राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ तहसील स्थित आरेट की भागल गांव में देर रात वन विभाग की टीम ने एक पैंथर को पिंजरे में कैद कर लिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, क्योंकि पिछले कुछ समय से आबादी क्षेत्र में पैंथर की लगातार आवाजाही से भय का माहौल बना हुआ था। जानकारी के अनुसार, पैंथर ने बीते दिन सुबह एक मवेशी का शिकार कर लिया था, जिसके बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। ग्रामीणों द्वारा तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के तहत पिंजरा लगाया गया। पिंजरा लगाए जाने के पहले ही दिन देर रात पैंथर उसमें कैद हो गया। वन विभाग की टीम ने पैंथर को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया। इस कार्रवाई में रेंजर प्रेमचंद कुमावत, फॉरेस्टर सत्येंद्र सिंह, सहायक वनपाल मुकेश कुमार मीणा और वन रक्षक जयपाल सिंह चुंडावत शामिल थे, जिनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई को ग्रामीणों ने सराहा और आभार व्यक्त किया।
राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ तहसील स्थित आरेट की भागल गांव में देर रात वन विभाग की टीम ने एक पैंथर को पिंजरे में कैद कर लिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, क्योंकि पिछले कुछ समय से आबादी क्षेत्र में पैंथर की लगातार आवाजाही से भय का माहौल बना हुआ था। जानकारी के अनुसार, पैंथर ने बीते दिन सुबह एक मवेशी का शिकार कर लिया था, जिसके बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। ग्रामीणों द्वारा तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के तहत पिंजरा लगाया गया। पिंजरा लगाए जाने के पहले ही दिन देर रात पैंथर उसमें कैद हो गया। वन विभाग की टीम ने पैंथर को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया। इस कार्रवाई में रेंजर प्रेमचंद कुमावत, फॉरेस्टर सत्येंद्र सिंह, सहायक वनपाल मुकेश कुमार मीणा और वन रक्षक जयपाल सिंह चुंडावत शामिल थे, जिनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई को ग्रामीणों ने सराहा और आभार व्यक्त किया।
- राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ तहसील स्थित आरेट की भागल गांव में देर रात वन विभाग की टीम ने एक पैंथर को पिंजरे में कैद कर लिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, क्योंकि पिछले कुछ समय से आबादी क्षेत्र में पैंथर की लगातार आवाजाही से भय का माहौल बना हुआ था। जानकारी के अनुसार, पैंथर ने बीते दिन सुबह एक मवेशी का शिकार कर लिया था, जिसके बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। ग्रामीणों द्वारा तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के तहत पिंजरा लगाया गया। पिंजरा लगाए जाने के पहले ही दिन देर रात पैंथर उसमें कैद हो गया। वन विभाग की टीम ने पैंथर को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया। इस कार्रवाई में रेंजर प्रेमचंद कुमावत, फॉरेस्टर सत्येंद्र सिंह, सहायक वनपाल मुकेश कुमार मीणा और वन रक्षक जयपाल सिंह चुंडावत शामिल थे, जिनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई को ग्रामीणों ने सराहा और आभार व्यक्त किया।1
- आज राजस्थान के 27 जिलों के लिए आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिसके साथ ही राज्य में मानसून की एंट्री अब दूर नहीं बताई जा रही है। यह चेतावनी 'राजस्थान मानसून 2026' से संबंधित मौसम गतिविधियों के बीच सामने आई है। इसी क्रम में, राजसमंद जिले में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।1
- रेलमगरा के ग्राम पंचायत गोगाथला स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्र पर प्रशासक छोगालाल सालवी की अध्यक्षता में महिला कृषकों के लिए एक कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महिला कृषकों को विभिन्न कृषि योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था। कृषि पर्यवेक्षक मनराज मीणा ने राज्य सरकार की एग्रीटेक फार्मर आईडी (आधार आधारित) योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा विकसित मोबाइल ऐप के माध्यम से अनुदानित उर्वरक की बुकिंग प्रक्रिया और विभाग की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी। मीणा ने महिला कृषकों से आह्वान किया कि वे अपनी पात्रता के अनुसार योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और जैविक खेती को अपनाकर टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ें। कार्यक्रम के दौरान महिला कृषकों का उत्साहवर्धन करने के लिए एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महिला कृषकों को कृषि यंत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत लापसिया में पदस्थ कृषि पर्यवेक्षक कुलदीप सिंह, कृषक नाथूलाल धोबी, शंकरलाल सेन, दुर्गाशंकर जायसवाल, सत्यनारायण सहित बड़ी संख्या में महिला कृषक उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।2
- भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खाखला में कथित पट्टा घोटाले के एक बड़े मामले ने पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक हलचल मचा दी है। जिला परिषद की जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासों के बाद, पूर्व सरपंच और वर्तमान प्रशासक रतनलाल स्वर्णकार, संबंधित वार्ड पंचों और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला परिषद ने सात दिन के भीतर दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने और न्यायालय में कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सरपंच पद पर रहते हुए रतनलाल स्वर्णकार ने अपने ही परिवार को लाभ पहुंचाया। उन्होंने अपनी पत्नी, पुत्रों और पुत्रवधू के नाम पर भूखंडों के पट्टे जारी कर दिए, और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी के बावजूद उन्हें ताक पर रखकर परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही परिवार को एक से ज्यादा भूखंड आवंटित किए गए, जिसमें सरपंच के पुत्र के नाम सड़क किनारे का एक कीमती व्यावसायिक भूखंड भी शामिल है। भूमि विक्रय से जुड़ी आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं, जिससे पूरी आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जरूरतमंदों का हक छीनकर अपनों को फायदा पहुंचाने का स्पष्ट मामला है। शिकायतकर्ता रतनलाल जाट की शिकायत पर गठित जांच समिति ने रिकॉर्ड की गहन छानबीन के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पंचायतीराज नियम 156, 157 और 167 के उल्लंघन की पुष्टि की गई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में भूचाल आ गया है और कई जिम्मेदार अधिकारियों की नींद उड़ गई है। जिला परिषद ने सहाड़ा के विकास अधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे सात दिन के भीतर सक्षम न्यायालय में निगरानी दर्ज कराएं और दोषियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाएं। चेतावनी दी गई है कि यदि इस समय-सीमा में कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले के खुलासे के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। गांव में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही हैं, तो वर्षों तक यह घोटाला किसके संरक्षण में चलता रहा। लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि जनता के अधिकारों से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। खाखला पट्टा घोटाले ने फिलहाल पूरे जिले की राजनीति और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, और सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या सात दिन के भीतर एफआईआर दर्ज होगी और जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, या फिर यह मामला फाइलों में ही दब जाएगा। इस बड़े एक्शन और एफआईआर के आदेश से गांव में खुशी की लहर है।1
- उदयपुर जिले के घासा मंडल की एक बैठक हनुमान मंदिर पर विधानसभा प्रत्याशी कृष्ण गोपाल पालीवाल के नेतृत्व में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य डिजिटल लर्निंग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और ‘संविधान हत्या दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले पखवाड़ा कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना था। इसके अतिरिक्त, विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर, कार्यक्रम प्रभारी मोहब्बत सिंह राव, घासा मंडल अध्यक्ष पर्वत सिंह कीतावत, पूर्व मंडल अध्यक्ष गणेश लाल कुम्हार और मुख्य अतिथि व विधानसभा प्रभारी कृष्ण गोपाल पालीवाल ने कार्यकर्ताओं को डिजिटल लर्निंग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और ‘संविधान हत्या दिवस’ से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की।1
- घटना के चार साल बीत जाने के बाद भी, कन्हैयालाल का परिवार अभी भी न्याय की राह देख रहा है और उसकी प्रतीक्षा कर रहा है।1
- पाली जिले के बाली पुलिस थाने में एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस रिपोर्ट में 'पचौ' नामक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।3
- राजस्थान के नाथद्वारा स्थित पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के पावन अवसर पर, ज्येष्ठ पूर्णिमा को होने वाले प्रभु के ज्येष्ठाभिषेक स्नान की परंपराओं का हर्षोल्लास के साथ शुभारंभ हो गया है। तिलकायत श्री की आज्ञा से श्री विशाल बावा और श्री लाल बावा ने वल्लभकुल परिवार तथा श्रीजी व श्री नवनीतप्रिया जी के निज सेवकों के साथ मिलकर इस दिव्य सेवा को पूर्ण किया। परंपरा के अनुसार, श्रृंगार दर्शन के पश्चात भीतर की बावड़ी से स्वर्ण एवं रजत के घड़ों से प्रभु के ज्येष्ठाभिषेक के लिए पवित्र जल भरा गया। इसके बाद आरती दर्शन के समय इस जल का विशेष अधिवासन किया गया। अधिवासन के लिए जल में आठ पवित्र सामग्रियां (अष्टगंध) जैसे—विशेष फूल, सुगंधित द्रव्य, चंदन, केसर, गुलाब जल, बरास और अरगजा का मिश्रण कर जल को सिद्ध किया गया। अधिवासन का मुख्य भाव ग्रीष्म ऋतु में प्रभु श्रीनाथजी को अत्यधिक सुगंधित और शीतल जल से स्नान कराकर शीतलता प्रदान करना है। पुष्टिमार्ग में यह भाव व्यक्त किया जाता है कि साक्षात् श्री यमुना जी अपने प्रियतम प्रभु को इस सुगंधित जल से स्नान कराकर 'तत्सुख' की भावना को सिद्ध करती हैं। स्नान यात्रा के इस पावन और महा-उत्सव के अवसर पर, ज्येष्ठाभिषेक के बाद प्रभु श्रीनाथजी को सवा लाख आमों का भोग अरोगाया जाएगा। इस भव्य मनोरथ को लेकर वैष्णव समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है और हवेली के मोती महल चौक में वैष्णव जन लगातार आम की सामग्रियां सिद्ध करवा रहे हैं ताकि वे अपने अनन्य भाव से प्रभु को आम का भोग अंगीकार करवा सकें। जल भरने और अधिवासन के इस भव्य और दिव्य क्रम के दौरान मंदिर के मुखियाजी इंद्रवदन गिरनारा, प्रदीप साँचिहर, विभु साँचिहर, रजनीकांत सांचीहर, घनश्याम साँचिहर, सिद्धार्थ, ऋषिकेश, भाविक, राजेश, हर्षद, विजय, पराग सहित मंदिर के अधिकारी सुधाकर शास्त्री, मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास एवं सीईओ जितेंद्र कुमार पंड्या, तिलकायत श्री के मुख्य सलाहकार अंजन शाह उपस्थित रहे। इनके साथ ही मंदिर मंडल के सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य, तिलकायत श्री के सचिव लीलाधर पुरोहित, समाधानी उमंग मेहता और जमादार विठ्ठल सनाढ्य, कैलाश पालीवाल सहित कई गणमान्य वैष्णव जन इस अलौकिक क्षण के साक्षी बने।4