भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खाखला में कथित पट्टा घोटाले के एक बड़े मामले ने पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक हलचल मचा दी है। जिला परिषद की जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासों के बाद, पूर्व सरपंच और वर्तमान प्रशासक रतनलाल स्वर्णकार, संबंधित वार्ड पंचों और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला परिषद ने सात दिन के भीतर दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने और न्यायालय में कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सरपंच पद पर रहते हुए रतनलाल स्वर्णकार ने अपने ही परिवार को लाभ पहुंचाया। उन्होंने अपनी पत्नी, पुत्रों और पुत्रवधू के नाम पर भूखंडों के पट्टे जारी कर दिए, और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी के बावजूद उन्हें ताक पर रखकर परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही परिवार को एक से ज्यादा भूखंड आवंटित किए गए, जिसमें सरपंच के पुत्र के नाम सड़क किनारे का एक कीमती व्यावसायिक भूखंड भी शामिल है। भूमि विक्रय से जुड़ी आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं, जिससे पूरी आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जरूरतमंदों का हक छीनकर अपनों को फायदा पहुंचाने का स्पष्ट मामला है। शिकायतकर्ता रतनलाल जाट की शिकायत पर गठित जांच समिति ने रिकॉर्ड की गहन छानबीन के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पंचायतीराज नियम 156, 157 और 167 के उल्लंघन की पुष्टि की गई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में भूचाल आ गया है और कई जिम्मेदार अधिकारियों की नींद उड़ गई है। जिला परिषद ने सहाड़ा के विकास अधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे सात दिन के भीतर सक्षम न्यायालय में निगरानी दर्ज कराएं और दोषियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाएं। चेतावनी दी गई है कि यदि इस समय-सीमा में कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले के खुलासे के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। गांव में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही हैं, तो वर्षों तक यह घोटाला किसके संरक्षण में चलता रहा। लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि जनता के अधिकारों से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। खाखला पट्टा घोटाले ने फिलहाल पूरे जिले की राजनीति और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, और सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या सात दिन के भीतर एफआईआर दर्ज होगी और जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, या फिर यह मामला फाइलों में ही दब जाएगा। इस बड़े एक्शन और एफआईआर के आदेश से गांव में खुशी की लहर है।
भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खाखला में कथित पट्टा घोटाले के एक बड़े मामले ने पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक हलचल मचा दी है। जिला परिषद की जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासों के बाद, पूर्व सरपंच और वर्तमान प्रशासक रतनलाल स्वर्णकार, संबंधित वार्ड पंचों और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला परिषद ने सात दिन के भीतर दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने और न्यायालय में कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सरपंच पद पर रहते हुए रतनलाल स्वर्णकार ने अपने ही परिवार को लाभ पहुंचाया। उन्होंने अपनी पत्नी, पुत्रों और पुत्रवधू के नाम पर भूखंडों के पट्टे जारी कर दिए, और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी के बावजूद उन्हें ताक पर रखकर परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही परिवार को एक से ज्यादा भूखंड आवंटित किए गए, जिसमें सरपंच के पुत्र के नाम सड़क किनारे का एक कीमती व्यावसायिक भूखंड भी शामिल है। भूमि विक्रय से जुड़ी आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं, जिससे पूरी आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जरूरतमंदों का हक छीनकर अपनों को फायदा पहुंचाने का स्पष्ट मामला है। शिकायतकर्ता रतनलाल जाट की शिकायत पर गठित जांच समिति ने रिकॉर्ड की गहन छानबीन के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पंचायतीराज नियम 156, 157 और 167 के उल्लंघन की पुष्टि की गई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में भूचाल आ गया है और कई जिम्मेदार अधिकारियों की नींद उड़ गई है। जिला परिषद ने सहाड़ा के विकास अधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे सात दिन के भीतर सक्षम न्यायालय में निगरानी दर्ज कराएं और दोषियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाएं। चेतावनी दी गई है कि यदि इस समय-सीमा में कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले के खुलासे के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। गांव में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही हैं, तो वर्षों तक यह घोटाला किसके संरक्षण में चलता रहा। लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि जनता के अधिकारों से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। खाखला पट्टा घोटाले ने फिलहाल पूरे जिले की राजनीति और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, और सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या सात दिन के भीतर एफआईआर दर्ज होगी और जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, या फिर यह मामला फाइलों में ही दब जाएगा। इस बड़े एक्शन और एफआईआर के आदेश से गांव में खुशी की लहर है।
- भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की भीलवाड़ा-प्रथम इकाई ने करेडा तहसील के पटवार हल्का चिलेश्वर के पटवारी लोकेश जोशी को ₹1000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी पर फौतगी नामांतरण खोलने के लिए कुल ₹8000 की रिश्वत मांगने का आरोप है, जिसमें से ₹5000 पहले ही परिवादी से लिए जा चुके थे। शिकायत के सत्यापन के बाद, एसीबी ने शनिवार को एक ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और पटवारी लोकेश जोशी को ₹1000 लेते हुए पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।1
- चित्तौड़गढ़ में प्रदेशाध्यक्ष ममता भूपेश का जन्मदिवस सादगीपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने गौशाला में गायों की सेवा कर उनका जन्मदिन मनाया और उनकी दीर्घायु की कामना की।1
- भारतीय सेना में अग्निवीर की ट्रेनिंग पूरी कर पहली बार अपने गाँव तेलीखेड़ा (भीलवाड़ा) लौटे नव चयनित अग्निवीर पूरण बैरवा का चित्तौड़गढ़ जिले में भव्य स्वागत और अभिनन्दन किया गया। ग्रामवासियों ने पूरण बैरवा को साफा बांधकर, मिठाई खिलाकर और फूल मालाओं से लादकर उनका जोरदार स्वागत किया, जिसके बाद एक भव्य वाहन रैली निकाली गई। बैरवा युवा जागृति सामाजिक सेवा संस्थान के अध्यक्ष हीरालाल बैरवा ने बताया कि स्वागत कार्यक्रम की शुरुआत रेलवे स्टेशन पर हुई, जहाँ सर्व प्रथम संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद वाहन रैली कलेक्ट्रेट, टंकी के बालाजी, पालड़ी होते हुए ढोल नगाड़े और डी.जे. के साथ तेलीखेड़ा अपने गंतव्य स्थान पर पहुँची। वहाँ पूरण बैरवा ने अपनी माँ और भाई को आर्मी कैप पहनाई। इस भव्य रैली में 'भारत माता की जय' तथा 'जय भीम, जय भारत' के गगनभेदी नारों और जयकारों से पूरा शहर गूँज उठा, चारों तरफ देशप्रेम और उत्साह का माहौल दिखाई दिया। रैली के मार्ग में सभी समाजजनों और विभिन्न संगठनों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनन्दन और स्वागत सत्कार किया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ समाज सेवी अखेराम बड़ोदिया, रामेश्वर लाल बैरवा, जोगणियां सैनेट्री के प्रोपराइटर देवकरण बैरवा, कालूलाल (राज. पुलिस), भाई कमलेश बैरवा, भागीरथ, राकेश, राधेश्याम, सुरेश, महावीर, राजवीर, राजू लाल, राजेश, नरेश कुमार, माण्डल विधायक प्रतिनिधि व ग्राम पंचायत पालड़ी प्रशासक, साथ ही सर्व समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा शक्ति और विद्यार्थी सहित हजारों ग्रामवासी शामिल हुए। फौजी पूरण बैरवा ने इस सम्मान के लिए सभी उपस्थित साथियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के एक गांव में ग्रामीणों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में अभी तक न तो पट्टे बनाए गए हैं और न ही गांव की सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ है। वे शिकायत करते हुए कहते हैं कि सरकार उनके गांव से संबंधित जानकारी पर कोई ध्यान नहीं देती है और उनकी समस्याओं पर बिलकुल भी गौर नहीं किया जा रहा है।1
- इंग्लैंड ने हाल ही में खेले गए एक फुटबॉल मुकाबले में पनामा को 2-0 से हराकर एक शानदार जीत दर्ज की है। इस मैच में इंग्लैंड की टीम ने बेहद प्रभावी खेल का प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने ग्रुप L में अपनी स्थिति को और भी मजबूत कर लिया है।1
- भीलवाड़ा के शाहपुरा में जिला प्रशासन और सामाजिक न्याय विभाग द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत विकास परिषद और नई मुस्कान सेवा संस्थान नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ने मिलकर आयोजित किया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य लाभ ले रहे सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्त रहने की शपथ दिलाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करना था। भारत विकास परिषद के वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में फैल रही नशे की बीमारी से निपटने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया। मुख्य अतिथि रामप्रसाद पारीक ने उपस्थित सभी लोगों को नशा मुक्त रहने का संकल्प दिलवाया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ईश्वर लाल मीणा ने की, जबकि धारा सिंह मीणा मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम में पवन कुमार बांगड़, जय देव जोशी, कमलेश कुमार मुंडोतिया, थानमल परिहार, संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर बुद्धि प्रकाश पहाड़िया, सेंटर इंचार्ज किशोर सेन, स्टाफ मेंबर महेश कोली, दिलकुश मीणा और लव कुमार बेरवा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पवन कुमार बांगड़ ने किया, और संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर बुद्धि प्रकाश पहाड़िया ने आभार व्यक्त किया।4
- चित्तौड़गढ़, राजस्थान के मंडफिया धाम में स्थित प्रभु श्री सांवलिया सेठ जी के आज, यानी 28 जून 2026 के, भव्य श्रृंगार दर्शन हुए। श्रद्धालुओं को प्रभु के अलंकृत स्वरूप के दर्शन प्राप्त हुए, जिससे उनके प्रति आस्था और भक्ति का भाव प्रकट हुआ।1
- चित्तौड़गढ़ में भाजपा शासन के 12 वर्ष पूरे होने पर सांसद सीपी जोशी ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया। भाजपा इन वर्षों को विकास, सुशासन और राष्ट्र निर्माण का कालखंड बता रही है। हालांकि, इसी समय चित्तौड़गढ़ जिले में आमजन के जीवन, किसानों की जमीन, पर्यावरण, जल स्रोतों, रोजगार और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जो अब जिले की राजनीति का प्रमुख विमर्श बन गए हैं। इस विरोधाभास के केंद्र में यह प्रश्न है कि विकास का मॉडल कैसा हो – क्या यह केवल उद्योगों और परियोजनाओं की संख्या से मापा जाएगा या जनता की सुरक्षित जिंदगी, स्वच्छ हवा, पानी और रोजगार से भी। बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स अपशिष्ट को लेकर उपजा विवाद अब केवल गंदगी हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी, पर्यावरण सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा बन चुका है। ग्रामीणों और संघर्ष समिति का आरोप है कि बड़े पैमाने पर अपशिष्ट डाले जाने से जनस्वास्थ्य को खतरा है और वे इस मामले की पारदर्शी जांच तथा भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह मामला अब जनता के विश्वास की परीक्षा बन चुका है। इसी तरह, चंदेरिया में हिन्दुस्तान जिंक के फर्टिलाइजर प्लांट और बेगूं, निंबाहेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं को लेकर भी विकास और पर्यावरण के बीच बहस तेज है। जहां परियोजना समर्थक निवेश, रोजगार और आर्थिक मजबूती का तर्क देते हैं, वहीं ग्रामीण और पर्यावरण से जुड़े लोग जल, हवा, मिट्टी और स्थानीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के अध्ययन की मांग करते हैं। जनता का सवाल है कि क्या कागजों पर पर्यावरणीय सुरक्षा पर्याप्त है या इसका असर जमीन पर भी दिखेगा, क्योंकि हवा और पानी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में महसूस होते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि उद्योग जरूरी हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें। चित्तौड़गढ़ के अफीम किसान वर्षों से लाइसेंस व्यवस्था, उत्पादन नीति, लागत, मौसम की मार और गुणवत्ता मानकों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहते हैं, विशेषकर जब सरकार किसान सम्मान और कृषि विकास की बात करती है। उनकी चिंता केवल फसल तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार, भविष्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। वहीं, जिले में उद्योग और बड़े प्रोजेक्ट होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने का सवाल उठ रहा है। ग्रामीण युवा कौशल विकास और स्थायी रोजगार के ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि विकास केवल जमीन लेने तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समाज को उसका हिस्सा भी मिले। इसके अतिरिक्त, विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को जहां विरासत संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना गया, वहीं यह सवाल भी उठा कि वर्षों तक अतिक्रमण होने पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही, और अब जनता केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर स्थायी व्यवस्था चाहती है। इन 12 सालों की उपलब्धियों के दावों के बीच, चित्तौड़गढ़ में उठ रहे ये जनमुद्दे संकेत देते हैं कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है। जनता सवाल कर रही है कि क्या किसान मजबूत हुए, क्या अफीम किसान सुरक्षित हैं, युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिला और उद्योगों के साथ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा? चित्तौड़गढ़ आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण, किसान और स्थानीय समुदाय के अधिकारों की चुनौती है। लोकतंत्र में सरकारों की सफलता केवल परियोजनाओं की संख्या से नहीं बल्कि जनता के विश्वास से तय होती है। विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो इंसान, प्रकृति और भविष्य तीनों को साथ लेकर चले। आने वाले समय में जिले की सियासत इसी मूल प्रश्न से तय होगी: 'विकास किसका, कीमत किसकी और लाभ किस तक?'।1
- भीलवाड़ा जिले के बिजयनगर-शाहपुरा मार्ग पर कोठियां के पास मालीखेड़ा चौराहे के निकट सीमेंट से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। इस हादसे में ट्रक चालक को मामूली चोटें आईं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह ट्रक शाहपुरा की ओर जा रहा था जब मालीखेड़ा चौराहे के पास चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा और ट्रक सड़क किनारे पलट गया। दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था संभाली। चालक को लगी हल्की चोटों का प्राथमिक उपचार किया गया, जिसके बाद उसे राहत मिली। इस दुर्घटना के कारण कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।3