोलन का विश्लेषण करते हुए आगे भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने तक मुकम्मल आन्दोलन करते रहना चाहिए। लेकिन हमें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इस धरना में अधिवक्ता इंद्रदेव पाण्डेय, अधिवक्ता सतेन्द्र प्रेमजीवन, राम रतन राम, भिखारी ठाकुर के नाच मण्डली के जोकर रघु पासवान, अशोक पासवान, रामानन्द पासवान, राजीव रंजन मिश्र, राजू शुक्ला, वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल प्रतीक्षा, समाजसेवी कृष्ण प्रताप सिंह, चर्चित ड्रम वादक राम सुख राय, जेडीयू नेता मृत्युंजय भारद्वाज, अभय कुमार पाण्डेय, पंकज कुमार सिंह, कुमार विजय, आशुतोष कुमार पाण्डेय, संजय दुबे, प्रशान्त कुमार मिश्रा, राहुल कुमार, आरा नगर रामलीला समिति के सचिव शम्भू नाथ प्रसाद, पत्रकार सोनू सिंह, पत्रकार विष्णु पाठक, पत्रकार संजय श्रीवास्तव के साथ भोजपुर जिले के सैकड़ों साहित्यकार, पत्रकार, रंगकर्मी, नाटककार, चित्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और गायक - वादक उपस्थित थे। धरना में शामिल साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति स्वामी विक्रमादित्य जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अपने आठ सूत्री मांगों के साथ एक ज्ञापन और मांग - पत्र जिलाधिकारी भोजपुर के प्रतिनिधि को सौंपा गया।
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    अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस " के अवसर पर भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता के लिए " भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा " द्वारा जिलाधिकारी भोजपुर के समक्ष एक दिवसीय धरना जय प्रकाश नारायण प्रतिमा स्थल पर दिया गया।
प्रकाशनार्थ ...
आरा: आज दिनांक 21 फरवरी 2026 को " अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस " के अवसर पर भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता के लिए " भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा " द्वारा जिलाधिकारी भोजपुर के समक्ष एक दिवसीय धरना जय प्रकाश नारायण प्रतिमा स्थल पर दिया गया।
धरना का शुभारंभ भोजपुरी के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
भोजपुरी भाषा के लिए महत्वपूर्ण इस धरना की अध्यक्षता भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान, आरा के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेन्द्र सिंह और संचालन भोजपुरी शोध एवं विकास ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी कृष्ण यादव " कृष्णेन्दु " ने किया।
धरना को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ कुमार शीलभद्र ने " अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस " की उत्पति को विस्तार पूर्वक बताया।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा को समृद्ध करने के लिए रचनात्मक और आंदोलनात्मक, दोनों तरह से काम करना होगा।
भोजपुरिया सेना के अध्यक्ष प्रभात सिंह ने कहा कि भोजपुरी भाषा को लेकर भोजपुरिया समाज में नकारात्मक माहौल है। कॉन्वेंट विद्यालय में कोई कार्यक्रम आयोजित होता है तो अभिभावक बहुत ही ज्यादा विरोध करते हैं।
सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन के सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मानव ने कहा कि भोजपुरी भाषा के पुरखों को याद करना भी एक आन्दोलन ही है। हाल ही में हमारे बीच से भोजपुरी भाषा के बेहतरीन कवि पवन श्रीवास्तव का निधन हुआ है, हमें उनके याद में भी कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। लगातार कार्यक्रम होने से आन्दोलन को बल मिलता है।
भोजपुरिया जन मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के तर्ज पर बिहार विधानसभा में भी भोजपुरी भाषा के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषा को भी मान्यता मिलना चाहिए। बिहार में भोजपुरी अकादमी बन्द पड़ी है, इसे जल्द ही सुचारू रूप से चालू किया जाना चाहिए। इसके लिए हमलोगों को बिहार सरकार को ज्ञापन देना चाहिए।
चर्चित नाट्य संस्था नवोदय संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ रंगकर्मी डी. राजन ने कहा कि भोजपुरी भाषा का आन्दोलन अपने घर से शुरू करना होगा। आरा जंक्शन पर भोजपुरी भाषा में गाड़ियों सम्बन्धी उद्घोषणा होना चाहिए। हमलोगोंं को इसके लिए भी आरा रेलवे स्टेशन पर धरना - प्रदर्शन करना चाहिए। आन्दोलन में प्रतिबद्धता होगी तभी हमें सफ़लता मिलेगी।
भोजपुरी भाषा के स्वाभाविक कवि जन्मेजय ओझा " मंज़र " ने कहा कि आप जहां कहीं भी दो भोजपुरिया मिले अपने मातृभाषा भोजपुरी में ही बात करें। भोजपुरी भाषा बहुत ही समृद्ध और मारक क्षमता वाला माध्यम है।
कवि दूधेश्वर नाथ मिश्र ने कहा कि भोजपुरी भाषा के विकास के लिए पढ़ाई, लिखाई, गायन, वादन और कविताई आदि का लगातार आयोजन होते रहना चाहिए।
स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, भोजपुर के सहायक अध्यापक डॉ निलम्बुज सरोज ने कहा कि किसी भी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने के लिए कोई निर्धारित मापदण्ड नहीं है। भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए राजनीतिक पहल कमज़ोर है। हम लोगों को अपने जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाना चाहिए।
चर्चित गीतकार / लेखक कुमार अजय सिंह ने कहा कि अपने मातृभाषा भोजपुरी को लेकर भोजपुरिया समाज में हीनभावना व्याप्त है। जबकि भोजपुरी भाषा ने अंतराष्ट्रीय भाषा का स्वरूप ले लिया है। इसे भारत में संवैधानिक मान्यता मिलना ही चाहिए।
भोजपुर जिले के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता, सामाजिक संस्था यथार्थ के सचिव भास्कर मिश्र ने कहा कि भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और राजनीतिक आन्दोलन साथ - साथ होना चाहिए। भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता के लिए संसद भवन और भोजपुरिया सांसद लोग का घेराव करना होगा।
कायस्थ क्रांतिकारी विचार मंच के अध्यक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता मणिभूषण श्रीवास्तव ने कहा कि भोजपुरी भाषा के लिए बेहतरीन लिपि को भी तैयार करना होगा। पहले की भोजपुरी कैथी लिपि में लिखी जाती थी। कैथी लिपि मर रही है, उसे भी पुनजीर्वित करना पड़ेगा। कैथी लिपि भोजपुरी भाषा की अपनी लिपि है।
चर्चित गायक धनी पाण्डेय ने कहा कि भोजपुरी भाषा को लिखना - पढ़ना भी जरूरी है। हमलोग इस धरना में भोजपुरी भाषा में बोल रहे हैं, लेकिन समाचार आयेगा किसी अन्य भाषा में। भोजपुरी भाषा का अपना अख़बार होना चाहिए।
शिक्षाविद विजय कुमार राय ने कहा कि भोजपुरी भाषा के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर को भारत रत्न पुरस्कार मिलना चाहिए। अलग भोजपुरांचल राज्य की स्थापना होनी चाहिए, जहां का राज्य भाषा भोजपुरी होगी।
अध्यक्षीय भाषण में पत्रकार नरेन्द्र सिंह ने कहा कि भोजपुरी भाषा जन संख्या, साहित्य, संस्कृति और राजनीति में अन्य किसी भी भाषा से समृद्ध है। भोजपुरिया क्षेत्र के जनप्रतिनिधि लोग को पिछले आन्दोलन का विश्लेषण करते हुए आगे भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने तक मुकम्मल आन्दोलन करते रहना चाहिए। लेकिन हमें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।
इस धरना में अधिवक्ता इंद्रदेव पाण्डेय, अधिवक्ता सतेन्द्र प्रेमजीवन, राम रतन राम, भिखारी ठाकुर के नाच मण्डली के जोकर रघु पासवान, अशोक पासवान, रामानन्द पासवान, राजीव रंजन मिश्र, राजू शुक्ला, वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल प्रतीक्षा, समाजसेवी कृष्ण प्रताप सिंह, चर्चित ड्रम वादक राम सुख राय, जेडीयू नेता मृत्युंजय भारद्वाज, अभय कुमार पाण्डेय, पंकज कुमार सिंह, कुमार विजय, आशुतोष कुमार पाण्डेय, संजय दुबे, प्रशान्त कुमार मिश्रा, राहुल कुमार, आरा नगर रामलीला समिति के सचिव शम्भू नाथ प्रसाद, पत्रकार सोनू सिंह, पत्रकार विष्णु पाठक, पत्रकार संजय श्रीवास्तव के साथ भोजपुर जिले के सैकड़ों साहित्यकार, पत्रकार, रंगकर्मी, नाटककार, चित्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और गायक - वादक उपस्थित थे।
धरना में शामिल साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति स्वामी विक्रमादित्य जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
अपने आठ सूत्री मांगों के साथ एक ज्ञापन और मांग - पत्र जिलाधिकारी भोजपुर के प्रतिनिधि को सौंपा गया।
    user_News 91 Bhojpur
    News 91 Bhojpur
    Court reporter गरहनी, भोजपुर, बिहार•
    6 hrs ago
  • Post by बात बिहार की सपोर्टर अरवल
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    Post by बात बिहार की सपोर्टर अरवल
    user_बात बिहार की सपोर्टर अरवल
    बात बिहार की सपोर्टर अरवल
    Voice of people कलेर, अरवल, बिहार•
    8 hrs ago
  • आज जिला प्रशासन के घोर लापरवाही के वजह से जाम से पूरे अरवल जिला वासी परेशान है एग्जाम चल रहा है जाम के वजह से एग्जाम छूट जाता इस जाम को लेकर जिला पदाधिकारी महोदय को अरवल जिला खनन पदाधिकारी को आदेश देकर सभी अरवल बालू घाट को यह सूचना दें कि सुबह 6:00 से शाम 6:00 बजे तक नो एंट्री रहेगी उसे लोगों को आवागमन छात्राओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा इस पर जिला प्रशासन ध्यान दें
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    आज जिला प्रशासन के घोर लापरवाही के वजह से जाम से पूरे अरवल जिला वासी परेशान है एग्जाम चल रहा है जाम के वजह से एग्जाम छूट जाता इस जाम को लेकर जिला पदाधिकारी महोदय को अरवल जिला  खनन पदाधिकारी  को आदेश देकर सभी अरवल बालू घाट को यह सूचना दें कि सुबह 6:00 से शाम 6:00 बजे तक नो एंट्री रहेगी उसे लोगों को आवागमन छात्राओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा इस पर जिला प्रशासन ध्यान दें
    user_Satveer Singh
    Satveer Singh
    Journalist अरवल, अरवल, बिहार•
    10 hrs ago
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